16/04/2025
हरलाखी विधानसभा, मधुबनी जिले की एक महत्वपूर्ण सीट है, जो भौगोलिक दृष्टि से भी विशेष स्थान रखती है। यहां की प्रमुख नदियाँ बाढ़ की समस्या उत्पन्न करती हैं, जिससे कृषि और बुनियादी ढांचे पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इसके अलावा, यहाँ के ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़कें और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी है।
स्वतंत्रता के बाद से विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं द्वारा प्रतिनिधित्व किया गया है, लेकिन आज तक हरलाखी विधान सभा क्षेत्र के लोग मूल भूत सुविधाओ के लिए तरस रहे है, मैंने पिछले 35 साल के विधायको की सूचि तैयार की है, ताकि हमारी पीढ़ी को पता लग सके की इस बार किस आधार पर वोट देना है.
प्रशांत किशोर द्वारा स्थापित 'जन सुराज' पार्टी बिहार की राजनीति में एक नई दिशा देने का प्रयास कर रही है। यह पार्टी पारंपरिक राजनीतिक दलों से अलग हटकर विकास, समानता और सामाजिक न्याय पर आधारित अपने एजेंडे के साथ उभरी है।
पुरानी पारंपरिक पार्टियों की समस्याएं
बिहार में पारंपरिक दलों ने लंबे समय तक जातिवाद, परिवारवाद और तुष्टिकरण की राजनीति की है, जिससे राज्य में वास्तविक विकास की गति धीमी रही है। इन दलों के बीच सत्ता की अदला-बदली के बावजूद, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बुनियादी ढांचे जैसे मुद्दों पर ठोस सुधार नहीं हुए हैं।
जन सुराज का दृष्टिकोण:
जन सुराज पार्टी का उद्देश्य बिहार को एक समृद्ध और समावेशी राज्य बनाना है, जहां हर नागरिक को समान अवसर मिलें। पार्टी ने अपने पांच मुख्य एजेंडे की घोषणा की है:
शिक्षा में सुधार: राज्य के स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करना, ताकि गरीब और पिछड़े वर्ग के बच्चे भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त कर सकें।
रोजगार सृजन: बिहार में युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाना, ताकि पलायन की समस्या कम हो सके।
पेंशन योजना में सुधार: वृद्धजनों के लिए पेंशन राशि बढ़ाकर उन्हें सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर देना।
महिलाओं और किसानों के लिए आर्थिक सशक्तिकरण: महिलाओं को स्वरोजगार के लिए बैंक ऋण पर 4% ब्याज दर पर सुविधा प्रदान करना और किसानों को श्रमिक उपलब्ध कराना।
पिछले 35 वर्षो के विधायकों की सूची और उनके कार्यकाल:
1990 – वीणा वादिनी पांडे (कांग्रेस): उन्होंने इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया, लेकिन उनके कार्यकाल में क्षेत्रीय विकास के लिए कोई उल्लेखनीय योजनाएं नहीं देखी गईं।
1995 – रामनरेश पांडे (सीपीआई): सीपीआई के सदस्य के रूप में उन्होंने कार्य किया, लेकिन उनके कार्यकाल में भी कोई विशेष योजनाओं की घोषणा या कार्यान्वयन नहीं हुआ।
2000 – सीताराम यादव (राजद): राजद के सदस्य के रूप में उन्होंने क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया, लेकिन उनके कार्यकाल में भी विकास योजनाओं की कमी रही।
2005 (अक्टूबर) – रामनरेश पांडे (सीपीआई): फिर से सीपीआई के सदस्य के रूप में उन्होंने कार्य किया, लेकिन इस दौरान भी कोई महत्वपूर्ण योजनाओं की शुरुआत नहीं हुई।
2005 (फरवरी) – रामनरेश पांडे (सीपीआई): उनका कार्यकाल भी विकास के मामले में निराशाजनक रहा।
2010 – शालीग्राम यादव (जनता दल): उन्होंने इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया, लेकिन उनके कार्यकाल में भी कोई उल्लेखनीय योजनाएं नहीं देखी गईं।
2015 – बसंत कुमार (आरएलएसपी): उनके कार्यकाल में भी क्षेत्रीय विकास के लिए कोई महत्वपूर्ण योजनाओं की घोषणा नहीं हुई।
2016 (उपचुनाव) – सुधांशु शेखर (आरएलएसपी): उपचुनाव में उनकी जीत हुई, लेकिन उनके कार्यकाल में भी विकास योजनाओं की कमी रही।
2020 – सुधांशु शेखर (जनता दल): जनता दल के सदस्य के रूप में उन्होंने कार्य किया, लेकिन इस दौरान भी क्षेत्रीय विकास के लिए कोई महत्वपूर्ण योजनाओं की शुरुआत नहीं हुई।
अब तक के कार्यकालों में किसी भी विधायक का क्षेत्र के विकास पर ध्यान नहीं दिया गया है। जनता को अब ऐसे नेताओं की आवश्यकता है जो उनके विकास के लिए वास्तविक प्रयास करें।
तो अबकी बार
जनसुराज सरकार