07/09/2020
Best Maths Home Tutor In Jhansi
BEST MATHS HOME TUTOR:-
9th,10th,11th,12th
CBSE, ICSE, ISC
07/09/2020
Dear teachers
Please is video Ko jarur dekhiye.
*गुरु पूर्णिमा के अवसर पर मेरे जीवन मे जिन्होंने तनिक भी ज्ञान अर्पण किया उन सभी गुरूओं को प्रणाम करता हूँ*
*कुछ लोग मुझसे ज्ञान में श्रेष्ठ है..*
*कुछ लोग मुझसे संस्कार में श्रेष्ठ है..*
*कुछ लोग मुझसे बल में श्रेष्ठ है..*
*कुछ लोग मुझसे धन में श्रेष्ठ है..*
*कुछ लोग मुझसे सेवा कार्यो में श्रेष्ठ है..*
*कुछ लोग मुझसे भोलेपन में श्रेष्ठ है..*
*इसका मतलब प्रत्येक व्यक्ति किसी न किसी रूप में मुझसे श्रेष्ठ अवश्य है। अतः मैं सभी श्रेष्ठ व्यक्तिओ को हृदय की गहराइयों से प्रणाम करतI हूं*.....🙏🏻
*Teaching is the nobel profession*
शिक्षक का पेशा कितना महान है, इसका उदाहरण आज मुझे मुंशी प्रेमचंद की कहानी *बोध* में पढ़ने को मिला।
इस कहानी के पात्र एक शिक्षक पंडित चंद्रधर अपनी नौकरी से संतुष्ट नहीं है तथा मन ही मन कुढते रहते हैं। उनके पड़ोसी ठाकुर अतिबल सिंह थानेदार है तथा उनके रौब के कारण उनके घर में हर तरह का ठाठ रहता है, साथ ही दूसरे पड़ोसी बैजनाथ तहसील में नायब तहसीलदार है उनका भी पूरे गांव में रौब है।यद्यपि चंद्रधर जी का वेतन इन दोनों के बराबर है परंतु पड़ोसियों की ऊपरी आय ज्यादा होने के कारण उनका शाही रहन सहन व पूरे गांव में इज्जत के कारण शिक्षक महोदय हमेशा मन मसोसकर रह जाते हैं। एक बार थानेदार साहब व नायब साहब दोनों अयोध्या की यात्रा का कार्यक्रम बनाते हैं तथा शिक्षक महोदय को अपने खर्चे पर तीर्थ यात्रा करने का प्रलोभन देकर सहयोग के लिए साथ में ले लेते हैं। जब ट्रेन में चढ़ते हैं तो थानेदार साहब का परिवार व नायब साहब का परिवार अलग अलग हो जाता है। थानेदार साहब के साथ शिक्षक महोदय रेल में चढ़ते हैं। वहां पर बहुत ज्यादा भीड़ तथा दो आदमी सीट पर सोए हुए थे जब थानेदार साहब ने एक आदमी को उठने को कहा तो उसने कहा कि मैं बिल्कुल नहीं उठूंगा तेरी थानेदारी झाड़नी है तो थाने में जा। तूने एक बार मेरे को झूठे मामले में फंसाया था तथा रिश्वत की राशि ले कर छोड़ा था ।अब तो खड़ा रह। दूसरे यात्री को सीट देने के लिए कहते हैं तो दूसरा यात्री भी थानेदार साहब को उलाहना देता है कि एक बार बिना फालतू आपने मुझे डंडे मारे थे आप तो खड़े रहिए। जैसे तैसे दूसरे स्टेशन तक यात्रा पूरी करते हैं जब स्टेशन आता है थानेदार सपरिवार नीचे उतरते हैं तो ट्रेन के दूसरे यात्री उनका सामान नीचे फेंक देते हैं।जैसे तैसे दूसरे डिब्बे में सवार होते है। दूसरी तरफ नायब तहसीलदार साहब रेल के दूसरे डिब्बे में शराब पीना शुरु कर देते हैं। दम घुटता है तथा उल्टी होना शुरू होती है तो लखनऊ से आगे उतर जाते हैं। अपने मित्र को उतरा हुआ देखकर थानेदार साहब भी उतर जाते हैं तथा शिक्षक महोदय भी साथ में उतर जाते हैं। वहां पर एक डॉक्टर के पास जाते हैं तो डॉक्टर पुराना परिचित निकलता है और नायब तहसीलदार साहब को कहता है कि एक बार आपने कचहरी में मेरे से रिश्वत की राशि ली थी अब आप को इलाज के लिए पहले फीस देनी होगी फिर आप का इलाज शुरू होगा। ऊंची फीस पर इलाज शुरू होता है चार-पांच दिन में सही होने पर जब अयोध्या पहुंचते हैं तो जगह नहीं मिलती है और खुले आसमान में परिवार सहित डेरा जमाते हैं। रात में बरसात शुरू हो जाती है । उसी समय एक नौजवान लालटेन लिए हुए उधर से गुजरता है शिक्षक महोदय की आवाज सुन कर पास पहुंचता है तथा उनसे पूछता है कि आप शिक्षक चंद्रधर जी है क्या? जब शिक्षक महोदय पूछते हैं आप कौन हैं तब वह कहता है कि मैं पहली व दूसरी कक्षा में आपके पास पढ़ा हुआ हूं। मेरे पिताजी आपके गांव में नौकरी करते थे । अब मैं अयोध्या में नगर पालिका में नौकरी कर रहा हूं। आप मेरे घर पधारिए जब शिक्षक चंद्रधर उनसे कहते हैं कि हम 10 से ज्यादा है तो वह कहता कोई बात नहीं मेरे पास एक अलग से मकान है। वहां आप सभी आराम से रहिएगा। वह उनको सादर घर ले जाता है। लजीज व्यंजन बनाकर भोजन करवाता है, तथा साथ में रहकर अयोध्या में प्रत्येक धाम का दर्शन करवाता है। कई दिनों बाद जब वह वापस रवाना होते हैं तब वह स्टेशन पहुंचाने आता है तथा सजल नेत्रों से पंडित जी के चरण छू कर प्रणाम करता है।
शिक्षक चंद्रधर जी जब घर पहुंचते हैं तब उनके स्वभाव में बड़ा परिवर्तन हो जाता है। अब उनको अपने शिक्षक होने पर गर्व होता है तथा फिर कभी दूसरे विभाग में जाने की चेष्टा नहीं करते हैं.......
सबसे महान कार्य शिक्षा प्रदान करना है।
*अपने शिक्षक होने पर गर्व कीजिए*
अन्य ग्रुप से साभार
गुरू और ज्ञान
▪🙏🏻... गुरु कोई व्यक्ति नहीं, कोई शरीर नहीं,
गुरु एक तत्व है , एक शक्ति है ।
गुरु यदि शरीर होता,तो इस छोटी सी दुनिया में,एक ही गुरु पर्याप्त होता।
गुरु एक भाव है,गुरु श्रद्धा है,गुरु समर्पण है।
आपका गुरु आपके व्यक्तित्व का परिचय है।
कब कौन, कैसे आपके लिये
गुरु साबित हो,यह आप की दृष्टि एवं मनोभाव पर निर्भर करता है ।
गुरु प्रार्थना से मिलता है ।
गुरु समर्पण से मिलता है,
गुरु दृष्टा भाव से मिलता है,
गुरु किस्मत से मिलता है ।
और..........
गुरु किस्मत वालों को मिलता है ।
🌹🌹 सीताराम 🌹🌹
क्लास रूम में प्रोफेसर ने एक सीरियस टॉपिक पर चर्चा
प्रारंभ की।
😂😂😂😂😂
जैसे ही वे ब्लैकबोर्ड पर कुछ लिखने के लिए पलटे तो तभी
एक शरारती छात्र ने सीटी बजाई।
प्रोफेसर ने पलटकर सारी क्लास को घूरते हुए "सीटी
किसने मारी" पूछा,
लेकिन किसी ने जवाब नहीं दिया।
प्रोफेसर ने शांति से अपना सामान समेटा और आज की
क्लास समाप्त बोलकर, बाहर की तरफ बढ़े।
स्टूडेंट्स खुश हो गए कि, चलो अब फ्री हैं।
अचानक प्रोफेसर रुके, वापस अपनी टेबल पर पहुँचे और
बोले---" चलो, मैं तुम्हें एक कहानी सुनाता हूँ ,
इससे हमारे बचे हुए समय का उपयोग भी हो जाएगा। "
सभी स्टूडेंट्स उत्सुकता और इंटरेस्ट के साथ कहानी सुनने
लगे।
प्रोफेसर बोले---" कल रात मुझे नींद नहीं आ रही
थी तो मैंने सोचा कि, कार में पेट्रोल भरवाकर ले आता हूँ
जिससे सुबह मेरा समय बच जाएगा।
पेट्रोल पम्प से टैंक फुल कराकर मैं आधी रात को
सूनसान पड़ी सड़कों पर ड्राइव का आनंद लेने लगा।
अचानक एक चौराहे के कार्नर पर मुझे एक बहुत खूबसूरत
लड़की शानदार ड्रेस पहने हुए अकेली खड़ी नजर आई।
मैंने कार रोकी और उससे पूछा कि,
क्या मैं उसकी कोई सहायता कर सकता हूँ तो उसने कहा
कि,
उसे उसके घर ड्रॉप कर दें तो बड़ी मेहरबानी होगी।
मैंने सोचा नींद तो वैसे भी नहीं आ रही है ,
चलो, इसे इसके घर छोड़ देता हूँ।
वो मेरी बगल की सीट पर बैठी।
रास्ते में हमने बहुत बातें कीं।
वो बहुत इंटेलिजेंट थी, ढेरों
टॉपिक्स पर उसका कमाण्ड था।
जब कार उसके बताए एड्रेस पर पहुँची तो उतरने से
पहले वो बोली कि,
वो मेरे नेचर और व्यवहार से बेहद प्रभावित हुई है और
मुझसे प्यार करने लगी है।
मैं खुद भी उसे पसंद करने लगा था।
मैंने उसे बताया कि, " मैं यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर हूँ। "
वो बहुत खुश हुई
फिर उसने मुझसे मेरा मोबाइल नंबर लिया और
अपना नंबर दिया।
अंत में उसने बताया की, उसका भाई भी
यूनिवर्सिटी में ही पढ़ता है और उसने मुझसे
रिक्वेस्ट की कि,
मैं उसके भाई का ख़याल रखूँ।
मैंने कहा कि, " तुम्हारे भाई के लिए कुछ भी करने पर
मुझे बेहद खुशी होगी।
क्या नाम है तुम्हारे भाई
का...?? "
इस पर लड़की ने कहा कि, " बिना नाम बताए भी
आप उसे पहचान सकते हैं क्योंकि वो सीटी बहुत
ज्यादा और बहुत बढ़िया बजाता है। "
जैसे ही प्रोफेसर ने सीटी वाली बात की तो,
तुरंत क्लास के सभी स्टूडेंट्स उस छात्र की तरफ
देखने लगे, जिसने प्रोफ़ेसर की पीठ पर सीटी
बजाई थी।
प्रोफेसर उस लड़के की तरफ घूमे और उसे घूरते हुए बोले-
" बेटा, मैंने अपनी पी एच डी की डिग्री,
मटर छीलकर हासिल नहीं की है,
निकल क्लास से बाहर...!! " 😂😂😂
सफलता का कोई एक पंथ नहीं,
विफलता की गोद में ही जीत है
हारकर भी जो नहीं हारा कभी,
सफलता उसके हृदय का गीत है
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