04/03/2026
एक और होली यूँ ही गुजर गई… और मैं फिर घर नहीं जा पाया.
सुबह आंख खुली तो बाहर से 'होली है!' की आवाजें आ रही थीं. बच्चों की हंसी, रंग से भरी बाल्टियों की छींटें, DJ से आ रही गानों की धुन...सब कुछ पहले जैसा था. बस मैं पहले जैसा नहीं रहा.
कमरे की दीवारें आज कुछ ज़्यादा खामोश थीं. खिड़की से झांककर देखा तो हर तरफ रंग ही रंग थे, लेकिन मेरे हिस्से बस सन्नाटा आया. लगा जैसे बाहर पूरा शहर जश्न मना रहा है और अंदर कोई चुपचाप बैठा है... खुद से नजरें चुराता हुआ.
ऑफिस की छुट्टी नहीं मिली... या सच कहूं तो पैसों की मजबूरी ने फिर एक बार दिल को समझा दिया 'अभी नहीं, बाद में.'
हर बार की तरह इस बार भी टिकट देखते-देखते मोबाइल बंद कर दिया. सोचा, अगले साल पक्का. लेकिन ये 'अगला साल' हर बार आज को खा जाता है.आज भी जब गांव को याद करते हैं तो मन खुश हो जाता हैं. घर पर आज भी लोग रंग घोला रहें होंगे.
एक दूसरे पर फेक रहें होंगे. गुझिया की खुशबू पूरे घर में फैली होगी. सब खा रहें होंगे... लेकिन हम नहीं पहुंच पाए... हम कमरे में बैठ कर दोस्तों और भाइयों की की फोटो देख रहें... वही पुरानी छत, वही टोली, वही शोर... बस इस बार मैं फ्रेम से बाहर था. कभी जो होली बिना हम सब के शुरू नहीं होती थी, अब वहीं होली हम सब के बिना भी पूरी हो जाती है.
पहले होली का मतलब होता था रात में होलिका दहन की तैयारी करना, सुबह से पिचकारी भरना, गुझिया छुपा-छुपाकर खाना, और शाम तक पहचान में ना आना. इस बीच क्रिकेट का भी खूब शोर होता था. अब होली का मतलब है व्हाट्सऐप स्टेटस देखना और ‘हैप्पी होली’ का रिप्लाई भेजना.
सच कहूं तो अंदर थोड़ा सा नहीं...बहुत मलाल है. लेकिन बाहर सबको यही दिखता है. 'सब चंगा सी.' स्टेटस पर स्माइल, कॉल पर हंसी... और दिल में एक खाली सा कोना.
स्टेटस पर स्माइल, कॉल पर हंसी... और दिल में एक खाली सा कोना.
आज समझ आता है, बचपन में जो रंग चेहरे पर लगते थे, वो दिल तक उतर जाते थे. अब रंग महंगे नहीं हैं, पर उन्हें लगाने का वक्त और साथ बहुत महंगा हो गया है. कभी-कभी डर लगता है... कहीं ऐसा न हो कि एक दिन पैसे तो बहुत हों, पर वो लोग पास न हों जिनके साथ रंग खेलना था.
शायद बड़े होने का मतलब यही है. त्योहारों से ज्यादा जरूरी बन जाते हैं टारगेट, रंगों से ज्यादा भारी हो जाते हैं खर्चे और अपनों से ज्यादा पास आ जाती हैं जिम्मेदारियां.
आज फिर होली बीत गई...
चेहरे पर रंग नहीं लगा,
पर दिल पर एक और साल का फासला जरूर लग गया. अब त्योहार कैलेंडर में रह जाते हैं,
और हम जिम्मेदारियों में.
उम्मीद है अगली होली घर पर होगी. 🌸 सभी हो र