18/02/2024
मध्यस्थता केंद्र, प्रयागराज के उद्घाटन और "उत्तर प्रदेश के न्यायालय" पुस्तक के विमोचन के अवसर पर बोलते हुए चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) डीवाई चंद्रचूड़ ने जिला न्यायपालिका और हाईकोर्ट के बीच अधीनता की संस्कृति की समस्या पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि कैसे यह वादकारियों विशेष रूप से जमानत चाहने वालों को प्रभावी न्याय प्रदान करने को प्रभावित करता है। उन्होंने कहा, “हमारी जिला न्यायपालिका में भय का माहौल है। जज और बार के सदस्य दोनों मुझसे सहमत होंगे। मैं आलोचनात्मक नहीं हो रहा हूं, लेकिन हमें आत्मनिरीक्षण करना होगा। जिला न्यायपालिका जमानत देने से डरती है, क्योंकि समय के साथ हमारे पास हाईकोर्ट और जिला न्यायपालिका के बीच अधीनता की संस्कृति पनपी है। हमने जिला जजों और हाईकोर्ट के बीच समानता का आधार नहीं बनाया।''
न्याय वितरण तंत्र में जिला न्यायपालिका के महत्व पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि जिला न्यायपालिका देश के प्रत्येक राज्य के लिए न्याय प्रशासन की आधारशिला है। उन्होंने इस संबंध में कहा, "जिला न्यायपालिका संपर्क का पहला बिंदु है, जब किसी नागरिक को कोई समस्या होती है, चाहे वह भरण-पोषण की हो, चाहे उसे ससुराल वालों ने घर से बाहर निकाल दिया हो और घरेलू हिंसा निवारण अधिनियम के तहत उपाय तलाशना हो, या जब सीनियर सिटीजन हों, परिवार के सामने अपने अधिकारों को सुरक्षित करने के लिए आगे बढ़ना होगा। प्रशासनिक न्यायाधीशों द्वारा निरीक्षण की पूरी प्रक्रिया से जिला जजों के मन में डर पैदा होता है, अधीनता की इस संस्कृति को बदलना होगा।''
सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ ने आपराधिक अपीलों पर बहस करने में बार सदस्यों की झिझक पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “बार जमानत पर फैसला करने के लिए इतना उत्सुक क्यों है, लेकिन आपराधिक अपील पर बहस करने को तैयार नहीं है? मुझे लगता है कि इस मुद्दे को सुलझाने के लिए हम सभी को साथ बैठने की जरूरत है। क्योंकि यह हमारे राज्य का अहित कर रहा है। बड़ी संख्या में आपराधिक अपीलें लंबित हैं। यह पूर्ववत नहीं किया जा सकता। यह ऐसी स्थिति नहीं है, जो नियंत्रण से बाहर हो गई हो।”