B.Ed.Education

B.Ed.Education this page is for education and B.Ed. students

12/02/2026

 #विश्वहिंदीदिवस
10/01/2026

#विश्वहिंदीदिवस

07/01/2026

राजर्षि टण्डन मुक्त विश्वविद्यालय में जनवरी 2026 सत्र के प्रवेश शुरु
उत्तर प्रदेश राजर्षि टण्डन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज ने सत्र जनवरी 2026 की प्रवेश प्रक्रिया बुधवार को प्रारम्भ कर दिया।विश्वविद्यालय की सत्र जनवरी 2026 की प्रवेश प्रक्रिया का शुभारम्भ करते हुए कुलपति प्रो.सत्यकाम ने कहा कि विश्वविद्यालय ने इस बार प्रवेश प्रक्रिया को बहुत सरल एवं सुलभ बनाया है। छात्रों को आवेदन करने में किसी भी प्रकार की कठिनाई का सामना नही करना पड़ेगा। यूजीसी की गाइडलाइन के अनुसार छात्रो को अपनी अपार आईडी एबीसी आईडी एवं यूजीसी डेब आईडी बनाने के पश्चात ही प्रवेश प्रक्रिया सम्पादित की जाएगी।विश्वविद्यालय के दक्ष तकनीकी विशेषज्ञो ने इस प्रक्रिया को अत्यन्त सरलीकृत कर दिया है जिससे छात्रों को फॉर्म भरने में किसी भी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।प्रो. सत्यकाम ने कहा कि विश्वविद्यालय जनवरी 2026 सत्र में सभी प्रवेश राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप करने को कृत संकल्पित है।डिजिटल क्रांति के इस कालखण्ड में मुक्त विश्वविद्यालय ने शिक्षार्थियो के सुविधा को ध्यान में रखकर प्रवेश की ऑनलाइन व्यवस्था सुनिश्चित की है।मुक्त विश्वविद्यालय गुणात्मक शिक्षा की आकांक्षा रखने वाले हर व्यक्ति तक उच्च शिक्षा को सुलभ बनाने के लिए अग्रसर है।विश्वविद्यालय ने जनवरी 2026 सत्र में 24 परास्नातक कार्यक्रमो 06 स्नातक कार्यक्रमो 04 जागरूकता कार्यक्रमो 07 डिप्लोमा कार्यक्रमो तथा 23 प्रमाण-पत्र कार्यक्रमो सहित कुल 64 कार्यक्रमो में प्रवेश प्रारम्भ किया है।सभी स्नातक प्रोग्राम में कृत्रिम बुद्धिमत्ता एआई आधारित स्किल कोर्स द्वितीय वर्ष में शुरू किया जा रहा है। जनवरी 2026 सत्र के प्रथम वर्ष में संग्रहालय विज्ञान में डिप्लोमा एम ए गृह विज्ञान तथा बी सी ए कार्यक्रम भी शुरू किया जा रहा है।कुलपति प्रो.सत्यकाम ने प्रवेश के उद्घाटन सत्र में ऑनलाइन जुड़े हुए सभी 12 क्षेत्रीय केन्द्रो क्रमशःप्रयागराज लखनऊ बरेली आगरा बलिया अयोध्या झाँसी मेरठ गाजियाबाद कानपुर वाराणसी तथा गोरखपुर क्षेत्रीय केन्द्र के समन्वयको को निर्देशित किया कि वह केन्द्र पर आने वाले छात्रों की हर सम्भव सहायता करें, जिससे उन्हे प्रवेश लेते समय किसी भी तरह की परेशानियों का सामना न करना पड़े। इसके साथ ही उन्होंने समन्वयको से अधिकाधित लोगो तक प्रवेश की जानकारी पहुँचाने के लिए विभिन्न सोशल मीडिया माध्यमों का उपयोग करने की सलाह दी।प्रो. सत्यकाम ने आशा व्यक्त की है कि सभी क्षेत्रीय केन्द्र समन्वयको के सहयोग से इस बार हम एक लाख की छात्र संख्या का लक्ष्य अवश्य पूरा कर लेंगे एवं इस बार किसी भी छात्र को प्रवेश से वंचित नहीं रहने दिया जाएगा।प्रारम्भ में प्रवेश प्रभारी प्रो.जय प्रकाश यादव ने ऑनलाइन प्रवेश प्रक्रिया की विस्तार से जानकारी दी।आंतरिक गुणवत्ता सुनिश्चयन प्रकोष्ठ के निदेशक प्रो.आशुतोष गुप्ता ने कुलपति प्रो.सत्यकाम का स्वागत तथा कुलसचिव कर्नल विनय कुमार ने धन्यवाद ज्ञापित किया।इस अवसर पर विभिन्न विद्या शाखाओं के निदेशक एवं प्रभारीगण उपस्थित रहे।

03/01/2026

जयंती विशेष
Savitribai Phule : नारी चेतना, शिक्षा और सामाजिक न्याय की अमर ज्योति

भारतीय समाज में स्त्री शिक्षा और सामाजिक समानता की नींव रखने वाली महान समाज-सुधारक सावित्रीबाई फुले का नाम स्वर्णाक्षरों में अंकित है। उनका जन्म 3 जनवरी 1831 को महाराष्ट्र में हुआ। ऐसे समय में, जब स्त्रियों को शिक्षा से वंचित रखा जाता था और सामाजिक रूढ़ियाँ अत्यंत कठोर थीं, सावित्रीबाई फुले ने शिक्षा को सामाजिक मुक्ति का सबसे सशक्त माध्यम माना।

उन्होंने 1848 में पुणे में बालिकाओं के लिए पहला विद्यालय स्थापित कर न केवल स्त्री शिक्षा का मार्ग प्रशस्त किया, बल्कि सामाजिक क्रांति की शुरुआत भी की। समाज के विरोध, अपमान और कठिनाइयों के बावजूद वे अपने संकल्प से कभी विचलित नहीं हुईं। उनका स्पष्ट विश्वास था कि शिक्षा ही अज्ञान, अन्याय और असमानता के अंधकार को दूर कर सकती है।

सावित्रीबाई फुले का कृतित्व केवल शिक्षा तक सीमित नहीं था। उन्होंने साहित्य के माध्यम से भी समाज को जाग्रत किया। उनकी प्रमुख रचनाएँ काव्यफुले और बावनकशी सुबोध रत्नाकर स्त्री चेतना, सामाजिक न्याय और नैतिक मूल्यों की सशक्त अभिव्यक्ति हैं। उनका साहित्य शोषित, वंचित और स्त्रियों को आत्मसम्मान और आत्मविश्वास प्रदान करता है।

उनका व्यक्तित्व असाधारण था—साहस, करुणा, दृढ़ता और सामाजिक प्रतिबद्धता का अद्भुत संगम। वे नारी सशक्तीकरण की केवल समर्थक नहीं, बल्कि उसकी जीवंत मिसाल थीं। विधवा-कल्याण, पुनर्विवाह और पितृसत्तात्मक सोच के विरोध में उनका संघर्ष उन्हें अपने समय से बहुत आगे का चिंतक सिद्ध करता है।

आज जब हम स्त्री शिक्षा, समानता और सामाजिक न्याय की बात करते हैं, तब सावित्रीबाई फुले के विचार और कार्य पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक प्रतीत होते हैं। वे केवल इतिहास की एक महान विभूति नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य के लिए प्रेरणा का शाश्वत स्रोत हैं।

नमन है उस महान शिक्षिका को, जिन्होंने ज्ञान को संघर्ष बनाया और संघर्ष को समाज-परिवर्तन की शक्ति।





 #श्रीअरविंद
06/12/2025

#श्रीअरविंद

06/11/2025

राय की राय
09/09/2025

राय की राय

All suggestions of book
01/09/2025

All suggestions of book

Address

Mau Aima

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when B.Ed.Education posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Shortcuts

Share

Category