15/05/2026
जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय जोधपुर
स्नातक प्रवेश प्रारम्भ : विषय चयन सोच-समझकर करें
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) के तहत अब स्नातक स्तर पर मेजर–माइनर प्रणाली लागू हो चुकी है और प्रवेश हेतु ऑनलाइन आवेदन प्रारम्भ हो गए हैं।
नई व्यवस्था में विद्यार्थियों के लिए विषय चयन अत्यंत महत्वपूर्ण हो गया है, क्योंकि अब पूर्व की तरह तीन विषयों में समान रूप से डिग्री का प्रावधान नहीं रहेगा।
अब जो विषय आप “मेजर” के रूप में चुनेंगे, वही आपकी डिग्री का प्रमुख विषय माना जाएगा।
उदाहरण के रूप में —
यदि आपने 12वीं विज्ञान वर्ग से की है और स्नातक में रसायन शास्त्र को मेजर विषय चुना, तो आपकी बीएससी डिग्री का मुख्य विषय Chemistry ही होगा।
इसके साथ आप माइनर विषय के रूप में वनस्पति शास्त्र (Botany) या प्राणी शास्त्र (Zoology) ले सकते हैं।
साथ ही MDC (Multi Disciplinary Course) के अंतर्गत within faculty अन्य विषयों का चयन भी किया जा सकता है।
इसी प्रकार यदि आपने 12वीं कला वर्ग से की है और स्नातक में हिन्दी साहित्य को मेजर विषय चुना, तो आपकी डिग्री का प्रमुख विषय हिन्दी साहित्य ही माना जाएगा।
इसलिए विद्यार्थी एवं अभिभावक विषय चयन करते समय विशेष सावधानी रखें।
अपने रुचि क्षेत्र, भविष्य की प्रतियोगी परीक्षाओं, रोजगार अवसरों एवं उच्च शिक्षा की दिशा को ध्यान में रखकर ही मेजर और माइनर विषय का चयन करें।
-डॉ ओम प्रकाश राजपुरोहित
04/05/2026
संतों के सान्निध्य में शिक्षा का अर्थ है शिक्षा में संवेदनशीलता, सह-अस्तित्व और आध्यात्मिक चेतना का समावेश, संतों के सान्निध्य और गुरुकुल पद्धति का सम्मिलन शिक्षा को केवल रोजगारोन्मुखी नहीं, बल्कि जीवनोन्मुखी बनाता है। जब विद्यार्थी ऐसे वातावरण में शिक्षित होता है, तो वह केवल कुशल पेशेवर ही नहीं, बल्कि एक जागरूक, उत्तरदायी और संस्कारित नागरिक बनता है।
संतों के सान्निध्य में राष्ट्रीय शिक्षा नीति का आलोक, शिक्षा को एक नई दिशा देता है, जहाँ ज्ञान और संस्कार का समन्वय होकर एक आदर्श समाज के निर्माण की सुदृढ़ नींव रखी जाती है, और गुरुकुल परंपरा इस दिशा में एक प्रेरक आदर्श के रूप में पुनः स्थापित होती है।
02/05/2026
राज्य पात्रता परीक्षा की तैयारी
यूजीसी नेट के लिए आवेदन शुरू
16/01/2026
गर्व और प्रसन्नता का क्षण
राजस्थान लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित सहायक प्रोफ़ेसर (भूगोल) परीक्षा की अंतिम चयन सूची में संपूर्ण राजस्थान में द्वितीय स्थान प्राप्त करने पर मेरे विद्यार्थी एवं शोधार्थी श्री दीनदयाल सुथार को हृदय से बधाई एवं शुभकामनाएँ।
एक विद्यार्थी के रूप में उनकी जिज्ञासा, अनुशासन और विषय के प्रति गहरी प्रतिबद्धता तथा एक शोधार्थी के रूप में उनका धैर्य, निरंतर परिश्रम और अकादमिक ईमानदारी सदैव प्रशंसनीय रही है। आज यह उपलब्धि देखकर यह विश्वास और भी दृढ़ होता है कि सच्ची लगन, सतत साधना और आत्मविश्वास से किसी भी लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है।
यह सफलता केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि गुरु–शिष्य परंपरा की जीवंत अभिव्यक्ति है, जो आने वाले विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए प्रेरणास्रोत बनेगी। मुझे गर्व है कि ऐसे मेधावी, कर्मठ और समर्पित विद्यार्थी को मार्गदर्शन देने का अवसर प्राप्त हुआ।
ईश्वर से प्रार्थना है कि आप शिक्षा, शोध और समाज के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित करें और अपने ज्ञान से राष्ट्र की सेवा करें।
उज्ज्वल भविष्य की हार्दिक मंगलकामनाएँ।
11/01/2026
चूना पत्थर (Limestone) – भारत
श्रेणी: प्रमुख औद्योगिक खनिज
मुख्य उपयोग:
सीमेंट निर्माण (सबसे अधिक)
इस्पात उद्योग (फ्लक्स के रूप में)
रसायन उद्योग
निर्माण एवं अवसंरचना विकास
भारत में प्रमुख उत्पादक राज्य:
राजस्थान
आंध्र प्रदेश
मध्य प्रदेश
छत्तीसगढ़
कर्नाटक
तेलंगाना
तमिलनाडु
गुजरात
औद्योगिक विकास की आधारशिला
अवसंरचना परियोजनाओं में महत्वपूर्ण योगदान
खनिज-आधारित अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करता है
भारत विश्व के प्रमुख चूना पत्थर उत्पादक देशों में शामिल है
सीमेंट उद्योग की स्थिरता सीधे चूना पत्थर की उपलब्धता पर निर्भर करती है
09/01/2026
The Haripura meteorite, that fell in Rajasthan on 17 January 1921, represents an important record of extraterrestrial material reaching the Earth. Weighing 279.76 grams, the specimen exhibits distinct circular pores, deep and devoid of any spallation zone, likely formed due to the escape of gases during its passage through the environment.
04/01/2026
वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति के साथ उनकी पत्नी को बंदी बनाए जाने की घटना केवल एक देश तक सीमित घटना नहीं है, बल्कि यह समूची दुनिया के लिए एक गहरी और चिंताजनक चेतावनी है। एमबीएम विश्वविद्यालय के प्रो मिलिंद शर्मा की राजस्थान पत्रिका में छपी टिप्पणी बेहद सार्थक है कि यह घटना इस धारणा को चुनौती देती है कि राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा के लिए केवल अंतरराष्ट्रीय कानूनों और कूटनीतिक समझौतों पर निर्भर रहना पर्याप्त है।
इस संदर्भ में वेनेज़ुएला के पूर्व राष्ट्रपति हूगो चावेज़ का राजनीतिक दृष्टिकोण और अनुभव विशेष रूप से स्मरणीय है। चावेज़ ने अपने शासनकाल में बार-बार यह चेतावनी दी थी कि अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था समानता के सिद्धांत पर नहीं, बल्कि शक्ति और हितों के आधार पर संचालित होती है। वर्ष 2002 में उनके विरुद्ध हुआ तख्तापलट जिसमें कुछ समय के लिए उन्हें सत्ता से अपदस्थ कर दिया गया था इस बात का प्रत्यक्ष उदाहरण था कि लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित नेतृत्व भी अंतरराष्ट्रीय दबावों और आंतरिक–बाहरी साजिशों से सुरक्षित नहीं है।
अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उद्देश्य राष्ट्रों के बीच शांति, सम्मान और सहयोग को बनाए रखना है, किंतु व्यवहार में शक्ति-संतुलन, भू-राजनीतिक हित और सामरिक वर्चस्व कई बार इन कानूनों को अप्रभावी बना देते हैं। जब किसी संप्रभु राष्ट्र के शीर्ष नेतृत्व और उसके परिवार की सुरक्षा भी अंतरराष्ट्रीय नियमों की परिधि में सुरक्षित नहीं रह पाती, तब यह स्पष्ट हो जाता है कि वैश्विक व्यवस्था में कानून से अधिक शक्ति और प्रभाव निर्णायक भूमिका निभा रहे हैं।
यह घटना उन देशों और लोगों के लिए विशेष रूप से आत्ममंथन वाली है, जो अपनी सुरक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं और संधियों पर भरोसा करते हैं। इससे यह संदेश जाता है कि आत्मनिर्भर रक्षा क्षमता, आंतरिक एकता और सुदृढ़ राष्ट्रीय संस्थाएँ ही किसी राष्ट्र की वास्तविक सुरक्षा कवच हो सकती हैं।
संप्रभुता केवल काग़ज़ी अधिकार नहीं, बल्कि उसे सुरक्षित रखने के लिए राजनीतिक संकल्प, रणनीतिक तैयारी और राष्ट्रीय शक्ति का संतुलित विकास अनिवार्य है।