SK Brother Group

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Group :- Sk Brother Group

Work job:- Dropping Jog Peasing

**Work hours:- 24 hours

Group holder's name :- Sani Ahamad

Contact number:-8980683612,8160968528

21/03/2026
21/03/2026

eid mubarak

03/03/2026

Warmest wishes on Holi

10/02/2026

क्या आप जानते हैं?
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BNS की धारा mungra badshahpur

04/02/2026

वायरल दावा क्या कहता है?

“ममता बनर्जी बार काउंसिल में रजिस्टर्ड नहीं हैं, फिर भी सुप्रीम कोर्ट में खड़े होकर बहस कर रही हैं।
जबकि आम नागरिक बिना बार काउंसिल रजिस्ट्रेशन जिला अदालत में भी जिरह नहीं कर सकता।”

👉 यह दावा आधा सच + आधा भ्रम है।
⚖️ कानून क्या कहता है? (बिल्कुल स्पष्ट)

1️⃣ क्या कोई आम नागरिक बिना Bar Council रजिस्ट्रेशन बहस कर सकता है?
❌ नहीं। बिल्कुल नहीं।
Advocates Act, 1961 के अनुसार:
सिर्फ वही व्यक्ति कोर्ट में “argue / plead” कर सकता है
जो Bar Council में पंजीकृत अधिवक्ता हो।

जिला अदालत हो, हाईकोर्ट हो या सुप्रीम कोर्ट —
👉 जिरह और बहस सिर्फ अधिवक्ता कर सकता है।
2️⃣ फिर ममता बनर्जी कोर्ट में कैसे बोलीं?

यहाँ सबसे ज़रूरी फर्क समझिए 👇
🔸 ममता बनर्जी ने:
✔️ खुद को “Advocate” बताकर बहस नहीं की
✔️ जिरह नहीं की
✔️ कानूनी दलीलें formally नहीं रखीं

उन्होंने क्या किया? 👉 Bench की अनुमति से अपनी बात रखी
👉 एक याचिकाकर्ता / राज्य की executive head के रूप में factual submission दी

⚠️ यह arguing the case नहीं कहलाता
⚠️ यह pleading / cross-examination नहीं है
3️⃣ क्या यह Bar Council के ऊपर है?
❌ नहीं। बिल्कुल नहीं।

Bar Council का अधिकार:

“कौन advocate है और कौन बहस कर सकता है”
Supreme Court का अधिकार:
किसे सुनना है, किस सीमा तक सुनना है
👉 Bench की अनुमति सर्वोच्च होती है,
लेकिन वह वकील बनने की छूट नहीं देती।

4️⃣ आम नागरिक और ममता बनर्जी में फर्क क्यों?
क्योंकि:
वह मामले की याचिकाकर्ता हैं
वह राज्य की मुख्यमंत्री (executive head) हैं
और उनके साथ:
कपिल सिब्बल
श्याम दीवान
जैसे वरिष्ठ अधिवक्ता पहले से मौजूद थे

👉 कोर्ट ने खुद कहा:
“आपके वकील पहले ही सारी दलीलें रख चुके हैं।”
यानि: ✔️ बहस वकीलों ने की
✔️ बात रखने की अनुमति उन्हें दी गई

🔥 वायरल लाइन:
“देश में जूता सबसे बड़ा है… जो किसी में पड़ा है”
⚖️ कानूनी रूप से यह कथन तथ्य नहीं, भावना है।
कानून भावना से नहीं, प्रक्रिया से चलता है।

🧠 अंतिम निष्कर्ष (एकदम साफ)
✅ यह सच है कि बिना Bar Council रजिस्ट्रेशन कोई भी व्यक्ति कोर्ट में बहस नहीं कर सकता

❌ यह गलत है कि ममता बनर्जी ने कानून तोड़कर बहस की
❌ यह गलत है कि Bar Council की अवहेलना हुई

✔️ उन्होंने Bench की अनुमति से सीमित रूप में अपनी बात रखी,
जो संविधान और न्यायिक परंपरा के भीतर है।

04/02/2026

क्रिमिनल केस में जुर्म स्वीकार कैसे लिखा जाएगा सीखें

03/02/2026

Group: SK Brother Group
Work Job: Dropping Jog Peasing
Service Type: 24 hours
Group Holder's Name: Sani Ahamad
Contact Number: 8980683612, 8160968528

01/02/2026

I love you ammi

01/02/2026

झारखंड हाई कोर्ट के जस्टिस एसएन प्रसाद और जस्टिस एके राय की खंडपीठ में पति द्वारा दाखिल वैवाहिक अधिकारों की बहाली से संबंधित मामले में फैमिली कोर्ट के आदेश को निरस्त कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि पत्नी को पति के साथ रहने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता, खासकर तब जब उसने मानसिक और शारीरिक क्रूरता के गंभीर आरोप लगाए हों।

अदालत ने धनबाद फैमिली कोर्ट द्वारा 10 मई, 2024 को पारित आदेश को गलत मानते हुए पलट दिया और पत्नी की अपील स्वीकार कर ली। इस मामले में विवाहिता और अपने पति से लंबे समय से अलग रह रहे हैं। फैमिली कोर्ट ने पत्नी को पति के साथ रहने का निर्देश दिया था, जिसे हाई कोर्ट ने असंवैधानिक और तथ्यों के विपरीत बताया।

हाई कोर्ट में दायर अपनी याचिका में विवाहिता ने आरोप लगाया कि उसके पति और ससुराल वालों ने दहेज की मांग को लेकर उसके साथ शारीरिक मारपीट और मानसिक क्रूरता की। उसने यह भी कहा कि शादी के समय पति की नौकरी के बारे में गलत जानकारी दी गई थी।

विवाहिता ने कोर्ट को यह भी बताया कि वह 2018 से अलग रह रही है और उसके पति और अन्य लोगों के खिलाफ धारा दहेज प्रताड़ना सहित आपराधिक मामला दर्ज किया गया है।

कोर्ट ने अपने निर्णय में कहा कि फैमिली कोर्ट ने सबूतों का पूरी तरह से मूल्यांकन नहीं किया था और केवल चुनिंदा बयानों के आधार पर आदेश पारित किया था।

हाई कोर्ट ने साफ किया कि अगर पत्नी सम्मान और गरिमा के साथ पति के साथ नहीं रह सकती, तो उसे ऐसा करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने यह भी कहा कि वैवाहिक अधिकारों की बहाली का मकसद शादी को बचाना है, न कि किसी एक पक्ष को क्रूरता सहने के लिए मजबूर करना।

30/01/2026

सफेद और नीले आधार कार्ड में क्या होता है मुख्य अंतर..देखें आवेदन करने का तरीका, कौन से यूजर्स के लिए बनाया जाता है और अन्य डिटेल्स...

14/01/2023

5 Common Eye Infection Problem - Cause & Cure
1. Conjunctivitis: This disease is commonly called pink eye. It involves swelling of the conjunctiva lines inside the eyelids which cover the sclera of the eyes as well.

Causes:

1 May occur because of factors like viruses, bacteria, and substances, which cause irritation such as shampoo, smoke, dirt,

chlorine in swimming pools.
Dust, pollens, or similar allergies may cause this disease in sensitive people.
This disease is infectious in nature and spreads from person to person.
This Eye disorder may be treated with eye drops, pills, or ointments containing antibiotics. Avoid being with other people when affected and also abstain from using contact lenses.

2. Glaucoma: In the case of this eye disease, the optic nerve of the eye is damaged and can lead to loss of vision over time. A build-up of pressure takes place inside the eye.

Causes of Glaucoma
Occurs due to intense pressure within the eyes or the intraocular pressure.
The extra pressure destroys the optic nerve.
Permanent blindness is caused if the disease is not controlled and treated.
How to cure Glaucoma
Various Eye drops, laser surgery, and microsurgery used to cure glaucoma eye problem.

3. Ocular Migraine: This temporary disease causes loss of vision in one eye and generally does not last for more than an hour. This might happen after a migraine headache.

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