02/01/2026
नार्को टेस्ट (Narco Test) क्या है?
नार्को टेस्ट को Narco Analysis Test भी कहा जाता है। इसमें किसी व्यक्ति को एक दवा (अक्सर Sodium Pentothal) दी जाती है, जिससे वह आधी बेहोशी (semi-conscious) की हालत में चला जाता है। माना जाता है कि इस हालत में व्यक्ति झूठ बोल नहीं पाता और उसके मन की बातें बाहर आ जाती हैं।
नार्को टेस्ट कैसे किया जाता है?
डॉक्टर की निगरानी में नस (IV) के ज़रिए दवा दी जाती है
व्यक्ति पूरी तरह बेहोश नहीं होता, लेकिन होश भी पूरा नहीं रहता
सवाल पूछे जाते हैं और जवाब रिकॉर्ड किए जाते हैं
क्या नार्को टेस्ट सटीक (Accurate) है?
नहीं, यह पूरी तरह सटीक नहीं है।
कारण:
दवा लेने के बाद इंसान कल्पना, भ्रम या गलत यादें भी बोल सकता है
व्यक्ति सच और झूठ को मिला सकता है
मानसिक डर, दबाव या पहले से सुनी बातों का असर आ सकता है
वैज्ञानिक रूप से इसे 100% भरोसेमंद नहीं माना जाता
👉 इसलिए नार्को टेस्ट के नतीजे सबूत (Evidence) नहीं माने जाते।
भारत में नार्को टेस्ट का कानून
Supreme Court (2010) के अनुसार
👉 बिना व्यक्ति की सहमति नार्को टेस्ट कराना गैर-कानूनी है
कोर्ट में इसके जवाब सीधे सबूत के रूप में मान्य नहीं
हाँ, इससे मिली जानकारी के आधार पर आगे जांच हो सकती है
नार्को टेस्ट के जोखिम (Risks)
दवा से ब्रेन, हार्ट और नर्व सिस्टम पर असर
कुछ मामलों में कोमा या मौत का भी खतरा
मानसिक असर (डर, तनाव, याददाश्त की समस्या)
आसान शब्दों में निष्कर्ष
🔹 नार्को टेस्ट = सच उगलवाने की गारंटी नहीं
🔹 पूरी तरह भरोसेमंद नहीं
🔹 कानूनी तौर पर सीमित उपयोग
🔹 बिना सहमति नहीं हो सकता