Kavi Ranjit Tiwari

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Kavi Ranjit Tiwari samahit hai nujhme sabhi rang...prr prem rang se hoon abhisinchit....aapka pyara main Ranjit. . Poet--Actor--Teacher mob..08407082012

नमस्कार दोस्तों! अपनी रचना के साथ आज पुनः उपस्थित हूं ।क्या हुआ ऐ मन !क्यों तेज है धड़कनशिशिर के भी मौसम में क्योंतेरी आ...
21/12/2025

नमस्कार दोस्तों! अपनी रचना के साथ आज पुनः उपस्थित हूं ।

क्या हुआ ऐ मन !
क्यों तेज है धड़कन
शिशिर के भी मौसम में क्यों
तेरी आंखों में सावन

कुछ खो गया है क्या
बता कुछ हो गया है क्या
खिलखिलाहट तेरी खामोश क्यों--
अल्फ़ाज़ में कैसी उलझन

सर्द हवाएंँ यादों की
खुश्क करती हैं फिजाएं
तारीख गुजर रहे बेमेल सा क्यों
हालात में ये कैसी जकड़न

बोलो , कुछ तो बोलो
अपनी उदासी का भेद खोलो
ऐ मन ! सिले सिले से तेरे होंठ क्यों
ढीले पड़ गए कैसे बंधन

अपनेपन का एहसास
करीब होने का आभास
वक़्त की आँच में जल रहे क्यों
भाव में ये कैसी सिकुड़न

कवि ! बेबसी क्या बता पाऊंगा
नियति कैसे बदल पाऊंगा
महफ़िल में सूनापन है पसरा
हँसी में बिखरा फीकापन

तो कहो कवि ! तुम ही कहो
चुपचाप हैं सब्र, दशा है मौन
हर ओर से हो रही है टूटन
ये किस हाल का जीवन !

------- कवि रंजित तिवारी

#साहित्यप्रेमी #कविता #साहित्य

कभी खुद को खुद में खो जाने दूं....
30/05/2024

कभी खुद को खुद में खो जाने दूं....

नमस्कार दोस्तों !दहन हो जलन की अहम के अगन कीशिकायत रहे ना कभी भी तपन कीविकारी बने फिर रहे जो हमेशा ---मिले राह उनको शमन ...
22/04/2024

नमस्कार दोस्तों !

दहन हो जलन की अहम के अगन की
शिकायत रहे ना कभी भी तपन की

विकारी बने फिर रहे जो हमेशा ---
मिले राह उनको शमन के लगन की ।

------ रंजित तिवारी
कवि रंजित तिवारी
#साहित्य #कविता sammelan

*** विकारी -- बदल जाने वाला (दलबदलू)

नमस्कार दोस्तों ! अपनी रचना की एक मुक्तक के साथ उपस्थित हूं हंँसाने की अदा जिनमें,वे हंँसकर पल को जीते हैंज़माने को पता ...
30/03/2024

नमस्कार दोस्तों ! अपनी रचना की एक मुक्तक के साथ उपस्थित हूं

हंँसाने की अदा जिनमें,वे हंँसकर पल को जीते हैं
ज़माने को पता क्या है, हलाहल ग़म के पीते हैं
करें किससे गि़ला कुछ भी, शिकायत वे नही करते -
कहेंगे मुस्कुराकर ही, खुशी से पल ये बीते हैं ....l

------ रंजित तिवारी

#साहित्य #कवि #कविता #शायरी sammelan #कविसम्मेलन Everyone

नमस्कार दोस्तों !  अपनी एक कविता के साथ उपस्थित हूं ।तुम और मैं......-----------------------------मैं मुझमें नहीं तुझमें...
28/01/2024

नमस्कार दोस्तों ! अपनी एक कविता के साथ उपस्थित हूं ।

तुम और मैं......
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मैं मुझमें नहीं तुझमें हूं
तुम तुझमें नहीं मुझमें हो
तुम और मैं ही तो --
आधार हैं ---
निर्माण और निर्वाण का
संवरने से मिट जाने का
पा लेने से खो जाने का
मन तन और जीवन का
जगत का इस ब्रह्माण्ड का
तुम और मैं --
जाने कितने रूप मे
साकार हैं ---
लौकिक -- आलौकिक
भौतिक -- अभौतिक
शाश्वत तो क्षणिक भी
सार्थक और यथार्थ
निर्विकार -- निराकार भी
भाव - भक्ति का श्रृंगार भी
पराकाष्ठा की सीमा से ऊपर
अंतस की अंतहीन गहराइयों के तले --
तुम और मैं ...बस मैं और तुम

------ रंजित तिवारी

#कविता #साहित्य #कविसम्मेलन #कविताप्रेमी Everyone

नमस्कार दोस्तों....आज प्रस्तुत हूं....अपनी एक तुकबंदी कविता लेकरहास्य का पुट है...अवश्य पढ़ें आनंदित हों और बताएं-------...
22/11/2023

नमस्कार दोस्तों....
आज प्रस्तुत हूं....अपनी एक तुकबंदी कविता लेकर
हास्य का पुट है...अवश्य पढ़ें आनंदित हों और बताएं
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एक धनाढ्य की सुकुमारी थी
जॉब जॉब रटती वो कुंवारी थी

बड़े जद्दोजहद से पापा ने समझाया
सुकुमारी ने विवाह का मन बनाया

पापा ने उसकी हर शर्त पर सिर हिलाए
कुछ प्लानिंग सुकुमारी के मन में आए

वर तलाशने का अद्भुत था इंतजाम
होना था "पति" पद के लिए इंटरेंस एक्जाम

आवेदन पत्र ने ज्योहिं मार्किट में धूम मचाए
हर उम्र के इच्छा धारकों ने अपने भाग्य आजमाए

साइबर कैफे में हसरत लिए, लोग कर रहे अफरा तफरी
रिश्तेदारों से उम्मीदवारों तक ,थे सभी एक दूजे पर भारी

एक अनार सौ बीमार वाली लागू थी कहावत ---
फॉर्म भरते लोग कर रहे थे , सपनों की सजावट

पोस्टमैन परेशान, पापा हैरान ,सुकुमारी मुस्का रही थी
आए हुए आवेदनों में , सबकी बायोडाटा मिला रही थी

प्रश्न सेट- सेंटर सिलेक्ट, रिटेन एग्जाम की तैयारी भी
अंतिम दौर में शामिल हुए ,प्यारे भाई तिवारी जी

चाय गरम की आवाज सुन , सुकुमारी ने आंखे खोली
पास बैठे मुस्कुराते तिवारी जी से सपने की बात बोली

सपने की बात सुनकर दोनों जमकर खिलखिलाए
दिन की शुरुआत अच्छी हुई जब प्रातः काल मुस्काए

पति पत्नी होना जॉब नहीं ,जीवन की जरूरत है
ना अहंकार ना ईगो रूप समर्पण और चाहत है ।

------ रंजित तिवारी
कवि रंजित तिवारी Kavi Ranjit Tiwari Everyone

नमस्कार दोस्तों !अपनी मुक्तक रचना के साथ आज फिर उपस्थित हूं...---------------------------------------------------------क...
14/11/2023

नमस्कार दोस्तों !
अपनी मुक्तक रचना के साथ आज फिर उपस्थित हूं...

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किसी का था किसी का है,ये जीवन की कहानी है
सफर में थे सफर में हैं बची फिर भी निशानी है
कभी हंँसती कहानी है ,कभी रोता फसाना है --
कभी बुझता हुआ मन है ,कभी आंखों में पानी है ।

--- रंजित तिवारी
कवि रंजित तिवारी Kavi Ranjit Tiwari Everyone
#कविरंजिततिवारी #हिंदीसाहित्य #हिन्दीकविता #मुक्तक #रचनाएं

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