Chanakya Thoughts

Chanakya Thoughts बिना प्रश्न और ज्ञान की जिज्ञासा के तुम्हारा यहां ठहरना मुश्किल है।🧘🪷

30/09/2024

बहुत दुखी होके कहना पड़ रहा है की बांग्लादेशी और अन्य घुसपैठियों का फर्जी आधार बनाकर पहले उनको भारतीय बनाया जाता है (ममता सरकार के सहयोग से)। फिर वक्फ बोर्ड उन्हे भारत के अलग अलग राज्यों में जमीन देकर बसा देती है। फिर यही लोग वास्तविक भारतीयों के साथ बलात्कार और कत्ल जैसे घटना को अंजाम देते है। यहां बच्चे पैदा करके ममता बनर्जी जैसे तानाशाह का वोट बैंक बनते है।फिर ये भारत के अलग अलग राज्यों में बंगाली बनकर व्यवसाय जमाते है जिससे लोकल लोगो का रोजगार भी चला जाता है। ये मैंने ऐसी प्रक्रिया बताई है जो पिछले कई वर्षों से लगातार चल रहा है। अब यदि आपको ये गलत लग रहा है तो इसके खिलाफ कदम कैसे उठाना चाहिए ये आप लोगो पे ही छोड़ता हूं। और अंत में मुद्दे की बात इन्ही लोगो के वजह से हमारे मुस्लिम भाइयों का नाम खराब हो रहा है। क्योंकि ये फर्जी घुसपैठिए सारे के सारे मुस्लिम ही है।

हिन्दू शास्त्रों के अनुसार सभ्य लड़की और महिला के लिए सांस्कृतिक प्रोटोकॉल
26/09/2024

हिन्दू शास्त्रों के अनुसार सभ्य लड़की और महिला के लिए सांस्कृतिक प्रोटोकॉल

हिन्दू शास्त्रों के अनुसार सभ्य लड़की और महिला के लिए सांस्कृतिक प्रोटोकॉल हिन्दू धर्म, जो हज़ारों वर्षों से समृ.....

Accessing supreme has always a resistance called materialism.भौतिकता ब्रह्मत्व में बाधक है।-चित्रांश ऋषि
24/02/2022

Accessing supreme has always a resistance called materialism.
भौतिकता ब्रह्मत्व में बाधक है।
-चित्रांश ऋषि

31/12/2021

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#अष्टांग_योग
एक ऐसा विज्ञान जिसके माध्यम से कुछ भी असंभव नहीं है। व्यक्ति यदि चाहे तो अपने मन के माध्यम से अपने संपूर्ण शरीर को नियंत्रित कर सकता है। कोरोना काल का सबसे महत्वपूर्ण विषय है अष्टांग योग। तीन दिवसीय ऑनलाइन वर्ग संचालित की जाएगी। जुड़ने वालों की संख्या सीमित रहेगी इसीलिए जल्दी करें और ऊपर दिए गए लिंक पर क्लिक कर अपना पंजीयन करवाये। और भारत के इस अद्भुत विलुप्त होते जा रहे रहस्य से रूबरू हो।

 #महाभारत_चक्रव्यूहविश्व का सबसे बड़ा युद्ध था महाभारत का कुरुक्षेत्र युद्ध। इतिहास में इतना भयंकर युद्ध केवल एक बार ही घ...
02/12/2021

#महाभारत_चक्रव्यूह

विश्व का सबसे बड़ा युद्ध था महाभारत का कुरुक्षेत्र युद्ध। इतिहास में इतना भयंकर युद्ध केवल एक बार ही घटित हुआ था। अनुमान है कि महाभारत के कुरुक्षेत्र युद्ध में परमाणू हथियारों का उपयॊग भी किया गया था। ‘चक्र’ यानी ‘पहिया’ और ‘व्यूह’ यानी ‘गठन’। पहिए के जैसे घूमता हुआ व्यूह है चक्रव्यूह। कुरुक्षेत्र युद्ध का सबसे खतरनाक रण तंत्र था चक्रव्यूह। यधपि आज का आधुनिक जगत भी चक्रव्यूह जैसे रण तंत्र से अनभिज्ञ हैं। चक्रव्यू या पद्मव्यूह को बेधना असंभव था। द्वापरयुग में केवल सात लोग ही इसे बेधना जानते थे। भगवान कृष्ण के अलावा अर्जुन, भीष्म, द्रॊणाचार्य, कर्ण, अश्वत्थाम और प्रद्युम्न ही व्यूह को बेध सकते थे जानते हैं। अभिमन्यु केवल चक्रव्यूह के अंदर प्रवेश करना जानता था।

चक्रव्यूह में कुल सात परत होती थी। सबसे अंदरूनी परत में सबसे शौर्यवान सैनिक तैनात होते थे। यह परत इस प्रकार बनाये जाते थे कि बाहरी परत के सैनिकों से अंदर की परत के सैनिक शारीरिक और मानसिक रूप से ज्यादा बलशाली होते थे। *सबसे बाहरी परत में पैदल सैन्य के सैनिक तैनात हुआ करते थे। अंदरूनी परत में अस्र शत्र से सुसज्जित हाथियों की सेना हुआ करती थी।* चक्रव्यूह की रचना एक भूल भुलैय्या के जैसे हॊती थी जिसमें एक बार शत्रू फंस गया तो घन चक्कर बनकर रह जाता था।
चक्रव्यूह में हर परत की सेना घड़ी के कांटे के जैसे ही हर पल घूमता रहता था। इससे व्यूह के अंदर प्रवेश करने वाला व्यक्ति अंदर ही खॊ जाता और बाहर जाने का रास्ता भूल जाता था। महाभारत में व्यूह की रचना गुरु द्रॊणाचार्य ही करते थे। चक्रव्यूह को युग का सबसे सर्वेष्ठ सैन्य दलदल माना जाता था। इस व्यूह का गठन युधिष्टिर को बंधी बनाने के लिए ही किया गया था। माना जाता है कि 48×128 किलॊमीटर के क्षेत्र फल में कुरुक्षेत्र नामक जगह पर युद्ध हुआ था जिसमें भाग लेने वाले सैनिकों की संख्या 1.8 मिलियन था!

चक्रव्यूह को घुमता हुआ मौत का पहिया भी कहा जाता था। क्योंकि एक बार जो इस व्यूक के अंदर गया वह कभी बाहर नहीं आ सकता था। यह पृथ्वी की ही तरह अपने अकस में घूमता था साथ ही साथ हर परत भी परिक्रमा करती हुई घूमती थी। इसी कारण से बाहर जाने का द्वार हर वक्त अलग दिशा में बदल जाता था जो शत्रु को भ्रमित करता था। अद्भुत और अकल्पनीय युद्ध तंत्र था चक्रव्यूह। आज का आधुनिक जगत भी इतने उलझे हुए और असामान्य रण तंत्र को युद्ध में नहीं अपना सकता है।

आपको जानकर आश्चर्य होगा कि संगीत या शंख के नाद के अनुसार ही चक्रव्यूह के सैनिक अपने स्थिती को बदल सकते थे। कॊई भी सेनापती या सैनिक अपनी मन मर्ज़ी से अपनी स्थिती को बदल नहीं सकता था। अद्भूत अकल्पनीय।

ज़रा सॊचिये कि सहस्र सहस्र वर्ष पूर्व चक्रव्यूह जैसे घातक युद्ध तकनीक को अपनाने वाले कितने बुद्धिवान रहें होंगे।

चक्रव्यूह ठीक उस आंधी की तरह था जो अपने मार्ग में आनेवाले हर एक चीज को तिनके की तरह उड़ाकर नष्ट कर देता था। अभिमन्यू व्यूह के भीतर प्रवेश करना तो जानता था लेकिन बाहर निकलना नहीं जानता था। इसी कारण वश कौरवों ने छल से अभिमन्यू की हत्या कर दी थी। माना जाता है कि चक्रव्यूह का गठन शत्रु सैन्य को मनोवैज्ञानिक और मानसिक रूप से इतना जर्जर बनाता था कि एक ही पल में हज़ारों शत्रु सैनिक प्राण त्याग देते थे। कृष्ण, अर्जुन, भीष्म, द्रॊणाचार्य, कर्ण, अश्वत्थाम और प्रद्युम्न के अलावा चक्रव्यूह से बाहर निकलने की रणनीति किसी के भी पास नहीं थी।

सदियों पूर्व ही इतने वैज्ञानिक रीति से अनुशासित रण नीती का गठन करना सामान्य विषय नहीं है। महाभारत के युद्ध में कुल तीन बार चक्रव्यूह का गठन किया था, जिनमें से एक में अभिमन्यू की म्रुत्यू हुई थी। केवल अर्जुन ने कृष्ण की कृपा से चक्रव्यूह को वेध कर जयद्रथ का वध किया था। हमें गर्व होना चाहिए कि हम उस देश के वासी है जिस देश में सदियों पूर्व के विज्ञान और तकनीक का अद्भुत निदर्शन देखने को मिलता है। निस्संदेह चक्रव्यूह न भूतो न भविष्यती युद्ध तकनीक था। न भूत काल में किसी ने देखा और ना भविष्य में कॊई इसे देख पायेगा।

(साभार : रहस्य)

 जानना चाहते हो कि अकेले रहना कितना मज़ेदार होता है , तो सर्वप्रथम तुम्हें सीखना पड़ेगा खुद से ही बातें करना, खुद से रूब...
22/11/2021



जानना चाहते हो कि अकेले रहना कितना मज़ेदार होता है , तो सर्वप्रथम तुम्हें सीखना पड़ेगा खुद से ही बातें करना, खुद से रूबरू होना, करना पड़ेगा तुम्हें खुद का खुद से ही साक्षात्कार। जब तुम जानने लगोगे कि तुम्हारे अंदर क्या-क्या है, तुम क्या चाहते हो, तभी तुम्हें तुम्हारे जीवन के मायने समझ आएंगे।
बस इतनी आसान सी बात, पर तुम तो पड़े रहोगे , शाम का इंतजार करोगे कि कब जमेगी महफिल! और तुम मस्त हो जाओगे एक अलग ही दुनिया में, जिसका कोई संबंध नहीं है यथार्थ से , एक काल्पनिक दुनिया!!
और फिर जब रास आने लगेंगी तुम्हें यह काल्पनिक दुनिया! और जब तुम हो जाओगे इसके आदि तब तुम्हारा सामना होगा असली मुश्किल हालात से , क्योंकि जिस दुनिया का यथार्थ से कोई संबंध नहीं तुम उसी दुनिया में खो गए हो । तुम असल जीवन में नहीं जीना चाहते , तुम तो बस कल्पनाओं में उड़ना चाहते हो एवं सहयोगी बनते हैं तुम्हारे मित्र । परंतु तुम्हें सामंजस्य स्थापित करना होगा यथार्थ और कल्पनाओं के बीच अन्यथा ठगे जाओगे !! और मुंह की खाओगे ।
इसीलिए सावधान !!

#विचारक #हर्षित_आर्यन #चाणक्य

 #विचारक_चित्रांश  #प्रेम के संबंध में यह कहता है की, प्रेम का अर्थ अत्यधिक स्नेह नहीं बल्कि उसकी भी नपी तुली मात्रा है।...
11/12/2020

#विचारक_चित्रांश #प्रेम के संबंध में यह कहता है की, प्रेम का अर्थ अत्यधिक स्नेह नहीं बल्कि उसकी भी नपी तुली मात्रा है। जैसे एक #मां अपने पुत्र को प्रेमवश उसके अच्छे #स्वास्थ्य के लिए ज्यादा खाने के लिए जोर करती रहती है। मां का भाव यह रहता है कि उसका पुत्र ज्यादा खाएगा तो हष्ट पुष्ट रहेगा। परंतु प्रेमवश अत्यधिक स्नेह एवं ज्ञान का अभाव उसके पुत्र को पोषण प्रदान नहीं करता अपितु पोषणहीन कर देता है। मानव का पाचन तंत्र जब अत्यधिक भोजन का पाचन करता है तो जितनी उर्जा उसका शरीर पाता नहीं है उससे अत्यधिक ऊर्जा उस भोजन के पाचन में खर्च कर देता है। जिसके कारण शरीर पोषण पाने के लिए शरीर को ही खत्म करना शुरू कर देता है। अपने सुना होगा कई बार लोग कहते हैं कि मैं बहुत खाता हूं फिर भी दुबला पतला हुं। हमें समझना होगा कि ज्यादा खाना अच्छे स्वास्थ्य का कारक नहीं है अपितु पोषक तत्वों से भरपूर थोड़ा खाना अच्छे स्वास्थ्य का कारक है। ऐसे ही मानसिक और शारीरिक स्तर पर कई बार हम यह सोचते हैं कि हम सामने वाले से प्रेम कर रहे हैं उसका भला कर रहे हैं परंतु असलियत यह होती है कि हम अनजाने में प्रेम के नाम पर अत्याचार कर रहे होते हैं। इसलिए कई बार ज्ञान का अभाव भी हमारे प्रेम को प्रभावित करता है। इसलिए वैसा प्रेम प्रेम की श्रेणी में नहीं आता जिससे तुम्हारे प्रेमी का अहित हो। प्रेम का अर्थ यह है कि #शारीरिक, #मानसिक और #आध्यात्मिक स्तर पर तुम अपने प्रेमी को पोषण प्रदान करो। क्योंकि तुम्हारा जीवन सुखमय तभी होगा है जब तुम इन तीन स्तरों पर संतुलित रहोगे।
#विचारक_चित्रांश

तुम निश्चित तौर पर समाज के किसी ना किसी वर्ग से संबंध रखते होगे। अपने वर्ग की विशेषता को समझो और अपनी व्यवस्थाओं को मजबू...
29/11/2020

तुम निश्चित तौर पर समाज के किसी ना किसी वर्ग से संबंध रखते होगे। अपने वर्ग की विशेषता को समझो और अपनी व्यवस्थाओं को मजबूत करो। समाज का प्रत्येक व्यक्ति किसी ना किसी तरह से एक दूसरे पर निर्भर है। मतलब स्पष्ट है कि इस समाज में उपस्थित अलग-अलग वर्ग समाज को सफलतापूर्वक चलाने के लिए जरूरी है। इसलिए अपनी महत्ता को समझो और खुद को बदलते हुए समय के साथ तकनीकी रूप से भी संपन्न करो। अपने वर्ग के सम्मान को समाज में स्थापित करो और सामाजिक कल्याण के लिए अपने वर्ग को मजबूत करो। तुम ना किसी से छोटे हो ना किसी से बड़े!! इसलिए अपनी लड़ाइयां समाप्त करो और समाज के दूसरे वर्गों के लोगों से प्रेम करो। अपना और उनका सम्मान करो क्योंकि तुम दोनों समाज के कल्याण के लिए सक्रिय हो। तुम्हें अपने अस्तित्व की रक्षा के लिए दूसरे वर्गों से सहायता या उनमें शामिल होने की कोई आवश्यकता नहीं है। मैं फिर कहता हूं खुद को सुदृढ़ करो और तकनीकी बदलाव के साथ अग्रसर रहो। यदि मेरे वचनों का ख्याल नहीं रखोगे तो निश्चित ही पतन की दिशा में अग्रसर हो जाओगे जैसा कि देख ही रहे हो।
#विचारक #चाणक्य

ज्ञान
13/10/2020

ज्ञान

केवल धन ही नहीं!! नैतिकता कभी भी अन्याय का समर्थन नहीं करती, इसीलिए किसी भी परिस्थिति में यदि कोई व्यक्ति अन्याय करता है...
03/09/2020

केवल धन ही नहीं!!
नैतिकता कभी भी अन्याय का समर्थन नहीं करती, इसीलिए किसी भी परिस्थिति में यदि कोई व्यक्ति अन्याय करता है एवं यही उसका स्वभाव है जो कि काफी पर इतनी के बाद भी आप नहीं बदल सके तो ऐसे व्यक्ति से उसी क्षण सारे संबंध विच्छेद कर ले और इस बात का पूरा ध्यान रखें कि ऐसे व्यक्तियों के पक्ष में कम से कम आपकी तरफ से रत्ती मात्र भी लाभांश प्राप्त ना हो।
#विचारक #चाणक्य

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