02/07/2020
सुनो गौर से------!
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रोज चीन के उत्पातों का,
नया आकलन करने वालों।
देश विरोधी मनोभाव का,
दुश संचालन करने वालों।।
तुम्हें वास्ता भारत माँ के,अन्न- जल,मिट्टी- वायु का।
दूध पिया है अपनी माँ का,या फिर चीनी काऊ का।।
होता विश्वास नहीं तुम को,
सेना की गरिमा, गौरव पर।
क्यों नहीं गर्व से शीश उठे,
भारत जन नायक-सौरभ पर।।
कमनिस्टों के पिछलग्गू अब,तज दो वंदन चाऊ का।
तुम्हें वास्ता भारत माँ के,अन्न, जल, मिट्टी वायु का।।
जिन्हें नहीं होता है गौरव,
सैन्य शक्ति के संसाधन पर।
सैन्य बलों के राष्ट्र-प्रेम मय,
राष्ट्र-ध्वजा के अभिवादन पर।।
शर्मसार मत करो दरिन्दों,नाम कृष्ण बलदाऊ का।
तुम्हें वास्ता भारत माँ के,अन्न,जल,मिट्टी वायु का।।
शिनजिंपिंग के चमचों सुन लो,
बहुत हो चुकी गद्दारी अब।
शत्रु वंदना नित करते हो,
दिखलाओगे खुद्दारी कब।।
राजनीति में लुटा नाम अब,चाचा,पापा,ताऊ का।
तुम्हें वास्ता भारत माँ के,अन्न,जल,मिट्टी वायु का।।
राहुल गाँधी से मुक्त करो,
काँग्रेस जनित गठबंधन को।
मिला दिया मिट्टी में इसने,
गाँधी के कुशल प्रबंधन को।।
उसे देश हित से क्या मतलब,जो हो चाऊ-माऊ का।
तुम्हें वास्ता भारत माँ के,अन्न,जल,मिट्टी वायु का।
चीनी ऐप बंद क्या कर दी,
कराह उठे कुछ चीनी चींटे।
प्रतिबंधों का चला जो चाबुक,
सभी विरोधी मिल सिर पीटें।।
चीनी धन का हुआ खुलासा,पड़ गया चक्कर राहु का।
तुम्हें वास्ता भारत माँ के,अन्न, जल, मिट्टी वायु का।।
वहिष्कार कर चीनी चीजें,
देश-भक्ति कीअलख जगा दें।
अपना कर हम सर्व स्वदेसी,
अर्थ-तंत्र में प्राण जगा दें।।
सरकारी सहयोग बढ़ाता,स्तर अब धोबी-नाऊ का।
तुम्हें वास्ता भारत माँ के,अन्न,जल,मिट्टी वायु का।
'विजय'