30/09/2025
किसी भी राष्ट्र की रीढ़ की मजबूती में शिक्षा का योगदान हमेशा से ही सबसे महत्वपूर्ण रहा है। वैदिक काल से चली आ रही भारतीय शिक्षा व्यवस्था जिसमें गुरुकुल से लेके विद्यालय तक का जो लंबा सफर अब तक हमने तय किया है उसने हर काल में ही विश्व पटल पर एक अलग छाप छोड़ी है ।
आचार्य चरक, आचार्य सुश्रुत, आचार्य भास्कर, आर्यभट्ट, डॉ चंद्र शेखर रमन, डॉ. होमी जहांगीर भाभा, डॉ ए.पी.जे. अब्दुल कलाम और नजाने कितने ही ऐसे अतुल्य नाम हैं जिन्होंने अंतराष्ट्रीय स्तर पर भारत को एक दमदार पहचान दिलायी है ।
लेकिन पिछले कुछ वर्षों में शिक्षा का जो व्यापारीकरण हुआ उसने भविष्य की संभावनाओं पर एक तलवार सी लटका दी है।
सरकारी विद्यालयों में लगातार घटती बच्चों की संख्या और अच्छी शिक्षा के नाम पर क़र्ज़ में दबती पीढ़ी समाज और राष्ट्र के लिए कुछ करने के बजाये इस क़र्ज़ को चुकाने में ही गुज़र जायेगी ।
शिक्षा को मूल अधिकार मानने वाले हम, कब शिक्षा पर होने वाले खर्च की प्रतिस्पर्धा में उलझ गये हमें पता ही नहीं चला ।
जिस समाज में सरकारी स्कूलों ने एक से एक बढ़कर हीरे दिये हैं उन्हीं सरकारी स्कूलों में बच्चे का दाखिला कराने और पढ़ाने वाले माता-पिता के सामर्थ्य पर प्रश्न उठने लगते हैं, ऐसा क्यों????
जबकि हम सब जानते हैं इन स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षक कड़ी मेहनत और प्रतिस्पर्धा को पार कर शिक्षक बनने का गौरव हासिल करते हैं ।
इस पेज का लक्ष्य है समाज में फैली इस भ्रांति को मिटाना कि सरकारी स्कूल में शिक्षा का स्तर बच्चों के लायक़ नहीं है । सरकारी स्कूलों में फैली ये खामोशी हम मिलकर मिटायेंगे ।
जो अच्छा है उसे और अच्छा बनायेंगे, सरकारी स्कूल में पढ़ाना जितने गर्व की बात उतने ही गर्व की बात है उन शिक्षकों से पढ़ना।
हम इस पेज के माध्यम से पूरी कोशिश करेंगे कि सरकारी स्कूलों को पुनः जीवंत किया जाये, जो बेहतर है उसे सम्मान दिया जाए और जो कमतर है उसे बेहतर किया जाये ।
आओ एक साथ मिलकर एक बार फिर गुनगुनायें:
सवेरे सवेरे, यारों से मिलने, बन ठन के निकले हम
सवेरे सवेरे, यारों से मिलने, घर से दूर चले हम
रोके से ना रुके हम , मर्ज़ी से चलें हम
बादल सा गरजें हम , सावन सा बरसे हम
सूरज सा चमके हम - स्कूल चलें हम
ओहो..हो ओहो..हो हो..हो हो
इसके दरवाज़े से दुनिया के राज़ खुलते है
कोई आगे चलता है हम पीछे चलते है
दीवारों पे किस्मत अपनी लिखी जाती है
इस से हमको जीने की वजह मिलती जाती है
रोके से ना रुके हम , मर्ज़ी से चलें हम
बादल सा गरजें हम , सावन सा बरसें हम
सूरज सा चमके हम - स्कूल चलें हम
स्कूल चलें हम, हो..हो.. हो
ओहो..हो ओहो..हो हो..हो हो
रोके से ना रुके हम , मर्ज़ी से चलें हम
बादल सा गरजें हम , सावन सा बरसें हम
स्कूल चलें हम