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वन नेशन, वन इलेक्शन: एक परिचयभारत में "वन नेशन, वन इलेक्शन" (एक देश, एक चुनाव) एक ऐसा विचार है जो पूरे देश में लोकसभा और...
17/12/2024

वन नेशन, वन इलेक्शन: एक परिचय

भारत में "वन नेशन, वन इलेक्शन" (एक देश, एक चुनाव) एक ऐसा विचार है जो पूरे देश में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने की बात करता है। इस पहल का उद्देश्य चुनाव प्रक्रिया को अधिक कुशल, लागत प्रभावी और सुव्यवस्थित बनाना है।

वर्तमान व्यवस्था

भारत में वर्तमान में लोकसभा और विभिन्न राज्यों की विधानसभाओं के चुनाव अलग-अलग समय पर होते हैं। यह प्रणाली संसाधनों पर भारी दबाव डालती है और बार-बार चुनावों के कारण प्रशासनिक कार्य प्रभावित होते हैं।

वन नेशन, वन इलेक्शन का तर्क

लागत में कमी: बार-बार चुनाव कराने पर सरकार और राजनीतिक दलों को भारी खर्च का सामना करना पड़ता है।

प्रशासनिक राहत: चुनावी प्रक्रिया में सुरक्षा बल, सरकारी अधिकारी और अन्य संसाधनों का बार-बार इस्तेमाल होता है। एक साथ चुनाव से यह समस्या हल हो सकती है।

नीतिगत स्थिरता: बार-बार चुनावी प्रक्रिया के कारण आचार संहिता लागू होती है, जिससे विकास कार्यों में रुकावट आती है।

राजनीतिक स्थिरता: लगातार चुनाव से राजनीतिक दल चुनावी माहौल में रहते हैं और दीर्घकालिक नीतियों पर ध्यान नहीं दे पाते।

चुनौतियाँ

1. संविधानिक बाधाएँ: संविधान में बदलाव की आवश्यकता होगी क्योंकि विधानसभा और लोकसभा चुनावों की अवधि अलग-अलग हो सकती है।

2. क्षेत्रीय दलों का विरोध: क्षेत्रीय पार्टियों का मानना है कि यह केंद्र की राजनीति को अधिक महत्व देगा।

3. लॉजिस्टिक चुनौतियाँ: पूरे देश में एक साथ चुनाव कराना संसाधनों और प्रबंधन की दृष्टि से एक बड़ी चुनौती है।

संभावित समाधान

राज्यों के कार्यकाल को एक ही समय पर समाप्त करने के लिए संविधान में संशोधन किया जा सकता है।

चुनाव आयोग को सभी संसाधनों का बेहतर प्रबंधन करने के लिए अधिक अधिकार और तकनीकी सहायता दी जा सकती है।

निष्कर्ष

"वन नेशन, वन इलेक्शन" एक दूरदर्शी पहल है जो चुनावी प्रक्रिया को सरल और कुशल बना सकती है। हालांकि, इसके क्रियान्वयन के लिए गहन विचार-विमर्श, सभी हितधारकों की सहमति और संवैधानिक संशोधन की आवश्यकता होगी। यदि यह सफलतापूर्वक लागू होता है, तो यह भारत के लोकतांत्रिक ढांचे को और अधिक मजबूत और प्रभावी बना सकता है।

17/12/2024
17/12/2024

तरस आता है उसकी कहानी पर वो झूठा है मैं सब जानता हूँ...

17/12/2024

जितना ज़्यादा बाहरी दिखावा, उतनी अधिक भीतरी दरिद्रता."

17/12/2024

सुबह सुबह जब आंख खुली तो।
हजुम थोड़ा निराला था।
मेंने देखा सब मील कर, एक दिशा में जा रहा था।
पता किया तो पता चला की, अंधविश्वास की दुकान सजी है।
यही किसी जगह पाखंडी यो की, पुजा पाठ की दुकान लगी है।
धर्म-कर्म मर्यादा के प्रतिक मेरे धर्म का, ए गला घोटकर आयेंगे।
अंधविश्वास की गांठ बांधकर फिर मंदिर मंदिर जायेंगे ।।

धर्म-कर्म :- माने कर्तव्य - काम

15/12/2024

प्रेत बाधा / भूत आना

आपने कई बार ये सुनो होगा कि किसी पर भूत का साया आ गया या किसी व्यक्ति में किसी मृत व्यक्ति की आत्मा आ गई।

कई लोग इससे निजात पाने के लिए बाबाओं के चक्कर काटते रहते हैं

पर क्या सच में ऐसा होता है??

दरअसल ये एक मनोवैज्ञानिक बीमारी है जिसे Dissociative Identity Disorder (DID) कहते हैं। इसे पहले मल्टीपल पर्सनालिटी डिसऑर्डर और Split Personality Disorder कहा जाता था।

इस बीमारी में व्यक्ति के पास दो या अधिक अलग-अलग पहचानें होती हैं।

"डिसोसिएट" का मतलब है अलग या विच्छिन्न होना।
DID से ग्रसित व्यक्ति कई अलग-अलग व्यक्तित्वों का अनुभव कर सकते हैं, जिन्हें आमतौर पर "Alters" कहा जाता है।

प्रत्येक पहचान के पास अलग-अलग व्यवहार, यादें, सोचने के तरीके, या भावनाएं हो सकती हैं। ये पहचान अलग-अलग लिंग, जातीयता और परिवेश के साथ बातचीत करने के तरीके को भी अपना सकते हैं।

ये पहचानें अलग-अलग समय पर व्यक्ति के व्यवहार को नियंत्रित कर सकती हैं। एक पहचान से दूसरी पहचान में यादें स्थानांतरित नहीं होती हैं, जिससे स्मृतिभ्रंश (Amnesia) हो सकता है।

स्मृतिभ्रंश की उपस्थिति अक्सर DID के निदान के लिए महत्वपूर्ण लक्षण मानी जाती है।

DID आपके दैनिक जीवन में कार्य करने की क्षमता में बाधा डालता है। यह आपके संबंधों, स्कूल या कार्यस्थल पर प्रदर्शन को प्रभावित कर सकता है।
ये विकार आपकी वास्तविकता से जुड़ने की क्षमता को प्रभावित करते हैं।

डिसोसिएटिव आइडेंटिटी डिसऑर्डर के प्रकार:

DID के दो प्रकार (या रूप) होते हैं:

1. Possession: इसमें ऐसा होता है जैसे कि कोई बाहरी शक्ति या आत्मा आपके शरीर पर नियंत्रण कर रही हो। आप अलग तरीके से बोल या व्यवहार कर सकते हैं, जिसे दूसरों के लिए समझना आसान होता है। यह एक अवांछित पहचान होती है और व्यक्तित्व का स्विच करना अनैच्छिक होता है।

2. Non-possession:
इसमें मरीज़ अचानक से अपनी पहचान में बदलाव महसूस कर सकते हैं, जैसे कि आप खुद को एक फिल्म में देख रहे हैं (आउट-ऑफ-बॉडी एक्सपीरियंस) और अपने भाषण, भावनाओं या व्यवहार पर नियंत्रण नहीं कर पा रहे हैं।

DID के लक्षण:

- कम से कम दो पहचानें (व्यक्तित्व अवस्थाएँ) होती हैं, जो आपके व्यवहार, यादों, आत्म-धारणा और सोचने के तरीकों को प्रभावित करती हैं।

- ⁠- दैनिक गतिविधियों, व्यक्तिगत जानकारी और आघातपूर्ण घटनाओं के बारे में स्मृतिभ्रंश या यादों में अंतराल होता है।
- अलग-अलग पहचानें आपकी सामाजिक स्थिति या काम, घर या स्कूल में कार्य करने की क्षमता को प्रभावित करती हैं।

DID के साथ पाए जाने वाले अन्य मानसिक स्वास्थ्य लक्षण (जो हमेशा नहीं होते) में शामिल हो सकते हैं:

- चिंता (Anxiety)
- मिथ्या विश्वास (Delusions)
- अवसाद (Depression)
- स्वयं को नुकसान पहुँचाने की प्रवृत्ति (Self-harm)
- नशे की लत (Substance use disorder)
- आत्महत्या के विचार (Suicidal ideation)

DID का उपचार:

इसमें अवसाद और चिंता जैसे लक्षणों को ठीक करने के लिए दवाइयाँ दी जाती है और साथ ही साथ
मनोचिकित्सा (Psychotherapy), विशेष रूप से Cognitive Behavioral Therapy की मदद ली जाती है।

अगर आप किसी भी ऐसे व्यक्ति को जानते हैं जिसमें ऐसे लक्षण हैं तो आप जल्द से जल्द उन्हें एक मनोचिकित्सक से इलाज कराने की सलाह दें।

15/12/2024

ब्राह्मण का राज उनके ज्ञान पर नहीं तुम्हारे अज्ञान पर टिका है।
ब्राह्मण तुमसे पेड़ पुजवा सकता है,पत्थर पुजवा सकता है,धरती,आकाश,जल,अग्नि,वायु, देहरी (चौखट ), तस्वीर,लोहा,ईंट,पशु,पक्षी या जो कुछ भी उसे दिखाई दिया। उसने तुमसे खुले आम पुजवा दिया।
और ये सब एक अनपढ़ ब्राह्मण ने हमारे समाज के पढ़े लिखे IAS, IPS, वक़ील,मजिस्ट्रेट, इंजीनियर,प्रोफेसर,डॉक्टर से करवाता है।फिर आप कैसे कहते हैं कि आप ब्राह्मण के ग़ुलाम नहीं हैं❓
ब्राह्मणवादियों की कहानी
➖ जब भूकम्प आने वाला हो तो उनको पता नहीं होता
➖ जब हुदहुद तूफान आने वाला हो तो पता नहीं होता
➖ जब ट्रेन पलटने वाली या लड़ने वाली हो तो पता नहीं होता,
➖ जब नोट बदलने वाला हो तो पता नहीं होता,
➖ जब अपने देश पर हमला होने वाला हो तो पता नहीं होता,
➖ जब देश मे बंम बिस्फोट होने वाला हो तो पता नहीं होता
➖ जब केदारनाथ बाढ़ में बह जाने वाला हो तो पता नहीं होता,
➖ जब भारत की राजधानी में किसी बस में, मंदिर में लड़की का रेप होने वाला हो तो पता नहीं होता ,
➖ जब देश मे आतंकवादी घूम रहे होते तो पता नहीं होता,
➖ जब सीमा के सैनिकों का गला कटने वाला हो तो पता नही होता,
➖ जब चारो धाम जाते समय यात्री बस खाई मे गिरने वाली हो तो पता नहीं होता,
➖ जब कोई प्लेन लुप्त होने वाली हो तो पता नहीं होता,
➖ जब बारिस होने पर बिजली कड़कने वाली हो और किसी के ऊपर बिजली गिरने वाली हो तो इन्हें पता नहीं होता।
इनको केवल वह पता होता जो सम्भव नहीं।
जैसे :-
किसी पर ग्रह नक्षत्र
दोष पिछले जन्म का पाप
मरने के बाद स्वर्ग दिलाना
मूर्ति के प्राण प्रतिष्ठत करना(जान डालना )
माता-पिता को मरने के बाद बैठाना
बच्चे को सत्तईसा में पड़ना
साढ़े साती,शनि,ढैय्या चढ़ना और उतारना,
धरती के अन्दर पानी देखना
आदि सभी अन्ध विश्वास
मनगढंत बातें।
जिनको पिछले जन्म की और स्वर्ग की जानकारी हो वे ये सब क्यों नहीं जानते ?
ब्राह्मण मूर्ति में प्राण प्रतिष्ठित कर सकता है
लेकिन अपने मरे हुये बच्चे 5 मिनट के लिए जीवित नही कर सकता
इसलिए नहीं जानते क्योंकि ये सब देखे जा सकते हैं,हक़ीकत जाना जा सकता है।
ब्राह्मणवादी मनुवादी लोगों को ऐसे ही अपने झूठे मनगढ़ंत बातों से लूटते रहेंगे।
ये एक कड़वा सच है!
*पाखण्ड और अन्धविश्वास में न पड़ कर अपना दीपक स्वयं बने

💐💐इस हिंसा भरे माहोल में जहा कई देश युध्द मे है, ओर जहाँ पुरे भारत में धर्म के नाम पे हिंसा हो रही हो तब आपका महत्व और भ...
02/10/2024

💐💐इस हिंसा भरे माहोल में जहा कई देश युध्द मे है, ओर जहाँ पुरे भारत में धर्म के नाम पे हिंसा हो रही हो तब आपका महत्व और भी बढ़ जाता है।
हमें धार्मिक सद्भाव की जरूरत है शांती की जरूरत हमें आपकी जरूरत है।💐💐💐

भारत का सवौच्च नागरिक पुरस्कार. जिसकी सुरुवात,4 जाने वाली 1954 मे हुई उसके तहत,5 लाख रूपये, मानपत्र व सन्मानचिन्ह दिया ज...
04/09/2021

भारत का सवौच्च नागरिक पुरस्कार. जिसकी सुरुवात,4 जाने वाली 1954 मे हुई उसके तहत,5 लाख रूपये, मानपत्र व सन्मानचिन्ह दिया जाता है. 1954:- 1. डा. सर्वपल्ली राधाकृष्णन 2. सी. राजगोपालाचारी 3.डा सीवी रमन 1987:- 1.खान अब्दुल गफार खान 1990:- 1. डा. बाबा साहेब अम्बेडकर 2. नेल्सन मंडेला( द. अफ्रीका) 2013:- 1. सचिन तेंदुलकर 2. डा. सीएन आर राव 2014:- 1. अटल बिहारी वाजपेयी 2.पंडित मदनमोहन मालवीय

भारत का सवौच्च नागरिक पुरस्कार. जिसकी सुरुवात,4 जाने वाली 1954 मे हुई उसके तहत,5 लाख रूपये, मानपत्र व सन्मानचिन्ह दिया ज...

CHANGE is good Change is very small word but much more ahead it. If you CHANGE same thing you get new. that way change i...
28/08/2021

CHANGE is good Change is very small word but much more ahead it. If you CHANGE same thing you get new. that way change is every thing. When people are thing about CHANGE they get special tags and lead the world. Just imagine if any human are not thing about CHANGE .so where would we be. Then always think about CHANGE .

CHANGE is good Change is very small word but much more ahead it. If you CHANGE same thing you get new. that way change is every thing. When people are thing about CHANGE they get special tags and l…

If not us,you are not
15/08/2021

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