बी टी सी , उत्तर प्रदेश

बी टी सी , उत्तर प्रदेश

Share

UPBTC UPTET VBTC

उत्तर प्रदेश की एससीईआरटी राज्य स्तर पर एक शीर्ष सरकारी संगठन के रूप में 1981 में लखनऊ में स्थापित किया गया थाइसका मुख्य कार्य शिक्षा एवं समाज कल्याण मंत्रालय को विशेषकर स्कूली शिक्षा के संबंध में सलाह देने और नीति-निर्धारण में मदद करने का है। इसके अतिरिक्त अन्य कार्य हैं शिक्षा के समूचे क्षेत्र में शोधकार्य को सहयोग और प्रोत्साहित करना, उच्च शिक्षा में प्रशिक्षण को सहयोग देना, स्कूलों में शिक्षा

Photos from बी टी सी , उत्तर प्रदेश's post 12/12/2016

बीटीसी की ओर से सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखने हेतु अकादमिक मेरिट से चयन पाए लोगों की टीम निम्न है। निम्न टीम अनिल मौर्या के नेतृत्व में सुप्रीम कोर्ट की लड़ाई लड़ेगी। मैं आप सभी से निम्न टीम को सहयोग देने की अपील करता हूँ।

- जुझारू प्रत्याशी (http://facebook.com/jujharu)

Photos 12/12/2016

माननीय उच्चतम न्यायालय मे अकादमिक मेरिट के पक्ष में पैरवी हेतु #अनिल_कुमार_मौर्य से बेहतरीन कोई नाम नही है।अनिल अपना कार्य पूरी मेहनत लगन और ईमानदारी से कर रहा है। ये बात माननीय उच्चतम न्यायालय के अंतिम निर्णय के बाद स्पष्ट हो जाएगी।
मै और मेरे समस्त जनपद के प्रतिनिधियों से आग्रह करता हूँ की वो अपने जिला में यद्ध स्तर से जुट जाए

बरेली
मैनपुरी
एटा
सुल्तानपुर
रामपुर

केवल इतने जिलो में प्रगति की आख्या मिली है
#शेष_जिला_जल्दी_जग_जाओ
समस्त साथी आर्थिक मानसिक व् शारीरिक रूप से अनिल मौर्या भाई के साथ ही #सुप्रीम_कोर्ट जाए
हमारी नौकरी पर तलवार लटक रही है

जिन लोग को हाइकोर्ट से हटने के बाद ऐसा लग रहा कुछ न होगा ईस्वर ऐसे लोगों को सद्बुद्धि दे।
बाकी बस हर जिले से 25 लोग 2000/हेड के साथ भी आगे आये तो काम हो जाएगा

#ध्यान_रहे- ये केस अब अनिल मौर्या जी जीता सकता है
#हमारी टीम-
अनिल मौर्या
अंकुर त्रिपाठी
जुझारू प्रत्याशी
सुरजीत यादव
विमल मिश्रा
तिलक पाल
अंशुमान श्रीवास्तव

जय श्री हरि

03/12/2016

न्यायालय की लड़ाई हमेशा ईगो त्याग कर लड़नी चाहिए। हालाँकि पैरवी ऐसी होनी चाहिए जैसे आपकी नौकरी का अंतिम दिन हो, ठीक वैसे ही जैसे कहते हैं कि जियो ऐसे जैसे आपके जीवन का अंतिम दिन हो। मैं आशावादी या निराशावादी होने के स्थान पर व्यवहारवादी होना पसन्द करता हूँ। कहने को मैं इस आदेश में भी सकारात्मकता खोज सकता हूँ लेकिन मैं जबर्दस्ती का आशावादी होने के स्थान पर वास्तविकता का व्यवहारवादी होना पसन्द करूँगा। व्यवहारिक होना, आशावाद और निराशावाद का संतुलित मिश्रण है।

टीईटी में 121 (80.67%) नम्बर पाकर भी मैं अकादमिक से हुए अपने चयन को बचाने हेतु समस्त प्रयास करने के विश्वास रखता हूँ न कि चुपचाप खाली बैठ कर, सुप्रीम कोर्ट से निर्णय आने का इंतजार करूँ। यहाँ लड़ाई ईगो की नहीं है, लड़ाई सही और गलत की भी नहीं है। लड़ाई नौकरी बचाने की है। हालाँकि नौकरी टीईटी मेरिट से या टीईटी वेटेज से भी मिल जाएगी, लेकिन क्या हम मेहनत और इंतजार के बाद पाई नौकरी को छोड़कर दुबारा चयन होने में लगने वाले समय को ऐसे ही खाली झेलने को तैयार हैं?

यदि बात करूँ आशावादी होने की तो एक सकारत्मकता अभी भी है और हमेशा रहेगी कि यदि पूर्णतया पात्र होकर भी अकादमिक भर्ती वाले बाहर हुए तो क्या पात्रता पूर्ण न करने वाले शिक्षा मित्र बचेंगे? केवल एक 9बी को फॉलो न करने से अवैध घोषित होने वाले बाहर होंगे और पूरे सर्विस रूल को न फॉलो करने वाले 72,825 चयनित नौकरी करेंगे? नहीं। कदापि नहीं। यदि 15वां और 16वां संशोधन रद्द किया है तब यह भी कहा है कि 15वां संशोधन रद्द होने का अर्थ यह नहीं हो गया कि 12वां संशोधन बहाल हो जाएगा। लेकिन मैं इस तरह की सोच रखना, कायरता समझता हूँ। यह सोच ऐसी हो गई कि हम अपनी हार से दुखी नहीं हैं बल्कि यह सोच कर खुश हैं कि चलो हम तो हारे लेकिन हमारा पड़ोसी भी हारा।

यदि बात करूँ राजनीतिक सन्दर्भ में, यह भी सत्य है कि अब मायावती सरकार भी आ जाए तब भी 100% टीईटी मेरिट नहीं बनाएगी, लेकिन क्या अकादमिक वाले अपने आपको ठगे जाने के बाद भी सपा सरकार के साथ रहना पसंद करेंगे? अकादमिक से चयन पाए लोग न चाहते हुए भी समाजवादी पार्टी को वोट करेंगे, यह ही राजनीति है, पहले आदमी ने लाभ पाने के लिए वोट दिया, अब नुकसान बचाने के लिए वोट देंगे।

अंत में यह कहूंगा, बिना अंत तक लड़े हार मानना कायरता है। नौकरी बड़ी मशक्कत और इंतजार से पाई है, यूँ खाली बैठ कर उसको जाते देखना मुझे गंवारा नहीं। साथ ही यह भी कहता हूँ, अगर अंत में डूबे भी तब बहुतों को साथ लेकर जाएंगे और फिर दोबारा शान से नौकरी में आएँगे।

हरि ॐ।।

- जुझारू प्रत्याशी (http://facebook.com/jujharu)

जुझारू प्रत्याशी Upbtc/uptet/ctet जुझारू प्रत्याशी (बीटीसी) का आधिकारिक पेज। समस्त बीटीसी मित्रो तक पेज को पहुँचाएँ।

03/12/2016

आदेश 61 पेज का है। आदेश के मुख्य बिंदु :

1) 16वां संशोधन अवैध है।
2) टीईटी भारांक को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।
3) सरकार को टीईटी भारांक देना बाध्यकारी है।
4) एनसीटीई गाइड लाइन अवैध नहीं है।
5) बिना भारांक दिए की गई समस्त भर्ती अवैध हैं।
6) सुप्रीम कोर्ट का अंतिम आदेश आने तक यथास्थिति बरकरार रहेगी।

अकादमिक मेरिट समर्थकों के लिए, फ़िलहाल आदेश में कुछ भी सकारात्मक नहीं है। बाकी विस्तार से अध्ययन के बाद।

- जुझारू प्रत्याशी (http://facebook.com/jujharu)

जुझारू प्रत्याशी Upbtc/uptet/ctet जुझारू प्रत्याशी (बीटीसी) का आधिकारिक पेज। समस्त बीटीसी मित्रो तक पेज को पहुँचाएँ।

03/12/2016

बीएड के एक नेता जी ने कहा है कि एनसीटीई की 9बी संविधान के अनुच्छेद 254 की वजह से उचित है। लाहौल विला कुवत। अनुच्छेद 254 में केंद्र के कानून को राज्य के क़ानून पर वरीयता दी गई है। केंद्र का कानून है आरटीई एक्ट और एनसीटीई एक्ट, इन दोनों एक्ट में एनसीटीई को केवल न्यूनतम योग्यता निर्धारित करने की शक्ति है। अर्थात एनसीटीई द्वारा निर्धारित न्यूनतम योग्यता अंतिम और सर्वमान्य होगी। जब केंद्रीय कानून में एनसीटीई को चयन प्रक्रिया में हस्तक्षेप की शक्ति नहीं है और न ही केंद्र ने वह शक्ति किसी और को दी तथा न स्वयं उसका निर्धारण किया तब स्वतः ही अनुच्छेद 254 के तहत वह कार्य राज्य सरकार करेगी। न तो आरटीई एक्ट के सेक्शन 23(3) और न ही सेक्शन 35 (1) में ऐसी कोई भी शक्ति एनसीटीई को दी है, अब नेता जी ने जापानी चश्मा चढ़ा कर हो सकता है कुछ ऐसा लिखा देख लिए हो जिसमें यह शक्ति एनसीटीई को दी गई हो तब बात अलग है।

सेक्शन 23 (3) : The salary and allowances payable to, and the terms and conditions of service of, teachers shall be such as may be prescribed.

सेक्शन 35 (1) : (1) The Central Government may issue such guidelines to the appropriate Government or, as the case may be, the local authority, as it deems fit for the purposes of implementation of the provisions of this Act.

02/12/2016

हाई कोर्ट का आदेश आज भी अपलोड नहीं हुआ। जब तक आदेश नहीं आता है, वास्तविक स्थिति से अवगत नहीं हो सकते हैं। जो तथ्य अब तक ज्ञात हैं, वह यह हैं :

1) 15वां संशोधन अर्थात अकादमिक अंकों पर भर्ती को कोर्ट ने असंवैधानिक घोषित किया है।
2) अकादमिक अंको के आधार पर हुई भर्तियों को अवैध बताया है।
3) एनसीटीई गाइडलाइन के पैरा 9बी को अवैध घोषित करने की मांग करने वाली याचिकाओं को ख़ारिज किया है। किस आधार पर किया, यह आदेश पढ़ने के बाद पता चलेगा।
4) जस्टिस सुधीर अग्रवाल के आदेश जिसमें उन्होंने बीएड वालों के 16वें संशोधन को रद्द कर चयन सूचि किसी नए तरीके से बनाने को कहा, को रद्द कर दिया है।
5) अकादमिक अंको पर नियुक्त लोगों को सुप्रीम कोर्ट से अंतिम निर्णय आने तक सेवा में बने रहने की राहत दी है।

विस्तृत जानकारी आदेश पढ़ कर ही दी जा सकती है। हालांकि आदेश पढ़ने से उपरोक्त तथ्य नहीं बदलेंगे। अतः अकादमिक अंको से नियुक्त लोग फ़िलहाल स्वयं को अवैध ही समझें। सुप्रीम कोर्ट में लड़ाई को तैयार रहें। अपना नेता चुन लें, 50 चिल्लर वकीलों से बेहतर होगा 4 या 5 सीनियर वकील रहें। अतः छोटे छोटे समूहों में जाने के स्थान पर, बड़े व मजबूत समूहों में कोर्ट पहुँचें।

नोट : ठगों से सावधान रहें। वर्तमान स्थिति का फायदा उठाने के लिए कुछ हिस्ट्री शीटर ठग भी सर उठाएंगे, अतः सोच समझ कर अपने नेतृत्व का चुनाव करें। कौन आपका भला चाहता है और कौन अपनी जेंब भरना चाहता है, यह पहचान आप बखूबी कर सकते हैं।

- जुझारू प्रत्याशी (http://facebook.com/jujharu)

02/12/2016

अभी तक हाई कोर्ट का आदेश अपलोड नहीं हुआ है। जो भी बाते चल रही हैं, वह कोर्ट में हुई मौखिक वार्तालाप के आधार पर चल रही हैं। वास्तविक स्थिति का पता आदेश आने के बाद ही चलेगा। अतः धैर्य बनाए रखें। आज आदेश अपलोड होने की पूर्ण सम्भावना है।

24/11/2016

मैं देख रहा हूँ कि कुछ भाई अपने ही साथियों को कुछ वजहों से गालियां बक रहे हैं। यह अत्यंत ही निंदनीय है। किसी को कोई भी अपशब्द न कहे। अकादमिक मेरिट से नौकरी पाए हर व्यक्ति को अब साथ आकर सहयोग करना होगा। कोई इस खुमारी में न रहे कि मेरे तो टीईटी में इत्ते नम्बर हैं तो मैं क्यों परेशान होऊं। यह सोच भयंकर मूर्खतापूर्ण है। 31,098 रूपये प्रतिमाह ने आपको नशेड़ी बना दिया है, अब यदि एक माह भी बिना वेतन के बिताना पड़ गया तो सब दाल आटे का भाव याद आ जाएगा, पड़ोसी जो अब तक मास्टर साहब कहते आएं हैं जब आपको ठलुवा कहकर आपका मजाक उड़ाएंगे और कहेंगे कि मास्टर बन कर बड़ा इतरा रहा था, अब आया लाइन पर, यह सुनकर आप शर्म से पानी पानी हो जाएंगे।

जिनकी शादी हो गई है, वह इस 31,098 और सरकारी नौकरी के अहसास को भली भांति समझ सकते हैं। यह वेतन और अहसास बना रहे इसलिए सभी लोग एकजुट होकर भर्ती को सुप्रीम कोर्ट में बचाने हेतु कमर कस लें। टीईटी में अधिक अंक भी आपको भर्ती रद्द होने से लेकर नई भर्ती आने में लगने वाले समय के मध्य बेरोजगारी का जीवन व्यतीत करने से नहीं रोक पाएंगे। अब समय आ गया है कि आप इस बात को समझें कि हर व्यक्ति अपने लिए लड़ रहा है, आपको व आपके परिवार को कोई अन्य रोटी नहीं खिला जाएगा अतः सर्वप्रथम अपनी नौकरी बचाएं। भर्ती सरकार ने निकाली है, इसमें हमारी गलती नहीं है तब हम क्यों सहन करें? जब टीईटी में अधिक नम्बर और अकादमिक में कम अंक वाले अपनी लड़ाई लड़ सकते हैं, तब अकादमिक मेरिट से चयन पाए लोग क्यों नहीं एकजुट होकर पैरवी कर सकते हैं? अब तक चाहें जो भी विचारधारा रही हो, परन्तु अब पुराने गिले भुलाकर एकजुट होकर सुप्रीम कोर्ट में पैरवी करनी है। किसी भी पुराने संघर्ष के साथी को गाली न दें और सहयोग करें।

- जुझारू प्रत्याशी (http://facebook.com/jujharu)

जुझारू प्रत्याशी Upbtc/uptet/ctet जुझारू प्रत्याशी (बीटीसी) का आधिकारिक पेज। समस्त बीटीसी मित्रो तक पेज को पहुँचाएँ।

24/11/2016

नमस्कार मित्रों, जैसा कि कल मैंने एनसीटीई की 11 फरवरी 2011 की गाइडलाइन के पैरा 9बी की व्याख्या की थी, आज कोर्ट में माहौल बिलकुल वैसा ही था। जज साहब ने अंततः समस्त भर्तियों का भविष्य माननीय सुप्रीम कोर्ट के हाथों में सौंपते हुए अपना पल्ला झाड़ लिया। जज साहब समझ चुके हैं कि फुल बेंच से पैरा 88 में गम्भीर गलती हो गई जो उन्होंने बिना एनसीटीई की शक्तियों का अध्ययन किये ही वेटेज वाली बात कह दी। टीईटी मेरिट वकील 9बी की व्याख्या के नाम पर बस दो बातें बोलते नजर आ रहे थे, कि फुल बेंच ने ऐसा कहा, फुल बेंच ने वैसा कहा और एनसीटीई सर्वोच्च संस्था है इत्यादि। अमा एनसीटीई सर्वोच्च संस्था है, मानते हैं लेकिन किस सन्दर्भ में? एनसीटीई सर्वोच्च संस्था है, न्यूनतम अर्हता निर्धारित करने के लिए, न कि हर कार्य के लिए। ऐसे तो आपका वेतन, सेवा शर्तें सभी कुछ एनसीटीई निर्धारित करने लगेगी। आप यहाँ यह भी भूल रहे हैं कि उस ही बेंच ने यह भी कहा था कि एनसीटीई न्यूनतम योग्यता निर्धारित कर सकती है न कि अधिकतम योग्यता, अर्थात राज्य एनसीटीई द्वारा निर्धारित न्यूनतम योग्यता के अतिरिक्त भी कोई अन्य योग्यता बाध्य कर सकते हैं।

अर्थात एनसीटीई जिस कार्य हेतु सर्वोच्च संस्था है उस ही कार्य पर उसका निर्णय अंतिम होगा परन्तु जिस कार्य के लिए एनसीटीई अधिकृत ही नहीं है, वहां उसका निर्णय अंतिम और सर्वमान्य कैसे हो सकता है। यह बेवक़ूफ़ाना है। चयन प्रक्रिया में हस्तक्षेप का अधिकार एनसीटीई को नहीं है, यह राज्य निर्धारित करेगा क्योंकि नियोक्ता राज्य है और उसके लिए राज्य के पास नियमावली है। रही बात 15वें संशोधन की तो कोई भी चयन का आधार किसी न किसी दोष से ग्रसित है, कोई भी नियम 100% सही नहीं हो सकता है, कमियां हर प्रक्रिया में हैं। समान अधिकार का अर्थ यह नहीं हो गया कि हर दोष पर नियम निरस्त कर दिया जाए अतः उसका बहाल होना सुनिश्चित है क्योंकि पूरे देश में अकादमिक अंको के आधार पर विभिन्न नियुक्तियाँ हो रही हैं और सालों से होती आई हैं अतः अकादमिक मेरिट रद्द करना सम्पूर्ण देश में राजनीतिक तथा संवैधानिक उथल पुथल ले आएगा।

अंत में इतना ही कहूंगा कि टीईटी नेताओं ने जो खाई अकादमिक मेरिट को डुबोने के लिए बनाई थी अब उसमें वह खुद डूबने वाले हैं। 9बी का बचना अब सम्भव नहीं है, उसकी अर्थी का इंतजाम कर लें। और 9बी के साथ जाएंगी आपकी टीईटी मेरिट/वेटेज की कउआरेरे।

- जुझारू प्रत्याशी (http://facebook.com/jujharu)

जुझारू प्रत्याशी Upbtc/uptet/ctet जुझारू प्रत्याशी (बीटीसी) का आधिकारिक पेज। समस्त बीटीसी मित्रो तक पेज को पहुँचाएँ।

23/11/2016

भर्ती में सारा खेल एनसीटीई गाइड लाइन के पैरा 9(बी) का है। एनसीटीई कहती है, वेटेज दिया जाना चाहिए। शिव कुमार शर्मा केस में तीन जजों की पीठ ने, बिना एनसीटीई की शक्तियों का अध्ययन किये, केवल गाइडलाइन के पैरा 9(बी) पर विश्वास करते हुए कह दिया कि वेटेज बाध्य है जबकि वास्तविकता में एनसीटीई के पास ऐसी कोई शक्ति नहीं है जो उसको चयन प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने का पावर देती हो। एनसीटीई अंततः न्यूनतम योग्यता निर्धारित करने वाली संस्था ही मानी जाएगी। हालाँकि हाई कोर्ट में हमारा पक्ष कमजोर है, परन्तु सुप्रीम कोर्ट में हम हर हाल में सफल होंगे।

22/11/2016

अकादमिक मेरिट से चयन पाए बीटीसी के मुर्ख चयनितों सावधान हो जाओ। आज टीईटी बनाम अकादमिक मेरिट केस की सुनवाई इलाहाबाद हाई कोर्ट मुख्य न्यायाधीश की बेंच में हुई। सुनवाई कल भी जारी रहेगी। आज लगभग दो घण्टे तक सुनवाई हुई है। मुकदमे में कुछ भी फैसला आ सकता है। यह विचार कि नौकरी मिलने के बाद कुछ नहीं होगा, बेवक़ूफ़ाना है। यदि ऐसा होता तब कोर्ट सरकार से सिर्फ यह पूछती कि क्या नियुक्ति दे दी? और यदि सरकार कहती कि हाँ नियुक्ति दे दी है तब कोर्ट स्वतः ही मुकदमा खारिज कर देती। लेकिन ऐसा नहीं होता है। अतः मुकदमे को गम्भीरता से लेना शुरू कर दीजिए।

24/08/2016

आज लगभग 3.15लाख शिक्षकों की निगाहें ऊपर आसमान में भगवान् की ओर और नीचे सुप्रीम कोर्ट पर टिकी हैं ।

ऐसे में बस यही दुआ है कि हे ईश्वर किसी योग्य व्यक्ति का अहित न हो।

Want your school to be the top-listed School/college?

Telephone