14/01/2021
मेरी माँ " ताई " के निधन (14 दिसंबर ) के एक माह पूर्ण होने पर !
कोरोना से निर्मित भीषण एकांत के कारण , लोक संग्रह करने वाली हमारी माँ का बाहरी लोगो से संपर्क क्या टूट गया , माँ का वजन एकदम कम होने लगा !इधर फोन से on -line classes चालू करने के लिए पालकों एवं विद्द्यार्थियो का दबाव बढ़ रहा था !लेकिन शुक्र है ऊपर वाले का , की उसने अचानक दिमाग में एक विचार भर दिया,की अभी तक तो classes की व्यस्तता के कारण माँ की लगातार प्रत्यक्ष सेवा कर नहीं पाए थे , लेकिन शायद भगवान् ने एक मौका lockdown के रूप में दिया है !
फिर क्या , उक्त विचार दिमाग में आते बराबर तय कर दिया ," चाहे ये वर्ष classes के लिए ZERO YEAR क्यों न हो " ,लेकिन बस अब 24 by 7 माँ की सेवा करना है !मना कर दिया on -line की enquiry करने वालो को ! हालाँकि ,उस स्थिति में भी माँ डांटकर कहती , " The Show Must Go On " पढ़ाना बंद नहीं करना ! लेकिन हम लोगों ने तय कर दिया की जीवन में पहली बार माँ की आज्ञा न मानने से पाप लगा तो चलेगा , लेकिन उनकी active सेवा का ये मौका हाथ से जाने नहीं देंगे !
लेकिन जब गत माह 14 दिसंबर को माँ का अचानक ह्रदय गति रुकने से(उम्र 93 वर्ष ) निधन हो गया, तो अचानक जीवन में vacuum उत्पन्न हो गया !एक माह बाद भी समझ नहीं आ रहा है ,की , भगवान् ने single minded सेवा का मौका दिया, उसके लिए उसका शुक्रिया अदा करें, या , उक्त सेवा और अधिक तथा लम्बे समय तक के लिए न होने देने के कारण ,भगवान् से उसी की चुगली करे ?
लेकिन एक माह की समाप्ति पर अब उनकी पढ़ाने को जारी रखने की आज्ञा का पालन करने की जवाबदारी भी आ पड़ी है !सुबह जल्दी घर से classes के लिए निकल कर, घर पहुँचने पर अभी तक माँ का ये पूछना " कैसी रही आज की क्लास बेटे " सारी थकान दूर कर देती थी !
अब जब की classes चालू करने जा रहा हूँ ,आगे क्या होगा यही सोच के दिल पर बोझ बना हुआ है !
भगवान् तथा माता-पिता का आशीर्वाद और आप सब की शुभकामनाएं ही ये शक्ति भी प्रदान करेगा ,इसी विश्वास के साथ. . . . .
मिलिंद रोहिणी-वसंत खरे !!