20/05/2026
आंबेडकरी समूह आदर्श होता...आहे...आणि राहील These are not the real Buddhism.
The real Buddhism is not books, not manuals, not word for word repetition from the Tipitaka, nor is it rites and rituals. The real Buddhism is the practice, by way of body, speech and mind that will destroy the defilements, in part or completely...Though a person may never have seen or even heard of the Tipitaka, if he carries out detailed investigation every time suffering arises and scorches his
20/05/2026
15/05/2026
हर बार जब किसी छोटे बच्चे की जान बचाने के लिए करोड़ों की fund raising होती देखता हूँ, दिल अंदर से टूट जाता है।
सोचिए… जिस देश में लोग टैक्स भरते हैं, उसी देश में एक माँ-बाप को अपने बच्चे की जिंदगी बचाने के लिए सोशल मीडिया पर हाथ फैलाने पड़ते हैं।
क्या एक इंसान की जिंदगी अब पैसे से तय होगी?
जिसके पास पैसा है वो इलाज करवाएगा… और गरीब बस भगवान के भरोसे रहेगा?
सच्चाई ये है कि हमारे देश में healthcare आज भी एक luxury बन चुका है।
किसी भी सरकारी अस्पताल में जाकर देख लीजिए -
• घंटों लाइन
• डॉक्टरों की कमी
• मशीनें खराब
• साफ-सफाई की हालत खराब
• Emergency में भी basic सुविधाएँ नहीं
और फिर कहा जाता है “देश आगे बढ़ रहा है।”
अगर एक आम आदमी इलाज के डर से गरीब हो जाए, तो वो विकास किस काम का?
दुनिया के कई देशों ने ये साबित किया है कि free या affordable healthcare संभव है:
• United Kingdom – NHS के जरिए नागरिकों को free healthcare
• Canada – Tax funded universal healthcare
• Germany – मजबूत public health insurance system
• France – दुनिया के सबसे बेहतर healthcare systems में से एक
• Australia – Medicare system के तहत affordable treatment
तो सवाल ये है…
जब दूसरे देश अपने नागरिकों को इलाज का अधिकार दे सकते हैं, तो भारत में आज भी इलाज “business” क्यों बना हुआ है?
सरकारें बदलती रहीं… भाषण बदलते रहे…
लेकिन सरकारी अस्पतालों की हालत आज भी आम आदमी का दर्द चिल्ला-चिल्लाकर बता रही है।
देश को सिर्फ bullet train, बड़े-बड़े statues और चुनावी भाषण नहीं चाहिए…
देश को ऐसे अस्पताल चाहिए जहाँ कोई माँ अपने बच्चे की जान बचाने के लिए भीख माँगने पर मजबूर ना हो।
04/05/2026
इतिहास को तोड़-मरोड़ कर पेश करना आसान है, लेकिन सच छुपता नहीं।
डॉ. आंबेडकर जैसे महान विचारक ने महिलाओं को बराबरी, शिक्षा और अधिकार दिलाने के लिए पूरी ज़िंदगी संघर्ष किया| उनके नाम पर झूठ फैलाना सिर्फ अज्ञान नहीं, बल्कि जानबूझकर किया गया भ्रम है।
किसी भी quote को बिना संदर्भ और प्रमाण के फैलाना बंद करो।
अगर सच में सम्मान है, तो उनके असली विचार पढ़ो, fake lines नहीं।
झूठ फैलाने से न तुम बड़े बनोगे, न इतिहास बदल जाएगा।
सच वही रहेगा और एक दिन सामने भी आएगा।
📢 सोचने वाली बात है…
क्या आपने ध्यान दिया है?
धीरे-धीरे सरकारी स्कूल बंद होते जा रहे हैं…
और उसी गति से प्राइवेट स्कूल बढ़ते जा रहे हैं।
❗ सवाल ये है — ऐसा क्यों हो रहा है?
👉 सरकारी आंकड़ों के अनुसार:
- कई जगहों पर छात्र संख्या कम होने का कारण बताकर स्कूल बंद किए जा रहे हैं
- लेकिन असल में, सुविधाओं की कमी, शिक्षकों की कमी और ध्यान की कमी ने लोगों का भरोसा तोड़ा है
👉 दूसरी तरफ:
- प्राइवेट स्कूल महंगे होते हुए भी तेजी से बढ़ रहे हैं
- क्योंकि वहां बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, इंग्लिश मीडियम और अनुशासन दिखाया जाता है
⚠️ लेकिन इसका असर क्या है?
- गरीब और मध्यम वर्ग के बच्चों के लिए शिक्षा महंगी होती जा रही है
- शिक्षा अधिकार से व्यवसाय बनती जा रही है
📌 Ground Reality:
- जब सरकारी स्कूल कमजोर होंगे, तो आम जनता के पास विकल्प नहीं बचेगा
- और जब विकल्प नहीं होगा, तो महंगी शिक्षा मजबूरी बन जाएगी
💡 हमें क्या करना चाहिए?
✔️ सरकारी स्कूलों की स्थिति सुधारने की मांग करें
✔️ शिक्षा को व्यापार बनने से रोकने के लिए आवाज उठाएं
✔️ अपने आसपास के सरकारी स्कूलों की सच्चाई जानें और दूसरों को बताएं
✊ जागरूक बनें, आवाज उठाएं!
क्योंकि शिक्षा सिर्फ एक सेवा नहीं, हमारा अधिकार है।
credit: Mukesh Mohan
14/04/2026
आज हम सिर्फ एक जन्मदिन नहीं मना रहे,
हम उस विचारधारा को याद कर रहे हैं जिसने हमें इंसान होने का हक दिलाया।
डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर ने कहा था:
"शिक्षित बनो, संगठित रहो, संघर्ष करो"
यह सिर्फ एक नारा नहीं, बल्कि आज भी उतना ही सच्चा रास्ता है।
जब तक समाज में भेदभाव, अन्याय और असमानता मौजूद है, तब तक बाबासाहेब के विचार जिंदा रहेंगे।
उन्होंने हमें सिखाया कि
लोकतंत्र सिर्फ वोट देने का अधिकार नहीं,
बल्कि बराबरी से जीने का अधिकार है।
आज सवाल यह नहीं है कि हम उन्हें याद करते हैं या नहीं,
सवाल यह है कि क्या हम उनके बताए रास्ते पर चल रहे हैं?
अगर हम सच में उन्हें सम्मान देना चाहते हैं,
तो हमें उनके विचारों को अपने जीवन में उतारना होगा
समानता, शिक्षा और आत्मसम्मान के साथ।
जय भीम 🙏
लोकशाही: सम्मान के साथ एक सच्चा सवाल
डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर ने कहा था:
“Democracy in India is only a top-dressing on an undemocratic soil.”
यह कोई साधारण बयान नहीं था, बल्कि एक गहरी समझ और भविष्य की चेतावनी थी।
आज की सच्चाई (Ground Reality):
हम गर्व से कहते हैं कि हम दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में रहते हैं।
लेकिन कुछ सवाल आज भी खड़े हैं—
क्या हर व्यक्ति को सच में बराबरी का अवसर मिल रहा है?
क्या गरीब और आम आदमी की आवाज़ उतनी ही मजबूत है जितनी ताकतवर लोगों की?
क्या फैसले हमेशा जनहित में होते हैं, या कभी-कभी छवि और राजनीति हावी हो जाती है?
👉 जब समाज में अभी भी असमानता, भेदभाव और दबाव दिखता है,
तो यह साफ होता है कि लोकतंत्र केवल व्यवस्था में है,
लेकिन पूरी तरह से व्यवहार में नहीं।
डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर की दूरदर्शिता:
उन्होंने स्पष्ट कहा था—
राजनीतिक समानता (vote का अधिकार) तब तक अधूरी है,
जब तक सामाजिक और आर्थिक समानता नहीं आती।
आज हम वोट देते हैं, सरकारें बदलती हैं,
लेकिन अगर ज़मीन पर इंसाफ और बराबरी नहीं पहुंचती,
तो लोकतंत्र कमजोर पड़ने लगता है।
आज की सरकार और हमारी जिम्मेदारी:
यह मुद्दा सिर्फ किसी एक सरकार का नहीं है,
बल्कि पूरे सिस्टम और समाज का है।
👉 सरकार की जिम्मेदारी है कि वह संविधान के मूल्यों पर चले
👉 और नागरिकों की जिम्मेदारी है कि वे सवाल पूछें, जागरूक रहें
डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर ने जो रास्ता दिखाया,
वह सिर्फ संविधान तक सीमित नहीं है—
वह एक ऐसे भारत का सपना है,
जहां हर व्यक्ति को सम्मान, समानता और स्वतंत्रता मिले।
अगर आज भी हम इन मूल्यों तक नहीं पहुंच पाए हैं,
तो हमें खुद से ईमानदारी से पूछना होगा—
👉 क्या हम उनके सपनों का भारत बना रहे हैं, या सिर्फ लोकतंत्र का दिखावा कर रहे हैं?
08/04/2026
Dr. B. R. Ambedkar vs Karl Marx — विचारों का Comparison 🔍
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1. समाज की समस्या (Root Problem)
Ambedkar: समाज की सबसे बड़ी समस्या जाति व्यवस्था (Caste System) है
Marx: समाज की सबसे बड़ी समस्या आर्थिक असमानता (Class Struggle) है
👉 Real Example:
भारत में दलितों के साथ भेदभाव - Ambedkar के अनुसार caste issue
गरीब vs अमीर gap - Marx के अनुसार class issue
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2. धर्म पर विचार (View on Religion)
Ambedkar: धर्म जरूरी है, लेकिन ऐसा धर्म जो समानता और मानवता सिखाए (जैसे उन्होंने बौद्ध धर्म अपनाया)
Marx: धर्म एक illusion है जो लोगों को असली समस्याओं से दूर रखता है
👉 Real Example:
Ambedkar → धर्म से सुधार
Marx → धर्म से दूरी
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3. समाधान (Solution Approach)
Ambedkar: संविधान, कानून और शिक्षा के जरिए बदलाव
Marx: क्रांति (Revolution) के जरिए सिस्टम बदलना
👉 Real Example:
Ambedkar → Reservation, Rights
Marx → मजदूर क्रांति
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4. लक्ष्य (Ultimate Goal)
Ambedkar: सामाजिक समानता (Social Equality)
Marx: आर्थिक समानता (Economic Equality)
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5. तरीका (Method)
Ambedkar: Peaceful & Democratic तरीके
Marx: Revolutionary & संघर्ष का रास्ता
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Final Thought 💡
Ambedkar ground reality (India की caste system) पर focused थे
Marx global level पर economic system को challenge करते थे
👉 Conclusion:
अगर भारत को समझना है → Ambedkar जरूरी
अगर capitalism और economy समझनी है → Marx जरूरी
दोनों का मकसद एक ही था
इंसान को शोषण से आज़ाद करना, बस रास्ते अलग थे।
🌍 जगाला युद्ध नको, बुद्ध हवा 🕊️
कर्मकांडाच्या जाळ्यात अडकून न पडता,
विचार, तर्क आणि करुणेचा मार्ग स्वीकारणं
हाच खरा प्रगतीचा मार्ग आहे।
एकनाथ शिंदे यांचा संदेश आज दिला जातोय,
पण हीच दिशा खूप आधी
डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर यांनी दाखवली होती।
गौतम बुद्ध यांचे विचार
शांतता, समता आणि मानवता
हेच समाजाला पुढे नेणारे खरे तत्त्व आहेत।
❗ युद्ध विनाश घडवते,
पण बुद्धांचे विचार समाज घडवतात।
👉 अंधश्रद्धेपेक्षा विचार
👉 द्वेषापेक्षा करुणा
👉 संघर्षापेक्षा संवाद
हीच खरी प्रगती… हीच खरी मानवता।
धर्म और जाति के नाम पर ज़हर फैलाना
ना राजनीति है, ना नेतृत्व
ये सीधा संविधान का अपमान है।
भारतीय संविधान हमें सिखाता है
सब बराबर हैं,
ना कोई छोटा, ना कोई बड़ा।
लेकिन जब जिम्मेदार पद पर बैठा व्यक्ति
समाज को बांटने की बात करता है,
तो वो अपनी कुर्सी नहीं,
देश की एकता को कमजोर करता है।
👉 अनुच्छेद 14 - सबके लिए समान अधिकार
👉 अनुच्छेद 15 - धर्म/जाति पर भेदभाव मना है
❗ याद रखो
देश धर्म से नहीं,
संविधान से चलता है।
अब तय आपको करना है
नफरत को सपोर्ट करना है
या संविधान के साथ खड़ा होना है। 🇮🇳