19/07/2026
याद है जब पनामा पेपर्स सामने आए थे और उन्होंने खुलासा किया था कि दुनिया के कई अमीर और प्रभावशाली लोग टैक्स से बचने और संदिग्ध या अवैध तरीके से अर्जित संपत्ति को टैक्स हेवन देशों के ऑफशोर खातों में छिपाने के लिए एक व्यापक नेटवर्क का इस्तेमाल कर रहे थे?
सबूत सामने आने के बाद भी मानो कुछ हुआ ही नहीं। बस एक बात हुई,,, इस कहानी पर काम कर रही पत्रकार की कार बम विस्फोट में हत्या कर दी गई।
एपस्टीन फाइलों का मुद्दा दुनिया के सामने आया था, याद है? और देखिये कितनी जल्दी लोगों की रोज़मर्रा की चर्चा से गायब हो गया।
यही तरीका सत्ता और प्रभावशाली वर्ग अपनाता है, जब गंभीर आरोप या विवाद सामने आते हैं, तो कुछ समय तक जनता का गुस्सा बढ़ने दिया जाता है, फिर मीडिया और जनचर्चा का ध्यान ग़ैर ज़रूरी मुद्दों, क्रिकेट फुटबॉल, वर्ल्ड कप और दूसरे बड़े आयोजनों की ओर मोड़ दिया जाता है।
इंसानियत एक अंतहीन चक्र में फँस चुकी है।
पनामा पेपर्स और एपस्टीन फाइलें हमारे समाज के बारे में बहुत कुछ कहती हैं।
कोई सुनना नहीं चाहता... और जिस दिन सुनाई देगा, शायद तब तक बहुत देर हो चुकी होगी।