St. Xavier's High School Lalganj Official

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06/07/2024

घनश्यामदास बिड़ला का अपने बेटे के नाम पत्र विश्व मे प्रसिद्ध पत्र में से है.....
*घनश्यामदास जी बिड़ला (GD Birla) का अपने पुत्र बसंत कुमार जी बिड़ला (BK Birla) के नाम 1934 में लिखित एक अत्यंत प्रेरक पत्र जो हर एक को जरूर पढ़ना चाहिए-*_

_चि. बसंत!_

_”यह जो लिखता हूँ उसे बड़े होकर और बूढ़े होकर भी पढ़ना,अपने अनुभव की बात कहता हूँ।_
_संसार में मनुष्य जन्म दुर्लभ है और मनुष्य जन्म पाकर जिसने शरीर का दुरुपयोग किया,वह पशु है। तुम्हारे पास धन है,तन्दुरुस्ती है,अच्छे साधन हैं,उनको सेवा के लिए उपयोग किया,तब तो साधन सफल है,अन्यथा वे शैतान के औजार हैं।तुम इन बातों को ध्यान में रखना।_

_धन का मौज-शौक में कभी उपयोग न करना,ऐसा नहीं की धन सदा रहेगा ही,इसलिए जितने दिन पास में है,उसका उपयोग सेवा के लिए करो,अपने ऊपर कम से कम खर्च करो,बाकी जनकल्याण और दुखियों का दुख दूर करने में व्यय करो।धन शक्ति है,इस शक्ति के नशे में किसी के साथ अन्याय हो जाना संभव है,इसका ध्यान रखो की अपने धन के उपयोग से किसी पर अन्याय ना हो।_
_अपनी संतान के लिए भी यही उपदेश छोड़कर जाओ।यदि बच्चे मौज-शौक,ऐश-आराम वाले होंगे तो पाप करेंगे और हमारे व्यापार को चौपट करेंगे।_
_ऐसे नालायकों को धन कभी न देना,उनके हाथ में जाये उससे पहले ही जनकल्याण के किसी काम में लगा देना या गरीबों में बाँट देना।तुम उसे अपने मन के अंधेपन से संतान के मोह में स्वार्थ के लिए उपयोग नहीं कर सकते।_
_हम भाइयों ने अपार मेहनत से व्यापार को बढ़ाया है तो यह समझकर कि वे लोग धन का सदुपयोग करेंगे।_

_भगवान को कभी न भूलना,वह अच्छी बुद्धि देता है,इन्द्रियों पर काबू रखना,वरना यह तुम्हें डुबो देगी।_
_नित्य नियम से व्यायाम-योग करना।स्वास्थ्य ही सबसे बड़ी सम्पदा है।स्वास्थ्य से कार्य में कुशलता आती है,कुशलता से कार्यसिद्धि और कार्यसिद्धि से समृद्धि आती है।_
_सुख-समृद्धि के लिए स्वास्थ्य ही पहली शर्त है lमैंने देखा है की स्वास्थ्य सम्पदा से रहित होनेपर करोड़ों-अरबों के स्वामी भी कैसे दीन-हीन बनकर रह जाते हैं।स्वास्थ्य के अभाव में सुख-साधनों का कोई मूल्य नहीं।इस सम्पदा की रक्षा हर उपाय से करना। भोजन को दवा समझकर खाना।स्वाद के वश होकर खाते मत रहना।जीने के लिए खाना हैं,न कि खाने के लिए जीना।”_

_*घनश्यामदास बिड़ला*_

नोट :
श्री घनश्यामदास जी बिरला का अपने बेटे के नाम लिखा हुवा पत्र इतिहास के सर्वश्रेष्ठ पत्रों में से एक माना जाता है।।

हर पिता एवम हर बेटी को यह पत्र जरूर  पढ़ना चाहिए।आप भी पढ़ें और जो बात अच्छी लगे उसे साझा जरूर करें।
01/07/2024

हर पिता एवम हर बेटी को यह पत्र जरूर पढ़ना चाहिए।
आप भी पढ़ें और जो बात अच्छी लगे उसे साझा जरूर करें।

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इंफोसिस कंपनी के मालिक एन नारायणमूर्ति का अपनी बेटी को एक भावुक पत्र।हर पिता को जरूर पढ़ना चाहिए।

प्रिय बेटी अक्षता,

पिता बनकर मैं इतना बदल जाऊंगा, यह मैंने नहीं सोचा था। तुम्हारा मेरी जिंदगी में आना, मेरे लिए बहुत सी खुशियां और जिम्मेदारियां लेकर आया। मैं अब सिर्फ पति, पुत्र या कंपनी कर्मचारी नहीं था। मैं पिता बन चुका था, जिसे हर मो़ड़ पर अपनी बेटी की आशाओं पर खरा उतरना था। तुम्हारे जन्म ने मेरे जीवन को नई ऊंचाई दी। कंपनी में मेरी बातचीत ज्यादा विचारों वाली और नपी-तुली हो गई। बाहरी दुनिया के साथ मेरा बर्ताव अब ज्यादा परिपक्व हो गया। मैं हर इंसान से ज्यादा अच्छे तरीके से बर्ताव करने लगा। आखिरकार किसी दिन तुम ब़़डी होकर अपने आसपास की दुनिया को समझोगी और मैं नहीं चाहता कि तुम ये सोचो कि मैंने कुछ गलत किया।

मेरा दिमाग तुम्हारे जन्म के शुरुआती दिनों में हमेशा पहुंच जाता है। तुम्हारी मां और मैं उस समय जवान थे और अपने कॅरिअर के लिए स्ट्रगल कर रहे थे। तुम्हारे जन्म के 2 महीने बाद हम तुम्हें हुबली से मुंबई ले आए। जल्द ही हमें यह समझ आ गया कि बच्चे को बड़ा करना और कॅरिअर साथ में चलाना बहुत मुश्किल काम है। इसलिए हमने तय किया कि तुम अपने जीवन के शुरुआती साल हुबली में दादा-दादी के साथ बिताओगी।

हमारे लिए ये एक बहुत मुश्किल फैसला था। हर वीकेंड पर मैं बेलगाम तक हवाई जहाज से आता था और फिर वहां से हुबली के लिए कार किराए पर लेता था। इसमें बहुत पैसे खर्च होते थे, लेकिन मैं तुम्हें देखे बिना नहीं रह सकता था। मुझसे हमेशा यह पूछा जाता है कि मेरे बच्चों को मैंने क्या संस्कार दिए? मैं उनको कहता हूं कि ये जिम्मेदारी मैंने तुम्हारी मां के कंधों पर डाल रखी थी।

मैं तुम्हारी मां का हमेशा आभारी रहूंगा कि उसने तुम्हें बहुत अच्छे संस्कार दिए। उसने तुम्हें और रोहन को साधारण और सामान्य जीवन जीना सिखाया। एक बार बेंगलुरु में जब तुम्हें एक स्कूल ड्रामा में चुना गया था, तब तुम्हें एक विशेष ड्रेस पहननी थी। वह समय अस्सी के मध्य का था।

इन्फोसिस का ऑपरेशन शुरू ही हुआ था। हमारे पास इस तरह की चीजों पर खर्च करने के लिए पैसे नहीं थे। तुम्हारी मां ने समझाया कि हम ऐसा ड्रेस नहीं खरीद सकते, इसलिए तुम ड्रामा में भाग नहीं ले सकती। बहुत बाद में तुमने मुझे बताया था कि तुम्हें ये घटना समझ नहीं आई।

मुझे याद है कि जब मैं तुम्हारी मां से तुम लोगों को स्कूल भेजने को लेकर डिस्कस करता था। मेरा कहना था कि तुम्हें रोहन को कार से स्कूल भेजने की व्यवस्था करनी चाहिए, तब हमारे पास पैसे भी बहुत थे। लेकिन तुम्हारी मां ने कहा कि नहीं तुम लोगों को अपने क्लासमेट्स के साथ ऑटोरिक्शा से ही स्कूल जाना चाहिए। तुमने उस दौरान 'रिक्शा अंकल' और अन्य लोगों से अच्छी दोस्ती की थी।

तुम अकसर कहती थीं कि हमारे घर में टीवी क्यों नहीं है, जबकि अन्य दोस्तों के घर में टीवी था। तुम्हारी मां ने शुरुआत में फैसला लिया था कि घर में टीवी नहीं होना चाहिए ताकी बच्चों को पढ़ने, डिस्कशन करने और दोस्तों से मुलाकात के लिए वक्त मिल सके। उनका कहना था कि घर में ऐसा माहौल होना चाहिए, जिससे बच्चों को पढ़ाई में मदद मिल सके।

टेक केयर माई चाइल्ड,आपका प्यारा अप्पा।

05/09/2023

मुझे भीख की आवश्यकता नहीं धनानंद, मैं शिक्षक हूँ,यदि मेरी शिक्षा में सामर्थ्य है तो अपना पोषण करने वाले सम्राटों का निर्माण मैं स्वंय कर लूँगा- . चाणक्य ( विश्व का सर्वोच्च शिक्षक)
शिक्षक दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।

स्नेही स्वजन,आज बहुत दिन बाद एक सामाजिक कहानी लेकर आपके बीच उपस्थित हुआ हूँ। कहानी सुनकर अगर आपकी आँखें न भर जाएं तो कहि...
04/06/2023

स्नेही स्वजन,
आज बहुत दिन बाद एक सामाजिक कहानी लेकर आपके बीच उपस्थित हुआ हूँ। कहानी सुनकर अगर आपकी आँखें न भर जाएं तो कहिएगा।
कहानी का लिंक
https://youtube.com/
एक बार कहानी पूरा सुनिये और अपनी बहुमूल्य प्रतिक्रिया अवश्य दीजिये।
आभार सहित
सूरज वर्मा

*जिंदगी के सफर में गुजर जाते हैं जो मुकाम*  शिप्रा रात भर साकेत का हाथ पकड़ के सोती रही।रात जैसे कुँवारी आई थी , वैसे ही ...
04/05/2023

*जिंदगी के सफर में गुजर जाते हैं जो मुकाम*
शिप्रा रात भर साकेत का हाथ पकड़ के सोती रही।रात जैसे कुँवारी आई थी , वैसे ही पवित्र कुँवारी गुजर गई ।
सुबह शिप्रा ने कहा - " लीजिये मेरा पता रख लीजिए , कभी नानी घर आइये तो जरुर मिलने आइयेगा ।"
" कौन सा नानीघर बहन ? वो तो मैंने आपको डरते देखा तो....
*ट्रेन के सफर में आँखों देखी एक भावुक कहानी*
कहानी का लिंक ये रहा
https://youtube.com/
पूरी कहानी सुनें और अपनी बहुमूल्य प्रतिक्रिया अवश्य दें।
आपका अपना
सूरज

*गाँव मेरा मुझे याद आता रहा* साथियों!आज की भौतिकतावादी दुनियाँ में पारिवारिक रिश्ते बहुत तेजी से टूट रहे हैं।गाँव की पृष...
29/04/2023

*गाँव मेरा मुझे याद आता रहा*
साथियों!
आज की भौतिकतावादी दुनियाँ में पारिवारिक रिश्ते बहुत तेजी से टूट रहे हैं।गाँव की पृष्ठभूमि पर मेरी भावनाओं की स्याही से लिखी यह हृदयस्पर्शी कहानी आपको अंदर तक झकझोर देगी। आँख से मोती झरने लगेंगे।
ये कहानी मेरे चैनल पर इस एमी उपलब्ध है। लिंक ये रहा
https://youtube.com/
पूरी कहानी ध्यान से सुनें और अपनी अमूल्य प्रतिक्रिया देकर मेरे प्रयास को सफल बनायें।
आपका अपना
सूरज वर्मा

स्नेही स्वजनजितनी चीज़ें कृष्ण से छूटीं उतनी तो किसी से नहीं छूटीं। कृष्ण से उनकी माँ छूटी, पिता छूटे, फिर जो नंद-यशोदा म...
27/04/2023

स्नेही स्वजन
जितनी चीज़ें कृष्ण से छूटीं उतनी तो किसी से नहीं छूटीं। कृष्ण से उनकी माँ छूटी, पिता छूटे, फिर जो नंद-यशोदा मिले वे भी छूटे। संगी-साथी छूटे। राधा छूटीं। गोकुल छूटा, फिर मथुरा छूटी। कृष्ण से जीवन भर कुछ न कुछ छूटता ही रहा। कृष्ण जीवन भर त्याग करते रहे। हमारी आज की पीढ़ी जो कुछ भी छूटने पर टूटने लगती है, उसे कृष्ण को गुरु बना लेना चाहिए। जो कृष्ण को समझ लेगा वह कभी अवसाद में नहीं जाएगा। कृष्ण आनंद के देवता है। कुछ छूटने पर भी कैसे खुश रहा जा सकता है, यह कृष्ण से अच्छा कोई सिखा ही नहीं सकता।
अपने आप मे एक अलग प्रकार की मीमांसा मेरे चैनल पर उपलब्ध है। वीडियो जरूर देखें।
आपकी प्रतिक्रिया की अपेक्षा रहेगी।चैनल का लिंक
https://youtube.com/
आभार सहित,
सूरज वर्मा

स्नेही स्वजन!जीवन भर की पाई पाई जोड़कर एक पिता अपनी संतान को पालता है। उसके लिए अपनी पसंद नापसंद सब भूल जाता है पर शादी क...
14/04/2023

स्नेही स्वजन!
जीवन भर की पाई पाई जोड़कर एक पिता अपनी संतान को पालता है। उसके लिए अपनी पसंद नापसंद सब भूल जाता है पर शादी के बाद वही संतान उसे घर से धक्का देकर बाहर कर देती है। यही आज के संसार की रीति बन गई है।
आज की कहानी कुछ इन्हीं अनसुलझे सवालों को बयान करती है। यह कहानी आज मेरे चैनल पर उपलब्ध है।
आप जरूर सुनें और अपनी बहुमूल्य प्रतिक्रिया जरूर दें।
आपकी प्रतिक्रिया का इंतज़ार रहेगा। चैनल का लिंक ये रहा-

https://youtube.com/
आपका सूरज वर्मा

पति पत्नी का रिश्ता  संसार के हर रिश्ते से अलग होता है। इस रिश्ते में कितनी भी अनबन क्यों न हो जाये लेकिन अपनतत्व और अधि...
28/03/2023

पति पत्नी का रिश्ता संसार के हर रिश्ते से अलग होता है। इस रिश्ते में कितनी भी अनबन क्यों न हो जाये लेकिन अपनतत्व और अधिकार की भावना सदा बलवती होती है। आज की कहानी भी पति पत्नी के जज्बाती पलों को उजाकर करती है।अगर आप शादी शुदा व्यक्ति हैं या वैवाहिक बंधन में बंधने वाले हैं तो इस कहानी को जरूर सुनें। ये कहानी हरामी अनसुलझे रिश्तों को सुलझाने का एक बेहतर माध्यम होगी,ऐसा मुझे विश्वास है।पूरी कहानी सुनें,अपनी प्रतिक्रिया दें और अपनों को जरूर साझा करें।निवेदन है कि कहानी पूरी सुनें।
लिंक चैनल का ये रहा
https://youtube.com/
आपका सूरज वर्मा

नमस्कार साथियों!आपका आभार जो आप मेरे चैनल पर वक़्त दे रहे हैं। कहानी जीवन के किसी विशेष मार्मिक पक्ष को नाटकीय प्रभ.....

Once upon a time as Principal :St Xavier High School,Lalganj
22/03/2023

Once upon a time as Principal :St Xavier High School,Lalganj

School annual function welcome speech # st Xavier school program in school principal school

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