Ram Gopal Singh

Ram Gopal Singh Ram Gopal Singh is director of NIMS Kanpur. He is a mathematician, academician and social thinker.

भगवान जगन्नाथ जी की रथयात्रा की हार्दिक शुभकामनायें ।16  जुलाई  2026,  गुरुवार । आज से भगवान जगन्नाथ जी की रथयात्रा प्रा...
16/07/2026

भगवान जगन्नाथ जी की रथयात्रा की हार्दिक शुभकामनायें ।
16 जुलाई 2026, गुरुवार । आज से भगवान जगन्नाथ जी की रथयात्रा प्रारम्भ हो रही है । आज आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि है । हर साल आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को भगवान जगन्नाथ अपने भाई बलराम और बहन सुभद्रा के साथ अपनी मौसी के घर जाते हैं । ओडिशा के पुरी शहर में स्थित जगन्नाथ मंदिर में हर साल धूमधाम के साथ रथयात्रा निकाली जाती है । जगन्नाथ मंदिर से तीन सजे धजे रथ रवाना होते हैं । इनमें सबसे आगे बलराज जी का रथ, बीच में बहन सुभद्रा का रथ और सबसे पीछे जगन्नाथ प्रभु का रथ होता है । ओडिशा के पुरी में आज, 16 जुलाई 2026 (आषाढ़ शुक्ल द्वितीया) से शुरू हो गई है । 24 जुलाई तक चलने वाले इस उत्सव में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा के विशाल रथ ( क्रमशः नंदीघोष, तालध्वज, दर्पदलन ) खींचने के लिए लाखों भक्त उमड़ते हैं । भगवान जगन्नाथ का रथ (नंदीघोष) लाल और पीले रंग का 45 फीट ऊंचा होता है, बलभद्र जी का रथ (तालध्वज) लाल और हरे रंग का 44 फीट ऊंचा होता है, और देवी सुभद्रा का रथ (दर्पदलन) लाल व काले रंग का 43 फीट ऊंचा होता है । पद्म पुराण के अनुसार, भगवान जगन्नाथ की बहन ने एक बार नगर देखने की इच्छा जाहिर की थी । तब जगन्नाथ जी और बलभद्र अपनी बहन सुभद्रा को रथ पर बैठाकर नगर दिखाने निकल पड़े । इस दौरान वे मौसी के घर गुंडिचा भी गए और सात दिन ठहरे । तभी से यहां पर रथयात्रा निकालने की परंपरा है । रथ यात्रा का आरंभ 16 जुलाई 2026, गुरुवार से और समापन 24 जुलाई 2026, शुक्रवार को होगा ।

संत कबीरदास जयंती की हार्दिक शुभकामनायें । 29 जून 2026, सोमवार । आज कबीर जयंती है । आज ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा है । ज्ये...
29/06/2026

संत कबीरदास जयंती की हार्दिक शुभकामनायें ।
29 जून 2026, सोमवार । आज कबीर जयंती है । आज ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा है । ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा को महान संत श्री कबीर दास जी का जन्म हुआ था । माना जाता है कि विक्रमी संवत 1455 ( सन् 1398 ई ) में ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा को श्री कबीर दास जी का जन्म हुआ था । माना जाता है कि कबीर दास जी का जन्म काशी में लहरतारा ताल के पास हुआ था । कबीर दास जी के जन्म के संबंध में अनेक किंवदन्तियाँ हैं । इनके जन्म के विषय में यह प्रचलित है कि इनका जन्म स्वामी रामानन्द के आशीर्वाद से एक विधवा ब्राह्मणी के गर्भ से हुआ था । विधवा ब्राह्मणी ने लोक-लाज के डर से इन्हें ‘लहरतारा’ नामक तालाब के पास फेंक दिया । संयोगवश नीरू और नीमा नामक मुस्लिम जुलाहा दम्पति को यह बच्चा मिला और उन्होंने इनका पालन-पोषण किया । नीरू और नीमा बहुत निर्धन थे । वे कबीर दास जी की शिक्षा-दीक्षा का प्रबन्ध न कर सके । जैसे ही कबीर दास जी बड़े हुए उन्हें कपड़ा बुनने का कार्य सिखाया । इस कार्य को वे जीवन पर्यन्त करते रहे और किसी पर आश्रित नहीं रहे । कबीर दास जी का विवाह ‘लोई’ नामक स्त्री से हुआ था । इनके ‘कमाल’ नामक एक पुत्र और ‘कमाली’ नामक एक पुत्री थी । कबीर दास जी वैष्णव संत श्री रामानंद जी के शिष्य थे । कबीरदास ने अपना सारा जीवन ज्ञान देशाटन और साधु संगति से प्राप्त किया । ये पढ़े-लिखे नहीं थे परन्तु दूर-दूर के प्रदेशों की यात्रा कर और साधु-संतों की संगति में बैठकर सभी धर्मों तथा समाज का गहरा अध्ययन किया । अपने अनुभवों को इन्होने मौखिक रूप से कविता में लोगों को सुनाया । भक्ति काल के उस दौर में कबीरदास जी ने अपना संपूर्ण जीवन समाज सुधार में लगा दिया था । कबीरदास निर्गुण ब्रह्म के उपासक थे। उनका मत था कि ईश्वर समस्त संसार में व्याप्त है । उनका मार्ग ज्ञान मार्ग था । इसमें गुरु का महत्त्व सर्वोपरि है । कबीर स्वच्छंद विचारक थे । उन्होंने समाज में व्याप्त समस्त रूढ़ियों और आडम्बरों का विरोध किया । कबीरपंथी इन्हें एक अलौकिक अवतारी पुरुष मानते हैं। कबीर दास जी की मृत्यु सन 1495 ई० में कशी के पास मगहर में हुई । कबीदास की मृत्यु के बाद कबीर दास जी की रचनाओं को उनके पुत्र तथा शिष्यों ने ‘बीजक’ के नाम से संग्रहीत किया । इस बीजक के तीन भाग हैं– (1) सबद (2) साखी (3) रमैनी । बाद में इनकी रचनाओं को ‘कबीर ग्रंथावली’ के नाम से संग्रहीत किया गया। कबीर की भाषा में ब्रज, अवधी, पंजाबी, राजस्थानी और अरबी, फ़ारसी के शब्दों का मेल देखा जा सकता है । उनकी शैली उपदेशात्मक शैली है ।

मातम का पर्व मुहर्रम है आज ।26 जून 2026,  शुक्रवार । आज मोहर्रम महीने की 10वीं  तारीख  है । आज मुस्लिम समुदाय का मातमी प...
26/06/2026

मातम का पर्व मुहर्रम है आज ।
26 जून 2026, शुक्रवार । आज मोहर्रम महीने की 10वीं तारीख है । आज मुस्लिम समुदाय का मातमी पर्व मोहर्रम मनाया जा रहा है । दरअसल मोहर्रम एक महीना है, इसी महीने से इस्लाम धर्म के नए साल की शुरुआत होती है । मुहर्रम महीने के 10 वें दिन को 'आशूरा' कहते है । आशूरा के दिन हजरत रसूल के नवासे हजरत इमाम हुसैन को और उनके बेटे, घरवाले और उनके साथियों (परिवार वाले) को करबला के मैदान में शहीद कर दिया गया था । मोहर्रम की 10 वीं तारीख को हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद में मातम मनाया जाता है । इस दिन हजरत इमाम हुसैन के अनुयायी खुद को तकलीफ देकर इमाम हुसैन की याद में मातम मनाते हैं ।

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की हार्दिक शुभकामनायें।21 जून 2024,  शुक्रवार । आज अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस है । अंतर्राष्ट्रीय य...
21/06/2026

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की हार्दिक शुभकामनायें।
21 जून 2024, शुक्रवार । आज अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस है । अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 21 जून को मनाया जाता है । यह दिन वर्ष का सबसे लंबा दिन होता है और योग भी मनुष्य को दीर्घ जीवन प्रदान करता है । योग दिवस पहली बार 21 जून 2015 को मनाया गया था । अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर योग दिवस मानाने का प्रस्ताव भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 27 सितम्बर 2014 को संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने भाषण में किया था । 11 दिसम्बर 2014 को संयुक्त राष्ट्र में 177 सदस्यों द्वारा 21 जून को " अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस" को मनाने के प्रस्ताव को मंजूरी मिली । 11 दिसंबर 2014 को 193 सदस्यीय संयुक्त राष्ट्र महासभा ने सर्वसम्मति से 'योग के अंतर्राष्ट्रीय दिवस' के रूप में 21 जून को मंजूरी दे दी । पहली बार यह दिवस 21 जून 2015 को मनाया गया । योग व्यायाम का ऐसा प्रभावशाली प्रकार है, जिसके माध्याम से न केवल शरीर के अंगों बल्कि मन, मस्तिष्क और आत्मा में संतुलन बनाया जाता है । यही कारण है कि योग से शारीरिक व्याधियों के अलावा मानसिक समस्याओं से भी निजात पाई जा सकती है । वास्तव में, योग वह क्रिया है, जो शरीर के अंगों की गतिविधियों और सांसों को नियंत्रित करता है । यह शरीर और मन, दोनों को प्रकृति से जोड़कर आन्तरिक और बाहरी ताकत को बढ़ावा देता है । यह केवल शारीरिक क्रिया नहीं है, क्योंकि यह एक मनुष्य को मानसिक, भावनात्मक और आत्मिक विचारों पर नियंत्रण करने के योग्य बनाता है । इसका अभ्यास लोगों के द्वारा किसी भी आयु में किया जा सकता है ।

हैप्पी फादर्स डे ।21  जून  2026,  रविवार । आज फादर्स डे ( पितृ दिवस ) है । प्रति वर्ष जून महीने के तीसरे रविवार को फादर्...
21/06/2026

हैप्पी फादर्स डे ।
21 जून 2026, रविवार । आज फादर्स डे ( पितृ दिवस ) है । प्रति वर्ष जून महीने के तीसरे रविवार को फादर्स डे ( पितृ दिवस ) मनाया जाता है । पिता के सम्मान में फादर्स डे यानी पितृ दिवस मनाया जाता है । लोग इस दिन को अपने पिता के प्रति प्रेम, आदर और सम्मान प्रकट करते हुए उत्सव पूर्वक मनाते है । इस दिन बहुत से बच्चे, किशोर, युवा पिता से केक कटवाते हैं और अपने पिता को उपहार देते हैं । मां की ही तरह हमारे जीवन में पिता का महत्व बेहद खास होता है । मां हमारी जन्मदाता हैं तो पिता पालनहार । पिता भले ही ऊपर से सख्त दिखते हों, लेकिन अंदर से अपने बच्चों के प्रति नर्म ही होते हैं । पिता हमारा भविष्य बनाने के लिए अपने सपनों और ख्वाहिशों को भी भूल जाते हैं और सब कुछ करने को तैयार होते हैं । पिता का महत्व शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता । फादर्स डे मनाने की शुरुआत अमेरिका से हुई थी । साल 1909 में वॉशिंगटन के स्पोकेन के ओल्ड सेंटेनरी प्रेस्बिटेरियन चर्च के एक पादरी ने फादर्स डे मानाने का प्रस्ताव रखा । साल 1916 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति वुडरो विल्सन ने फादर्स डे मनाने के प्रस्ताव को स्वीकृति दी । साल 1924 में तत्कालीन राष्ट्रपति कैल्विन कुलिज ने इसे राष्ट्रीय आयोजन घोषित किया । साल 1966 में तत्कालीन राष्ट्रपति लिंडन जॉनसन ने पहली बार इस खास दिन को हर साल जून के तीसरे रविवार को मनाए जाने का फैसला किया । इस साल फादर्स डे 21 जून को है ।

ईद - उल - अजहा की बहुत बहुत मुबारकबाद ।28 मई 2026,  गुरुवार ।  आज मुसलमानो का एक महत्वपूर्ण त्यौहार ईद उल अजहा है । ईद उ...
28/05/2026

ईद - उल - अजहा की बहुत बहुत मुबारकबाद ।
28 मई 2026, गुरुवार । आज मुसलमानो का एक महत्वपूर्ण त्यौहार ईद उल अजहा है । ईद उल अजहा को बकरा ईद भी कहते है । रमजान के पवित्र महीने की समाप्ति के लगभग 70 दिनों बाद इसे मनाया जाता है । ईद उल अजहा का त्यौहार हिजरी के आखिरी महीने जुल हिज्ज में मनाया जाता है । पूरी दुनिया के मुसलमान इस महीने में मक्का ( सऊदी अरब ) में एकत्रित होकर हज मनाते है । ईद उल अजहा का अक्षरश: अर्थ है त्याग वाली ईद । इस्लामिक मान्यता के अनुसार हज़रत इब्राहिम अपने पुत्र हज़रत इस्माइल को इसी दिन खुदा के हुक्म पर खुदा की राह में कुर्बान करने जा रहे थे, लेकिन अल्लाह ने उसके पुत्र को जीवनदान दे दिया । इसी की याद में यह पर्व मनाया जाता है । इस दिन जानवर की कुर्बानी देना एक प्रकार की प्रतीकात्मक कुर्बानी है ।

विनायक दामोदर सावरकर की जयंती है आज ।28 मई 2026,  गुरुवार । आज महान देशभक्त एवं स्वतंत्रता सेनानी विनायक दामोदर सावरकर क...
28/05/2026

विनायक दामोदर सावरकर की जयंती है आज ।
28 मई 2026, गुरुवार । आज महान देशभक्त एवं स्वतंत्रता सेनानी विनायक दामोदर सावरकर की जयंती है । विनायक दामोदर सावरकर जी वीर सावरकर नाम से जाने जाते है । वीर सावरकर का जन्म 28 मई, 1883 को महाराष्ट्र के नासिक जिले के ग्राम भगूर में हुआ था । बीए पास करने के बाद वह वर्ष 1906 में इंग्लैंड चले गए । लंदन के इंडिया हाउस में रहते हुए सावरकर जी क्रांतिकारी गतिविधियों के साथ लेखन कार्य में जुट गए । इंडिया हाउस उन दिनों राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र था जिसे पंडित श्यामजी चला रहे थे । सावरकर ने ‘फ्री इंडिया’ सोसाइटी का निर्माण किया जिससे वह भारतीय छात्रों को स्वतंत्रता के लिए लड़ने को प्रेरित करते थे । उनकी एक लेखक के तौर पर यहीं से पहचान बननी प्रारंभ हुई । वर्ष 1907 में ‘1857 का स्वातंत्र्य समर’ नामक पुस्तक लिखनी प्रारंभ की। उनके मन में आजादी की अलख जल रही थी । अपने जीवनकाल में संघर्षों के बाद भी उन्होंने विपुल लेखन किया । विनायक दामोदर सावरकर की पूरी जिंदगी रचना, सृजन और संघर्ष का उदाहरण है । आजादी के आंदोलन के वे अप्रतिम नायक हैं । वे क्रांतिकारी, सामाजिक चिंतक, समाज सुधारक, इतिहासकार, उपन्यासकार, कवि, राजनेता एवं संगठनकर्ता थे । सावरकर भारतीय स्वातंत्र्य समर के प्रथम क्रांतिकारी हैं जिन्हें दो बार काला पानी की सजा सुनाई गई । सावरकर पर अंग्रेज अफसर की हत्या की साजिश रचने और भारत में क्रांति की पुस्तकें भेजने के दो अभियोगों में 25-25 वर्ष यानी कुल 50 वर्ष की सजा सुनाई गई थी । वर्ष 1911 में उन्हें अंडमान निकोबार की सेलुलर जेल में भेज दिया गया । इसी जेल में उनके बड़े भाई गणेश भी थे, किंतु दो साल तक दोनों भाई आपस में मिल भी नहीं सके । काला पानी की विभीषिका, यातना और त्रासदी किसी नरक से कम नहीं है । सावरकर ने न सिर्फ इसे भोगा, बल्कि उन्होंने इस अनुभव से ‘काला पानी’ नामक एक उपन्यास भी लिखा । यह उपन्यास अंडमान की जेल में बंद सश्रम कारावास काट रहे बंदियों पर हो रहे अत्याचारों और क्रूरतापूर्ण व्यवहार के बारे में त्रासद वर्णन करता है । महात्मा गांधी उन्हें ‘वीर’ कहकर संबोधित करते थे । सरदार भगत सिंह सावरकर को ‘आदर्श’ के रूप में देखते थे । वीर सावरकर की मृत्यु 26 फरवरी 1966 को हुई ।

विश्व एड्स वैक्सीन दिवस ( वर्ल्ड एड्स वैक्सीन डे ) है आज । 18 मई 2026,  सोमवार । आज विश्व  एड्स वैक्सीन दिवस ( वर्ल्ड एड...
18/05/2026

विश्व एड्स वैक्सीन दिवस ( वर्ल्ड एड्स वैक्सीन डे ) है आज ।
18 मई 2026, सोमवार । आज विश्व एड्स वैक्सीन दिवस ( वर्ल्ड एड्स वैक्सीन डे ) है । हर साल 18 मई का दिन वर्ल्ड एड्स वैक्सीन डे के रूप में मनाया जाता है । इस दिन को मनाने का मकसद लोगों को एड्स के बारे में हर छोटी बड़ी बात बताना और इसकी वैक्सीन के प्रति जागरूक करना है । 18 मई सन् 1997 में मार्गन स्टेट यूनिवर्सिटी में अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने एक भाषण दिया था । अपने भाषण में उन्होंने इस बार को कहा था कि एक दशक के अंदर एड्स को वैक्सीन के माध्यम से खत्म किया जाएगा । इस भाषण के आधार पर ही इस बात का फैसला किया गया था कि 18 मई के दिन ही विश्व एड्स टीकाकरण दिवस मनाया जाएगा ।

अन्तर्राष्ट्रीय संग्रहालय दिवस (International Museum Day) है आज । 18 मई 2026,  सोमवार । आज अन्तर्राष्ट्रीय संग्रहालय दिव...
18/05/2026

अन्तर्राष्ट्रीय संग्रहालय दिवस (International Museum Day) है आज ।
18 मई 2026, सोमवार । आज अन्तर्राष्ट्रीय संग्रहालय दिवस (International Museum Day) है । हर साल 18 मई का दिन अन्तर्राष्ट्रीय संग्रहालय दिवस के रूप में मनाया जाता है । वर्ष 1983 में 18 मई को संयुक्त राष्ट्र ने संग्रहालय की विशेषता एवं महत्त्व को समझते हुए अंतर्राष्ट्रीय संग्रहालय दिवस मनाने का निर्णय लिया इसका मूल उद्देश्य जनसामान्य में संग्रहालयों के प्रति जागरूकता तथा उनके कार्यकलापों के बारे में जन जागृति फैलाना था इसका यह भी एक उद्देश्य था कि लोग संग्रहालयों में जाने अपने इतिहास को अपनी प्राचीन समृद्ध परंपराओ को जाने और समझे ।

विश्व उच्च रक्तचाप दिवस है आज । 17 मई 2026,  रविवार । आज विश्व उच्च रक्तचाप दिवस है । विश्व उच्च रक्तचाप दिवस हर साल 17 ...
17/05/2026

विश्व उच्च रक्तचाप दिवस है आज ।
17 मई 2026, रविवार । आज विश्व उच्च रक्तचाप दिवस है । विश्व उच्च रक्तचाप दिवस हर साल 17 मई को मनाया जाता है । इसका उद्देश्य लोगों को उच्च रक्तचाप के महत्व के बारे में बताना, गंभीर चिकित्सा जटिलताओं के विकास में उच्च रक्तचाप के प्रभाव को समझाना और रोकथाम, पहचान और उपचार के बारे में जानकारी प्रदान करना है । उच्च रक्तचाप को मूक हत्यारा कहा जाता है क्योंकि यह शरीर में धीरे-धीरे बढ़ता है, जिसके कारण हृदय संबंधी कई विकार जैसे कि मायोकार्डियल इन्फार्क्शन, स्ट्रोक, हृदय विफलता आदि विकसित हो जाते हैं । इसके कोई भी लक्षण या संकेत दिखाई नहीं देते ।

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