Muharram Series | Day 10: Ashura – The Final Day of Karbala and the Greatest Sacrifice
मुहर्रम सीरीज़ के दसवें दिन (यौम-ए-आशूरा) में जानिए कर्बला के अंतिम दिन की घटनाएँ। 10 मुहर्रम इस्लामी इतिहास का एक महान दिन है, जब इमाम हुसैन (रज़ि.) और उनके साथियों ने सत्य, न्याय और दीन की रक्षा के लिए अद्वितीय कुर्बानी पेश की। आइए आशूरा के संदेश और उससे मिलने वाले सबक को समझें।
lbnul hind qasmi
Education in not prepration for life ...
It's life............
Khalifa Umar ibn al-Khattab – The Great Second Caliph of Islam
From Ayush Malik to Richard McKinney | What Changed Their Minds About Islam?
क्या इस्लाम को समझने के बाद लोगों की राय बदल सकती है?
इस वीडियो में हम आयुष मलिक (अब मोहम्मद अली), जेरोम वान क्लावेरन (Joram van Klaveren) और रिचर्ड मैकिनी (Richard McKinney) जैसे लोगों की कहानियों पर चर्चा करेंगे। इन लोगों ने अलग-अलग पृष्ठभूमि से आने के बावजूद इस्लाम का अध्ययन किया और बाद में इस्लाम को स्वीकार किया।
आयुष मलिक का दावा है कि उन्होंने अपनी इच्छा से इस्लाम कबूल किया और किसी दबाव में नहीं आए। वहीं जेरोम वान क्लावेरन, जो कभी इस्लाम के आलोचक थे, अध्ययन के बाद मुसलमान हो गए। रिचर्ड मैकिनी, जो पहले इस्लाम के प्रति नकारात्मक सोच रखते थे, बाद में इस्लाम स्वीकार कर बैठे।
इस वीडियो का उद्देश्य किसी धर्म का अपमान करना नहीं बल्कि लोगों की व्यक्तिगत यात्राओं और धार्मिक स्वतंत्रता के विषय को समझना है।
वीडियो को पूरा देखें और अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं।
Humanity Above All: A Life Saved on Hyderabad RTC Road ❤️
हैदराबाद के RTC रोड पर इंसानियत की एक ऐसी मिसाल देखने को मिली जिसने हर किसी का दिल छू लिया।
बस में सफर कर रहे मनोहर को अचानक दिल का दौरा पड़ा और वे बेहोश होकर गिर पड़े। आसपास मौजूद लोग घबरा गए, लेकिन उसी समय सैयद सामी हुसैन तुरंत मदद के लिए आगे आए। उन्होंने बिना समय गंवाए CPR देना शुरू किया और लगातार कोशिश करते रहे।
काफी मेहनत और हिम्मत के बाद मनोहर की सांसें वापस लौट आईं और उनकी जान बच गई।
आज के दौर में, जब कई लोग ऐसे मौकों पर सिर्फ वीडियो बनाने में व्यस्त हो जाते हैं, वहीं सैयद सामी हुसैन ने इंसानियत का फर्ज निभाते हुए एक जिंदगी बचा ली।
इंसानियत का कोई धर्म नहीं होता। अच्छा काम, अच्छा काम होता है — चाहे करने वाला कोई भी हो।
क्या धर्म बदलने की आज़ादी सबके लिए बराबर है?
जब वसीम रिज़वी अपनी इच्छा से जितेंद्र नारायण त्यागी बनते हैं, तो उसे "घर वापसी" और व्यक्तिगत स्वतंत्रता कहा जाता है।
लेकिन जब कोई व्यक्ति अपनी इच्छा से इस्लाम स्वीकार करता है, तो तुरंत सवाल उठने लगते हैं — क्या उसे बहकाया गया? क्या उस पर दबाव डाला गया?
अगर धर्म चुनना या बदलना एक संवैधानिक और व्यक्तिगत अधिकार है, तो यह अधिकार हर नागरिक के लिए समान होना चाहिए।
यह वीडियो किसी धर्म के पक्ष या विपक्ष में नहीं, बल्कि एक सिद्धांत की बात करता है: जो अधिकार आप अपने लिए चाहते हैं, वही दूसरों के लिए भी स्वीकार कीजिए।
आख़िर धार्मिक स्वतंत्रता का असली मतलब क्या है? और क्या हमारे समाज में इस सिद्धांत को समान रूप से लागू किया जाता है?
वीडियो देखें और अपनी राय कमेंट में ज़रूर बताएं।
Youth Revolution: From Silence to System Change
Description (Hindi):
जब तक देश के बेरोजगार युवा चुप रहते हैं, सिस्टम आराम से चलता रहता है।
लेकिन जब डिग्रियां घरों में सड़ने लगती हैं, मेहनत के बाद भी नौकरी नहीं मिलती, और युवाओं को एहसास होता है कि इस बेरोजगारी में सिस्टम का भी बड़ा हाथ है… तब आवाज उठती है।
NET Exam Scam, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और अन्याय के खिलाफ अब युवा सड़क पर हैं।
जिन्हें “Cockroach” कहा गया… वही अब बदलाव की आवाज बन रहे हैं।
यह सिर्फ नौकरी की लड़ाई नहीं, बल्कि सम्मान, न्याय, बराबरी और सिस्टम बदलने की लड़ाई है।
अब फैसला युवाओं को करना है —
सिर्फ वायरल होना है, या सच में सिस्टम बदलना है?
Hashtags:
Cockroach Janata Party: The Dark Truth of India’s Broken System
क्या भारत का युवा सिर्फ़ वादों पर जिंदा है?
2 करोड़ नौकरियों का वादा कहाँ गया?
डिग्री के बाद भी नौकरी क्यों नहीं?
क्या सिस्टम युवाओं से मज़ाक कर रहा है?
पेपर लीक कब रुकेगा?
चुनाव में पैसा ज़्यादा या रोजगार?
क्या युवाओं का गुस्सा अब मीम बन चुका है?
आखिर Cockroach Janata Party वायरल क्यों हुई?
क्या राजनीति अब सिर्फ़ इवेंट बन गई है?
टैक्स का पैसा कहाँ खर्च हो रहा है?
युवा सवाल पूछे तो गलत क्यों?
क्या बेरोजगारी नया नॉर्मल बन चुकी है?
क्या आज का युवा नेताओं से निराश है?
क्या लोकतंत्र सिर्फ़ चुनाव तक सीमित रह गया है?
क्या युवाओं की आवाज़ सच में सुनी जा रही है?
Social activist:
Ibnu L Hind Qasmi
क्या “आखरी सवाल” सिर्फ एक फिल्म है…
या इतिहास को नए तरीके से दिखाने की कोशिश?
संजय दत्त की नई फिल्म ने पूरे देश में बहस छेड़ दी है।
गांधी जी की हत्या, बाबरी मस्जिद, इमरजेंसी और RSS जैसे मुद्दों पर उठे सवालों ने सोशल मीडिया से लेकर न्यूज़ चैनलों तक माहौल गरमा दिया है।
इस वीडियो में जानिए:
• फिल्म “Aakhri Suwal” की पूरी कहानी
• RSS और बाबरी मस्जिद विवाद
• गांधी हत्या केस पर नई बहस
• इमरजेंसी की सच्चाई
• क्या ये फिल्म प्रोपेगेंडा है?
• या छुपे हुए सवालों को सामने ला रही है?
वीडियो आखिर तक देखें और खुद फैसला करें —
History… या Propaganda?
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