प्रिय अभ्यर्थियों
दिनाक 18.06.2017 को महारानी लक्ष्मीबाई के बलिदान दिवस के पुण्य अवसर पर प्रातः 10.30 बजे विश्वविद्यालय के गाँधी ऑडिटोरियम मे स्वतन्त्रता संग्राम सेनानियो का सम्मान किया जाना है।मुख्य अतिथि के रूप मे माननीय विधान सभा अध्यक्ष श्री हृदयनारायण दीक्षित एवं अध्यक्ष के रूप मे माननीय कुलपतिजी कार्यक्रम मे उपस्थित रहेगें।
माननीय कुलपति जी के आदेशानुसार आप सभी शोध छात्र/छात्राओं से अनुरोध करना है कि उक्त कार्यक्रम मे प्रातः 10.30 बजे अपनी उपस्थिति दर्ज कराना सुनिश्चित करें।
आभार
डॉ संदीप सिंह वर्मा
शोध सेल।
BU Jhansi Ph.D 2015
Its a groups of scholars who are engaging in Research work at Bundelkhand University. it provides updates and news for their social & academic activity.
16/03/2017
The ‘fatwa’ against Assam singer Nahid Afreen that never was While there was a pamphlet campaign to shut down the event the 16-year-old was to perform in, a top Assam cleric says there is no fatwa against it.
28/11/2016
Top 10 points & features for PhD degree under new UGC MPhil/PhD Regulations 2016 | SkillOutlook.com New Delhi: Degree of Doctor of Philosophy or PhD is amongst top honoured degrees both in India and the global higher education system. PhD is …
All the RDC will be held from 7 Nov to 30 Nov
Interviews will be conducted for 2016 Phd batches !!!
Top luck !!!
Result will be out soon......
Comment ur result by your confidence...
25/06/2016
Admit cards are available now for 5 july 2016 course work final examination
19/05/2016
Terror of 23 May.......is diminishing !!!
the date of evaluation of session is about to 23 May 2016
21/04/2016
एक तरफ 12 हजार अफगान .....तो दूसरी तरफ 21 सिख .......
अगर आप को इसके बारे नहीं पता तो आप अपने इतिहास से बेखबर है।
आपने "ग्रीक सपार्टा" और "परसियन" की लड़ाई के बारे मेँ सुना होगा ...... इनके ऊपर "300" जैसी फिल्म भी बनी है ....पर अगर आप "सारागढ़ी" के बारे मेँ पढोगे तो पता चलेगा इससे महान लड़ाई सिखलैँड मेँ हुई थी ...... बात 1897 की है .....
नॉर्थ वेस्ट फ्रंटियर स्टेट मेँ 12 हजार अफगानोँ ने हमला कर दिया ...... वे गुलिस्तान और लोखार्ट के किलोँ पर कब्जा करना चाहते थे ....
इन किलोँ को महाराजा रणजीत सिँघ ने बनवाया था ..... इन किलोँ के पास सारागढी मेँ एक सुरक्षा चौकी थी ....... जंहा पर 36 वीँ सिख रेजिमेँट के 21 जवान तैनात थे ..... ये सभी जवान माझा क्षेत्र के थे और सभी सिख थे ..... 36 वीँ सिख रेजिमेँट मेँ केवल साबत सूरत (जो केशधारी हों) सिख भर्ती किये जाते थे ....... ईशर सिँह के नेतृत्व मेँ तैनात इन 20 जवानोँ को पहले ही पता चल गया कि 12 हजार अफगानोँ से जिँदा बचना नामुमकिन है .......
फिर भी इन जवानोँ ने लड़ने का फैसला लिया और 12 सितम्बर 1897 को सिखलैँड की धरती पर एक ऐसी लड़ाई हुयी जो दुनिया की पांच महानतम लड़ाइयोँ मेँ शामिल हो गयी ..... एक तरफ 12 हजार अफगान थे .....
तो दूसरी तरफ 21 सिख .......
यंहा बड़ी भीषण लड़ाई हुयी और 600-1400 अफगान मारे गये और अफगानोँ की भारी तबाही हुयी ..... सिख जवान आखिरी सांस तक लड़े और इन किलोँ को बचा लिया ........ अफगानोँ की हार हुयी ..... जब ये खबर यूरोप पंहुची तो पूरी दुनिया स्तब्ध रह गयी ......ब्रिटेन की संसद मेँ सभी ने खड़ा होकर इन 21 वीरोँ की बहादुरी को सलाम किया ..... इन सभी को मरणोपरांत इंडियन ऑर्डर ऑफ मेरिट दिया गया ....... जो आज के परमवीर चक्र के बराबर था ......
भारत के सैन्य इतिहास का ये युद्ध के दौरान सैनिकोँ द्वारा लिया गया सबसे विचित्र अंतिम फैसला था ...... UNESCO ने इस लड़ाई को अपनी 8 महानतम लड़ाइयोँ मेँ शामिल किया ...... इस लड़ाई के आगे स्पार्टन्स की बहादुरी फीकी पड़ गयी ...... पर मुझे दुख होता है कि जो बात हर भारतीय को पता होनी चाहिए ...... उसके बारे मेँ कम लोग ही जानते है .......ये लड़ाई यूरोप के स्कूलो मेँ पढाई जाती है पर हमारे यहा जानते तक नहीँ ........
किसी भी राष्ट्र की जिंदाबाद कहना देशद्रोह नहीं होना चाहिये चाहे वह दो सौ साल पुराना शत्रू इंग्लेण्ड हो या फिर छ दशक पुयाना पाकिस्तान। जब भी किसी राष्ट्र की जिंदाबाद बोली जाती है तो उसके केन्द्र में सेना की गोलियों से छलनी लाशें नहीं होती बल्कि वह निर्दोष अवाम होती है जिसकी दूसरे राष्ट्र से कोई निजी दुश्मनी नहीं है मगर युद्ध के दौरान उसे भी पिसना पड़ता है। श्री श्री के कार्यक्रम में जो नारे लगे हैं उनका मतलब यह न निकाला जाये कि वे नारे देश के खिलाफ हैं बल्कि पाकिस्तान को यह खुला पैगाम कि दिल्ली में आज भी पाकिस्तान को जिंदाबाद कहा जा सकता है सिर्फ इसलिये कि नफरतों की ऊंची होती दीवार को हिलाया जा सके।
लड़ाई में तो जानें तक गईं हैं
मौहब्बत में कोई खतरा नहीं है।
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