16/09/2026
UPI पेमेंट पर चार्ज बहुत ही वाहियात फैसला है। सरकार लाख कहे कि ये चार्ज 2000 रुपये से ऊपर के पेमेंट पर है। ये दुकानदारों से लिया जाएगा, ग्राहकों से नहीं। मगर इन बातों का कोई मतलब नहीं। फीस लगने की शुरुआत नहीं होनी थी, वो तो हो गई है। अब कल को एक नोटिफिकेशन से 2000 रुपये से कम के पेमेंट पर भी चार्ज लग सकता है।
आज भी गांव में कई दुकानदार UPI से पेमेंट नहीं लेते। कुछ को टेक्नोलॉजी की समझ में दिक्कत हो सकती है। मगर एक अविश्वास ये भी है कि उनके सारी कमाई सरकार की नजर में आ जाएगी। कभी कभार सब्जी बेचने वाले को करोड़ों का टैक्स नोटिस आने की खबरें भी आती हैं। अब UPI को लेकर गलतफहमी और भी ज्यादा बढ़ेगी।
और मुझे तो नहीं लगता कि अब ज्यादातर दुकानदार 3, 5 या फिर 10 हजार का पेमेंट UPI से लेने वाले हैं। इसी में उनके 12 रुपये से लेकर 40 रुपये चले जाएंगे। ऐसे में दो बातें होंगी। पहली तो वो साफ कहेगा कि भैया कैश ही दीजिए। अगर आपने दबाव डाला या मजबूरी गाई कि कैश नहीं है, तो आपसे कहेगा कि आप एक्स्ट्रा पेमेंट कर दीजिए।
UPI पर जो जनता का भरोसा धीरे-धीरे बढ़ रहा है। लोगों के लेनदेन का पता चल रहा था, वो भी अंधेरे में चला जाएगा। UPI के बावजूद कैश सर्कुलेशन 10-12% सालाना बढ़ा है। अब ये और भी ज्यादा होने वाला है। जबकि ब्राजील भी भारत जैसा ही देश है। भ्रष्ट और बड़ी आबादी वाला। मगर वो पिक्स पेमेंट सिस्टम लाया। वहां कैश का चलन काफी घटा है।
और हां अब ये दुहाई मत दीजिएगा कि डिजिटल पेमेंट को चलाने की लागत होती है। किसी को बोझ तो उठाना पड़ेगा। अगर किसी को बोझ उठाना ही है, तो वो सरकार उठाए। लाड़ली बहना और लोलू भैया जैसी स्कीमों में टैक्सपेयर्स का पैसा उड़ाते वक्त तो उसे बोझ की चिंता नहीं रहती है। फिर UPI से कितना उसका खजाना घट जा रहा है।
अगर सरकार से UPI का बोझ भी नहीं उठ रहा है, तो डींगे हांकना बंद कीजिए कि हम डिजिटल पेमेंट में वर्ल्ड लीडर बन रहे हैं। और समझ जाइए कि सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि पेट्रोल में गन्ने का जूस मिलाना है। और कुछ नहीं।