Centre for Geographical Studies, Aryabhatta Knowledge University, Patna

  • Home
  • India
  • Mithapur
  • Centre for Geographical Studies, Aryabhatta Knowledge University, Patna

Centre for Geographical Studies, Aryabhatta Knowledge University, Patna Director: Prof. Poornima Shekhar Singh
Centre for Geographical Studies,
Aryabhatta Knowledge University, Mithapur, Patna-800001

भौगोलिक अध्ययन केन्द्र, आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय, पटना में दिनांक 12 जनवरी, 2023 को स्वामी विवेकानंद राष्ट्रीय युवा ...
13/01/2023

भौगोलिक अध्ययन केन्द्र, आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय, पटना में दिनांक 12 जनवरी, 2023 को स्वामी विवेकानंद राष्ट्रीय युवा दिवस (जन्म दिवस) के अवसर पर केन्द्र के सभी विद्यार्थियों द्वारा आशु भाषण (extempore speech) का आयोजन किया गया । सभी विद्यार्थियों द्वारा स्वामी विवेकानंद से संबंधित जीवनी के संदर्भ में विस्तारपूर्वक चर्चा की गई । शोधार्थी राहुल भूषण ने कहा कि भारत विश्व के सबसे युवा देशों मे से एक है और जनांकिकीय संक्रमण के दौर से गुजर रहा है। इस संदर्भ मे स्वामी विवेकानंद के आदर्शों एवं मूल्यों की महत्ता और बढ़ जाती है क्योंकि वे हमेशा से युवाओ के प्रेरणा स्त्रोत रहे है । केंद्र की निदेशक प्रो0 पूर्णिमा शेखर सिंह द्वारा स्वामी विवेकानंद का कथन “उठो जागो तब तक नहीं रुको जब तक लक्ष्य न मिल जाये” । यह कथन अपने आप मे युवायों के लिए बहुत बड़ा संदेश समाहित किए हुए हैं । युवा ऊर्जा के पुंज है किन्तु उन्हे इसका आभास नहीं हैं “ अपनी बिखरी ऊर्जाओं को ऊर्जा पुंज में बदलने के लिए सही मूल्यों का समावेश आवश्यक हैं“ । यह विचार स्वामी विवेकानंद का युवाओ के प्रति था एवं प्रो0 पूर्णिमा शेखर सिंह ने स्वामी विवेकानंद के विभिन्न रोचक तथ्यों से सभी विद्यार्थी को अवगत कराया I

व्याख्यान : "अध्यात्मिकता बनाम आधुनिकता" मुख्यवक्ता : माननीय एम. हनुमंतराव जी, उपाध्यक्ष, अखिल भारतीय विवेकानन्द केन्द्र...
09/12/2022

व्याख्यान : "अध्यात्मिकता बनाम आधुनिकता"
मुख्यवक्ता : माननीय एम. हनुमंतराव जी, उपाध्यक्ष, अखिल भारतीय विवेकानन्द केन्द्र, कन्याकुमारी

आध्यात्मिकता बनाम आधुनिकता
आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय, पटना के भौगोलिक अध्ययन केन्द्र में आध्यात्मिकता बनाम आधुनिकता पर शैक्षणिक एवं सूचनात्मक व्याख्यान का आयोजन किया गया ।जिसमें मुख्य वक्ता के रूप में माननीय एम. हनुमंतराव जी, उपाध्यक्ष, अखिल भारतीय विवेकानन्द केन्द्र, कन्याकुमारी उपस्थित थे। अपने व्याख्यान में उन्होने संगठन के महत्व को समझाते हुए बताया कि विभिन्न विचारधारा वाले लोगों के द्वारा संगठन मे आने पर इनकी ऊर्जा और चेतना का प्रवाह एक ही लक्ष्य को पाने के लिए बेहतरीन तरीके से अग्रसर होता हैं । विचारों की शक्ति पर बल देते हुए उन्होंने कहा- "यथा दृष्टि तथा सृष्टि" अर्थात हमारा विचार जिस प्रकार का होता है हमारा वातावरण हमें वैसा ही नजर आता है। उन्होने आध्यात्म की दिशा में अग्रसर होने के क्रम में व्यक्ति के अहंकार विहीन (निरहंकार), ममंकार रहित तथा मोहविहिन होने की आवश्यकता को जरूरी बताया। आध्यात्म के प्रकटीकरण के साधन के रूप में सेवा को महत्वपूर्ण बताया । उनके अनुसार आध्यात्म का उद्देश्य लोकहित या जनहित होना चाहिए। हमें इसकी अक्षुण्णता बनाए रखने के लिए शिक्षा के साथ मूल्यों के समावेशन पर बल देना होगा। शिक्षा, सत् चरित्र का समावेश आवशयक है अन्यथा शिक्षा विध्वंशकरी हो जाती है । आधुनिकीकरण वर्तमान विश्व की आवश्यकता है परंतु आज के समय में आध्यात्म में आधुनिकरण को नहीं बल्कि आधुनिकरण में आध्यात्म को लाना हैं ।
भौगोलिक अध्ययन केन्द्र की निदेशक प्रोo पूर्णिमा शेखर सिंह द्वारा भी अपना मत व्यक्त करते हुए बताया कि आध्यात्म समाज में जीने का तरीका बताता है।आध्यात्मिकता मनुष्य के जीवन के लिए अत्यंत आवश्यक हैं क्योंकि यह मनुष्य के आतंरिक दुनिया और बाह्य दुनिया, दोनों में एकात्मकता स्थापित करती है। इस तरह मनुष्य के जीवन और प्रकृति जिसमें मनुष्य रहता है; दोनों में सकारात्मक तारतम्य बना रहता है। आज का जो आधुनिक दौर है, इसमें हम केवल बाहर की ओर देखते है, अपने अन्तः मन में किसी को झाकने की फुरसत नहीं है और इसका नतीजा हमें कई दुष्परिणामों के रूप में देखने को मिलता हैं, जैसे: प्राकृतिक असंतुलन, ग्लोबल वार्मिंग, समाज में बढ़ती हुई हिंसा, बाढ़, सुखाड़, आदि। यदि हम अपने आंतरिक मन से जुड़े रहे तो हमारे जीवन में स्थिरता और संतुलन बना रहेगा और हमारी मानसिक शांति स्थापित होगी। सब चीजों को ज़्यादा बारीकी से और ज़्यादा स्पष्ट रूप से विश्लेषण कर मनुष्य आपने जीवन में संतुलित निर्णय लेने में सक्षम हो सकता हैं ।जिसका परिणाम मनुष्य और प्रकृति के लिए अवश्य ही अच्छा होगा। इनके आभाव में ही हमें कई तरह की विसंगति झेलनी पड़ रही है और मानवता अपने विनाश के कगार पर पहुंचा चुकी हैं।
आध्यात्मिकता बनाम आधुनिकता
आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय, पटना के भौगोलिक अध्ययन केन्द्र में आध्यात्मिकता बनाम आधुनिकता पर शैक्षणिक एवं सूचनात्मक व्याख्यान का आयोजन किया गया ।जिसमें मुख्य वक्ता के रूप में माननीय एम. हनुमंतराव जी, उपाध्यक्ष, अखिल भारतीय विवेकानन्द केन्द्र, कन्याकुमारी उपस्थित थे। अपने व्याख्यान में उन्होने संगठन के महत्व को समझाते हुए बताया कि विभिन्न विचारधारा वाले लोगों के द्वारा संगठन मे आने पर इनकी ऊर्जा और चेतना का प्रवाह एक ही लक्ष्य को पाने के लिए बेहतरीन तरीके से अग्रसर होता हैं । विचारों की शक्ति पर बल देते हुए उन्होंने कहा- "यथा दृष्टि तथा सृष्टि" अर्थात हमारा विचार जिस प्रकार का होता है हमारा वातावरण हमें वैसा ही नजर आता है। उन्होने आध्यात्म की दिशा में अग्रसर होने के क्रम में व्यक्ति के अहंकार विहीन (निरहंकार), ममंकार रहित तथा मोहविहिन होने की आवश्यकता को जरूरी बताया। आध्यात्म के प्रकटीकरण के साधन के रूप में सेवा को महत्वपूर्ण बताया । उनके अनुसार आध्यात्म का उद्देश्य लोकहित या जनहित होना चाहिए। हमें इसकी अक्षुण्णता बनाए रखने के लिए शिक्षा के साथ मूल्यों के समावेशन पर बल देना होगा। शिक्षा, सत् चरित्र का समावेश आवशयक है अन्यथा शिक्षा विध्वंशकरी हो जाती है । आधुनिकीकरण वर्तमान विश्व की आवश्यकता है परंतु आज के समय में आध्यात्म में आधुनिकरण को नहीं बल्कि आधुनिकरण में आध्यात्म को लाना हैं ।

भौगोलिक अध्ययन केन्द्र की निदेशक प्रोo पूर्णिमा शेखर सिंह द्वारा भी अपना मत व्यक्त करते हुए बताया कि आध्यात्म समाज में जीने का तरीका बताता है।आध्यात्मिकता मनुष्य के जीवन के लिए अत्यंत आवश्यक हैं क्योंकि यह मनुष्य के आतंरिक दुनिया और बाह्य दुनिया, दोनों में एकात्मकता स्थापित करती है। इस तरह मनुष्य के जीवन और प्रकृति जिसमें मनुष्य रहता है; दोनों में सकारात्मक तारतम्य बना रहता है। आज का जो आधुनिक दौर है, इसमें हम केवल बाहर की ओर देखते है, अपने अन्तः मन में किसी को झाकने की फुरसत नहीं है और इसका नतीजा हमें कई दुष्परिणामों के रूप में देखने को मिलता हैं, जैसे: प्राकृतिक असंतुलन, ग्लोबल वार्मिंग, समाज में बढ़ती हुई हिंसा, बाढ़, सुखाड़, आदि। यदि हम अपने आंतरिक मन से जुड़े रहे तो हमारे जीवन में स्थिरता और संतुलन बना रहेगा और हमारी मानसिक शांति स्थापित होगी। सब चीजों को ज़्यादा बारीकी से और ज़्यादा स्पष्ट रूप से विश्लेषण कर मनुष्य आपने जीवन में संतुलित निर्णय लेने में सक्षम हो सकता हैं ।जिसका परिणाम मनुष्य और प्रकृति के लिए अवश्य ही अच्छा होगा। इनके आभाव में ही हमें कई तरह की विसंगति झेलनी पड़ रही है और मानवता अपने विनाश के कगार पर पहुंचा चुकी हैं।

A condolence meet was held in Centre for Geographical Studies, Aryabhatta Knowledge University, Patna on 02.09.2022 in t...
02/09/2022

A condolence meet was held in Centre for Geographical Studies, Aryabhatta Knowledge University, Patna on 02.09.2022 in the commemorate of Prof. Abha Lakshmi Singh.

Centre has organized one day Seminar cm Special lecture on 23.08.2022 (Tuesday). The theme was "Only One Earth". Janard...
25/08/2022

Centre has organized one day Seminar cm Special lecture on 23.08.2022 (Tuesday). The theme was "Only One Earth". Janardan Jee, President , SAVE International , Patna was the key speaker. 10 neem trees were planted on this day

Centre has organized a poster exhibition on 13.08.2022(Saturday). The focal theme was "Distress Migration During Partiti...
25/08/2022

Centre has organized a poster exhibition on 13.08.2022(Saturday). The focal theme was "Distress Migration During Partition of India in 1947.

World Autism Awareness Day was organized by Centre for Geographical Studies, Aryabhatta Knowledge University, Patna on 2...
29/07/2022

World Autism Awareness Day was organized by Centre for Geographical Studies, Aryabhatta Knowledge University, Patna on 2nd April, 2022 at 10:30 a.m. in collaboration with Utkarsh Seva Sansthan.

Centre for Geographical Studies, Aryabhatta Knowledge University, Patna was the host institution for 5-days capacity bui...
29/07/2022

Centre for Geographical Studies, Aryabhatta Knowledge University, Patna was the host institution for 5-days capacity building workshop on “Geospatial Analytics and Post-COVID-19 Urban development for early career researchers under Urban Studies Foundation (USF) Seminar Series Awards on “Recasting the City, Lives and Livelihood and Inequalities in the Post COVId-19 World (ReCLIC) in collaboration with University of Wolverhampton, United Kingdom. The program was planned for 17th May 2022 to 21st May 2022. In this workshop cm 5-days training program, resource persons and participants were from different states of India as well as United Kingdom.

Admission process of M.A./M.Sc. in Geography has been started in the Centre for Geographical Studies, Aryabhatta Knowled...
29/07/2022

Admission process of M.A./M.Sc. in Geography has been started in the Centre for Geographical Studies, Aryabhatta Knowledge University, Patna. Kindly visit our website www.cgspatna.ac.in for more details.

Director, Centre for Geographical Studies, Patna has organized an extramural lecture delivered by Akhouri Bishwapriya, D...
07/05/2022

Director, Centre for Geographical Studies, Patna has organized an extramural lecture delivered by Akhouri Bishwapriya, Director, Geological Survey of India, Patna on 07.05.2022 in the Centre. Topic of the extramural lecture is "Groundwater Scenario of Patna district, Bihar: with special reference to Aquifer Conditions and Water Quality".

A mural lecture of Prof. Pradhan Parth Sarthi was organized by Centre for Geographical Studies, Aryabhatta Knowledge Uni...
27/04/2022

A mural lecture of Prof. Pradhan Parth Sarthi was organized by Centre for Geographical Studies, Aryabhatta Knowledge University, Patna on 27.04.2022 at 12 p.m. on the topic "Climate Change over the Eastern Gangetic Plain of India".

Address

Aryabhatta Knowledge University Campus
Mithapur
800001

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Centre for Geographical Studies, Aryabhatta Knowledge University, Patna posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The School

Send a message to Centre for Geographical Studies, Aryabhatta Knowledge University, Patna:

Shortcuts

Share