03/10/2024
आज की यात्रा के कुछ पल
आज दिनांक 03 अक्टूबर 2024 पहला नवरात्रा को सुबह पूजा पाठ सहित सारे नित्य कर्म सम्पूर्ण करने के बाद दो रोटि के अल्पाहार से उदर पूर्ति कर मैं 07:25 बजे रवाना होकर आसोप के बाज़ार की मुख्य गली में आदरणीय प्रिंसिपल सर (जैन साहब)के साथ मोटरसाइकिल पर सर के पिछे मोटरसाइकिल की सीट पर सवार हो गया। सर की TVS मोटरसाइकिल अपनी सुर्र सुर्र में फुर्र फुर्र के मिले जुले स्वर की आवाज करती हुई
आसोप गढ़ के दरवाज़े की तरफ रवाना हो गई
फिर आसोप पार करते हुए हम दोनों लोग भोपालगढ़ वाया रतकुड़िया होते हुए पिचियाक के पास बिलाड़ा स्थित आई माता मंदिर पहुंचे चूंकि पहला नवरात्रा में पहला काम माताजी के दर्शन करना था लेकिन हम लोग 10:00 बजे मंदिर परिसर में पहुंचे और 10:00 बजे से लेकर 10:30 बजे तक महा भोग के समय मंदिर में सामान्य जन का प्रवेश निषेध होता है।
हमने निर्णय लिया पहले संग्रहालय देख लेते हैं फिर माता जी के धोक लगाएंगे
संग्रहालय देखा बहुत सारी अनोखी चीजें भी देखी
जोधपुर मेहरानगढ़ दुर्ग सहित घंटाघर बाजार का दृश्य संग्रहालय में बहुत ही शानदार लगा
फिर हमने मंदिर में धोक लगाई,अखंड ज्योत के दर्शन किए तथा फिर बिलाड़ा से 4 किलोमीटर आगे 5000 साल पुराना कल्पवृक्ष है बहुत ही शानदार इतना बड़ा और पौराणिक वृक्ष मैंने जीवन में पहली बार देखा था आज। वहां पर मंदिर के पुजारी जी के मुखारविंद से कल्पवृक्ष का इतिहास सुना जो बहुत ही अनोखा था
कल्पवृक्ष के अंदर प्राकृतिक रूप से बनी ब्रह्मा, विष्णु, महेश, राम, लक्ष्मण, गणेश जी, शिवजी का त्रिशूल सहित अनेक आकृतियां बहुत ही विलक्षण थी।
फिर हम बिलाड़ा आ गए और एक भोजनालय में भजन किया।
भोजनोपरान्त जैन साहब के पुराने और अभिन्न मित्र तथा गुरु पंडित, प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य नाथूराम जी गौड़ से मुलाकात की, बहुत ही सुलझे हुए और अथाह ज्ञान के भंडार पंडित जी ने बहुत अच्छी आवभगत की और एक डेढ़ घंटा बातों में ऐसे निकला पता ही नहीं चला , उन्होंने बहुत मान सम्मान दिया।
फिर हम वहां से रवाना होकर रतकुड़िया में जैन साहब के अज़ीज़ मित्र...... डूडी जी से मिले
डूडी जी के व्यक्तित्व की जितनी तारीफ करूं उतनी ही कम है क्योंकि डूडी जी से मेरा परिचय पहली बार 29 सितंबर 2024 रविवार के दिन जैन साहब के माध्यम से जोधपुर में हुआ था।
आज भी दूसरी मुलाकात हुई उन्होंने बहुत अच्छी आवभगत की वो भी मारवाड़ की परम्परा के अनुसार।
घंटे भर की बातचीत के बाद हमने डूडी जी के घर रतकुडि़या से सीधे मोटरसाइकिल के माध्यम से आसोप की उड़ान भरी और 5:15 बजे आसोप पहुंच गए। आज़ की ये शानदार यात्रा करवाने के लिए जैन साहब का बहुत बहुत आभार और धन्यवाद 👏👏
बोलो आज़ के आनंद की जय 👏👏
आपका अपना सी डी स्वामी 👏👏👏👏