Aadhyatmik Prayogshala

Aadhyatmik Prayogshala While the world is busy wondering about Machines,
We, at , experiment on the ' Don’t they?

"आत्मानुभूति. तत्त्वविचार. तत्त्व-प्रचार - आध्यात्मिक प्रयोगशाला परिवार"

The Key to a “Happy, Accomplished Life” that we all have:

*Get good education => Be wealthy => Own what you wish*

Let’s review its ex*****on in our lives so far:

*We have good Education => We are Sufficiently rich => We keep owning whatever we wish whenever we wish!*

So, do we have "Happy, accomplished Life"? As life mov

es on, we all realize that even money and the premium luxuries prove to be impotent in keeping us from the worries and pressures of life. We are a few youths of this scientific age, who are busy conducting experiments in the laboratories that our lives are to answer what even the modern science couldn't answer: the Path to a "Happy, Accomplished Life”. This is our Aadhyatmik Prayogshala (The Spiritual Laboratory!).

हमें ज्ञात “सुखी, समृद्ध जीवन” की कुञ्जी:

*उत्क्रष्ट शिक्षा => आर्थिक सम्पन्नता => अभिलाषाओं की पूर्ती*

अब तक के हमारे जीवन पर पुनर्विचार करते हैं:

*आज हमारे पास उच्च शिक्षा है => हम आवश्यकतानुसार समृद्ध हैं => हम अपनी अभिलाषाओं को भी समय समय पर पूर्ण कर लेते हैं!*

तो क्या हमारे पास "सुखी, समृद्ध जीवन" है?

जैसे जैसे जीवन आगे बढता है, हम महसूस करते हैं कि ये हमारी समस्त संपत्ती और वस्तुएं हमें जीवन की चिंताओं व दबाव से बचने में कितनी नपुंसक हैं, असमर्थ हैं | नहीं?

हम इस विज्ञान युग के वे कुछ युवा हैं जो अपनी इस जीवनरुपी प्रयोगशाला में प्रयोग करते हुए व्यस्त हैं उन उत्तरों की खोज के लिए जिनका उत्तर आधुनिक विज्ञान भी अब तक नहीं दे पाया है - "सुखी, समृद्ध जीवन" का पथ!

ये है हमारी आध्यात्मिक प्रयोगशाला! (Please do share the post of the page on your timeline, so that more and more people can get the knowledge and move ahead on the path of Liberation.) Please accept our humble apologies for any typographical errors you may come across in the content of this page. Write to us at [email protected] or message us on https://www.facebook.com/AadhyatmikPrayogshala for any Suggestions, Corrections or Complaints.

अलख अमूरति नित्य निरंजन, एकरूप निज जानना ।वरन फरस रस गंध न जाकै, पुन्य पाप विन मानना ।।तन देख्या अथिर घिनावना..23
08/09/2024

अलख अमूरति नित्य निरंजन,
एकरूप निज जानना ।
वरन फरस रस गंध न जाकै,
पुन्य पाप विन मानना ।।

तन देख्या अथिर घिनावना..

23

उत्तम त्याग पांच पापों का सर्वदेश मैं त्याग करूं ।योग्य पात्र को योग्य दान दे उर में सहज विराग भरूं ।।
10/09/2019

उत्तम त्याग पांच पापों का सर्वदेश मैं त्याग करूं ।
योग्य पात्र को योग्य दान दे उर में सहज विराग भरूं ।।



उत्तम तप धर शुक्ल ध्यान से आठों कर्मों को जारूं ।अंतरंग-बहिरंग तपों से निज आतम को उजियारूं ।।
09/09/2019

उत्तम तप धर शुक्ल ध्यान से आठों कर्मों को जारूं ।
अंतरंग-बहिरंग तपों से निज आतम को उजियारूं ।।



उत्तम संयम धर्म सभी जीवों के प्रति करुणा धारूं ।समिति गुप्ति व्रत पालन करके निज आतम गुण विस्तारूं ।।
08/09/2019

उत्तम संयम धर्म सभी जीवों के प्रति करुणा धारूं ।
समिति गुप्ति व्रत पालन करके निज आतम गुण विस्तारूं ।।



उत्तम शौच धर्म धारण क्र लोभ कषाय विनष्ट करूं ।शुचिमय चेतन से अशुद्ध ये चार घातिया कर्म हरूं ।।
08/09/2019

उत्तम शौच धर्म धारण क्र लोभ कषाय विनष्ट करूं ।
शुचिमय चेतन से अशुद्ध ये चार घातिया कर्म हरूं ।।



उत्तम सत्य धर्म से निर्मल निज स्वरूप को सत्य करूं ।हित-मिट-प्रिय सच बोलूँ निज-परिणति संग नृत्य करूं ।।
08/09/2019

उत्तम सत्य धर्म से निर्मल निज स्वरूप को सत्य करूं ।
हित-मिट-प्रिय सच बोलूँ निज-परिणति संग नृत्य करूं ।।



08/09/2019
उत्तम क्षमा आत्मा का गुण उत्तम मार्दव विनय स्वरूप ।उत्तम आर्जव माया नाशक उत्तम शौच लोभहर भूप ।।उत्तम सत्य स्वभाव ज्ञानमय...
08/09/2019

उत्तम क्षमा आत्मा का गुण उत्तम मार्दव विनय स्वरूप ।
उत्तम आर्जव माया नाशक उत्तम शौच लोभहर भूप ।।
उत्तम सत्य स्वभाव ज्ञानमय उत्तम संयम संवर रूप ।
उत्तम तप निर्जरा कर्म की उत्तम त्याग स्वरूप अनूप ।।
उत्तम आकिंचन विरागमय उत्तम ब्रह्मचर्य चिद्रूप ।
धन्य-धन्य दशधर्म परमपद दाता सुखमय मोक्षस्वरूप ।।
-कविवर राजमल जी पवैया की द्वारा रचित "श्री दशलक्षण धर्म पूजन"

(Lines in image: पं. अभय जी देवलाली द्वारा रचित "हे परम दिगम्बर मुद्रा जिनकी" भजन)

उत्तम आर्जव धर्म धार माया कषाय संहार करूं ।कपट भाव से रहित शुद्ध आतम का सदा विचार करूं ।।
05/09/2019

उत्तम आर्जव धर्म धार माया कषाय संहार करूं ।
कपट भाव से रहित शुद्ध आतम का सदा विचार करूं ।।



उत्तम मार्दव धर्म ग्रहण कर विनय स्वरूप विकास करूं।पर कर्तव्य मान्यता त्यागूँ अहंकार का नाश करूं।।
04/09/2019

उत्तम मार्दव धर्म ग्रहण कर विनय स्वरूप विकास करूं।
पर कर्तव्य मान्यता त्यागूँ अहंकार का नाश करूं।।



उत्तम क्षमा धर्म को धारूं क्रोध कषाय विनाश करूं ।पर पदार्थ को इष्ट अनिष्ट न मानूं आत्म प्रकाश करूं ।।(Correction: मुझ अज...
03/09/2019

उत्तम क्षमा धर्म को धारूं क्रोध कषाय विनाश करूं ।
पर पदार्थ को इष्ट अनिष्ट न मानूं आत्म प्रकाश करूं ।।

(Correction: मुझ अज्ञानी ने*)


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