Independent Business consultant Anshu

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31/12/2022

अक्सर लोग मौत से डरते हैं, उससे दूर भागते हैं। कुछ लोग तो ऐसे भी होते हैं जो मरने पर अपनों के शवों का भी तृस्कार कर देते हैं। लेकिन हमारे समाज में एक ऐसे शख्स भी हैं जो अपने जीवन में अब तक 25 हजार से भी अधिक लावारिस लाशों का अंतिम संस्कार कर चुके हैं वो भी निस्वार्थ भाव से। यह शख्स हैं अयोध्या उत्तर प्रदेश के रहने वाले मोहम्मद शरीफ़। इनका ये सरहानीय कार्य करने का मिशन तब शुरू हुआ जब उन्होंने कई साल पहले अपने ही बेटे को खो दिया था। मोहम्मद शरीफ़ के मुताबिक 28 साल पहले उनका बेटा रईस खां केमिस्ट के तौर पर सुल्तानपुर किसी काम के सिलसिले से गया था। वहीं से वह एक महीने तक गायब रहा। उसी दौरान राम जन्मभूमि का विवाद चल रहा था। पता चला कि उसी दौरान उसे मार कर रेलवे लाइन के किनारे फेंक दिया गया। जिसके बाद में एक बोरे में लावारिस लाश की तरह उसकी बॉडी मिली। जिसे कई जंगली जानवरों ने खा लिया था। अपने बेटे के शव की इस दुर्दशा को देख उन्होंने फैसला किया कि वे लावारिस मृतकों का एक सभ्य संस्कार कराएंगे, फिर वो चाहे किसी भी धर्म का क्यों ना हो। उनके इस सराहनीय कार्य का ही परिणाम है कि उन्हें देश के सर्वोच्च सम्मान में से एक पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया गया है। शरीफ चाचा ने अपने जीवन के 27 वर्ष दूसरों के नाम कर इंसानियत की असल मिसाल पेश की हअक्सर लोग मौत से डरते हैं, उससे दूर भागते हैं। कुछ लोग तो ऐसे भी होते हैं जो मरने पर अपनों के शवों का भी तृस्कार कर देते हैं। लेकिन हमारे समाज में एक ऐसे शख्स भी हैं जो अपने जीवन में अब तक 25 हजार से भी अधिक लावारिस लाशों का अंतिम संस्कार कर चुके हैं वो भी निस्वार्थ भाव से। यह शख्स हैं अयोध्या उत्तर प्रदेश के रहने वाले मोहम्मद शरीफ़। इनका ये सरहानीय कार्य करने का मिशन तब शुरू हुआ जब उन्होंने कई साल पहले अपने ही बेटे को खो दिया था। मोहम्मद शरीफ़ के मुताबिक 28 साल पहले उनका बेटा रईस खां केमिस्ट के तौर पर सुल्तानपुर किसी काम के सिलसिले से गया था। वहीं से वह एक महीने तक गायब रहा। उसी दौरान राम जन्मभूमि का विवाद चल रहा था। पता चला कि उसी दौरान उसे मार कर रेलवे लाइन के किनारे फेंक दिया गया। जिसके बाद में एक बोरे में लावारिस लाश की तरह उसकी बॉडी मिली। जिसे कई जंगली जानवरों ने खा लिया था। अपने बेटे के शव की इस दुर्दशा को देख उन्होंने फैसला किया कि वे लावारिस मृतकों का एक सभ्य संस्कार कराएंगे, फिर वो चाहे किसी भी धर्म का क्यों ना हो। उनके इस सराहनीय कार्य का ही परिणाम है कि उन्हें देश के सर्वोच्च सम्मान में से एक पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया गया है। शरीफ चाचा ने अपने जीवन के 27 वर्ष दूसरों के नाम कर इंसानियत की असल मिसाल पेश की है।

27/04/2022


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12/03/2022

Ab hua doctor Vivek Bindra se milna aasan
Kyunki IBC Banna hua aasan
IBC Bankar ke lakhon ka Mana hua aasan
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09/03/2022

Bada bharat ki shuruaat ho chuki hai
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28/02/2022

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28/02/2022

#कुछ छोटा बचाने के चक्कर में बड़ा खो देते हैं₹



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14/02/2022
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