Saturn direct from 18th Sept 2019 till next 128 days is the time to bring in material resources, redefine financial goals, make money and materialise desires.... With the upsurge of positivity, u can easily manifest success in career, finance,overseas and long distance travel....
astro research laxminarayan vyas
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[30/09, 06:46] Laxminarayan Vyas: good morning......Once in a while, no matter what age you are, a person needs to hear someone loves them & is proud of them....
Tell someone you are proud of them and make their day. Your words could be the very thing that turns someone's life around when they see only failure and depression in themselves......IT'S TRUE!!....try once ///
[30/09, 06:46] Laxminarayan Vyas: शुभ प्रभात,,,,गणित एक दूसरे के नंबर बनाने के काम आता है....जबकि केमिस्ट्री एक दूसरे के सम्बन्ध बनाने के काम आती है.....गणित बिगड़ जाने पर फिर जोड़ तोड़ हो सकती है लेकिन केमिस्ट्री बिगड़ जाने पर संबंधों में भूचाल आ जाता है.....जय श्री कृष्णा
23 SEPT day and night r equal and thereafter night will be longer than day.......SUN TAKING SOUTH WARD DIRECTION
August 5.....सभी मित्रो को मित्रत्रा दिवस की बधाई .......
दुनिया विश्वास पर चलती है एवं विश्वास का पर्याय दोस्ती है Iअपनी तो दुनिया ही दोस्ती से शुरू होकर दोस्त ही दुनिया बन जाता हैI मित्रता दिवस के इस विश्वसनीय रिश्ते के आगे नतमस्तक आपकी दोस्ती प्यार व स्नेह के उपहार से खुशनसीब मित्र लक्ष्मीनारायण व्यास vyasastroresearch की तरफ से आपको हार्दिक शुभकामनाये |be happy enjoy life.....जय श्री कृष्णा
सुप्रभात...इच्छाए हमेशा बदलती रहती है . ..क्यूंकि मन चंचल है...मस्तिक आत्मविश्वाश पैदा करता है...मन को control करता है...दुःख के केंद्र ढक कर सुख को चेतना देता है....jai shree krishna
सची सफलता तभी साबित होती है जब उसमे जीत ,आज़ादी और संरक्ष्ण हो....
Jeet जिसमे अंदर से हार का मन न हो
आजादी जिसमे पद ,प्रतिष्ठा, धन का बंधन न हो
संरक्ष्ण जिसमे निर्भय हो.......
वैसे तो बहुत लोग आश्रित होकर भी सफल हॉते है.....कुछ अपने बलबूते पर जोर दिखाते है
शुभ प्रभात,,,,,दुख और कर्म पर कुछ सोच विचार,,,,,,,,सभी यह सोचते है कि दुःख से छुटकारा कैसे मिले....kuchh कहते है आँखे मूँद कर ध्यान में बैठो या फिर निक्कमे बन कर बैठो ....लेकिन इनसे पदार्थ की प्राप्ति नही होती और पदार्थ के अभाव मे दुख मिटता नही....bhookh लगी है तो भोजन चाहिए ,सर्दी लगती है तो कपडे चाहिए ....अध्यात्म तो दुःख मिटाने की घोषणा है ,एक कल्पना...धर्म करने से मन को शांति मिलती है लेकिन दुख मिटाने के लिए कर्म करना जरूरी है कुछ पदार्थ जुटाना है तभी दुःख की निव्रती होगी...कुछ पाने के लिए कुछ खोना नही बल्कि कुछ बोना पड़ता है इसलिए सार्थक मेहनत,उपाय, प्रयाश करना जरूरी है.....जय श्री कृष्णा
शुभ प्रभात.....आत्मा शरीर के सुख दुःख से अप्रभावित रहती है....सूर्य के प्रकाश से इस संसार में मनुष्य और सभी जीव अपनी क्रिया करते है ...पृथ्वी पर सूर्य जीवन का स्त्रोत्र है और उसीसे जीवन की गतिविधिया चलती है लेकिन सूर्य पर उसका कोई असर नही होता ....इसी प्रकार चैतन्य आत्मा का आश्रय लेकर शरीर इन्द्रिया मन बुद्धि आदि चलायमान होते है और सुख दुःख का आभास होता है लेकिन आत्मा पर उसका कोई असर नहीं होता ....जय श्री कृष्णा
भगवान को हम इसीलिए याद करते है कि हमें मुश्किलों का सामना करने में हिम्मत दे.....हमारे जीवन में कोई हादसा न हो,...भक्ति में शक्ति है,,,,,समय बलवान हो जाता है प्रभु कृपा से,,,...god is gr8.
शुभ प्रभात ,,,जब समय अच्छा चलता है तो लगता है जिन्दगी सुहानी है लेकिन बुरे दिनों में जिन्दगी जीने में कसम कस हो जाती है... समय कटता नहीं......फिर भी लोग अपने स्वार्थ में सब कुछ भुला देते है....जियो तो बस यू की लोग आपको पसंद करे...नेकी के साथ....जय श्री कृष्णा
शुभ प्रभात,,,,🌿🌸 पूजा संबंधित अति महत्वपूर्ण बातें 🌸🌿
🌸1. घर में सेवा पूजा करने वाले जन भगवान के एक से अधिक स्वरूप की सेवा पूजा कर सकते हैं ।
🌸2. घर में दो शिवलिंग की पूजा ना करें तथा पूजा स्थान पर तीन गणेश जी नहीं रखें।
🌸3. शालिग्राम जी की बटिया जितनी छोटी हो उतनी ज्यादा फलदायक है।
🌸4. कुशा पवित्री के अभाव में स्वर्ण की अंगूठी धारण करके भी देव कार्य सम्पन्न किया जा सकता है।
🌸5. मंगल कार्यो में कुमकुम का तिलक प्रशस्त माना जाता हैं।
🌸6. पूजा में टूटे हुए अक्षत के टूकड़े नहीं चढ़ाना चाहिए।
🌸7. पानी, दूध, दही, घी आदि में अंगुली नही डालना चाहिए। इन्हें लोटा, चम्मच आदि से लेना चाहिए क्योंकि नख स्पर्श से वस्तु अपवित्र हो जाती है अतः यह वस्तुएँ देव पूजा के योग्य नहीं रहती हैं।
🌸8. तांबे के बरतन में दूध, दही या पंचामृत आदि नहीं डालना चाहिए क्योंकि वह मदिरा समान हो जाते हैं।
🌸9. आचमन तीन बार करने का विधान हैं। इससे त्रिदेव ब्रह्मा-विष्णु-महेश प्रसन्न होते हैं।
🌸10. दाहिने कान का स्पर्श करने पर भी आचमन के तुल्य माना जाता है।
🌸11. कुशा के अग्रभाग से दवताओं पर जल नहीं छिड़के।
🌸12. देवताओं को अंगूठे से नहीं मले।
🌸13. चकले पर से चंदन कभी नहीं लगावें। उसे छोटी कटोरी या बांयी हथेली पर रखकर लगावें।
🌸15. पुष्पों को बाल्टी, लोटा, जल में डालकर फिर निकालकर नहीं चढ़ाना चाहिए।
🌸16. श्री भगवान के चरणों की चार बार, नाभि की दो बार, मुख की एक बार या तीन बार आरती उतारकर समस्त अंगों की सात बार आरती उतारें।
🌸17. श्री भगवान की आरती समयानुसार जो घंटा, नगारा, झांझर, थाली, घड़ावल, शंख इत्यादि बजते हैं उनकी ध्वनि से आसपास के वायुमण्डल के कीटाणु नष्ट हो जाते हैं। नाद ब्रह्मा होता हैं। नाद के समय एक स्वर से जो प्रतिध्वनि होती हैं उसमे असीम शक्ति होती हैं।
🌸18. लोहे के पात्र से श्री भगवान को नैवेद्य अपर्ण नहीं करें।
🌸19. हवन में अग्नि प्रज्वलित होने पर ही आहुति दें।
🌸20. समिधा अंगुठे से अधिक मोटी नहीं होनी चाहिए तथा दस अंगुल लम्बी होनी चाहिए।
🌸21. छाल रहित या कीड़े लगी हुई समिधा यज्ञ-कार्य में वर्जित हैं।
🌸22. पंखे आदि से कभी हवन की अग्नि प्रज्वलित नहीं करें।
🌸23. मेरूहीन माला या मेरू का लंघन करके माला नहीं जपनी चाहिए।
🌸24. माला, रूद्राक्ष, तुलसी एवं चंदन की उत्तम मानी गई हैं।
🌸25. माला को अनामिका (तीसरी अंगुली) पर रखकर मध्यमा (दूसरी अंगुली) से चलाना चाहिए।
🌸26.जप करते समय सिर पर हाथ या वस्त्र नहीं रखें।
🌸27. तिलक कराते समय सिर पर हाथ या वस्त्र रखना चाहिए।
🌸28. माला का पूजन करके ही जप करना चाहिए।
🌸29. ब्राह्मण को या द्विजाती को स्नान करके तिलक अवश्य लगाना चाहिए।
🌸30. जप करते हुए जल में स्थित व्यक्ति, दौड़ते हुए, शमशान से लौटते हुए व्यक्ति को नमस्कार करना वर्जित हैं।
🌸31. बिना नमस्कार किए आशीर्वाद देना वर्जित हैं।
🌸32. एक हाथ से प्रणाम नही करना चाहिए।
🌸33. सोए हुए व्यक्ति का चरण स्पर्श नहीं करना चाहिए।
🌸34. बड़ों को प्रणाम करते समय उनके दाहिने पैर पर दाहिने हाथ से और उनके बांये पैर को बांये हाथ से छूकर प्रणाम करें।
🌸35. जप करते समय जीभ या होंठ को नहीं हिलाना चाहिए। इसे उपांशु जप कहते हैं। इसका फल सौगुणा फलदायक होता हैं।
🌸36. जप करते समय दाहिने हाथ को कपड़े या गौमुखी से ढककर रखना चाहिए।
🌸37. जप के बाद आसन के नीचे की भूमि को स्पर्श कर नेत्रों से लगाना चाहिए।
🌸38. संक्रान्ति, द्वादशी, अमावस्या, पूर्णिमा, रविवार और सन्ध्या के समय तुलसी तोड़ना निषिद्ध हैं।
🌸39. दीपक से दीपक को नही जलाना चाहिए।
🌸40. यज्ञ, श्राद्ध आदि में काले तिल का प्रयोग करना चाहिए, सफेद तिल का नहीं।
🌸41. शनिवार को पीपल पर जल चढ़ाना चाहिए। पीपल की सात परिक्रमा करनी चाहिए। परिक्रमा करना श्रेष्ठ है, किन्तु रविवार को परिक्रमा नहीं करनी चाहिए।
🌸42. कूमड़ा-मतीरा-नारियल आदि को स्त्रियां नहीं तोड़े या चाकू आदि से नहीं काटें। यह उत्तम नही माना गया हैं।
🌸43. भोजन प्रसाद को लाघंना नहीं चाहिए।
🌸44. देव प्रतिमा देखकर अवश्य प्रणाम करें।
🌸45. किसी को भी कोई वस्तु या दान-दक्षिणा दाहिने हाथ से देना चाहिए।
🌸46. एकादशी, अमावस्या, कृृष्ण चतुर्दशी, पूर्णिमा व्रत तथा श्राद्ध के दिन क्षौर-कर्म (दाढ़ी) नहीं बनाना चाहिए ।
🌸47. बिना यज्ञोपवित या शिखा बंधन के जो भी कार्य, कर्म किया जाता है, वह निष्फल हो जाता हैं।
🌸48. यदि शिखा नहीं हो तो स्थान को स्पर्श कर लेना चाहिए।
🌸49. शिवजी की जलहारी उत्तराभिमुख रखें ।
🌸50. शंकर जी को बिल्वपत्र, विष्णु जी को तुलसी, गणेश जी को दूर्वा, लक्ष्मी जी को कमल प्रिय हैं।
🌸51. शंकर जी को शिवरात्रि के सिवाय कुंुकुम नहीं चढ़ती।
🌸52. शिवजी को कुंद, विष्णु जी को धतूरा, देवी जी को आक तथा मदार और सूर्य भगवानको तगर के फूल नहीं चढ़ावे।
🌸53 .अक्षत देवताओं को तीन बार तथा पितरों को एक बार धोकर चढ़ावंे।
🌸54. नये बिल्व पत्र नहीं मिले तो चढ़ाये हुए बिल्व पत्र धोकर फिर चढ़ाए जा सकते हैं।
🌸55. विष्णु भगवान को चांवल, गणेश जी को तुलसी, दुर्गा जी और सूर्य नारायण को बिल्व पत्र नहीं चढ़ावें।
🌸56. पत्र-पुष्प-फल का मुख नीचे करके नहीं चढ़ावें, जैसे उत्पन्न होते हों वैसे ही चढ़ावें।
🌸57. किंतु बिल्वपत्र उलटा करके डंडी तोड़कर शंकर पर चढ़ावें।
🌸58. पान की डंडी का अग्रभाग तोड़कर चढ़ावें।
🌸59. सड़ा हुआ पान या पुष्प नहीं चढ़ावे।
🌸60. गणेश को तुलसी भाद्र शुक्ल चतुर्थी को चढ़ती हैं।
🌸61. पांच रात्रि तक कमल का फूल बासी नहीं होता है।
🌸62. दस रात्रि तक तुलसी पत्र बासी नहीं होते हैं।
🌸63. सभी धार्मिक कार्यो में पत्नी को दाहिने भाग में बिठाकर धार्मिक क्रियाएं सम्पन्न करनी चाहिए।
🌸64. पूजन करनेवाला ललाट पर तिलक लगाकर ही पूजा करें।
🌸65. पूर्वाभिमुख बैठकर अपने बांयी ओर घंटा, धूप तथा दाहिनी ओर शंख, जलपात्र एवं पूजन सामग्री रखें।
🌸66. घी का दीपक अपने बांयी ओर तथा देवता को दाहिने ओर रखें एवं चांवल पर दीपक रखकर प्रज्वलित करें।
🌿🌸आप सभी के श्री चरणों में प्रार्थना है अगर हो सके तो और लोगों को भी आप इन महत्वपूर्ण बातों से अवगत करा सकते हैं 🌸🌿जय श्री कृष्ण,,👏🌸🌿.
A religion has more of peace , purity and happiness to be derived....A TEMPLE IS SOURCE OF ENERGY....the mind, body and soul are at receiving end.....there r innumerable schedules, rules, ways to achieve atma so parmatma...take it or leave it, is your choice..... .the ultimate hapiness is the crux of life...jai shree krishna,,,
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