No TET Before RTE

No TET Before RTE “RTE Act से पूर्व नियुक्त शिक्षकों के न्याय और सम्मान के लिए—TET के विरुद्ध संघर्ष”

27/06/2026

केंद्र सरकार ने RTE Act के लागू होने के बाद NCTE के माध्यम से सेवारत शिक्षकों को आवश्यक योग्यता प्राप्त करने के लिए पहले 5 वर्ष और बाद में 4 वर्ष का अतिरिक्त समय दिया, अर्थात कुल 9 वर्ष का अवसर प्रदान किया। उस अवधि में अधिकांश शिक्षक अपेक्षाकृत कम आयु के थे, शारीरिक एवं मानसिक रूप से अधिक सक्षम थे और प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के लिए अनुकूल स्थिति में थे। इसके बावजूद NCTE द्वारा दी गई छूट के कारण राज्य सरकार ने TET आयोजित नहीं की अथवा शिक्षकों से TET उत्तीर्ण करने की अपेक्षा नहीं की।

अब, जब वही शिक्षक सेवा के अंतिम वर्षों में हैं, आयु अधिक हो चुकी है, पारिवारिक एवं सामाजिक दायित्व बढ़ चुके हैं और प्रतियोगी परीक्षा देना पहले की अपेक्षा अधिक कठिन हो गया है, तब उन्हें केवल 3 वर्ष का समय देकर TET अनिवार्य करना न्यायोचित नहीं है। यदि पूर्व में 9 वर्ष का अवसर व्यर्थ चला गया, जिसकी जिम्मेदारी शिक्षकों की नहीं थी, तो उसके प्रतिकूल परिणाम शिक्षकों पर नहीं डाले जा सकते। कम से कम उतना ही प्रभावी और पर्याप्त अवसर पुनः उपलब्ध कराया जाना चाहिए जितना समय शिक्षकों से छूट के कारण व्यावहारिक रूप से नष्ट हो गया।
Dk Singore twta

07/06/2026
07/06/2026

शिक्षा में “क्वालिटी” के नाम पर हो रहे निर्णयों को समझना जरूरी है।

विधायिका ने जब Right to Education Act (RTE) बनाया, तब उसने शिक्षक प्रशिक्षण (Teacher Training) को अनिवार्य माना—
और पहले से कार्यरत शिक्षकों को 5 साल में यह योग्यता हासिल करने का अवसर दिया।

❗ लेकिन ध्यान देने वाली बात:
➡️ Act में कहीं भी योग्यता न होने पर सेवा समाप्ति का प्रावधान नहीं रखा गया
➡️ 2017 संशोधन में भी 4 साल का समय और बढ़ाया, फिर भी सेवा समाप्ति नहीं जोड़ी गई

तत्कालीन मंत्री Prakash Javadekar ने संसद में साफ कहा:
👉 “जो शिक्षक प्रशिक्षण नहीं ले पाए हैं, उन्हें नौकरी से नहीं निकाल सकते”



अब सवाल उठता है 👇

जब Teacher Training (जो Act में है) के लिए भी नौकरी नहीं गई,
तो बाद में लाई गई Teacher Eligibility Test (TET) के आधार पर
सेवा समाप्ति कैसे न्यायसंगत हो सकती है?



📌 सच्चाई यह है:

* TET, RTE Act के बाद लागू हुआ
* Act ने इसे पूर्व से कार्यरत शिक्षकों पर लागू नहीं किया
* “न्यूनतम योग्यता” में सिर्फ TET नहीं, बल्कि
✔️ Teacher Training
✔️ न्यूनत्तम अंक (50%)
भी शामिल हैं

फिर केवल TET को ही “क्वालिटी” का आधार क्यों बनाया जा रहा है?



⚖️ निष्कर्ष:
क्वालिटी जरूरी है, लेकिन
👉 नियम बदलकर पुराने कर्मचारियों पर लागू करना
👉 और केवल एक ही मानक (TET) को आधार बनाना

यह न्याय नहीं, चयनात्मक दृष्टिकोण है।



✍️ डी के सिंगौर
प्रदेश संयोजक
अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा, म.प्र.

माननीय प्रधानमंत्री जी,कृपया ध्यान दीजिए, Rte Act, NCTE की मंशा और सुप्रीम कोर्ट के निर्णय में विरोधाभास,RteAct में संशो...
06/06/2026

माननीय प्रधानमंत्री जी,
कृपया ध्यान दीजिए,
Rte Act, NCTE की मंशा और सुप्रीम कोर्ट के निर्णय में विरोधाभास,
RteAct में संशोधन ही एक मात्र समाधान हैl

05/06/2026

वो एक बात की खाना पूर्ति कर रहे थे कि “हमको सुना नहीं गया ” सुनकर मामले को खत्म करना उनका मकसद था सो उन्होंने कर दिया

05/06/2026

कोर्ट ने कहा ncte द्वारा इन सर्विस टीचर्स को दी गई छूट गलत है , तो ncte की गलती का burden शिक्षकों पर क्यों?

, अगर शिक्षा में “क्वालिटी” का तर्क देकर TET जैसी शर्तें लागू की जाती हैं, तो वही कसौटी न्याय व्यवस्था पर भी लागू होनी च...
04/06/2026

, अगर शिक्षा में “क्वालिटी” का तर्क देकर TET जैसी शर्तें लागू की जाती हैं, तो वही कसौटी न्याय व्यवस्था पर भी लागू होनी चाहिए। न्याय की क्वालिटी का मतलब है:

* सुसंगत निर्णय (Consistency) – एक ही मुद्दे पर अलग-अलग व्याख्या न हो
* तार्किकता (Reasoning) – फैसले में स्पष्ट और मजबूत आधार हो
* पूर्व प्रभाव (Retrospective fairness) – पुराने नियुक्त लोगों पर नए नियम थोपना न्यायसंगत न हो
* समता (Equality) – समान परिस्थिति में समान व्यवहार
RTE से पहले नियुक्त शिक्षकों पर TET लागू करने के मुद्दे में सवाल यही उठता है कि:
👉 अगर क्वालिटी का तर्क है, तो क्या यह तर्क न्याय की कसौटी पर भी उतना ही मजबूत है?

क्योंकि:

* जब नियुक्ति के समय TET की शर्त नहीं थी,
* और बाद में नियम बदलकर उसे लागू किया गया,

तो यह “क्वालिटी” के नाम पर न्याय के सिद्धांतों (fairness, legitimate expectation) से टकराता है।

“शिक्षा में क्वालिटी के नाम पर नियम बदल सकते हैं,
पर न्याय में क्वालिटी का मतलब है—नियम नहीं, न्याय बदला न जाए।”

“क्वालिटी सिर्फ शिक्षक से क्यों?
न्याय भी तो क्वालिटी मांगता है—फैसलों में, सोच में और समानता में।”

डी के सिंगौर twta

04/06/2026

हमारी तरफ से स्पष्ट मांग होनी चाहिए:

“सरकार TET लागू करने की प्रक्रिया

और उससे जुड़े विरोधाभासों पर श्वेत पत्र जारी करे”

“Policy contradiction को उजागर करो →

सरकार से White Paper की मांग करो →

Amendment की दिशा बनाओ”

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