23/08/2026
🌱 कृतज्ञता से आत्मिक शांति तक का सफ़र 🌱
✍️ सुख की आवाज़
🙏 नमस्कार जी 🙏
🌿 स्वागत है 🌿
जब कृतज्ञता की बात आती है तो हम आमतौर पर बड़ी उपलब्धियों को याद करते हैं—नया घर, बड़ा लाभ, कोई बड़ी सफलता या घर में किसी नए बच्चे का आना।
लेकिन क्या कृतज्ञता केवल इन्हीं मौकों के लिए है? ❓
हम साँस ले रहे हैं, अच्छी नींद आ जाती है, पेट भरकर रोटी मिल जाती है, प्यास लगने पर पानी मिल जाता है—ये भी तो कितनी बड़ी नेमतें हैं।
जिस घर की रसोई में आटा न हो, उससे रोटी की कीमत पूछिए।
हमारे लिए तो कई बार रोटी भी इतनी मामूली बात बन जाती है कि पता ही नहीं चलता कब खा ली। शरीर रोटी खा रहा होता है और मन कहीं और भटक रहा होता है।
कृतज्ञता केवल मुँह से “धन्यवाद” कहने का नाम नहीं।
कृतज्ञता तो जो मिला है, उसकी कीमत को महसूस करने का नाम है।
हम अपनी उपलब्धियों की ओर बढ़ते हुए हर छोटे कदम के लिए भी कृतज्ञ रहें। हमें लगता है कि हम कर रहे हैं, हमारी मेहनत की वजह से हो रहा है। बेशक मेहनत हम करते हैं, लेकिन यह मेहनत करने की ताकत कहाँ से मिली? ❓
प्रकृति देने वाली है, हम तो उसके दिए बल से आगे बढ़ रहे हैं।
रास्ते में मुश्किलें भी आएँगी, रुकावटें भी आएँगी। वहाँ भी शिकायत करने की जगह थोड़ा अपने भीतर देखें।
शायद यह रुकावट मुझे अपने कदम को दोबारा देखने के लिए मिली है। और अगर यह सावधानी भी उसकी याद की ओर ले आए, तो इसमें भी कृतज्ञता ही है।
फिर मन में यह भरोसा भी बनता है कि अगर वह मेरे साथ है तो कोई भी मुश्किल मेरे लिए अंत नहीं हो सकती।
इस तरह जब मन कृतज्ञता से भरता है तो केवल अपनी नेमतें ही नहीं दिखतीं, दूसरे की कमी भी दिखाई देने लगती है।
किसी भूखे को देखकर उसकी भूख हमें अपनी महसूस होने लगती है। किसी जरूरतमंद की जरूरत देखकर मन में देने का भाव पैदा होता है।
उसकी मदद करके यह न सोचें कि “मैं उसका सहारा बना हूँ।”
बल्कि यह सोचें—
उसे तो मिलना ही था, परमात्मा ने उसे देना ही था।
मेरे ऊपर कृपा हुई कि उसने आज मेरे हाथों अपना काम करवा लिया।
यह भाव सेवा में से अहंकार को निकाल देता है।
इस तरह छोटी-छोटी रोज़ की नेमतों से लेकर किसी के दुःख को महसूस करने और उसके दुःख को कम करने में सहायक बनने तक—अगर हमारा दिन कृतज्ञता में बीते तो भीतर शांति बनी रह सकती है।
प्रकृति का नियम है कि जो हम देते हैं, वह किसी न किसी रूप में बढ़कर हमारे पास लौटता है। लेकिन हमारी मंशा यह न हो कि मैं इसलिए दे रहा हूँ कि बदले में मुझे कुछ बड़ा मिले।
देना इसलिए हो कि मेरे पास है और सामने वाले को जरूरत है।
और जब कभी कोई बहुत बड़ी उपलब्धि मिले तो मन में यही अरदास रहे—
परमात्मा!
तूने मुझे बहुत कुछ दिया है, तेरा बहुत शुक्र है।
कर्ता तू है—यह बात मेरी याद में सदा बनी रहे।
🌱 जब कृतज्ञता जीवन का हिस्सा बन जाती है, तो बाहरी सुखों के साथ भीतर की शांति भी जन्म लेने लगती है। 🌱
🙏 धन्यवाद जी।
📆 23 अगस्त 2026