Dr. Om Prakash Rajpurohit

Dr. Om Prakash Rajpurohit Assistant Professor of Geography, Jai Narain Vyas University Jodhpur, Rajasthan India

बांग्लादेश में आंदोलन के दौरान तथाकथित जेन जी द्वारा राष्ट्रीय और सांस्कृतिक प्रतीकों के प्रति अत्यंत अमर्यादित व्यवहार ...
25/07/2026

बांग्लादेश में आंदोलन के दौरान तथाकथित जेन जी द्वारा राष्ट्रीय और सांस्कृतिक प्रतीकों के प्रति अत्यंत अमर्यादित व्यवहार के दृश्य सामने आए थे, तब मन में यह संतोष था कि भारत की युवा पीढ़ी संस्कार, मर्यादा और सभ्यता की उस सीमा को कभी नहीं लांघेगी।
किन्तु इस आंदोलन में हाथों में लिए गए कुछ आपत्तिजनक संदेशों और अभिव्यक्तियों ने चिंता बढ़ाई है। असहमति लोकतंत्र का स्वाभाविक और आवश्यक अंग है, परंतु उसकी अभिव्यक्ति यदि शालीनता, संवेदनशीलता और सांस्कृतिक मर्यादाओं से विमुख हो जाए, तो वह आत्ममंथन का विषय बन जाती है।
यह किसी एक आंदोलन या एक विचारधारा का प्रश्न नहीं, बल्कि हमारी शिक्षा व्यवस्था, पारिवारिक संस्कार और सामाजिक उत्तरदायित्व का प्रश्न है। यदि हमारी युवा पीढ़ी तर्क, संवाद और राष्ट्रहित की भावना के साथ अपनी बात रखने के स्थान पर उग्रता और अमर्यादित अभिव्यक्ति की ओर बढ़ती है, तो यह गंभीर चिंतन का विषय है

डिग्रियाँ पास, परीक्षा फ़ेल!राजस्थान लोक सेवा आयोग की सहायक आचार्य (सांख्यिकी) परीक्षा का परिणाम कई गंभीर प्रश्न छोड़ गय...
19/07/2026

डिग्रियाँ पास, परीक्षा फ़ेल!

राजस्थान लोक सेवा आयोग की सहायक आचार्य (सांख्यिकी) परीक्षा का परिणाम कई गंभीर प्रश्न छोड़ गया। स्थिति यह बनी कि किसी भी श्रेणी का कोई अभ्यर्थी न्यूनतम निर्धारित अंक तक नहीं पहुँच सका

विडंबना देखिए जिन अभ्यर्थियों ने इसी विषय में बी.एससी. और एम.एससी. की डिग्रियाँ प्राप्त कीं, वे सहायक आचार्य की परीक्षा में न्यूनतम अंक भी नहीं ला सके।

अब प्रश्न यह है कि सांख्यिकी कमजोर है, विद्यार्थी कमजोर हैं, विश्वविद्यालयों की पढ़ाई कमजोर है, या फिर परीक्षा और शिक्षण के बीच का संबंध ही सांख्यिकीय त्रुटि Statistical Error बन गया है?

यदि विषय में स्नातक और स्नातकोत्तर डिग्रीधारी भी न्यूनतम योग्यता सिद्ध नहीं कर पा रहे हैं, तो यह केवल अभ्यर्थियों का नहीं, बल्कि हमारी उच्च शिक्षा व्यवस्था, मूल्यांकन प्रणाली और गुणवत्ता आश्वासन पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न है।

लगता है अब आँकड़ों का नहीं, शिक्षा के आँकड़ों का विश्लेषण करने की आवश्यकता है।

स्क्रीन टाइम टू एक्टिविटी टाइम : समय की आवश्यकता मानव ने तकनीक का सृजन अपने जीवन को सरल, सहज और समृद्ध बनाने के लिए किया...
17/07/2026

स्क्रीन टाइम टू एक्टिविटी टाइम : समय की आवश्यकता

मानव ने तकनीक का सृजन अपने जीवन को सरल, सहज और समृद्ध बनाने के लिए किया था, किंतु विडंबना यह है कि आज वही तकनीक धीरे-धीरे हमारे जीवन को अधिक जटिल, अधिक व्यस्त और अधिक एकाकी बनाती जा रही है, जिस उपकरण का उद्देश्य समय बचाना था, वही आज हमारे समय का सबसे बड़ा उपभोक्ता बन बैठा है
ब्रिटेन जैसे विकसित राष्ट्र का किशोरों के लिए सोशल मीडिया पर रात्रिकालीन प्रतिबंध लगाने पर विचार करना केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि पूरे विश्व के लिए एक चेतावनी ह, यह संकेत है कि यदि समय रहते डिजिटल अनुशासन नहीं अपनाया गया, तो आने वाली पीढ़ियाँ तकनीक का उपयोग नहीं करेंगी, बल्कि तकनीक ही उनका उपयोग करने लगेगी।
भारत विश्व का सबसे बड़ा इंटरनेट और मोबाइल उपयोगकर्ता देश है, इस विशाल डिजिटल संसार का सबसे बड़ा भाग हमारी युवा शक्ति है, वही युवा, जिसके कंधों पर विकसित भारत का स्वप्न टिका है, किंतु जब चिंतन की जगह स्क्रॉलिंग, मनन की जगह नोटिफिकेशन, पठन-पाठन की जगह रील्स और खेल के मैदानों की जगह मोबाइल स्क्रीन ले लेती है, तब यह केवल व्यक्तिगत आदत नहीं रहती, बल्कि राष्ट्रीय चिंता का विषय बन जाती है
स्क्रीन की चमक धीरे-धीरे संबंधों की ऊष्मा को मद्धिम कर रही है, संवाद का स्थान संदेशों ने, पुस्तक का स्थान स्क्रीन ने, खेल का स्थान गेम ने और आत्मचिंतन का स्थान अंतहीन डिजिटल शोर ने ले लिया है, परिणामस्वरूप एकाकीपन, मानसिक तनाव, असहिष्णुता और शारीरिक निष्क्रियता हमारे समाज में मौन महामारी की तरह फैल रही है
विषय तकनीक के विरोध करने का नहीं, बल्कि उसके विवेकपूर्ण उपयोग का है, तकनीक साधन बने, साध्य नहीं, सुविधा बने, स्वामी नहीं, मनुष्य का नियंत्रण तकनीक पर रहे, तकनीक का नियंत्रण मनुष्य पर नहीं
युवाओं के हाथों में केवल मोबाइल नहीं, पुस्तक भी हो, केवल की-बोर्ड नहीं, खेल का मैदान भी हो, केवल आभासी मित्र नहीं, वास्तविक संबंध भी हों, केवल स्क्रीन की रोशनी नहीं, प्रकृति का प्रकाश भी हो।
जीवन का वास्तविक स्पर्श किसी स्क्रीन पर नहीं, समाज, प्रकृति, परिवार और कर्म के बीच मिलता है।
इस समय का नारा होना चाहिय

स्क्रीन टाइम टू एक्टिविटी टाइम

28/06/2026

ब्रह्मर्षि खेतेश्वर वेद विज्ञान गुरुकुल, मायलावास में आयोजित आचार्य प्रशिक्षण शिविर में "भारतीय ज्ञान परंपरा में गुरुकुल पद्धति" विषय पर उद्बोधन देने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
परम पूज्य डॉ. ध्यानाराम जी महाराज के मार्गदर्शन में संचालित यह गुरुकुल भारतीय ज्ञान परंपरा के पुनर्जागरण का सशक्त केंद्र बनकर उभर रहा है। सिवाना की गोलाकार पहाड़ियों की रमणीय गोद में स्थित इस तपोभूमि में 200 से अधिक ऋषिकुमार आधुनिक शिक्षा के साथ वेदाध्ययन, संस्कार, गौसेवा, जैविक कृषि एवं कौशल विकास के माध्यम से जीवन को भारतीय दृष्टि से गढ़ रहे हैं।गुरुकुल व्यवस्था की यह जीवंत परंपरा निस्संदेह भारत के ज्ञान वैभव को पुनः प्रतिष्ठित करने का महत्त्वपूर्ण प्रयास है।
हाल ही में राजस्थान के माननीय राज्यपाल महोदय श्री हरिभाऊ किसनराव बागडे जी और क्षेत्र प्रचारक आदरणीय निंबाराम जी ने गुरुकुल के वार्षिक समारोह में अपनी गरिमामयी उपस्थिति से इस प्रयास का उत्साहवर्धन किया।
इस पावन अवसर के लिए गुरुकुल परिवार के प्रति हृदय से आभार एवं भारतीय ज्ञान परंपरा के इस पुनर्जागरण अभियान के प्रति शुभकामनाएँ।
॥ ॐ ॥

लौह अयस्क (Iron Ore) से दो महत्वपूर्ण औद्योगिक उत्पाद बनाए जाते हैं पिग आयरन (Pig Iron) जिसको ढालू लोहा भी कहते हैं और स...
25/06/2026

लौह अयस्क (Iron Ore) से दो महत्वपूर्ण औद्योगिक उत्पाद बनाए जाते हैं पिग आयरन (Pig Iron) जिसको ढालू लोहा भी कहते हैं और स्पंज आयरन (Sponge Iron/DRI)

पिग आयरन ब्लास्ट फर्नेस में निर्मित होता है और इसका उपयोग पाइप, मशीनों के पुर्जों तथा विभिन्न ढलाई उत्पादों के निर्माण में किया जाता है।

स्पंज आयरन (DRI) उच्च गुणवत्ता वाले लौह अयस्क को ठोस अवस्था में कोयला या प्राकृतिक गैस की सहायता से अपचयित (Reduction) करके बनाया जाता है। यह इस्पात (Steel) निर्माण का एक प्रमुख कच्चा माल है।
भारत वर्ष 2003 से विश्व का सबसे बड़ा स्पंज आयरन उत्पादक देश बना हुआ है। वर्ष 2023-24 में देश में लगभग 51.56 मिलियन टन स्पंज आयरन तथा 7.36 मिलियन टन पिग आयरन का उत्पादन हुआ।

जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय जोधपुर स्नातक प्रवेश प्रारम्भ : विषय चयन सोच-समझकर करें राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) क...
15/05/2026

जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय जोधपुर
स्नातक प्रवेश प्रारम्भ : विषय चयन सोच-समझकर करें

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) के तहत अब स्नातक स्तर पर मेजर–माइनर प्रणाली लागू हो चुकी है और प्रवेश हेतु ऑनलाइन आवेदन प्रारम्भ हो गए हैं।
नई व्यवस्था में विद्यार्थियों के लिए विषय चयन अत्यंत महत्वपूर्ण हो गया है, क्योंकि अब पूर्व की तरह तीन विषयों में समान रूप से डिग्री का प्रावधान नहीं रहेगा।

अब जो विषय आप “मेजर” के रूप में चुनेंगे, वही आपकी डिग्री का प्रमुख विषय माना जाएगा।

उदाहरण के रूप में —
यदि आपने 12वीं विज्ञान वर्ग से की है और स्नातक में रसायन शास्त्र को मेजर विषय चुना, तो आपकी बीएससी डिग्री का मुख्य विषय Chemistry ही होगा।
इसके साथ आप माइनर विषय के रूप में वनस्पति शास्त्र (Botany) या प्राणी शास्त्र (Zoology) ले सकते हैं।
साथ ही MDC (Multi Disciplinary Course) के अंतर्गत within faculty अन्य विषयों का चयन भी किया जा सकता है।

इसी प्रकार यदि आपने 12वीं कला वर्ग से की है और स्नातक में हिन्दी साहित्य को मेजर विषय चुना, तो आपकी डिग्री का प्रमुख विषय हिन्दी साहित्य ही माना जाएगा।

इसलिए विद्यार्थी एवं अभिभावक विषय चयन करते समय विशेष सावधानी रखें।
अपने रुचि क्षेत्र, भविष्य की प्रतियोगी परीक्षाओं, रोजगार अवसरों एवं उच्च शिक्षा की दिशा को ध्यान में रखकर ही मेजर और माइनर विषय का चयन करें।
-डॉ ओम प्रकाश राजपुरोहित

संतों के सान्निध्य में शिक्षा का अर्थ है शिक्षा में संवेदनशीलता, सह-अस्तित्व और आध्यात्मिक चेतना का समावेश, संतों के सान...
04/05/2026

संतों के सान्निध्य में शिक्षा का अर्थ है शिक्षा में संवेदनशीलता, सह-अस्तित्व और आध्यात्मिक चेतना का समावेश, संतों के सान्निध्य और गुरुकुल पद्धति का सम्मिलन शिक्षा को केवल रोजगारोन्मुखी नहीं, बल्कि जीवनोन्मुखी बनाता है। जब विद्यार्थी ऐसे वातावरण में शिक्षित होता है, तो वह केवल कुशल पेशेवर ही नहीं, बल्कि एक जागरूक, उत्तरदायी और संस्कारित नागरिक बनता है।
संतों के सान्निध्य में राष्ट्रीय शिक्षा नीति का आलोक, शिक्षा को एक नई दिशा देता है, जहाँ ज्ञान और संस्कार का समन्वय होकर एक आदर्श समाज के निर्माण की सुदृढ़ नींव रखी जाती है, और गुरुकुल परंपरा इस दिशा में एक प्रेरक आदर्श के रूप में पुनः स्थापित होती है।

राज्य पात्रता परीक्षा की तैयारीयूजीसी नेट के लिए आवेदन शुरू
02/05/2026

राज्य पात्रता परीक्षा की तैयारी
यूजीसी नेट के लिए आवेदन शुरू

02/02/2026

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