11/09/2026
विनोद कुमार कोयला वाले सरस्वती विद्या मंदिर में दो दिवसीय अध्यापक विकास कार्यक्रम एवं निरीक्षण का सफल आयोजन
भारतीय ज्ञान परंपरा, मूल्यपरक शिक्षा एवं समग्र विकास की दिशा में विद्यालय की शैक्षिक गतिविधियों का किया गया व्यापक अवलोकन
मथुरा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 की भावना के अनुरूप भारतीय शिक्षा दर्शन एवं भारतीय ज्ञान परंपरा को शिक्षक शिक्षा से जोड़ने तथा शिक्षकों के व्यावसायिक विकास को नई दिशा प्रदान करने के उद्देश्य से विद्याभारती उच्च शिक्षा संस्थान, राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) तथा इंटर यूनिवर्सिटी सेंटर ऑफ टीचर एजुकेशन (IUC-TE), काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU), वाराणसी के संयुक्त सहयोग से आयोजित अभिनव अध्यापक विकास कार्यक्रम के अंतर्गत विनोद कुमार कोयला वाले सरस्वती विद्या मंदिर, मथुरा में दो दिवसीय अध्यापक विकास कार्यक्रम एवं विद्यालय निरीक्षण का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया।
दो दिवसीय कार्यक्रम के दौरान विद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था, शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया, सह-शैक्षणिक गतिविधियों, विद्यार्थियों की सहभागिता तथा विद्यालय के समग्र वातावरण का निकटता से अवलोकन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य केवल विद्यालय की गतिविधियों का निरीक्षण करना ही नहीं, बल्कि भारतीय दृष्टि से शिक्षा के विविध आयामों को समझना, शिक्षकों के अनुभवों का आदान-प्रदान करना तथा विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए प्रभावी शैक्षिक प्रयासों को प्रोत्साहित करना भी रहा।
निरीक्षण दल की गरिमामयी उपस्थिति
इस अवसर पर काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU), वाराणसी के इंटर यूनिवर्सिटी सेंटर ऑफ टीचर एजुकेशन (IUC-TE) द्वारा नियुक्त निरीक्षण दल के सदस्य उपस्थित रहे—
*डॉ. अजय सिंह वर्मा*— केंद्र समन्वयक एवं प्रोफेसर-शोध, ग्राफिक एरा डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी, देहरादून
*डॉ. शैलेन्द्र कुमार सिंह* — विभागाध्यक्ष एवं असिस्टेंट प्रोफेसर, डीपीबीएस कॉलेज, अनूपशहर
*डॉ. देव स्वरूप गौतम* — असिस्टेंट प्रोफेसर, डीपीबीएस कॉलेज, अनूपशहर
*डॉ. विजय कुमार* — एसोसिएट प्रोफेसर, एपीजे सत्य यूनिवर्सिटी, दिल्ली
*डॉ. विजय यादव* — असिस्टेंट प्रोफेसर, केंद्रीय विश्वविद्यालय झारखंड, रांची
विद्यालय परिवार की ओर से *प्रबंधिका श्रीमती मीरा अग्रवाल जी* एवं *प्रधानाचार्या श्रीमती संगीता चौहान जी* के कुशल नेतृत्व में निरीक्षण दल एवं सभी सम्माननीय अतिथियों का भारतीय परंपरा के अनुरूप आत्मीय एवं भव्य स्वागत किया गया। छात्र-छात्राओं द्वारा अतिथियों का स्वागत करते हुए उनकी कलाई पर पवित्र कलावा (मौली) बांधा गया। स्वागत की इस भारतीय परंपरा ने पूरे कार्यक्रम को आत्मीयता, सम्मान और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ दिया।
शैक्षणिक एवं सह-शैक्षणिक गतिविधियों का व्यापक अवलोकन
निरीक्षण दल द्वारा विद्यालय की विभिन्न गतिविधियों का विस्तृत एवं गहन अवलोकन किया गया। इस दौरान विज्ञान प्रयोगशाला, गणित, हिंदी, अंग्रेजी एवं विज्ञान विषयों से संबंधित गतिविधियों एवं प्रयोगों, विद्यार्थियों द्वारा तैयार की गई विज्ञान प्रदर्शनी, शिशु वाटिका के 12 आयामों, कार्यशाला एवं कलाशाला की गतिविधियों सहित विभिन्न शैक्षणिक, सांस्कृतिक एवं सह-शैक्षणिक कार्यक्रमों को देखा गया।
कक्षा-कक्षों में संचालित शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया, शिक्षक-विद्यार्थी संवाद, विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता, अनुशासन, स्वच्छता तथा विद्यालय के समग्र शैक्षणिक वातावरण का भी निरीक्षण किया गया। विद्यार्थियों में विषयगत समझ के साथ-साथ रचनात्मकता, प्रयोगशीलता, वैज्ञानिक दृष्टिकोण एवं आत्मविश्वास विकसित करने के लिए किए जा रहे प्रयास विशेष रूप से उल्लेखनीय रहे।
विद्यालय की गतिविधियों में शिक्षा को केवल पाठ्यक्रम एवं परीक्षा तक सीमित न रखकर विद्यार्थियों के बौद्धिक, शारीरिक, सामाजिक, सांस्कृतिक एवं नैतिक विकास से जोड़ने का प्रयास स्पष्ट रूप से दिखाई दिया।
संवाद एवं विचार-विमर्श सत्र रहे कार्यक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा
दो दिवसीय कार्यक्रम के दौरान विभिन्न स्तरों पर संवाद एवं विचार-विमर्श सत्र भी आयोजित किए गए। इनमें शिक्षकों एवं विशेष अतिथियों के साथ बैठक, पूर्व छात्रों एवं गणमान्य अतिथियों के साथ संवाद, विद्यार्थियों के अभिभावकों के साथ बैठक तथा अध्यापिका बहनों के साथ विचार-विमर्श प्रमुख रहे।
इन बैठकों में शिक्षा की गुणवत्ता, भारतीय ज्ञान परंपरा, मूल्यपरक शिक्षा, विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास, शिक्षक की भूमिका तथा विद्यालय की निरंतर प्रगति से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर सार्थक चर्चा की गई। संवाद के माध्यम से विद्यालय की उपलब्धियों, चुनौतियों एवं भविष्य की संभावनाओं को समझने का भी प्रयास किया गया।
निरीक्षण दल ने की विद्यालय की कार्यसंस्कृति की सराहना
निरीक्षण दल ने विद्यालय में अपनाई जा रही नवाचारपूर्ण शिक्षण पद्धतियों, शिक्षकों की समर्पण भावना, विद्यार्थियों की प्रतिभा, अनुशासन, सक्रिय सहभागिता तथा वैज्ञानिक दृष्टिकोण की सराहना की। दल के सदस्यों ने विद्यालय की कार्यसंस्कृति एवं विभिन्न गतिविधियों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 तथा NCF 2023 की भावना के अनुरूप प्रेरणादायी एवं अनुकरणीय बताया।
निरीक्षण के दौरान यह अनुभव सामने आया कि विद्यालय में शिक्षा को ज्ञानार्जन के साथ-साथ संस्कार, अनुशासन, आत्मविश्वास, चरित्र निर्माण, रचनात्मकता और सामाजिक उत्तरदायित्व से जोड़ने का सार्थक प्रयास किया जा रहा है।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में प्रबंधन का विशेष मार्गदर्शन
कार्यक्रम के सफल एवं सुव्यवस्थित आयोजन में विद्यालय प्रबंध समिति के अध्यक्ष श्री रमाकांत शर्मा जी, प्रबंधिका श्रीमती मीरा अग्रवाल जी, निर्देशिका श्रीमती दीपा अग्रवाल जी, पूर्व प्रबंधक श्री सोनल अग्रवाल जी एवं कोषाध्यक्ष श्री प्रेम जी सर्राफ जी का विशेष मार्गदर्शन एवं सहयोग प्राप्त हुआ।
इस अवसर पर विद्यालय की प्रधानाचार्या श्रीमती संगीता चौहान जी, विद्यालय प्रबंध समिति के पदाधिकारीगण, समस्त आचार्यवृंद एवं शिक्षकगण, पूर्व छात्र, अभिभावक तथा क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों की गरिमामयी उपस्थिति रही।
*समग्र रूप से यह दो दिवसीय अध्यापक विकास कार्यक्रम एवं विद्यालय निरीक्षण अनुभवों के आदान-प्रदान, शिक्षक के व्यावसायिक विकास, भारतीय ज्ञान परंपरा के शैक्षिक संदर्भों की समझ तथा शिक्षा की गुणवत्ता को और अधिक सुदृढ़ करने की दिशा में एक सार्थक एवं प्रेरणादायी पहल सिद्ध हुआ। कार्यक्रम ने विद्यालय परिवार को अपनी शैक्षिक उपलब्धियों के साथ-साथ भविष्य के लिए नए शैक्षिक प्रयोगों एवं नवाचारों की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा प्रदान की।*