Rshtriya Sanatan Shala:निशुल्क साप्ताहिक संस्कार शाळा:

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Rshtriya Sanatan Shala:निशुल्क साप्ताहिक संस्कार शाळा: An innovative idea for educate young generation on ancient Bhartiya culture as well as techniques in order to cascade knowledge of Veds and ancient text.

Vidya Dadati Vinyam! Shri Amitabh Chaoubey a well-known social worker in Madhya Pradesh observed that, the young generation is unaware of our cultural values as well as they see this world with glasses of modern education system and think that there was nothing in past. Henceforth Srhi Choubeyji came up with an innovative idea of ‘Rashtiya Sanatan Shala’, a place where young generation of motherland can learn ancient culture along with modern education in their summer vacations. It is free cost, only fee you have to pay is your time and respect for our culture, motherland and soldierly for Hinduism in order to sustain and expand knowledge and techniques you learn here.
‘Rashtriya Sanatan Shala’ is for children of class 1st to 12th from all religions are eligible to attend it. Following are the courses covered in the school for different standard:
• Meditation and yog
• Vaidik mathematics
• Vaidik science
• History of Bharat and Arya Vrat
• Researches on various topics
• Scientific reasons behind Hinduism
• History and teachings of religions:
o Sanatan Dharma
o Baudh Dharma
o Jain Dharma
o Sikh Dharma
For details on admissions and franchise you can connect to us using following details:
Email: [email protected]
Shri Amitabh Choubey (Sagar MP): +91 98934 56369
Shri Abhishek Yadav (Sagar MP):+91 98273 64643
Shri Varun Shrivastava (Mumbai):+91 93207 66257

https://youtu.be/7-AZloiImQE
10/08/2021

https://youtu.be/7-AZloiImQE

बचपन का प्यार जैसे फूहड़ गीतों को प्रसिद्धि दिलाने वाले समाज को 7 साल की बच्ची यह प्रस्तुति अवश्य देखनी चाहिए …

भगवान श्री गणेश जी का व्यक्तित्व बेहद आकर्षक माना गया है। उनका मस्तक हाथी का है और वाहन मूषक है। उनकी दो पत्नियां ऋद्धि ...
22/09/2020

भगवान श्री गणेश जी का व्यक्तित्व बेहद आकर्षक माना गया है। उनका मस्तक हाथी का है और वाहन मूषक है। उनकी दो पत्नियां ऋद्धि और सिद्धि हैं। सभी गणों के स्वामी होने के कारण इनका नाम गणेश है। परंपरा में हर कार्य के प्रारंभ में इनका स्मरण आवश्यक है। उन्हें विघ्नहर्ता कहते हैं। गणेश में ऎसी क्या विशेषताएं हैं कि उनकी पूजा 33 कोटि देवी-देवताओं में सर्वप्रथम होती है। आइए जानते हैं गणेश जी विशिष्टता के बारे में

वेदों के मुताबिक, गणेश जी की पूजा के बिना कोई भी कार्य प्रारंभ नहीं किया जाता है। गणेश जी को वैदिक देवता की उपाधि दी गई है। ॐ के उच्चारण से वेद पाठ प्रारंभ होता है। गणेश आदिदेव है। वैदिक ऋचाओं में उनका अस्तित्व हमेशा रहा है। गणेश पुराण में ब्रहा, विष्णु एवं शिव के द्वारा उनकी पूजा किए जाने का तक उल्लेख मिलता है।

गणेश जी का वाहन मूषक क्यों : भगवान गणेश की शारीरिक बनावट के मुकाबले उनका वाहन चूहा काफी छोटा है। चूहे का काम किसी चीज को कुतर डालना है। वह चीर-फाड़ कर उसके प्रत्येक अंग-प्रत्यंग का विश्लेषण करता है। गणेश बुद्धि और विद्या के अधिष्ठाता हैं। तर्क-वितर्क में वे बेजोड़ हैं। इसी प्रकार मूषक भी तर्क-वितर्क में पीछे नहीं हैं। काट छांट में उसका कोई सानी नहीं है। मूषक के इन्हीं गुणों को देखकर उन्होंने इसे वाहन चुना है।

गणेश जी की सूंड का रहस्य : गजानन की सूंड हमेशा हिलती डुलती रहती है जो उनके सचेत होने का संकेत है। इसके संचालन से दु:ख-दारिद्रय समाप्त हो जाते हैं। अनिष्टकारी शक्तियां डरकर भाग जाती हैं। यह सूंड जहां बड़े-बड़े दिग्पालों को भयभीत करती है, वहीं देवताओं का मनोरजंन भी करती है। इस सूंड से गणोश, ब्रहाजी पर पानी एवं फूल बरसाते है। सूंड के दायीं और बायीं ओर होने का अपना महत्व है।

बड़ा पेट : गणेश जी का पेट बहुत बड़ा है। इसी कारण उन्हें लंबोदर भी कहा जाता है। लंबोदर होने का कारण यह है कि वे हर अच्छी और बुरी बात को पचा जाते हैं और किसी भी बात का निर्णय सूझबूझ के साथ लेते हैं। वे संपूर्ण वेदों के ज्ञाता है। संगीत और नृत्य आदि विभिन्न कलाओं के भी जानकार हैं। ऎसा माना जाता है कि उनका पेट विभिन्न विद्याओं का कोष है।

लंबे कान : श्री गणेश लंबे कान वाले हैं। इसलिए उन्हें गजकर्ण भी कहा जाता है। लंबे कान वाले भाग्यशाली होते हैं। लंबे कानों का एक रहस्य यह भी है कि वह सबकी सुनते हैं और अपनी बुद्धि और विवेक से ही किसी कार्य का क्रियान्वयन करते हैं। बड़े कान हमेशा चौकन्ना रहने के भी संकेत देते हैं।

01 माँ नर्मदा का गुणगान पूराण करते है।02 स्वर्ग से अवतरित हुयी थी पुण्य सलिला नर्मदा।03 स्वर्ग में शिवतनया के नाम से जान...
09/09/2015

01 माँ नर्मदा का गुणगान पूराण करते है।
02 स्वर्ग से अवतरित हुयी थी पुण्य सलिला नर्मदा।
03 स्वर्ग में शिवतनया के नाम से जानी जाती है माँ नर्मदा।
04 नर्मदा जीवन और मोक्षदायनी है।
05 नर्मदा माता पृथ्वी वासियों के लिए मेकल के कठोर तप की देन है।
06 पुण्य सलिला शिवजी के सख्त आदेश के बाद अवतरित हुयी थी।
07 माता गंगा के पापों को नाश करती है नर्मदा देवी।
08 पृथ्वी में अमर कंटक है मर्मादा माता।
09 नर्मदा की दो संतान है एक सतपुड़ा दूसरी विन्ध्याचाल पर्वत।
10 उलटी दिशा में बहती है नर्मदा नदी ।
11 नर्मदा का सागर संगम गुजरात के भरूच में होता है।
12 नर्मदा के तट पर विराजमान है शिव ज्योतिर्लिंग ॐ कारेश्वर .
13 भैरो ब्रह्म हत्या दोष मुक्त हुए नर्मदा और महेश्वर का पूजन करके।
14 मकर की सवारी करती है माता नर्मदा देवी।
15 चांदी की धातु में वास है नर्मदा देवी का।
16 नर्मदा में सोमवती अमावस्या को विशेष तीर्थ स्नान का महत्त्व है।
17 गंगा में 108 डुबकी के बराबर नर्मदा के दर्शन मात्र से पुण्य मिलता है।
18 निमाडी और नारमदेव संस्कृति का उदगम स्थल है नर्मदा।
19 बेगा संप्रदाय की कुलदेवी है माँ नर्मदा देवी।
20 शिव-पार्वती को गंगा और गोदावरी के तुल्य प्रिय है पुण्य सलिल माँ नर्मदा। https://www.facebook.com/SanatanShala

हिंदुत्व को जाने भारतीय संस्कृति को पहचाने —दो पक्ष – कृष्ण पक्ष एवं शुक्ल पक्ष !तीन ऋण – देव ऋण, पित्र ऋण एवं ऋषि ऋण!चा...
03/09/2015

हिंदुत्व को जाने भारतीय संस्कृति को पहचाने —

दो पक्ष – कृष्ण पक्ष एवं शुक्ल पक्ष !
तीन ऋण – देव ऋण, पित्र ऋण एवं ऋषि ऋण!

चार युग – सतयुग , त्रेता युग , द्वापरयुग एवं कलयुग !

चार धाम – द्वारिका , बद्रीनाथ, जगन्नाथ पूरी एवं रामेश्वरम धाम !
चारपीठ – शारदा पीठ ( द्वारिका ), ज्योतिष पीठ ( जोशीमठ बद्रिधाम), गोवर्धन पीठ ( जगन्नाथपुरी ) एवं श्रन्गेरिपीठ!

चर वेद- ऋग्वेद , अथर्वेद, यजुर्वेद एवं सामवेद !
चार आश्रम – ब्रह्मचर्य , गृहस्थ , बानप्रस्थ एवं संन्यास !
चार अंतःकरण – मन , बुद्धि , चित्त , एवं अहंकार !

पञ्च गव्य – गाय का घी, दूध, दही, गोमूत्र एवं गोबर, !
पञ्च देव – गणेश , विष्णु , शिव , देवी और सूर्य !
पंच तत्त्व – प्रथ्वी , जल , अग्नि , वायु एवं आकाश !

छह दर्शन – वैशेषिक, न्याय, सांख्य, योग, पूर्व मिसांसा एवं उत्तर मिसांसा !

सप्त ऋषि – विश्वामित्र, जमदाग्नि, भरद्वाज, गौतम, अत्री, वशिष्ठ और कश्यप !
सप्त पूरी – अयोध्या पूरी , मथुरा पूरी , माया पूरी ( हरिद्वार ) , कशी , कांची ( शिन कांची – विष्णु कांची ) , अवंतिका और द्वारिका पूरी !

आठ योग – यम, नियम, आसन, प्राणायाम , प्रत्याहार, धारणा, ध्यान एवं समाधी !

आठ लक्ष्मी – आग्घ , विद्या , सौभाग्य , अमृत , काम , सत्य , भोग , एवं योग लक्ष्मी !

नव दुर्गा – शैल पुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायिनी, कालरात्रि, महागौरी एवं सिद्धिदात्री !

दस दिशाएं – पूर्व, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण, इशान, नेत्रत्य, वायव्य आग्नेय,आकाश एवं पाताल !

मुख्या दस अवतार – मत्स्य, कच्छप, बराह, नरसिंह, बामन, परशुराम, श्री राम, कृष्ण, बलराम एवं कल्कि !

ब्रह्मास्त्र, नारायणास्त्र पाशुपत, आग्नेय अस्त्र, पर्जन्य अस्त्र, पन्नग अस्त्र या सर्प अस्त्र,गरुड़ अस्त्र, शक्ति अस्त्र, फरसा, गदा एवं चक्र l

ग्यारह कौमार ऋषि – सनक, सनन्दन, सनातन और सनत कुमार, मरीचि, अत्री, अंगीरा, पुलह, क्रतु, पुलस्त्य एवं वशिष्ठ l

बारह मास – चेत्र, वैशाख, ज्येष्ठ,अषाड़, श्रावन, भाद्रपद, अश्विन, कार्तिक, मार्गशीर्ष. पौष, माघ एवं फागुन !

बारह राशी – मेष, ब्रषभ, मिथुन, कर्क, सिंह, तुला, ब्रश्चिक, धनु, मकर, कुम्भ, कन्या एवं मीन !

बारह ज्योतिर्लिंग – सोमनाथ, मल्लिकर्जुना, महाकाल, ओमकालेश्वर, बैजनाथ, रामेश्वरम, विश्वनाथ, त्रियम्वाकेश्वर, केदारनाथ, घुष्नेश्वर, भीमाशंकर एवं नागेश्वर !

बारह विश्व की प्रारम्भिक जातियां – देवऋषि, देवता, गन्धर्व, किन्नर, रूद्र, खस, नाग, गरुड व अरुण, दानव, दैत्य, असुर एवं वसु l

चौदह मनु – स्वायंभुव, स्वारोचिष, उत्तम, तामस, रैवत, चाक्षुष, वैवस्वत, अर्क सावर्णि, दक्ष सावर्णि, ब्रह्म सावर्णि, धर्म सावर्णि, रुद्र सावर्णि, रौच्य एवं भौत्य।

पंद्रह तिथियाँ – प्रतिपदा, द्वतीय, तृतीय, चतुर्थी, पंचमी, षष्ठी, सप्तमी, अष्टमी, नवमी, दशमी, एकादशी, द्वादशी, त्रयोदशी, चतुर्दशी, पूर्णिमा, अमावश्या !

स्म्रतियां – मनु, विष्णु, अत्री, हारीत, याज्ञवल्क्य, उशना, अंगीरा, यम, आपस्तम्ब, सर्वत, कात्यायन, ब्रहस्पति, पराशर, व्यास, शांख्य, लिखित, दक्ष, शातातपवब, वशिष्ठ !

03/09/2015

https://www.facebook.com/SanatanShala

An innovative idea for educate young generation on ancient Bhartiya culture as well as techniques in order to cascade knowledge of Veds and ancient text.

मेरा ' भारत ' सम्पूर्ण संसार में पूज्य और विश्वगुरु की उपाधि से विभूषित क्यों हैं .... आइये देखें...
02/09/2015

मेरा ' भारत ' सम्पूर्ण संसार में पूज्य और विश्वगुरु की उपाधि से विभूषित क्यों हैं .... आइये देखें...

गुरुत्वाकर्षण शक्ति कि खोंज न्यूटन ने की ,ये हमारे लिए शर्म की बात है.जिस समय न्यूटन के पुर्वज जंगली लोग थे ,उस समय मह्र...
02/09/2015

गुरुत्वाकर्षण शक्ति कि खोंज न्यूटन ने की ,ये हमारे लिए शर्म की बात है.

जिस समय न्यूटन के पुर्वज जंगली लोग थे ,उस समय मह्रिषी भाष्कराचार्य ने प्रथ्वी की गुरुत्वाकर्षण शक्ति पर एक पूरा ग्रन्थ रच डाला था. किन्तु आज हमें कितना बड़ा झूंठ पढना पढता है कि गुरुत्वाकर्षण शक्ति कि खोंज न्यूटन ने की ,ये हमारे लिए शर्म की बात है.

भास्कराचार्य सिद्धान्त की बात कहते हैं कि वस्तुओं की शक्ति बड़ी विचित्र है।
मरुच्लो भूरचला स्वभावतो यतो
विचित्रावतवस्तु शक्त्य:।।
- सिद्धांतशिरोमणि गोलाध्याय - भुवनकोश
आगे कहते हैं-

आकृष्टिशक्तिश्च मही तया यत् खस्थं
गुरुस्वाभिमुखं स्वशक्तत्या।
आकृष्यते तत्पततीव भाति
समेसमन्तात् क्व पतत्वियं खे।।
- सिद्धांतशिरोमणि गोलाध्याय - भुवनकोश

अर्थात् पृथ्वी में आकर्षण शक्ति है। पृथ्वी अपनी आकर्षण शक्ति से भारी पदार्थों को अपनी ओर खींचती है और आकर्षण के कारण वह जमीन पर गिरते हैं। पर जब आकाश में समान ताकत चारों ओर से लगे, तो कोई कैसे गिरे? अर्थात् आकाश में ग्रह निरावलम्ब रहते हैं क्योंकि विविध ग्रहों की गुरुत्व शक्तियाँ संतुलन बनाए रखती हैं।

ऐसे ही अगर यह कहा जाय की विज्ञान के सारे आधारभूत अविष्कार भारत भूमि पर हमारे विशेषज्ञ ऋषि मुनियों द्वारा हुए तो इसमें कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी ! सबके प्रमाण उपलब्ध हैं ! आवश्यकता स्वभाषा में विज्ञान की शिक्षा दिए जाने की है !

भारत का अर्थ"भा" मतलब भाषकर सूर्य चमकने वाला प्रकाशवान"रत" मतलब समाहित रहने वाला लीनइतना धार्मिक और प्रभावी नाम है हमारे...
02/09/2015

भारत का अर्थ

"भा" मतलब भाषकर सूर्य चमकने वाला प्रकाशवान
"रत" मतलब समाहित रहने वाला लीन
इतना धार्मिक और प्रभावी नाम है हमारे देश का फिर हम "इण्डिया" बोल कर क्यों इसके आभामंडल को बदलते है

राम तो सदा मिले हैं, मर्यादा से जीने मेंराम नहीं मिलते ईंट और गारा में,राम मिले हैं निर्धन के अश्रु की धारा में,राम मिले...
02/09/2015

राम तो सदा मिले हैं, मर्यादा से जीने में

राम नहीं मिलते ईंट और गारा में,
राम मिले हैं निर्धन के अश्रु की धारा में,
राम मिले हैं वचन निभाती आयु को
राम मिले हैं घायल पड़े जटायु को
राम मिले हैं अंगद आले पावों में
राम मिले हैं पंचवटी की छावों में
राम मिले हैं मर्यादा से जीने में
राम मिले हैं बजरंगी के सीने में
राम मिले हैं वचन वद्ध वनवासों में
राम मिले हैं केवट के विश्वासों में
राम मिले हैं अनुसुईया की मानवता को
राम मिले हैं सीता जैसी पावनता को
राम मिले हैं कोशल्या माँ की ममता को
राम मिले हैं पत्थर बनी अहल्या को
राम नहीं मिलते मंदिर के फेरों में
राम तो सदा मिले हैं शबरी के झूठे बेरों में
शबरी के झूठे बेरों में......................

पढ़िए और शेयर करिए आखिर सच्चाई सबको पता चलनी चाहिएअंग्रजी भाषा की डिक्शनरी मेँ मात्र चार लाख शब्द हैँ........!! मित्रोँ, ...
02/09/2015

पढ़िए और शेयर करिए आखिर सच्चाई सबको पता चलनी चाहिए

अंग्रजी भाषा की डिक्शनरी मेँ मात्र चार लाख शब्द हैँ........!!

मित्रोँ, हमारे देश मेँ एक सबसे बड़ा झूठ प्रचारित किया जाता है कि अंग्रेजी के बिना कुछ नहीँ हो सकता क्योँकि यह पूरे विश्व की भाषा है और सबसे समृद्ध है। आइये आपको अंग्रेजी की सच्चाई बताते हैँ-

1. भारत अकेला ऐँसा देश है जहाँ विदेशी भाषा अंग्रजी मेँ शिक्षा दी जाती है। बाकि सभी देश अपनी मातृ भाषा मेँ ही अपनी शिक्षा ग्रहण करते है।
2. पूरे विश्व मेँ सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा चीनी है फिर इसके बाद हिन्दी और तीसरे स्थान पर रुसी भाषा है। अंगेजी का बारहवाँ स्थान है। तो फिर अंग्रेजी पूरे विश्व की भाषा कहाँ से हो गयी?

3. हमारा देश ही एकमात्र अकेला ऐँसा देश है जहाँ विदेशी भाषा मेँ समाचार पत्र छपते हैँ। बाकि किसी भी दूसरे देश मेँ विदेशी भाषा मेँ अखबार नहीँ छपते हैँ। और अगर छपते भी हैँ तो बहुत कम मात्रा मेँ।

4. अंग्रजी भाषा की डिक्शनरी मेँ मात्र चार लाख शब्द हैँ और अंग्रेजी के मूल शब्द सिर्फ 65 हजार हैँ बाकि दूसरे भाषाओँ से चोरी किये हुये शब्द हैँ। इसके विपरीत हिन्दी मेँ 70 लाख तथा संस्कृत मेँ 100 अरब से भी अधिक शब्द हैँ और जिस भाषा का शब्दकोष जितना अधिक होता है वह भाषा उतनी ही अधिक समृद्ध होती है अर्थात अंग्रेजी का व्याकरण सबसे खराब है।

5. दुनिया का कोई भी धर्मशास्त्र और अन्य पुस्तकेँ कभी अंग्रेजी मेँ
नही लिखी गयी। इसके अलावा कोई भी दर्शनशास्त्री, धर्मशास्त्री आजतक
अंग्रेजी भाषा बोलने वाला नहीँ हुआ। रुसो, प्लूटो, अरस्तू इत्यादि इनका अंग्रेजी भाषा से कोई लेना-देना नहीँ था। यहाँ तक की ईसा मसीह की अपनी भाषा कभी भी अंग्रेजी नहीँ रही। ईसा मसीह ने जो उपदेश दिये थे
वो भी अंग्रेजी भाषा मेँ कभी नहीँ दिये। बल्कि ईसा मसीह ने अरमेक भाषा में अपने उपदेश दिए थे। और बाइबिल भी अंग्रेजी भाषा मेँ नहीँ लिखी गयी थी। बल्कि अरमेक भाषा में लिखी गयी थी। अरमेक भाषा की लिपि बिल्कुल बांग्ला भाषा की लिपि के तरह थी।

6. सयुक्त राष्ट्र महासंघ और नासा की रिपोर्ट के अनुसार संस्कृत भाषा कम्प्यूटर के लिये सबसे उत्तम् है क्योँकि इसका व्याकरण शत् प्रतिशत
शुद्ध है। इसके अलावा अंग्रेजों ने दुनिया में सबसे कम वैज्ञानिक शोध
कार्य किये। तो मित्रोँ ये कहानी है अंग्रजी भाषा की और हमारे देश मेँ
बच्चोँ के ऊपर जबरदस्ती अंग्रेजी थोप दी जाती है। तथा बच्चा बेचारा सारी उम्र अंग्रेजी का मारा फिरता रहता है। और उसके सिर्फ अंग्रेजी सीखने के चक्कर मेँ दूसरे महत्वपूर्ण विषय छूट जाते हैँ। इसके अलावा जब सेना के ऑफिसर की भर्ती होती है तो वहाँ भी अंग्रेजी आना जरुरी होता है।
अब अंग्रेजी का फौज से क्या लेना देना। विश्व के ताकतवर देश चीन जापान जर्मनी फ्राँस इत्यादि देश के सैनिक तो अंग्रेजी जानते भी नहीँ हैँ।
तो मित्रोँ हमको इस अंग्रेजियत की गुलामी से बाहर निकलना होगा। क्योँकि किसी भी राष्ट्र का सम्पूर्ण विकास सिर्फ उनकी मातृभाषा और
राष्ट्रभाषा मेँ हो सकता है।

वन्दे मातरम् ।।जय हिन्द । जय भारत।।जय
मातृभूमि

02/09/2015

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Sagar
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