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18/07/2026

भाजपा को शिक्षा में भी साम्प्रदायिकता नज़र आती है। शिक्षा, शिक्षक, शिक्षार्थी और शिक्षा के बाद मिलनेवाली नौकरी भाजपा के एजेंडे में है ही नहीं।

भाजपा अपने अनरजिस्टर्ड संगी-साथियों के अवैधानिक भवनों को कब ढहाएगी? जब संगी-साथी ही अपंजीकृत है, तो उनके भवन, कार्यालय, संस्थान कैसे जायज़ होंगे?

निंदनीय!

अखिलेश यादव

जब जौहर युनिवर्सिटी का निर्माण हो रहा था तब वो क्षेत्र रामपुर डेवलपमेंट अथॉरिटी के दायरे में नहीं आता था, बाद में प्राधिकरण ने अपना दायरा बड़ा कर लिया और अब रामपुर DM कह रहे हैं कि जौहर युनिवर्सिटी का नक्शा नहीं पास है तो गिराने का आदेश पारित कर दिया गया है।

वैसे नक्शा तो इस देश की किसी युनिवर्सिटी का पास नहीं है तो क्या सारे विश्वविद्यालयों पर बुलडोज़र चला दोगे ??

नक्शा तो इस देश के ज्यादातर DM ऑफिस का भी नहीं पास होगा तो क्या सब को ज़मींदोज़ कर दोगे ?

एैसे बेतुके और तानाशाही वाले आदेश पारित करते हुए इन अधिकारियों को सोचना चाहिये कि ये भी किसी एैसी ही युनिवर्सिटी से पढ़कर आये होंगे जहॉं का नक्शा नहीं पास होगा।

शिक्षा के इतने बड़े संस्थान को बचाने के लिये सभ्य समाज को आगे आना होगा वरना ये ज़ालिम सरकारें कुछ भी महफ़ूज़ नहीं रहने देंगी।

इमरान प्रतापगढ़ी

#मौलाना_मोहम्मद_अली_जौहर
विश्व विद्धालय पर सिर्फ इसलिए कार्यवाही हो रही है

क्युकी उसके साथ
#आज़म_खान का नाम जुड़ा है

सरकार अगर चाहे तो
" कंपाउंडिंग " जमा करवा कर नक्शा पास किया जा सकता है

गिराने से बेहतर है सरकार उस university को अपने आधीन लेकर संचालित कर सकती है

वरना नक्शा तो उत्तर प्रदेश मे हज़ारों
multy story इमारतों का भी नही पास है।

सैयद आसिम वकार

अब वे एक यूनिवर्सिटी पर बुलडोज़र चलाने जा रहे हैं!

उन्हें शिक्षा और युवाओं के भविष्य की कोई परवाह नहीं है।

एक यूनिवर्सिटी पर बुलडोज़र चलाना...थोड़ा रुककर सोचो!

सुप्रिया श्रीनेत

कांग्रेस ने इंडियन एक्स्प्रेस की एक न्यूज़ शेयर करते हुए नरेंद्र मोदी सरकार और चुनाव आयोग पर 'वोट चोरी' का आरोप लगाया।  ...
22/03/2026

कांग्रेस ने इंडियन एक्स्प्रेस की एक न्यूज़ शेयर करते हुए नरेंद्र मोदी सरकार और चुनाव आयोग पर 'वोट चोरी' का आरोप लगाया।


"इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक- यूपी के शामली में लोहारिपुर गांव है। यहां 14 फरवरी को BLO के पास 544 लोगों के नाम हटाने के लिए फॉर्म जमा किया गया।

इनमें सभी नाम मुस्लिम समुदाय से आने वाले लोगों के थे, जिसमें पूर्व प्रधान का नाम भी शामिल था।

जिसने ये ‘फॉर्म 7’ भरा था, उसका नाम वेद पाल था। कमाल की बात है कि पूरे गांव में कोई वेद पाल को जानता ही नहीं था।

जब शामली DM अरविंद चौहान से इस मामले पर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा- हम फॉर्म 7 देने वाले शख्स वेद पाल को ढूंढ नहीं पाए। ये सभी फॉर्म नकली थे।

सोचिए, ये कितनी बड़ी साजिश है और ऐसी साजिश सिर्फ 1 गांव में नहीं, पूरे देश में रची गई है।"


5 राज्यों का चुनाव शेड्यूल, 51 देनों कि चुनाव प्रक्रिया।
15/03/2026

5 राज्यों का चुनाव शेड्यूल, 51 देनों कि चुनाव प्रक्रिया।

सोशल मिडिया पर एक फोटो खूब वायरल हो रहा है। कहा जा रहा है कि सत समंदर पर एक व्यक्ति धर्म-देश भूलकर सिर्फ माँ से मिलने आग...
17/02/2026

सोशल मिडिया पर एक फोटो खूब वायरल हो रहा है। कहा जा रहा है कि सत समंदर पर एक व्यक्ति धर्म-देश भूलकर सिर्फ माँ से मिलने आगया!

दर असल सऊदी से फ्लाइट लेकर केरल पहुंचा बेटा अपनी हिंदू माँ से मिलने के लिए। कहा जाता है कि कई साल पहले सऊदी में एक केरल की हिंदू आंटी बच्चों की देखभाल किया करती थीं वो एक छोटे से बच्चे को अपनी कोख से भी बहुत ज्यादा प्यार करती थीं!

समय बीतने के बाद बच्चा बड़ा हुआ वो वापस भारत लौट आईं लेकिन वो बेटा अब जवान हो चुका था लेकिन माँ की यादें वो कभी नहीं भूला!

उसने महीनों तक ढूंढा पता लगाया और फिर फ्लाइट बुक की और सीधा केरल पहुंच गया वो दरवाजे पर पहुचा दिल धड़क रहा था क्या माँ उसे पहचानेगी क्या वो पुराना प्यार अभी भी याद होगा!

जैसे ही माँ ने उसे देखा उनकी आंखें भर आईं अपने हाथ फैलाए और चिल्लाई बेटा वो दौड़कर गले लग गईं जैसे पहले बचपन में लगा करती थीं बेटा रो पड़ा माथे को प्यार से चूमा धर्म-देश भूलकर सिर्फ माँ-बेटे का प्यार बाकी था!

क्या आपने भी कभी किसी की इतनी बड़ी मेहरबानी याद रखी?

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मेरी व्यक्तिगत राय है कि वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए भारत और पाकिस्तान के बीच क्रिकेट मैचों का आयोजन नहीं किया जान...
15/02/2026

मेरी व्यक्तिगत राय है कि वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए भारत और पाकिस्तान के बीच क्रिकेट मैचों का आयोजन नहीं किया जाना चाहिए!

भारत और पाकिस्तान के बीच क्रिकेट मैच महज़ एक खेल नहीं, बल्कि भावनाओं, इतिहास और जनउत्साह का एक विशाल प्रतीक होता है। जब भी और मैच होते हैं तो सरहदों के आर-पार करोड़ों दिल एक साथ धड़कने लगते हैं। गलियों-मोहल्लों से लेकर बड़े शहरों तक, चाय की दुकानों से लेकर स्टेडियम की दीर्घाओं तक हर जगह सिर्फ एक ही सवाल गूंजता है — मैच का नतीजा क्या होगा?

लेकिन पिछले कुछ वर्षों में एक चिंताजनक प्रवृत्ति भी देखने को मिली है। मैच समाप्त होने के बाद कुछ इलाकों से तनाव और हिंसा की खबरें सामने आती हैं। इस बड़े खेल मुकाबले को कुछ तत्व सामाजिक विभाजन को गहरा करने के लिए इस्तेमाल करने की कोशिश करते हैं। जीत या हार को आधार बनाकर लोगों के बीच शंका, आरोप-प्रत्यारोप और नफ़रत को हवा दी जाती है, जिससे सामाजिक सौहार्द प्रभावित होता है।

अक्सर देखा गया है कि सोशल मीडिया पर अफवाहें और नकारात्मक प्रचार तेज़ी से फैलते हैं। कुछ वीडियो, पोस्ट या के आधार पर पूरे एक समुदाय पर सवाल उठाए जाते हैं। कुछ लोगों से देशभक्ति के प्रमाण पत्र मांगे जाते हैं और वही पुराना तरीका दोहराकर माहौल को और अधिक विषाक्त बनाया जाता है। ऐसे वातावरण में प्रशासन पर भी दबाव बढ़ जाता है और कभी-कभी त्वरित तथा कठोर कार्रवाई की खबरें सामने आती हैं, जिन पर बाद में बहस चलती रहती है।

एक संवेदनशील नागरिक के रूप में यह प्रश्न उठता है कि यदि किसी खेल के परिणामस्वरूप समाज में दरारें गहरी हो रही हों, तो क्या हमें सामूहिक रूप से इस पर गंभीरता से विचार नहीं करना चाहिए? खेल का उद्देश्य लोगों को जोड़ना, खुशियां बांटना और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना विकसित करना है, न कि नफ़रत और विभाजन को बढ़ावा देना। यदि हर मैच के बाद कड़वे अनुभव सामने आएं, तो चिंता स्वाभाविक है।

मेरी व्यक्तिगत राय है कि जब तक हम एक समाज के रूप में इतने परिपक्व और जागरूक न हो जाएं कि जीत और हार को केवल खेल की सीमा तक स्वीकार कर सकें, तब तक ऐसे संवेदनशील मुकाबलों के आयोजन पर गंभीर संवाद होना चाहिए। प्रसारण हितों या क्षणिक उत्साह से बढ़कर सामाजिक शांति और भाईचारा अधिक महत्वपूर्ण है।

आवश्यकता इस बात की है कि खेल को खेल ही रहने दिया जाए, उसे धार्मिक या राष्ट्रीय पूर्वाग्रह का मैदान न बनाया जाए। मीडिया, प्रशासन और नागरिक समाज — सभी की जिम्मेदारी है कि वे उकसावे को रोकें, अफवाहों पर नियंत्रण रखें और कानून का निष्पक्ष पालन सुनिश्चित करें।

अंततः, एक स्वस्थ और शांतिपूर्ण समाज किसी भी मैच या मनोरंजन से कहीं अधिक मूल्यवान है। यदि हम खेल को नफ़रत के बजाय दोस्ती, सहिष्णुता और पारस्परिक सम्मान का माध्यम बना सकें, तो यही हमारी सच्ची जीत होगी।

आतंकवाद के आरोप में गिरफ्तार आतंकियों के नाम दिलजोत सिंह सैनी, हरमन उर्फ हैरी, अजय उर्फ मेहरा, अर्शदीप सिंह उर्फ अरश कंड...
24/01/2026

आतंकवाद के आरोप में गिरफ्तार आतंकियों के नाम दिलजोत सिंह सैनी, हरमन उर्फ हैरी, अजय उर्फ मेहरा, अर्शदीप सिंह उर्फ अरश कंडोला हैं। लेकिन ABPNews के GFX देखिए! इस मक्कार ने एआई से ऐसी तस्वीर बनाई है जो...... इशारा करता की है। आप इस हरामखोरी के लिए ABP पर लानत तो भेज ही सकते हैं।

22/01/2026

मिली जानकारी के अनुसार वर्ष 2000 : मैनपुरी पुलिस ने आजाद खान को डकैती में जेल भेजा

वर्ष 2025 : हाईकोर्ट ने निर्दोष करार दिया

21 जनवरी 2026 : बरेली सेंट्रल जेल से हुई रिहाई

यूपी में आजाद खान को खुद को बेगुनाह साबित करने में 25 साल लग गए !!

बांग्लादेश के साथ संबंधों का बिगड़ना न केवल बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था के लिए झटका साबित हुआ है, बल्कि भारत के किसानों, ...
10/01/2026

बांग्लादेश के साथ संबंधों का बिगड़ना न केवल बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था के लिए झटका साबित हुआ है, बल्कि भारत के किसानों, छोटे व्यापारियों और पर्यटन क्षेत्र को भी नुकसान पहुंचा है। सबसे पहले दोनों देशों के बीच तनाव का असर पर्यटन उद्योग में देखने को मिला। उत्तर-पूर्वी राज्यों का पर्यटन प्रभावित हुआ। रिपोर्टों के अनुसार, नए साल 2025 के अवसर पर गोवा के समुद्र तटों पर वैसी भीड़ देखने को नहीं मिली, जैसी पहले के वर्षों में दिखाई देती थी।

इसी तरह, पिछले वर्ष दोनों देशों के बीच मक्का (भुट्टा) का व्यापार न होने के कारण बिहार और पश्चिम बंगाल के किसानों तथा छोटे व्यापारियों को काफी नुकसान उठाना पड़ा। बिहार और पश्चिम बंगाल में मक्का की कीमतें अन्य राज्यों की तुलना में अधिक रहने की सबसे बड़ी वजह बांग्लादेश को होने वाला निर्यात है। लेकिन सामान्य व्यापार बाधित होने और बांग्लादेश को निर्यात बंद होने से मक्का के स्टॉक का कारोबार करने वाले किसानों और व्यापारियों को भारी नुकसान झेलना पड़ा और छोटे व्यापारियों की हालत खराब हो गई।

इसी प्रकार, यदि बांग्लादेश भारतीय कपास के धागे (कॉटन यार्न) पर कोई शुल्क लगाता है, तो इसका सीधा असर कपास किसानों और मिल मालिकों पर पड़ना तय है। टैरिफ लगने से भारतीय सूत/धागा महंगा हो जाएगा, जिससे किसानों और मिल मालिकों को नुकसान होगा। ऐसी खबरें भी हैं कि अमेरिकी दबाव के कारण बांग्लादेश ने भारतीय सामान पर शुल्क लगाने का फैसला किया है। वहीं, अमेरिका के राष्ट्रपति की आक्रामक नीतियों के चलते छोटे देश अमेरिका को खुश करने में लगे हुए हैं, जिसका असर भारत जैसे देशों पर पड़ता हुआ नजर आ रहा है।

दूसरी ओर, भारत के भीतर की स्थिति भी अलग है। एक बड़ा वर्ग मुस्लिम-विरोध में इतने आगे निकल चुके हैं कि उसे न तो देश की चिंता है और न ही देश की अर्थव्यवस्था की। उन्हें सिर्फ इस बात की फिक्र है कि “अब्दुल” चैन की सांस न ले, उसके बच्चे अच्छी शिक्षा न पा सकें और समाज में उसे वह सम्मान न मिले, जो एक इंसान होने के नाते मिलनी चाहिए!

वर्तमान हालात को देखते हुए ऐसा नहीं लगता है कि दोनों देशों के बीच तनाव जल्द खत्म होने वाला है, क्योंकि गोदी मीडिया और भक्तों की टोली रोज़ बांग्लादेश पर हमला करने की सलाह देती दिखाई दे रही है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार महाराष्ट्र के अकोला सीट पर बीजेपी-AIMIM में गठबंधन हुआ है। अकोला के अकोट में बीजेपी ने बहुमत का...
07/01/2026

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार महाराष्ट्र के अकोला सीट पर बीजेपी-AIMIM में गठबंधन हुआ है। अकोला के अकोट में बीजेपी ने बहुमत का आंकड़ा हासिल करने के लिए AIMIM के साथ गठबंधन किया है।

दर असल निकाय चुनाव में बीजेपी की माया धुले ने मेयर का पद तो जीत लिया, लेकिन 35 सदस्यीय नगर पालिका में पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला था। जिनमें बीजेपी को 11 सीटें ही मिलीं. बहुमत के आंकड़े से दूर रहने के कारण बीजेपी ने अपने नेतृत्व में एक नया गठबंधन खड़ा किया, जिसे ‘अकोट विकास मंच’ नाम दिया गया।

अकोट विकास मंच में सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि यहां 5 सीटें जीतकर दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनी AIMIM बीजेपी की सहयोगी बन गई। इसके अलावा इस मंच में शिंदे गुट की शिवसेना, अजित पवार की एनसीपी, शरद पवार की एनसीपी और बच्चू कडू की प्रहार जनशक्ति पार्टी भी शामिल हैं। इस नए गठबंधन को औपचारिक रूप से अकोला जिला मजिस्ट्रेट के पास रजिस्टर करा दिया गया है।


इसे लेकर शिवसेना यूबीटी के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने बीजेपी के साथ-साथ कांग्रेस और एआईएमआईएम पर प्रहार किया है।

सौरभ द्विवेदी के लल्लनटॉप छोड़ने के बाद सोशल मीडिया पर लोग लिख रहे हैं कि " जब एक इंसान खून पसीने से सींचकर किसी संस्थान...
07/01/2026

सौरभ द्विवेदी के लल्लनटॉप छोड़ने के बाद सोशल मीडिया पर लोग लिख रहे हैं कि " जब एक इंसान खून पसीने से सींचकर किसी संस्थान को खड़ा करता है उसके बाद वहां से एक दिन चला जाता है तो यह क्षण बहुत ही भावुक होता है फिर भले ही वह व्यक्ति ऊपर से कितना भी मज़बूत होने का दिखावा करे।

सौरभ को पसंद या नापसंद करने वाले अपनी जगह लेकिन इस बात से कोई इनकार नहीं कर सकता कि पिछले एक दशक में भारतीय पत्रकारिता जगत के बड़ा सुपरस्टारों में सौरभ द्विवेदी का नाम शामिल है। हजारों युवा सौरभ जैसा बनना चाहते हैं, उनके जैसा दिखना चाहते हैं।

मिली जानकारी के अनुसार सौरभ द्विवेदी ने अपना नया ठिकाना ढूंढ लिए हैं।

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