P.L. Yadav mahaviddyalay
शिक्षार्थ आइये सेवार्थ जाइये।
09/07/2017
गुरु पूर्णिमा की हार्दिक बधाई ।
आषाढ़ मास की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा कहते हैं। इस दिन गुरु पूजा का विधान है। गुरु पूर्णिमा वर्षा ऋतु के आरम्भ में आती है। इस दिन से चार महीने तक परिव्राजक साधु-सन्त एक ही स्थान पर रहकर ज्ञान की गंगा बहाते हैं। ये चार महीने मौसम की दृष्टि से भी सर्वश्रेष्ठ होते हैं। न अधिक गर्मी और न अधिक सर्दी। इसलिए अध्ययन के लिए उपयुक्त माने गए हैं। जैसे सूर्य के ताप से तप्त भूमि को वर्षा से शीतलता एवं फसल पैदा करने की शक्ति मिलती है, वैसे ही गुरु-चरणों में उपस्थित साधकों को ज्ञान, शान्ति, भक्ति और योग शक्ति प्राप्त करने की शक्ति मिलती है।
यह दिन महाभारत के रचयिता कृष्ण द्वैपायन व्यास का जन्मदिन भी है। वे
संस्कृत के प्रकांड विद्वान थे और उन्होंने चारों वेदों की भी रचना की थी। इस कारण उनका एक नाम वेद व्यास भी है। उन्हें आदिगुरु कहा जाता है और उनके सम्मान में गुरु पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा नाम से भी जाना जाता है। भक्तिकाल के संत घीसादास का भी जन्म इसी दिन हुआ था वे कबीरदास के शिष्य थे।
शास्त्रों में गु का अर्थ बताया गया है- अंधकार या मूल अज्ञान और रु का का अर्थ किया गया है- उसका निरोधक। गुरु को गुरु इसलिए कहा जाता है कि वह अज्ञान तिमिर का ज्ञानांजन-शलाका से निवारण कर देता है। अर्थात अंधकार को हटाकर प्रकाश की ओर ले जाने वाले को 'गुरु' कहा जाता है।
"अज्ञान तिमिरांधश्च ज्ञानांजन शलाकया,चक्षुन्मीलितम तस्मै श्री गुरुवै नमः "
गुरु तथा देवता में समानता के लिए एक श्लोक में कहा गया है कि जैसी भक्ति की आवश्यकता देवता के लिए है वैसी ही गुरु के लिए भी। बल्कि सद्गुरु की कृपा से ईश्वर का साक्षात्कार भी संभव है। गुरु की कृपा के अभाव में कुछ भी संभव नहीं है।
भारत भर में गुरू पूर्णिमा का पर्व बड़ी श्रद्धा व धूमधाम से मनाया जाता है। प्राचीन काल में जब विद्यार्थी गुरु के आश्रम में निःशुल्क शिक्षा ग्रहण करता था तो इसी दिन श्रद्धा भाव से प्रेरित होकर अपने गुरु का पूजन करके उन्हें अपनी शक्ति सामर्थ्यानुसार दक्षिणा देकर कृतकृत्य होता था। आज भी इसका महत्व कम नहीं हुआ है। पारंपरिक रूप से शिक्षा देने वाले विद्यालयों में, संगीत और कला के विद्यार्थियों में आज भी यह दिन गुरू को सम्मानित करने का होता है। मन्दिरों में पूजा होती है, पवित्र नदियों में स्नान होते हैं, जगह जगह भंडारे होते हैं ।
26/01/2017
21 नवम्बर को बी एस सी प्रथम तथा द्वतीय वर्ष का भौतिकी का प्रैक्टिकल होना तय हुआ है
आप सभी विद्यालय आकर अपनी परिक्षा को पूर्ण करें
महाविद्यालय सुनवरसा, में मैथा
स्टेशन के पास कानपुर देहात में
स्थित है। महाविद्यालय का नाम
पुत्तीलाल यादव के माता व पिता
श्री के नाम पर होना निश्चित हुआ
था। किन्तु इस विद्यालय का जन्म
श्री रामऔतार यादव व श्री राम
प्रकाश यादव श्री मुन्ना यादव व
श्री जहाम सिंह यादव व श्री
जगराम सिह यादव द्वारा विशेष
सहयोग करने के फलस्वरुप हुआ
था। विद्यालय के नाम भूमि
रजिस्ट्री के समय विद्यालय में
पुत्ती लाल यादव महाविद्यालय
रखने का प्रस्ताव सर्व सम्मति से
हुआ। विद्यालय का जन्म,
पुत्तीलाल यादव के बड़े लड़के
बृजेन्द्र कुमार के विशेष इच्छा पर
हुआ। विद्यालय को बी.ए. व बी.एसी.
की मान्यतऐं प्राप्त हैं।
महाविद्यालय में उच्च स्तारिय
शिक्षक हैं। सभी प्रकार की
प्रयोगशालाऐं सामग्री सही
विद्यमान हैं। महाविद्यालय को
जल्द से जल्द नई प्रगति की ओर
बढ़वा दे। यही आप सभी से अनुरोध
महाविद्यालय में प्रवेश प्रारम्भ है
छात्र महाविद्यालय में आकर प्रवेश सम्बन्धित जानकारी प्राप्त कर सकते हैं |
समय 3 शाम से 6 शाम तक
आवश्यक सूचना #
कानपुर विश्वविद्यालय की बी एस सी द्वती वर्ष का गणित का तृतीय पेपर रद्द हो गया है
ये पेपर पुनः 25 अप्रैल को होगा
सभी छात्र विद्यालय आकर अपने प्रैक्टिकल की जानकारी प्राप्त करें
पी एल यादव महाविद्यालय
में
बीए
बीएससी
में एडमिशन सुरु है
इच्छुक छात्र आवेदन कर सकते हैं
अधिक जानकारी के लिए मेरे पेज पे पूछें
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