25/08/2026
क्या औरत कोई लॉलीपॉप है?
दो लॉलीपॉप दिखाकर एक को ढका हुआ और दूसरे पर चींटियाँ बैठी हुई दिखाना और फिर इसे औरत के हिजाब से जोड़ना—मुझे यह उदाहरण न सिर्फ़ बेतुका, बल्कि महिलाओं का अपमान करने वाला लगता है।
औरत कोई लॉलीपॉप, बिस्किट, टॉफी, सोना-चाँदी या कोई वस्तु नहीं है, जिसे ढककर रखने से उसकी “कीमत” बची रहेगी और खुला छोड़ने पर कोई उसे नुकसान पहुँचा देगा।
औरत एक इंसान है। उसकी अपनी सोच है, आत्मसम्मान है, इच्छाएँ हैं और अपने जीवन के फैसले लेने का अधिकार है।
हिजाब पहनना किसी महिला की अपनी आस्था और पसंद हो सकती है—और उस पसंद का सम्मान होना चाहिए। लेकिन किसी दूसरी महिला को सिर्फ़ इसलिए किसी वस्तु से तुलना करना कि उसने हिजाब नहीं पहना, यह तर्क समझाने का सही तरीका नहीं है।
मेरा सवाल बस इतना है—हम औरतों को वस्तुओं से तुलना करना कब बंद करेंगे?
जिस तरह एक पुरुष को अपनी ज़िंदगी अपनी समझ और पसंद से जीने का अधिकार है, उसी तरह एक महिला को भी इंसान समझकर उसकी स्वतंत्रता और गरिमा का सम्मान क्यों नहीं किया जा सकता?
औरत को बचाने के लिए उसे वस्तु मत बनाइए—उसे इंसान समझिए।