Anand Mohan Bhardwaj

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🌟✨ आप को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं! ✨🌟🏠🪔 जैसे दीपक अंधकार को दूर करता है,वैसे ही यह दिवाली हमारे दिलों से अज्ञान, भय...
20/10/2025

🌟✨ आप को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं! ✨🌟

🏠🪔 जैसे दीपक अंधकार को दूर करता है,
वैसे ही यह दिवाली हमारे दिलों से अज्ञान, भय और नकारात्मकता को दूर करे। ❤️🙏

💫 आइए, इस बार केवल घर ही नहीं,
बल्कि अपने दिलों को भी प्रेम, करुणा और सद्भावना के दीपों से जगमगाएं। 🕯️💖

🎆🌈 शुभ दीपावली! 🌈🎆
#प्रेम_और_प्रकाश

🪔 "SC-ST एक्ट से करोड़पति बनने की कला" - नई प्रेरणा गाथा! 💰"कैसे बनें करोड़पति?"अब सेमिनार, मोटिवेशनल स्पीच या नेटवर्क म...
04/09/2025

🪔 "SC-ST एक्ट से करोड़पति बनने की कला" - नई प्रेरणा गाथा! 💰

"कैसे बनें करोड़पति?"
अब सेमिनार, मोटिवेशनल स्पीच या नेटवर्क मार्केटिंग की ज़रूरत नहीं।

मिलिए चंद्रावती जी से, जिन्होंने SC-ST एक्ट का "सृजनात्मक उपयोग" कर के 46 लाख रुपए का 'क्लीन प्रॉफिट' कमाया!

📌 ना बिज़नेस प्लान,
📌 ना इन्वेस्टमेंट,
📌 ना GST रजिस्ट्रेशन –
बस एक FIR, थोड़ा ड्रामा और सिस्टम की "मजबूरी"।

अब मोटिवेशनल स्पीकरों को अपने PPT स्लाइड्स में नया चैप्टर जोड़ लेना चाहिए:
"कानूनी हथियारों से कमाई के उपाय" 💼⚖️

👉 केस स्टडी: चंद्रावती v/s सिस्टम
👉 प्रॉफिट: ₹46,00,000/-
👉 लागत: ZERO
👉 रिस्क: सिर्फ़ नैतिकता की मौत

सवाल ये नहीं कि चंद्रावती ने क्या किया...
सवाल ये है कि सिस्टम ने क्या होने दिया! 🤷‍♂️

अब अगली बार जब कोई बोले – "कुछ बड़ा करना है ज़िंदगी में..."
तो बोल देना –
"SC-ST एक्ट ट्राई किया क्या?"

#व्यंग्य #सिस्टम_की_कमाई
#चंद्रावती_की_कहानी #करोड़पति_बनने_का_नया_तरीका

मां जानकी जन्मस्थली पुनौराधाम मंदिर का शिलान्यास – एक ऐतिहासिक पहल या सिर्फ एक और चुनावी घोषणा?आज पुनौराधाम, सीतामढ़ी मे...
08/08/2025

मां जानकी जन्मस्थली पुनौराधाम मंदिर का शिलान्यास – एक ऐतिहासिक पहल या सिर्फ एक और चुनावी घोषणा?

आज पुनौराधाम, सीतामढ़ी में मां जानकी की जन्मस्थली के समग्र विकास हेतु 883 करोड़ रुपये की वृहद योजना का शिलान्यास आदरणीय केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह जी की उपस्थिति में संपन्न हुआ। सरकार का यह संकल्प सराहनीय है कि अयोध्या की तर्ज पर इस पावन धाम का भव्य निर्माण किया जाएगा। साथ ही, अयोध्या से सीतामढ़ी के बीच रेल और सड़क मार्गों के विकास एवं दिल्ली से नई ट्रेन की शुरुआत के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी को धन्यवाद।

बिना संदेह, मां जानकी के भव्य मंदिर का निर्माण हम सभी देशवासियों और विशेष रूप से बिहारवासियों के लिए गर्व और आस्था का विषय है।

अब देखने वाली बात यह होगी कि यह परियोजना सिर्फ शिलान्यास तक ही सीमित रहती है या फिर वास्तव में इस मंदिर समेत सीतामढ़ी की अन्य विकास योजनाओं को धरातल पर तेजी से अमलीजामा पहनाया जाएगा।

आशा है कि यह पहल केवल चुनावी रणनीति नहीं, बल्कि मिथिला के गौरवशाली इतिहास और भविष्य को एक नई दिशा देने वाली सिद्ध होगी।

जय मां जानकी! जय मिथिला!

🟥 अब FIR मोनिका पर — झूठी गुमशुदगी की सजा जरूरी है!जब मोनिका "लापता" हुई, तो माँ-बाप की नींदें उड़ गईं। मोहल्ला दहशत में...
04/07/2025

🟥 अब FIR मोनिका पर — झूठी गुमशुदगी की सजा जरूरी है!

जब मोनिका "लापता" हुई, तो माँ-बाप की नींदें उड़ गईं। मोहल्ला दहशत में था, सोशल मीडिया पर मदद की गुहार थी। पुलिस तो अपने आदत अनुसार टालने में लगी थी, पर पूरा समाज चिंता में डूबा हुआ था...

और अब सच सामने आता है —
मोनिका खुद की मर्ज़ी से भागकर शादी कर चुकी थी?
किसी को बताना भी ज़रूरी नहीं समझा?

⚠️ यह मज़ाक नहीं, एक गंभीर अपराध है!

❌ समाज को झूठी चिंता में डालना
❌ पुलिस और प्रशासन के संसाधनों की बर्बादी
❌ माता-पिता को मानसिक प्रताड़ना देना
❌ फर्ज़ी गुमशुदगी का केस बनाना

🛑 अब मोनिका पर FIR होनी चाहिए — इन धाराओं में:
🔹 IPC धारा 182 — पुलिस को झूठी सूचना देना
🔹 IPC धारा 203 — झूठा अपराध दर्शाना
🔹 IPC धारा 211 — बेबुनियाद आरोप लगाना
🔹 IPC धारा 417 — धोखाधड़ी और छल

➡️ इन सभी धाराओं के तहत सजा हो सकती है —
👉 6 महीने से लेकर 7 साल तक की कैद और/या जुर्माना!

📢 यह ज़रूरी है कि मोनिका को कोर्ट में जवाब देना पड़े —
ताकि अगली बार कोई भी "मोनिका", भागने से पहले सौ बार सोचे।

🔒 भरोसा तोड़ने की भी क़ीमत होती है।

👉 अगर ऐसे मामलों पर कड़ा एक्शन नहीं होगा,
तो समाज, पुलिस और परिवार बार-बार यूँ ही मूर्ख बनते रहेंगे।

#मोनिका_पर_FIR
#फर्ज़ी_गुमशुदगी_अपराध_है
ोगी_अब
#झूठी_रिपोर्ट_सजा_पाएगी
#न्याय_होना_चाहिए

🚧 फास्टैग, एआई और जीएसटी: अब चालान से पहले चेक हो रहा है टोल! 🚧जीएसटी विभाग अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से फास...
30/05/2025

🚧 फास्टैग, एआई और जीएसटी: अब चालान से पहले चेक हो रहा है टोल! 🚧

जीएसटी विभाग अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से फास्टैग डेटा का विश्लेषण कर रहा है। यदि आपके ट्रक ने टोल पार नहीं किया, तो विभाग मान सकता है कि माल की आपूर्ति नहीं हुई। इससे समन, नोटिस और इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) की अस्वीकृति हो सकती है ।
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उदाहरण:

🛣️ आपने प्वाइंट A से प्वाइंट B तक 500 किमी की यात्रा के लिए ई-वे बिल जारी किया।

🚚 वाहन संख्या स्पष्ट रूप से उल्लेखित है।

💸 वाहन को टोल पार करना चाहिए, है ना? टोल = फास्टैग = डिजिटल रिकॉर्ड।

❌ लेकिन यदि यात्रा के दौरान फास्टैग डेबिट नहीं हुआ, तो?

जीएसटी विभाग का एआई मानता है: "कोई टोल नहीं = कोई मूवमेंट नहीं = कोई सप्लाई नहीं"। इससे समन, नोटिस और इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) की अस्वीकृति हो सकती है ।
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तो ध्यान दें:

🛣️ फास्टैग में पर्याप्त बैलेंस रखें।

📜 सभी दस्तावेज़ सही और अपडेटेड रखें।

🤖 एआई की नजर हर जगह है।

सावधान रहें, कहीं फास्टैग की "बीप" न हो, तो टैक्स विभाग की "बीप" सुननी पड़ सकती है! 😅

इसलिए, फास्टैग को चार्ज रखें और दस्तावेज़ों को दुरुस्त रखें, ताकि जीएसटी विभाग की नजरों से बच सकें।

 #जलकुंभी आपने अपने आस पास भी गौर किया होगा लेकिन फिर भी एक जागरूक हिंदुस्तानी होने के नाते आपको बताता हूँ....जलकुंभी एक...
25/05/2025

#जलकुंभी
आपने अपने आस पास भी गौर किया होगा लेकिन फिर भी एक जागरूक हिंदुस्तानी होने के नाते आपको बताता हूँ....जलकुंभी एक ऐसा पौधा होता है जो पहले किसी तालाब पोखर मे एकाध ही दिखाई देता है।

फिर धीरे धीरे कुछ हफ्तों में तालाब के सब कोनों में एक-दो पौधे तैरते दिखाई देने लगते हैं,बड़े ही सुंदर दिखते है।

फिर अचानक कुछ महीने या सालों में पानी दिखाई देना बंद हो जाता है... सारे तालाब के ऊपर सिर्फ हरा हरा ही दिखाई देता है....

पानी की आक्सीजन खत्म होने लगती है.... अंदर का जीवन, मछलियां मरने लगती हैं।

धीरे धीरे पानी सड़ने लगता है । सड़ांध किलोमीटर दूर से महसूस होनी शुरू हो जाती है। और बाकी प्राणियों का जीवन मुस्किल होना शुरू हो जाता है।

जिस जिस तालाब में ये जलकुंभी पहुंचती है, सब खत्म कर देती है।

इलाज...

अगर शुरू में ही एक दो पौधों को बाहर निकाल कर फेंक दिया जाए तो वो धूप से सूख जाएंगे।

अगर पूरा तालाब भर गया हो तो सारी जलकुंभी को बाहर निकाल कर सुखाया जाता है।

और सूखने के बाद आग लगा कर बीज तक नाश कर दिया जाता है...

ताकि दुबारा ना पनप सके....

हो सकता है आपके घर के पास के तालाब में एक दो पौधे दिखाई दें।

शुरू में आपको ये सुंदर दिखाई देंगे... लेकिन अगर आप अभी इलाज नहीं करेंगे तो धीरे धीरे ये पूरे तालाब पर कब्जा कर लेंगे...
फिर तालाब के बाकी जीवों के पास दो में से एक रास्ता चुनने को बचता है या तो वो उनके हिसाब से जिएं या अपना अस्तित्व ही खत्म करवा लें।

तीसरा रास्ता आपको ही तय करना है।

बाकी मर्जी आपकी है,
क्यूंकि तालाब आपका हैं।

हादसों का हाइवे – NH 77मौत का रास्ता, विकास का मज़ाक!महिंदवारा के पास एक दिल दहला देने वाली दुर्घटना में कार और ट्रक की ...
04/05/2025

हादसों का हाइवे – NH 77
मौत का रास्ता, विकास का मज़ाक!

महिंदवारा के पास एक दिल दहला देने वाली दुर्घटना में कार और ट्रक की सीधी टक्कर हो गई। टक्कर इतनी ज़बरदस्त थी कि कार के परखच्चे उड़ गए और ट्रक भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। तीन लोगों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया, जबकि दो गंभीर रूप से ज़ख्मी हैं।

NH 77 पर फिर उजड़ गया एक परिवार।
और कारण? बिना डिवाइडर का हाईवे, जहाँ करोड़ों का टोल तो लिया जाता है, लेकिन सुरक्षा के नाम पर एक ईंट भी नहीं लगाई जाती।

क्या सरकार का काम सिर्फ टोल वसूलना है?
डिवाइडर लगाना उसकी ज़िम्मेदारी नहीं?
कब तक लाशों की कीमत पर राजस्व कमाया जाएगा?

और हमारे देवेश चंद्र ठाकुर और अन्य जनप्रतिनिधि कहाँ हैं? क्या उन्हें इन सड़कों पर बहते खून की गंध नहीं आती? या फिर वो तब जागेंगे जब हादसे उनके दरवाज़े तक पहुँचेंगे?

अब बहुत हो चुका!
सड़क सुरक्षा की गारंटी दो या टोल बंद करो!
#जनता_पूछेगी

#सीतामढ़ी

23/04/2025

भारत और पाकिस्तान के बीच की सीमा लगभग 3,323 किलोमीटर लंबी है, जो चार भारतीय राज्यों से होकर गुजरती है:​

जम्मू और कश्मीर: लगभग 1,222 किमी

राजस्थान: लगभग 1,170 किमी

गुजरात: लगभग 506 किमी

पंजाब: लगभग 547 किमी

पाकिस्तान की बहुत लंबी सीमा राजस्थान से लगती है, बहुत लंबी सीमा गुजरात से भी लगती है,

पूरा कच्छ बनासकांठा पाकिस्तान से लगता है पंजाब से भी सीमा लगती है,

लेकिन यहां कभी पाकिस्तानी आतंकी घुसपैठ नहीं करते क्योंकि उनको यहां लोकल सपोर्ट नहीं मिलता स्थानीय लोग मदद नहीं करते,

यह कश्मीर में जितने हैं मोमबत्ती की नौटंकी कर रहे हैं हकीकत में यह सब उन्हीं आतंकवादियों के है सपोर्टर हैं, बगैर स्थानीय सपोर्ट के कश्मीर में आतंकवाद एक दिन भी जिंदा नहीं रह सकता ।

लोकल लोग स्थानीय लोग आतंकवादियों को छुपाते हैं, उन्हें टिप देते हैं, उन्हें गुप्त सूचना देते हैं, उन्हें छुपाने में मदद करते हैं, उन्हें भोजन देते हैं, यहां तक कि उनकी की यौन सन्तुष्टि की भी व्यवस्था करते हैं ।

मोमबत्ती गैंग नौटंकी कर के हिन्दुओं को बरगलाने के लिए एक्टिव हो चुका है ।

इस आंतकवादी हमले के लिए पाकिस्तान पर इल्ज़ाम लगा कर स्थानीय आंतकवाद को बचाने का प्रयास किया जा रहा है ।

जब तक कश्मीरी आतंकियों को वहां से विस्थापित नहीं किया आतंकी हमले नहीं रुकने वाले।

#पहलगाम #आतंकीघटना

ये सिर्फ एक परिवार की कहानी नहीं है।ये उस भारत की कहानी है, जहाँ शांति की चाह रखने वालों को ज़िंदा जला दिया जाता है, और ...
17/04/2025

ये सिर्फ एक परिवार की कहानी नहीं है।
ये उस भारत की कहानी है, जहाँ शांति की चाह रखने वालों को ज़िंदा जला दिया जाता है, और कब्जा करने वालों को कानून का कवच मिल जाता है।

अब भी चुप रहोगे?
या पूछोगे – प्रभा मुखर्जी की हत्या में असली दोषी कौन है?
हत्या करने वाले हाथ?
या वो तंत्र जो उन्हें सुरक्षा की गारंटी देता है?

16/04/2025

हरलाखी विधानसभा, मधुबनी जिले की एक महत्वपूर्ण सीट है, जो भौगोलिक दृष्टि से भी विशेष स्थान रखती है। यहां की प्रमुख नदियाँ बाढ़ की समस्या उत्पन्न करती हैं, जिससे कृषि और बुनियादी ढांचे पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इसके अलावा, यहाँ के ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़कें और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी है।

स्वतंत्रता के बाद से विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं द्वारा प्रतिनिधित्व किया गया है, लेकिन आज तक हरलाखी विधान सभा क्षेत्र के लोग मूल भूत सुविधाओ के लिए तरस रहे है, मैंने पिछले 35 साल के विधायको की सूचि तैयार की है, ताकि हमारी पीढ़ी को पता लग सके की इस बार किस आधार पर वोट देना है.
प्रशांत किशोर द्वारा स्थापित 'जन सुराज' पार्टी बिहार की राजनीति में एक नई दिशा देने का प्रयास कर रही है। यह पार्टी पारंपरिक राजनीतिक दलों से अलग हटकर विकास, समानता और सामाजिक न्याय पर आधारित अपने एजेंडे के साथ उभरी है।​

पुरानी पारंपरिक पार्टियों की समस्याएं

बिहार में पारंपरिक दलों ने लंबे समय तक जातिवाद, परिवारवाद और तुष्टिकरण की राजनीति की है, जिससे राज्य में वास्तविक विकास की गति धीमी रही है। इन दलों के बीच सत्ता की अदला-बदली के बावजूद, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बुनियादी ढांचे जैसे मुद्दों पर ठोस सुधार नहीं हुए हैं।​

जन सुराज का दृष्टिकोण:

जन सुराज पार्टी का उद्देश्य बिहार को एक समृद्ध और समावेशी राज्य बनाना है, जहां हर नागरिक को समान अवसर मिलें। पार्टी ने अपने पांच मुख्य एजेंडे की घोषणा की है:​

शिक्षा में सुधार: राज्य के स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करना, ताकि गरीब और पिछड़े वर्ग के बच्चे भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त कर सकें।​

रोजगार सृजन: बिहार में युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाना, ताकि पलायन की समस्या कम हो सके।​

पेंशन योजना में सुधार: वृद्धजनों के लिए पेंशन राशि बढ़ाकर उन्हें सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर देना।​

महिलाओं और किसानों के लिए आर्थिक सशक्तिकरण: महिलाओं को स्वरोजगार के लिए बैंक ऋण पर 4% ब्याज दर पर सुविधा प्रदान करना और किसानों को श्रमिक उपलब्ध कराना।​

पिछले 35 वर्षो के विधायकों की सूची और उनके कार्यकाल:

1990 – वीणा वादिनी पांडे (कांग्रेस): उन्होंने इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया, लेकिन उनके कार्यकाल में क्षेत्रीय विकास के लिए कोई उल्लेखनीय योजनाएं नहीं देखी गईं।​

1995 – रामनरेश पांडे (सीपीआई): सीपीआई के सदस्य के रूप में उन्होंने कार्य किया, लेकिन उनके कार्यकाल में भी कोई विशेष योजनाओं की घोषणा या कार्यान्वयन नहीं हुआ।​

2000 – सीताराम यादव (राजद): राजद के सदस्य के रूप में उन्होंने क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया, लेकिन उनके कार्यकाल में भी विकास योजनाओं की कमी रही।​

2005 (अक्टूबर) – रामनरेश पांडे (सीपीआई): फिर से सीपीआई के सदस्य के रूप में उन्होंने कार्य किया, लेकिन इस दौरान भी कोई महत्वपूर्ण योजनाओं की शुरुआत नहीं हुई।​

2005 (फरवरी) – रामनरेश पांडे (सीपीआई): उनका कार्यकाल भी विकास के मामले में निराशाजनक रहा।​

2010 – शालीग्राम यादव (जनता दल): उन्होंने इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया, लेकिन उनके कार्यकाल में भी कोई उल्लेखनीय योजनाएं नहीं देखी गईं।​

2015 – बसंत कुमार (आरएलएसपी): उनके कार्यकाल में भी क्षेत्रीय विकास के लिए कोई महत्वपूर्ण योजनाओं की घोषणा नहीं हुई।​

2016 (उपचुनाव) – सुधांशु शेखर (आरएलएसपी): उपचुनाव में उनकी जीत हुई, लेकिन उनके कार्यकाल में भी विकास योजनाओं की कमी रही।​

2020 – सुधांशु शेखर (जनता दल): जनता दल के सदस्य के रूप में उन्होंने कार्य किया, लेकिन इस दौरान भी क्षेत्रीय विकास के लिए कोई महत्वपूर्ण योजनाओं की शुरुआत नहीं हुई।​

अब तक के कार्यकालों में किसी भी विधायक का क्षेत्र के विकास पर ध्यान नहीं दिया गया है। जनता को अब ऐसे नेताओं की आवश्यकता है जो उनके विकास के लिए वास्तविक प्रयास करें।

तो अबकी बार
जनसुराज सरकार

आपके बचपन की ठंडक, किसी का मज़हबी एजेंडा बन चुकी है!"क्या आप जानते हैं?जिस रूह अफ़्ज़ा को आप गर्मियों में ठंडक पाने के ल...
15/04/2025

आपके बचपन की ठंडक, किसी का मज़हबी एजेंडा बन चुकी है!"

क्या आप जानते हैं?
जिस रूह अफ़्ज़ा को आप गर्मियों में ठंडक पाने के लिए पीते हैं,
वो न कोई आम व्यापार है,
न ही किसी FMCG सेक्टर की खेल-खेल में बनी ब्रांड—
बल्कि यह एक "वक़्फ़" संपत्ति है!
जी हाँ, Hamdard न तो निजी मुनाफ़े के लिए बनी है,
और न ही इसका पैसा किसी टैक्सपेयर को रिटर्न में आता है—
बल्कि इसका सारा मुनाफ़ा सीधे “Hamdard National Foundation” को जाता है,
जो कि 1948 में ‘वक़्फ-ए-आम’ घोषित की गई थी,
यानी एक इस्लामी ट्रस्ट—जिसका मक़सद है:
मुस्लिम छात्रों की पढ़ाई, मदरसों की फंडिंग, और इस्लामी मिशनरी काम।

अब सोचिए—आप एक "सेक्युलर" हिंदू हैं,
आपको रूह अफ़्ज़ा का स्वाद अच्छा लगता है,
आपने कभी सोचा ही नहीं कि हर घूंट के साथ
आप एक धार्मिक ट्रस्ट को फंड कर रहे हैं,
जो किसी भी राष्ट्रीय विकास एजेंडा से नहीं, बल्कि मज़हबी शिक्षा और प्रचार से जुड़ा है।

रूह अफ़्ज़ा को मिला है "हलाल सर्टिफिकेट",
जहाँ सबसे पवित्र तरीका "थूकना" बताया जाता है,
अब आप खुद सोचिए—क्या ये महज़ एक पेय है या सांस्कृतिक सॉफ्ट पावर की जड़ें?

जब बिस्किट का ब्रांड हिंदू त्योहार पर विज्ञापन करता है,
तो "सेक्युलर ब्रिगेड" उसे टारगेट करता है।
लेकिन एक ब्रांड खुलेआम कहता है कि वो इस्लाम की सेवा कर रहा है,
और उसके पैसे से मदरसों में पाठ पढ़ाया जाता है,
तो वहाँ सब शांत हैं।

जब बंगाल, केरल, या उत्तर प्रदेश में धर्म के नाम पर हिंसा होती है,
तब कोई नहीं पूछता कि इन ट्रस्टों से फंड कहां-कहां पहुंचता है?
क्योंकि पूछने वाला "सांप्रदायिक" कहलाने का डर रखता है।

तो अगली बार जब आप रूह अफ़्ज़ा का घूंट लें,
तो याद रखिए—
आप सिर्फ़ ठंडक नहीं पी रहे,
बल्कि अपने पैसों से एक मज़हबी तंत्र को मज़बूत कर रहे हैं,
जो आपके धर्म, आपकी संस्कृति और शायद आपकी ही पहचान से जुड़ी
‘इनसानियत’ को वैचारिक तौर पर कमजोर करने में इस्तेमाल हो सकता है।

#बॉयकॉट_रूहअफ़्ज़ा


#सेक्युलर_बेवकूफ़ी_बंद_करो

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