Rashi Vichar Jyotish Adhyatm
These videos have helped people overcome mental stress, depression, addictions, low self esteem.
1- क्या आपकी नौकरी में व्यवधान आते हैँ ?
2- क्या आपको या आपके किसी परिजन को सर्प दोष, ग्रहण दोष, पितृ दोष, मंगलिक दोष की समस्या है ?
3- क्या आपको संतान सुख नही है, संतान है पर नालायक है ?
4- क्या आपके घर में हमेशा गृह क्लेश रहता है ?
5- क्या अथक परिश्रम के बाद भी धन नहीं आ रहा है ?
6- क्या आपका वैवाहिक जीवन दुःखी है ?
7- क्या आपके परिवार में अक्सर दुर्घटनाएं होती रहती हैं ?
8- क्या आपको व्यापार, नौकरी से लाभ नही होता?
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💥गुरुजी💥 राशि विचार ज्योतिष ,वास्तु एवं आध्यात्मिक कार्यालय 9450127391
"समस्या आपकी- समाधान हमारा"उपाय सहित,
"परंतु कुंडली देखने की फीस जरूर पड़ेगी"।
क्योंकि निशुल्क कुंडली देखने को कहकर , कपट और स्वार्थ पूर्ण -अनावश्यक खर्च नहीं कराते हैं। हमें धर्मराज के सामने सर झुका कर बात नहीं करनी है।" इस सिद्धांत को मैं पूर्ण रूप से मानता हूं।"
✨ धन, वैभव और सफलता प्रदान करने वाला गुरु पुष्य योग
वर्ष 2026 का आखिरी और तीसरा 'गुरु पुष्य योग' | 18 जून, गुरुवार
💥गुरुजी💥 राशि विचार ज्योतिष ,वास्तु एवं आध्यात्मिक कार्यालय 9450127391
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सनातन ज्योतिष में सभी 27 नक्षत्रों में पुष्य नक्षत्र को अत्यंत शुभ एवं सर्वसिद्धिदायक माना गया है। जब गुरुवार के दिन पुष्य नक्षत्र का संयोग बनता है, तब “गुरु पुष्य योग” निर्मित होता है।
यह एक अत्यंत दुर्लभ एवं दिव्य योग है।
वर्ष 2026 में केवल 3 गुरु पुष्य योग बन रहे हैं— 23 अप्रैल, 21 मई और 18 जून। इस वर्ष का यह तीसरा और अंतिम गुरु पुष्य योग है, जो 18 जून 2026 को सूर्योदय से लेकर शाम 04:22 बजे तक रहेगा।
पुष्य नक्षत्र के देवता देवगुरु बृहस्पति तथा स्वामी ग्रह शनि माने गए हैं। यह नक्षत्र कर्क राशि में स्थित होता है और इसे “तिष्य” अथवा “देव नक्षत्र” भी कहा जाता है। “पुष्य” का अर्थ है— पोषण करने वाला। यह नक्षत्र व्यक्ति को आध्यात्मिकता, धर्म, समृद्धि, संरक्षण एवं दिव्य कृपा प्रदान करने वाला माना गया है। शास्त्रों में इसे माता के वात्सल्य और देवकृपा का प्रतीक कहा गया है। इस योग में किया गया शुभ कार्य दीर्घकाल तक फलदायी होता है। यहाँ तक कि श्रीराम के अनुज भरत का जन्म नक्षत्र भी पुष्य ही माना गया है।
गुरु पुष्य में सोना, चाँदी, वाहन, भूमि, वस्त्र, आभूषण एवं नए कार्यों का आरम्भ करना अत्यंत शुभ माना गया है। साथ ही यह मंत्र सिद्धि, साधना, तंत्र-जप एवं लक्ष्मी साधना का सबसे श्रेष्ठ समय है।
नोट: इस योग में विवाह कार्य पूर्णतः वर्जित माना गया है।
इस महापर्व पर स्वर्ण क्रय, धन निवेश, तिजोरी पूजन, लक्ष्मी साधना, मंत्र जाप, व्यापार आरम्भ, गृह/ऑफिस स्थापना, दक्षिणावर्ती शंख स्थापना, एकाक्षी नारियल पूजन और पारद लक्ष्मी पूजन करना विशेष फलदायी होता है।
कमलगट्टे की माला से “ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः” मंत्र का 108 बार जप करें। माँ लक्ष्मी को कमल पुष्प एवं सफेद मिठाई अर्पित करें। तिजोरी में अपामार्ग की जड़ स्थापित करें तथा आर्थिक उन्नति हेतु मोती शंख एवं दक्षिणावर्ती शंख की स्थापना करें।
इस दिव्य गुरु पुष्य योग में किए गए शुभ कर्म अनेक गुना फल प्रदान करते हैं। भगवान विष्णु एवं माँ लक्ष्मी की कृपा आप सभी पर बनी रहे।
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