Srila Bhakti Kinkar Damodar Goswami Maharaj

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01/04/2025

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Hare Krishna. Dandavat Pranam 🙏🏻

Save the dates for Sri Vraj Mandal Parikrama with our merciful monk, Srila Bhakti Kinkar Damodar Goswami Maharaj Ji.

📅 15 SEPTEMBER 2025
TO
📅 30 SEPTEMBER 2025

Important Points:
1. Devotees who wish to complete the full Parikrama must confirm their participation by 15 July 2025.
• Devotees should reach Govardhan on 14 September 2025 and book their return tickets for 01 October 2025.
• After 15 July 2025, those still wishing to join the Yatra must arrange their own travel and accommodation, as the Yatra management team will not be responsible for these facilities.
2. An advance payment of ₹5000 per person must be deposited into the account mentioned below or sent via GPay.
• For GPay, please send a WhatsApp message to the number below to receive the QR code.
3. Children below the age of five (5 years) can join the Yatra free of cost.
4. The estimated total cost of the Yatra is ₹15,000 per person.
• This excludes train tickets.
• If the actual expenses are lower, the excess amount will be refunded.
• If the expenses exceed the estimate, the additional amount will be collected from the yatris.
5. The total cost includes travel, accommodation, and two meals (lunch and dinner) per day.
• Devotees are requested to carry dry snacks for breakfast, which can be eaten during the journey in their respective cars.
6. Devotees should carry small currency notes for offering pranami in temples and for personal expenses.
7. Those who wear spectacles should carry an extra pair or take necessary precautions, especially in Vrindavan, for safety purposes.
8. Devotees traveling with small children or infants should carry essential snacks, milk powder, and extra clothes to ensure smooth time management during the Yatra.

Account Details:
Bank Name: State Bank of India, Govardhan Branch
Account Holder Name: Bhakti Kinkar Damodar
Account Number: 32130532531
IFSC Code: SBIN0010313
MICR Code: 281002015

For any queries or clarifications, please feel free to contact or WhatsApp us at the number below:

📞 Mobile Number: +91 9821970074

Jai Radhe Shyam!
Jai Giriraj!
Jai Gurudev!
___________________________

हरे कृष्ण। दंडवत प्रणाम 🙏🏻

श्रील भक्ति किंकर दामोदर गोस्वामी महाराज जी के आनुगत्य में श्री व्रज मंडल परिक्रमा के लिए अपनी तिथियाँ सुरक्षित करें।

📅 15 सितंबर 2025
से
📅 30 सितंबर 2025

महत्वपूर्ण जानकारी:
1. जो भक्त संपूर्ण परिक्रमा करना चाहते हैं, उन्हें 15 जुलाई 2025 तक अपनी भागीदारी की पुष्टि करनी होगी।
• भक्तों को 14 सितंबर 2025 को गोवर्धन पहुंचना होगा और अपनी वापसी की टिकट 01 अक्टूबर 2025 के लिए बुक करनी होगी।
• 15 जुलाई 2025 के बाद जो भक्त यात्रा में शामिल होना चाहेंगे, उन्हें अपनी यात्रा और आवास की व्यवस्था स्वयं करनी होगी, क्योंकि यात्रा प्रबंधन टीम इन सुविधाओं की ज़िम्मेदार नहीं होगी।
2. प्रत्येक व्यक्ति को ₹5000 की अग्रिम राशि जमा करनी होगी, जो नीचे दिए गए खाते में या GPay के माध्यम से भेजी जा सकती है।
• GPay के लिए, कृपया नीचे दिए गए नंबर पर व्हाट्सएप संदेश भेजकर QR कोड प्राप्त करें।
3. 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए यात्रा निःशुल्क रहेगी।
4. यात्रा की अनुमानित कुल लागत ₹15,000 प्रति व्यक्ति होगी।
• इसमें ट्रेन टिकट शामिल नहीं है।
• यदि वास्तविक खर्च कम हुआ, तो अतिरिक्त राशि वापस कर दी जाएगी।
• यदि खर्च अनुमान से अधिक हुआ, तो यात्रियों से अतिरिक्त राशि ली जाएगी।
5. कुल लागत में यात्रा, आवास और प्रतिदिन दो भोजन (दोपहर का भोजन एवं रात्रि भोजन) शामिल होंगे।
• भक्तों से अनुरोध है कि वे नाश्ते के लिए सूखे स्नैक्स साथ रखें, जिन्हें यात्रा के दौरान अपनी गाड़ियों में खाया जा सकता है।
6. भक्तगण छोटे मूल्य के करेंसी नोट साथ रखें, जो मंदिरों में प्रणामी अर्पण और व्यक्तिगत खर्चों के लिए उपयोगी होंगे।
7. जो भक्त चश्मा पहनते हैं, उन्हें एक अतिरिक्त जोड़ी साथ रखनी चाहिए या आवश्यक सावधानी बरतनी चाहिए, विशेष रूप से वृंदावन में, सुरक्षा कारणों से।
8. जो भक्त छोटे बच्चों या शिशुओं के साथ यात्रा कर रहे हैं, उन्हें आवश्यक स्नैक्स, दूध पाउडर और अतिरिक्त कपड़े साथ रखने चाहिए ताकि यात्रा के दौरान समय का उचित प्रबंधन हो सके।

खाता विवरण:
बैंक का नाम: स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, गोवर्धन शाखा
खाताधारक का नाम: भक्ति किंकर दामोदर
खाता संख्या: 32130532531
IFSC कोड: SBIN0010313
MICR कोड: 281002015

किसी भी प्रश्न या स्पष्टीकरण के लिए, कृपया नीचे दिए गए नंबर पर संपर्क करें या व्हाट्सएप करें:

📞 मोबाइल नंबर: +91 9821970074

जय राधे श्याम!
जय गिरिराज!
जय गुरुदेव!
___________________________

హరే కృష్ణ. దండవత్ ప్రణామం 🙏🏻

శ్రీ వ్రజ మండల పరిక్రమ కోసం తేదీలను గుర్తుంచుకోండి, మన కరుణామయ సన్యాసి శ్రీల భక్తి కింకర్ దామోదర్ గోస్వామి మహారాజ్ జీ తో కలిసి।

📅 15 సెప్టెంబర్ 2025
నుండి
📅 30 సెప్టెంబర్ 2025

ముఖ్యమైన విషయాలు:
1. పూర్తి పరిక్రమలో పాల్గొనదలచుకున్న భక్తులు 15 జూలై 2025 లోపు తమ అభిప్రాయాన్ని తెలియజేయగలరు.
• భక్తులు 14 సెప్టెంబర్ 2025న గోవర్ధన్కి చేరుకోవాలి మరియు తిరుగు ప్రయాణ టిక్కెట్లు 01 అక్టోబర్ 2025 కోసం బుక్ చేసుకోవాలి.
• 15 జూలై 2025 తరువాత, యాత్రలో చేరాలనుకునే వారు వారి స్వంతంగా ప్రయాణం, వసతి ఏర్పాట్లు చేసుకోవాలి, ఎందుకంటే యాత్ర నిర్వహణ బృందం వీటి బాధ్యత వహించదు.
2. ఒక్కొక్కరికి ₹5000 అడ్వాన్స్ చెల్లించాల్సి ఉంటుంది, క్రింద పేర్కొన్న ఖాతాలో డిపాజిట్ చేయాలి లేదా GPay ద్వారా పంపాలి.
• GPay కోసం, దయచేసి క్రింద ఉన్న నంబర్‌కు WhatsApp సందేశం పంపి QR కోడ్ పొందండి.
3. ఐదు (5) సంవత్సరాల లోపు పిల్లలకు యాత్ర ఉచితం.
4. యాత్ర అంచనా వ్యయం ₹15,000 ప్రతి వ్యక్తికి.
• ఇందులో రైలు టిక్కెట్లు చేర్చబడవు.
• నిజమైన ఖర్చు తక్కువగా ఉంటే, మిగిలిన మొత్తాన్ని తిరిగి చెల్లిస్తాము.
• ఖర్చు అంచనాను మించిపోయినట్లయితే, అదనపు మొత్తాన్ని యాత్రికుల నుంచి వసూలు చేస్తాము.
5. యాత్ర ఖర్చులో ప్రయాణం, వసతి, మరియు రోజుకు రెండు భోజనాలు (మధ్యాహ్న భోజనం మరియు రాత్రి భోజనం) ఉంటాయి.
• భక్తులు అల్పాహారం కోసం డ్రై స్నాక్స్ తీసుకురావాలని అభ్యర్థిస్స్తున్నాము, ఇవి ప్రయాణ సమయంలో వారి వాహనము లో తినవచ్చు.
6. భక్తులు చిల్లర మరియు చిన్న నోట్లను తీసుకురావాలి, ఇవి దేవాలయాలలో ప్రణామిగా సమర్పించేందుకు మరియు వ్యక్తిగత ఖర్చులకు ఉపయోగపడతాయి.
7. కళ్లజోడు ధరించే భక్తులు అదనపు జతను తెచ్చుకోవడం లేదా అవసరమైన జాగ్రత్తలు తీసుకోవడం మంచిది, ముఖ్యంగా వృందావనంలో, భద్రతా కారణాల రీత్యా.
8. చిన్న పిల్లలు లేదా శిశువులతో ప్రయాణించే భక్తులు, అవసరమైన స్నాక్స్, పాల పొడి మరియు అదనపు దుస్తులు తీసుకురావాలి తద్వారా యాత్ర సమయం సజావుగా కొనసాగుతుంది.

ఖాతా వివరాలు:
బ్యాంక్ పేరు: స్టేట్ బ్యాంక్ ఆఫ్ ఇండియా, గోవర్ధన్ బ్రాంచ్
ఖాతాదారుడు పేరు: భక్తి కింకర్ దామోదర్
ఖాతా సంఖ్య: 32130532531
IFSC కోడ్: SBIN0010313
MICR కోడ్: 281002015

ఏదైనా ప్రశ్నలు లేదా స్పష్టత కోసం, దయచేసి క్రింద ఉన్న నంబర్‌కు సంప్రదించండి లేదా WhatsApp చేయండి:

📞 మొబైల్ నంబర్: +91 9821970074

జై రాధే శ్యామ్!
జై గిరిరాజ్!
జై గురుదేవ్!

03/01/2025

*जय राधे श्याम*🙏🏻

🌺|| भजन ||🌺

*प्रभु हे सुनो मोर दुखेर कहानी (7)*

🌀 श्रील भक्ति विनोद ठाकुर जी महाराज कहते हैं *"नाभेल विवेक गवालिया"* अर्थात मैंने अपना विवेक (समझदारी) गंवा दी है। इन्हीं सब चीज़ो में फंसकर मैंने अपनी बुद्धि, अपने विचार गंवा दिए हैं।

🌀 यहीं सुबह जब हम कीर्तन के लिए निकलते है तो रास्ते में एक घर के बाहर एक कुत्ते का फोटो है और बगल में लिखा हुआ है "this house is under my protection " (यह घर कुत्ते के संरक्षण में है) हर जगह दिखता है -- "beware of dogs " ((कुत्तों से सावधान)।

🌀 लिखने वाले को लगता है कि भिन्न तरीके से लिखा हुआ है लेकिन उसकी मति ऐसी मारी गई है कि वो कुत्ते के संरक्षण में है। जिसके जीवन का रखवाला कुत्ता है भगवान नहीं, उसके जीवन का मंगल कहां से होगा। उस कुत्ते को कहां समझ है। लिखने वाले व्यक्ति की मानसिकता उस रूप से दिखती है। इसलिए यहां कहते हैं कि बुद्धि का हरण हो गया है, उस व्यक्ति की भी बुद्धि खराब हो गई है यही सब करते-करते।

🌀 श्रील भक्ति विनोद ठाकुर जी महाराज बताते हैं कि दिन-रात परिश्रम करते, पढ़ते पढ़ते बहुत ज्ञान प्राप्त किया। यदि पढ़ने के उद्देश्य से पढ़ता तो विनम्रता आती। जिसके अंदर विद्या होती है उसके पास विनम्रता भी होती है। लेकिन सिर्फ धन कमाने के उद्देश्य से जिसने भी विद्या का आश्रय लिया है उस व्यक्ति की बुद्धि भ्रष्ट रहती है, वह केवल संसार में डुबा रहता है। इस प्रकार संसार में डूबे हुए व्यक्ति की बुद्धि भ्रष्ट हो ही जाती है।

✍🏻 *श्रील भक्ति किंकर दामोदर गोस्वामी महाराज*

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28/12/2024

*जय राधे श्याम*🙏🏻

🌺|| भजन ||🌺

*प्रभु हे सुनो मोर दुखेर कहानी (6)*

❤️ महापुरुषों का ऐसा होता है कि समय बहुत कम है। भला ऐसा क्यों ? क्योंकि भगवान अनंत है, उन अनंत भगवान का नाम भी अनंत है। इसीलिए अनंत की सेवा में नियुक्त होने वाले प्रत्येक साधक, प्रत्येक जीव के पास समय नहीं होता है। जब समय ही नहीं होता है तो खेलेगा कब? खेलने का समय ही नहीं है क्योंकि वो सेवा में है।

❤️ अनंत देव स्वयं पृथ्वी को मस्तक पर धारण किये हुए बैठे हैं। वे पूछते हैं की मुझे कब तक इसे धारण करना होगा? तो कहते हैं कि जबतक तुम भगवान की महिमा का कीर्तन करते रहोगे तब तक धारण कर लेना और जब भगवान का कीर्तन समाप्त हो जायेगा तब उतार देना। अनंत देव सहस्त्र मुखों से (एक हजार मुखों से), अनंत काल से, उन भगवान की महिमा का कीर्तन करते जा रहे हैं, लेकिन अभी भी कीर्तन समाप्त नहीं हुआ। फिर समय कहां से हो।

❤️ इधर कहते है बाल्यकाल में खेल का आनंद लेता रहा और जब बालक से किशोर अवस्था में आया तो पढ़ाई का आनंद लेता रहा। आजकल तो कोई भी पढ़ाई का आनंद नहीं लेते है। प्रतियोगिता (competition) के डर से जो भी पढ़ना है उतना पढ़ लेते है। पहले समय में तो लोग पढ़ने का भी सुख लेते थे। फिर धीरे-धीरे ऐसा हुआ की पढ़ना जरूरी है इसीलिए पढ़ते थे।

❤️और अब समय ऐसा है कि प्रतियोगिता या अंकों (percentage) के डर से पढ़ते है। लेकिन पढ़ने के ही उद्देश्य से पढ़ने वालों की संख्या बहुत कम हो गई है। इसीलिए कहते हैं कि किशोर अवस्था में व्यक्ति अपने समय को पढ़ाई में लगाता है।

✍🏻 *श्रील भक्ति किंकर दामोदर गोस्वामी महाराज*

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20/12/2024

*जय राधे श्याम*🙏🏻

🌺|| भजन ||🌺

*प्रभु हे सुनो मोर दुखेर कहानी (5)*

💎 यहां कहते हैं कि बच्चों को खेलना बहुत अच्छा लगता है इसीलिए बाल्यकाल खेल में चला गया। श्रील भक्ति विनोद ठाकुर जी कहते हैं कि व्यक्ति को बालपन में माता पिता के स्नेह में डूबकर यह संसार अच्छा लगने लगता है।

💎 पहली बार यह संसार अच्छा लगने का कारण अपने माता पिता ही होते हैं। अपने बालक के प्रति उनकी ममता ही संसार से उसकी आसक्ति बढ़ाती है। फिर उनकी ममता में पलते हुए वह धीरे धीरे बाल्यकाल में बालकों के साथ खेलने में मस्त (मग्न) हो जाता है।

💎 ठाकुर जी महाराज कहते हैं मैंने भी वही किया। बचपन में खेलता रहा। जबकि प्रल्हाद महाराज कहते हैं कि यदि समझ (बुद्धि) है तो बाल्यकाल से ही भगवान की शरण में चले जाओ। और वे सोचते हैं कि मैंने क्या किया? बस खेलता रहा। अपना समय खेलने में गंवा दिया। महापुरुष कहते हैं कि समय ही नहीं है, और संसार के जीव के पास तो समय व्यतीत करने के लिए भी अनेक व्यवस्थाएं है।

💎 हमारे परम आराध्य श्रील गुरु महाराज जी कोलकात्ता मठ में थे, वहां एक व्यक्ति आकर गुरुजी को अलग-अलग चीज़ो को लेकर बहुत कुछ बताने लगा। सब सुनने के बाद गुरुजी उससे पूछते हैं कि आपके पास इतना समय कहां से आता है? हमारे पास तो समय ही नहीं है इन सब बातो को देखने का। वह व्यक्ति लज्जित होकर वहां से चला गया।

💎 कहने का तात्पर्य यह है कि जो व्यक्ति परमार्थ में नियुक्त (लगा हुआ) नहीं है, उसी के पास समय का अपव्यय करने के सारे साधन होते हैं। लेकिन परमार्थ में लगे हुए जीव के पास समय का हमेशा अभाव (कमी) रहता है।

✍🏻 *श्रील भक्ति किंकर दामोदर गोस्वामी महाराज*

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15/12/2024

*जय राधे श्याम*🙏🏻

🌺|| भजन ||🌺

*प्रभु हे सुनो मोर दुखेर कहानी*(4)

💚 इसीलिए श्रील भक्ति विनोद ठाकुरजी महाराज यहां कहते हैं कि भगवान के नाम में मग्न न होने के कारण मेरी ऐसी अवस्था हो गई है कि इस विषय रूपी भयंकर विष के अंदर मैं फंस गया। कहते हैं, *"विषय विषम विषय हालाहल"* यह विषय रूपी हालाहल सबसे भयंकर जहर है जिसे कोई भी नहीं पी सकता। केवल महादेव पी सकते हैं इसीलिए भगवान ने भी उस हलाहल को पीने के लिए महादेव को ही आमंत्रित किया था।

💚 यह विषय (शब्द, स्पर्श, रूप, रस, गंध) भी ठीक वैसा ही जहर है जिसे कोई भी नहीं पी सकता। जो अजितेंद्रीय (इन्द्रियों के अधीन) व्यक्ति है वो इन विषयों के पीछे जाएगा तो उसका जीवन समाप्त हो जायेगा। और जो जितेंद्रीय (इन्द्रियों को वश में करने वाला) व्यक्ति है उसे इन विषयों की कोई आवश्यकता ही नहीं होती है। लेकिन अगर भगवान की सेवा के लिए यदि आवश्यकता हो तो वो इसे भी ग्रहण करता है।

💚 वो कृष्ण सेवा के लिए उन्हें ग्रहण करता है इसीलिए वो विषय उसे कभी भी ताप नहीं देते हैं। जैसे महादेव जी ने भगवान की सेवा के लिए हलाहल को पिया था लेकिन उन्हें कुछ भी नहीं हुआ। कहते हैं *"विषय हलाहल सुधाभाने पीलू"* अर्थात विष को मैंने अमृत समझ कर पिया। यदि कोई व्यक्ति जहर को जहर समझ कर पीये तो उस से निकलने की कोशिश तो करता है। पर यहां तो जहर को तो अमृत समझ कर पी लिया है।

💚 इस प्रकार संसार का विषय रूपी जहर वो पीता रहा और अब परिणाम का समय आ गया है, अर्थात अब मृत्यु का समय आ पहुंचा है।

✍🏻 *श्रील भक्ति किंकर दामोदर गोस्वामी महाराज*

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06/12/2024

*जय राधे श्याम*🙏🏻

🌺|| भजन ||🌺

*प्रभु हे सुनो मोर दुखेर कहानी*(3)

🔮 हरिनाम होने से तुम्हें नाम करने का अधिकार प्राप्त हुआ है, पर अब नाम करना है, यह तुम्हारा अपना कार्य है। पहले तो हमारा यह अधिकार भी नहीं था कि हम नाम कर सकें, परन्तु गुरु कृपा से, साधु कृपा से नाम करने की योग्यता हमें प्राप्त हुई है। स्वयं ही नाम करके अब तुम्हें अपना उद्धार करना है।

🔮 अक्सर लोग सोचते हैं कि हमारा तो हरिनाम हो गया है गुरुजी की कृपा से तो हमारा मंगल हो जायेगा। लेकिन ऐसा होता नहीं है, गुरुजी की कृपा तुम्हें हरिनाम करने का अधिकार दे रही है। इसके पहले तो बद्ध जीव होने के कारण हरिनाम करने की योग्यता भी नहीं थी।

🔮 यहां कहते हैं कि हरिनाम का आश्रय ना लेकर, गुरुपादपद्म् का आश्रय ना लेकर इस संसार के विष को खाने वाले व्यक्ति बहुत हैं। और वो सभी दुखी हैं क्योंकि यह संसार उनको गधा (बोझ ढोने वाला) बनाकर छोड़ देता है।

🔮 वह लोग सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक और सोने के बाद स्वप्न में भी संसार का ही चिंतन करते रहते हैं। यह उनकी बड़ी दयनीय स्थिति है। संसार चिंतन उनके लिए विष है, चिंतन करते-करते चिंता में डुबकर वह व्यक्ति चिंतित अवस्था में अपने जीवन को समाप्त कर देता है। वह चिंता ही उसके लिए चिता बनकर उसके जीवन को जलाने लगती है।

✍🏻 *श्रील भक्ति किंकर दामोदर गोस्वामी महाराज*

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29/11/2024

*जय राधे श्याम*🙏🏻

🌺|| भजन ||🌺

*प्रभु हे सुनो मोर दुखेर कहानी*(2)

🪷 हमने पहले भी इस विषय की चर्चा की है कि प्रार्थना बहुत आवश्यक है। यदि प्रार्थना सही तरीके से नहीं की, तो परिणाम भी सुनिश्चित रूप से अनर्थदायी होता है। इसीलिए भगवान से प्रार्थना करनी चाहिए। क्या प्रार्थना करनी चाहिए ? हृदय की बातो को निकाल कर भगवान के समक्ष प्रार्थना में रख देना चाहिए, यही बात इस भजन में बता रहे हैं। *"सुनो मोर दुखेर कहानी"* हे प्रभु आप मेरे दुख की बात सुनिए।

🪷 ऐसा कौन सा दुख है ? श्रील भक्ति विनोद ठाकुर जी महाराज कहते हैं *"विषय हलाहल सुदाभाने पीलू"* विषय रूपी विष को मैंने अमृत समझ कर पीना शुरु कर दिया। विष क्या है? इस संसार के विषय (शब्द, स्पर्श, रूप, रस, गंध) ही विष हैं। और कह रहे हैं, *"गौरा प्रभु"* हे गौरांग महाप्रभु! हे चैतन्यदेव ! मैने आपके चरणों की कभी आराधना नहीं की है, आपके चरणों की सेवा भी नहीं की है।

🪷 *"विषम विषय रस विष सतत खाए"* विषों मे भयंकर विष, विषय है, और मैं उसे लगातार खाता रहा परन्तु अपने मन को भगवान के चरणों में नहीं लगाया। इस संसार के प्रत्येक व्यक्ति को यह बात समझनी चाहिए कि जब तक व्यक्ति भगवान के चरणों में समर्पित नहीं होगा, उनके चरणो का आश्रय नहीं लेगा तब तक उसके दुख की निवृत्ती (समाप्ति) नहीं हो सकती।

🪷 किसी-किसी के विचार में आता है कि 'मेरा तो हरिनाम हो गया तो अब दुख भी निवृत्त हो जाना चाहिए।' लेकिन हरिनाम हो जाने से दुख निवृत्ती नहीं होती है बल्कि हरिनाम करने से दुख निवृत्ती होती है।

✍🏻 *श्रील भक्ति किंकर दामोदर गोस्वामी महाराज*

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21/11/2024

*जय राधे श्याम*🙏🏻

🌺|| भजन ||🌺

*प्रभु हे सुनो मोर दुखेर कहानी*(1)

🔷 परम आराध्य श्रील गुरुपादपद्म की महती कृपा से यह संकीर्तन करने का सुअवसर हमें प्राप्त हो रहा है। उसी के अंतर्गत, श्रील भक्ति विनोद ठाकुरजी महाराज जी द्वारा विरचित इस ग्रंथ पर, हम सभी यहां विचार कर रहे हैं। इसमें एक साधक को सिद्धि के बारे में उपदेश किया जा रहा है। परन्तु किस अवस्था से? जिस भी अवस्था में वह है उसी अवस्था से उठाते हुए बताया जा रहा है।

🔷 जैसे हमने पूर्व अध्याय में श्रवण किया कि कृष्ण से विमुख होने के कारण जीव इस संसर में पतित होता रहता है। इस संसार के अंदर जो पतित जीव है, उसके अंदर दाम्भिकता, अधमता यह स्वाभाविक रूप से ही आ जाते हैं, इसके लिए उसे प्रयास भी नहीं करना पड़ता है। अपनी अधमता के कारण इस संसार में पतित हुए जीव को भगवान के पाद्पद्म की एकांतिक सेवा प्राप्त हो यही शिक्षा इन उपदेशों के माध्यम से श्रील भक्ति विनोद ठाकुरजी महाराज हमें दे रहे हैं।

🔷 यहां भगवान के चरणों में निवेदन करते हुए श्रील महाराज जी प्रार्थना करते हैं, *"प्रभु हे"* हे नाथ, वे बहुत ही कातर भाव से, विरह भाव से, अत्यंत व्याकुलता के साथ भगवान को सम्बोधन करते हुए कह रहे हैं "प्रभु हे"। जब हृदय व्याकुल हो उठता है तो वह रोने लगता है।

🔷 *"व्याकुल हृदय सदा करिया क्रन्दन"* जो व्याकुल हृदय है वह भगवान के चरणों में विलाप करने लगता है। इस तरह से वो भगवान के चरणों में निवेदन कर रहे हैं। आगे कहते हैं *"शुन मोर दुखेर कहानी"* आप कृपा कर मेरी दुख की कहानी को सुनिए, मेरे दुख की गाथा सुनिए। इस प्रकार से वो भगवान के सामने प्रार्थना कर रहे हैं।

✍🏻 *श्रील भक्ति किंकर दामोदर गोस्वामी महाराज*

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10/10/2024

*जय राधे श्याम*🙏🏻

🌺|| भजन ||🌺

*मानस देह गेहा*(15)

💜 *"भक्ति विनोद कहे शूनो कान, राधानाथ तुहु अमार परान"* हे कृष्ण आप मेरी प्रार्थना को सुन लीजिए । हे श्री राधाजी के प्रितम! हे कृष्ण! हे श्यामसुंदर! आप ही मेरे प्राण हैं। मेरा जीवन भी आप हैं, मेरे प्राण भी आप ही हैं। आपके अतिरिक्त मेरा अपना कुछ भी नहीं है।

💜 मेरी किसी भी वस्तू की कोई मांग नहीं है, अन्य कुछ भी मुझे नहीं चाहिए। यहां पर श्रील भक्ति विनोद ठाकुरजी यही बता रहे हैं कि आत्मसमर्पण ऐसा होना चाहिए। हम लोग मंदिर में जाते हैं अपने मन की बात भगवान को बताते हैं। वो भी कौनसी बात बताते हैं ? इस संसार की बातें, कि मेरी पत्नी ठीक हो, मेरा बच्चा ठीक हो। यह अच्छा हो, वो अच्छा हो।

💜 यहाँ पर तो भगवान के लिए कोई जगह ही नहीं है। अपने आप को पूरे संसार से अलग करके सिर्फ मैं और मेरे गोविंद के अतिरिक्त कुछ भी नही है, यह भावना होनी चाहिए। यदि पूछना है तो भगवान के लिए पूछना चाहिए कि आपकी सेवा मैं किस प्रकार से कर सकता हूँ। और यदि अपने लिए पूछना है तो यह पूछना चाहिए कि, प्रभु आपकी मैं किस प्रकार सेवा करके अपने जीवन को धन्य कर सकता हूँ।

💜 आपकी सेवा करके आपको कैसे संतुष्ट करना है, और आपकी सेवा करके अपने जीवन को कैसे सार्थक करना है। सिर्फ इन्हीं बातों का भगवान के समक्ष निवेदन करना चाहिए, तब जाकर जन्म सफल होता है। अन्यथा सफल होने की कोई संभावना नहीं है।

*वृंदावन बिहारी लाल की जय*

✍🏻 *श्रील भक्ति किंकर दामोदर गोस्वामी महाराज*

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25/09/2024

*जय राधे श्याम*🙏🏻

🌺|| भजन ||🌺

*मानस देह गेहा*(14)

🌀 भगवान स्वयं भागवत जी के अंदर उद्धव को बता रहे हैं *"नासावयेत माम् योगों"* यदि तुमने सारे साधनों का पालन कर भी लिया तब भी मुझे तुम प्राप्त नहीं कर सकते। तो आपको कैसे प्राप्त करें ? कहते हैं, *"यथा भक्ति ममोर्जित"* भक्ति के द्वारा मुझे आकर्षित किया जा सकता है।

🌀 इसलिए कहते हैं *"सवैपुंसा परोधर्मा यथा भक्तिर् अधोक्ष्ज"* सभी साधनों में सर्वश्रेष्ठ साधन है भगवान की भक्ति। और वो भी अहैतुकि, अप्रतिहता भक्ति। "अहेतुकी" का अर्थ है कृष्ण हेतू की, भगवान को ही केंद्र, उनको ही उद्देश्य बना कर की जाने वाली भक्ति जो की अप्रतिहता भक्ति है।

🌀 "अप्रतिहता" अर्थात ऐसी भक्ति जिसमें कहीं पर ठहराव (अवरोध) नहीं है। जब इच्छा हुई तब की जाये ऐसी नहीं होनी चाहिए। वह स्थायी होनी चाहिए, क्षणिक नहीं अपितु शाश्वत होनी चाहिए। ऐसी जो भक्ति है वही हमारा परम धर्म है। ऐसे जो भक्त होंगे, उनके ही संग की कामना मेरे हृदय में है। यही शरणागति की विशेषता है।

🌀 परन्तु ऐसा क्यों ? कहते है, *"जनक जननी दयित तनया तुहु: सर्वमय "* मेरी माँ, पिता, पुत्र, भाई, प्रभु, गुरू, पति सब कुछ, हे कृष्ण ! आप ही हैं। मेरा सर्वस्व हे कृष्ण,आप ही हैं। आपके अतिरिक्त मेरा और कोई नहीं है। "दयित" अर्थात जो परमप्रिय है वो आप ही हैं और कोई नहीं। इसलिए मैं किसी भी अवस्था में रहूं, केवल आपका होकर ही रहना चाहता हूं अन्य किसी और का नहीं होना चाहता हूँ।

✍🏻 *श्रील भक्ति किंकर दामोदर गोस्वामी महाराज*

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श्री तीर्थ आश्रम, श्री गिरिराज नगर कॉलोनी, जतीपुरा रोड, गोवर्धन
Mathura
281502