GI TAG

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It protects traditional knowledge.

A Geographical Indication (GI) tag is a certification sign used on products originating from a specific geographical location, guaranteeing unique quality, reputation, or characteristics attributable to that origin.

21/05/2026





13/05/2026

सच बताऊं, पहले मैं भी उन्हीं लोगों में था जिन्हें लगता था कि Foreign Brand मतलब Better Quality।
कपड़े हों, Perfume हो या Decor items — अगर बाहर का हो तो ज्यादा Premium लगता था।

लेकिन हाल ही में जब PM मोदी जी ने फिर से “Swadeshi" अपनाने और Local Products को Support करने की बात कही..

तब एहसास हुआ कि हमारे भारत में ऐसी-ऐसी चीजें बनती हैं जिनकी Quality और Craftsmanship दुनिया में कहीं नहीं मिलती। फर्क सिर्फ इतना है कि हम उन्हें Branding नहीं दे पाए।

एक बनारसी साड़ी बनाने में महीनों लग जाते हैं। कन्नौज का इत्र आज भी पारंपरिक तरीके से बनता है। हाथ से बनी मधुबनी पेंटिंग में सिर्फ रंग नहीं, पूरी संस्कृति छिपी होती है।

Swadeshi अपनाने का मतलब सिर्फ Indian Product खरीदना नहीं है।
इसका मतलब है — अपने लोगों की मेहनत, अपनी Culture और अपनी पहचान को Support करना।

क्योंकि जिस दिन भारत अपने Local Products को सही Value देना शुरू कर देगा, उस दिन दुनिया खुद Indian Brands को Follow करेगी।

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12/05/2026

किसी प्रोडक्ट को GI Tag मिलता कैसे है?

आपको शायद लगता होगा कोई भी व्यक्ति सीधे Apply कर सकता है, पर इसका पूरा एक Legal Process होता है।

1. सबसे पहले प्रोडक्ट की खासियत साबित करनी पड़ती है:

जिस प्रोडक्ट के लिए GI TAG चाहिए, उसकी यह Uniqueness बतानी होती है कि वह किसी खास जगह से क्यों जुड़ा है।
जैसे बनारसी साड़ी सिर्फ बनारस की कारीगरी की वजह से Famous है।

2. Association या Group आवेदन करता है:

GI Tag किसी एक व्यक्ति को नहीं मिलता। इसके लिए उस क्षेत्र के Producers, Artisans या Organizations मिलकर Apply करते हैं।

3. GI Registry में आवेदन जमा होता है:

भारत में GI TAG का Registration चेन्नई स्थित GI Registry Office में होता है। वहाँ सभी Documents और Proof Submit किए जाते हैं।

4. जांच और Verification होता है:

Experts यह Check करते हैं कि प्रोडक्ट सच में Unique है या नहीं और उसका Connection उस जगह से है या नहीं।

5. GI Journal में Publish किया जाता है:

अगर सब सही लगता है, तो उसे Public Notice के लिए Publish किया जाता है ताकि कोई Objection हो तो सामने आ सके।

अगर कोई Objection नहीं आता, तो उस Product को Officially GI TAG दे दिया जाता है।

GI TAG सिर्फ एक TAG नहीं है, बल्कि यह हमारी Local Culture, मेहनत और Tradition को दुनिया के सामने पहचान दिलाने का तरीका है।

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06/05/2026

तो ये है मधुबनी पेंटिंग के यूनिक होने का रहस्य :

मधुबनी पेंटिंग सिर्फ एक कला नहीं है, बल्कि यह भारत की परंपरा, संस्कृति और लोक जीवन की झलक है। यह कला बिहार के मिथिला क्षेत्र से आती है और सदियों से चली आ रही है।

इसकी सबसे बड़ी खासियत है इसका स्टाइल। इसमें प्राकृतिक रंगों का इस्तेमाल किया जाता है, जैसे हल्दी, फूल, पत्ते और मिट्टी से बने रंग। साथ ही इसमें ज्यादातर डिज़ाइन हाथ से बनाए जाते हैं, इसलिए हर पेंटिंग अलग और यूनिक होती है।

मधुबनी पेंटिंग में भगवान, प्रकृति, जानवर और शादी-ब्याह जैसे विषयों को बहुत खूबसूरती से दिखाया जाता है। इसमें खाली जगह नहीं छोड़ी जाती, पूरा कैनवास बारीक पैटर्न और डिज़ाइनों से भरा होता है — यही इसे और खास बनाता है।

एक और खास बात यह है कि पहले यह पेंटिंग दीवारों और घरों पर बनाई जाती थी, लेकिन अब यह पेपर, कपड़े और कैनवास पर भी बनने लगी है, जिससे यह दुनिया भर में फेमस हो गई है।

सीधी बात में कहें तो इसकी परंपरा, हाथ से बनी कला, प्राकृतिक रंग और डिटेलिंग ही मधुबनी पेंटिंग को इतना यूनिक बनाती है।

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05/05/2026

लोकल प्रोडक्ट को ग्लोबल ब्रांड कैसे बनाता है GI TAG??

आज के समय में बहुत से ऐसे लोकल प्रोडक्ट्स हैं जो अपने इलाके में तो मशहूर होते हैं, लेकिन दुनिया तक उनकी पहचान नहीं पहुंच पाती। यहीं पर GI TAG (Geographical Indication) बहुत बड़ा रोल निभाता है।

GI TAG मिलने के बाद किसी भी प्रोडक्ट को एक खास पहचान मिल जाती है। यह साबित करता है कि यह प्रोडक्ट उसी जगह से जुड़ा है और उसकी क्वालिटी भी यूनिक है। इससे लोगों का भरोसा बढ़ता है, खासकर इंटरनेशनल मार्केट में।

दूसरी सबसे बड़ी बात, GI TAG नकली प्रोडक्ट्स को रोकता है। जब किसी नाम पर GI TAG होता है, तो कोई दूसरी जगह का व्यक्ति उसी नाम से प्रोडक्ट नहीं बेच सकता। इससे असली कारीगरों और उत्पादकों को सीधा फायदा मिलता है।

इसके अलावा, GI TAG मिलने से उस प्रोडक्ट की डिमांड और कीमत दोनों बढ़ जाती हैं। विदेशी बाजारों में ऐसे प्रोडक्ट्स को प्रीमियम कैटेगरी में रखा जाता है, जिससे एक्सपोर्ट के मौके भी बढ़ते हैं।

सरल शब्दों में कहें तो GI TAG एक लोकल प्रोडक्ट को पहचान, भरोसा और वैल्यू देता है — और यही तीन चीजें मिलकर उसे ग्लोबल ब्रांड बना देती हैं।

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28/04/2026

भारत में कई ऐसे प्रोडक्ट्स हैं जिन्हें GI TAG प्राप्त हुआ है, और ये सिर्फ देश में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में अपनी अलग पहचान बना चुके हैं। इनकी खासियत सिर्फ इनके नाम में नहीं, बल्कि इनके पीछे की मेहनत, परंपरा और जगह से जुड़ी कहानी में होती है। आइए विस्तार से जानते हैं ऐसे ही 5 मशहूर GI TAG प्रोडक्ट्स के बारे में:

1. दार्जिलिंग चाय (West Bengal)
दार्जिलिंग की पहाड़ियों में उगने वाली यह चाय अपने हल्के स्वाद, खुशबू और यूनिक फ्लेवर के लिए जानी जाती है।

2. बनारसी साड़ी (Uttar Pradesh)
बनारसी साड़ी अपनी बारीक कारीगरी, जरी के काम और पारंपरिक डिज़ाइन के लिए मशहूर है।

3. कांचीपुरम सिल्क साड़ी (Tamil Nadu)
कांचीपुरम की साड़ियाँ अपने मजबूत सिल्क, चमकदार रंगों और गोल्डन बॉर्डर के लिए जानी जाती हैं।

4. अल्फांसो आम (Maharashtra)
अल्फांसो आम को “आमों का राजा” कहा जाता है। इसका स्वाद, खुशबू और मिठास इसे बाकी आमों से अलग बनाते हैं।

5. कश्मीर पश्मीना (Jammu & Kashmir)
पश्मीना शॉल अपनी मुलायम बनावट और हल्के वजन के लिए दुनिया भर में मशहूर है।

इन सभी GI TAG प्रोडक्ट्स की खास बात यह है कि ये सिर्फ सामान नहीं हैं, बल्कि भारत की संस्कृति, कला और मेहनत की पहचान हैं। यही वजह है कि ये प्रोडक्ट्स भारत को वैश्विक स्तर पर खास बनाते हैं।

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27/04/2026

ये 5 GI Tag प्रोडक्ट्स भारत को दुनिया में बना रहे हैं खास पहचान :

भारत में कई ऐसे प्रोडक्ट्स हैं जिन्हें GI Tag मिला हुआ है, और ये सिर्फ देश में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में अपनी अलग पहचान बना चुके हैं। इनकी खासियत सिर्फ इनके नाम में नहीं, बल्कि इनके पीछे की मेहनत, परंपरा और जगह से जुड़ी कहानी में होती है। आइए विस्तार से जानते हैं ऐसे ही 5 मशहूर GI Tag प्रोडक्ट्स के बारे में:

1. दार्जिलिंग चाय (West Bengal)
दार्जिलिंग की पहाड़ियों में उगने वाली यह चाय अपने हल्के स्वाद, खुशबू और यूनिक फ्लेवर के लिए जानी जाती है। ठंडा मौसम, ऊँचाई और खास मिट्टी मिलकर इसे एक प्रीमियम क्वालिटी देते हैं। इसे “चाय की शैम्पेन” भी कहा जाता है और यह दुनिया भर में एक्सपोर्ट होती है।

2. बनारसी साड़ी (Uttar Pradesh)
बनारसी साड़ी अपनी बारीक कारीगरी, जरी के काम और पारंपरिक डिज़ाइन के लिए मशहूर है। इसे बनाने में कई दिन या कभी-कभी महीनों का समय लगता है। शादी और खास मौकों पर इसे पहनना शान और परंपरा का प्रतीक माना जाता है।

3. कांचीपुरम सिल्क साड़ी (Tamil Nadu)
कांचीपुरम की साड़ियाँ अपने मजबूत सिल्क, चमकदार रंगों और गोल्डन बॉर्डर के लिए जानी जाती हैं। ये साड़ियाँ लंबे समय तक टिकती हैं और दक्षिण भारत में इन्हें खास अवसरों पर पहना जाता है। इसकी क्वालिटी इसे अलग पहचान देती है।

4. अल्फांसो आम (Maharashtra)
अल्फांसो आम को “आमों का राजा” कहा जाता है। इसका स्वाद, खुशबू और मिठास इसे बाकी आमों से अलग बनाते हैं। यह भारत के साथ-साथ विदेशों में भी काफी डिमांड में रहता है और इसकी कीमत भी सामान्य आमों से ज्यादा होती है।

5. कश्मीर पश्मीना (Jammu & Kashmir)
पश्मीना शॉल अपनी मुलायम बनावट और हल्के वजन के लिए दुनिया भर में मशहूर है। इसे खास ऊन से बनाया जाता है, जो बेहद कीमती होती है। सर्दियों में यह न सिर्फ गर्म रखता है, बल्कि एक लग्जरी और स्टाइल का प्रतीक भी माना जाता है।

इन सभी GI Tag प्रोडक्ट्स की खास बात यह है कि ये सिर्फ सामान नहीं हैं, बल्कि भारत की संस्कृति, कला और मेहनत की पहचान हैं। यही वजह है कि ये प्रोडक्ट्स भारत को वैश्विक स्तर पर खास बनाते हैं।

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26/04/2026

दार्जिलिंग चाय दुनिया भर में इतनी मशहूर कैसे हुई...???

दार्जिलिंग चाय को “चाय की शैम्पेन” कहा जाता है, और यह नाम इसे यूँ ही नहीं मिला। इसकी खास पहचान इसकी खुशबू, हल्का स्वाद और यूनिक फ्लेवर है, जो दुनिया में कहीं और नहीं मिलता।

सबसे बड़ी वजह है इसका उगने का स्थान। दार्जिलिंग, पश्चिम बंगाल के पहाड़ी इलाके में स्थित है, जहाँ ठंडा मौसम, ऊँचाई और खास मिट्टी मिलकर चाय को एक अलग स्वाद देते हैं। यही वजह है कि यहाँ उगने वाली चाय बाकी चाय से बिल्कुल अलग होती है।

इतिहास भी इसमें बड़ा रोल निभाता है। ब्रिटिश समय में दार्जिलिंग में चाय की खेती शुरू हुई और धीरे-धीरे इसे यूरोप तक एक्सपोर्ट किया जाने लगा। वहाँ के लोगों को इसका स्वाद इतना पसंद आया कि यह प्रीमियम चाय बन गई।

इसके अलावा, दार्जिलिंग चाय को GI Tag भी मिला हुआ है, जिससे इसकी असलियत और गुणवत्ता की पहचान होती है। मतलब, सिर्फ दार्जिलिंग में उगी चाय ही “दार्जिलिंग चाय” कहलाती है।

सीधी बात में कहें तो यूनिक स्वाद, सही लोकेशन, इतिहास और क्वालिटी — इन सबने मिलकर दार्जिलिंग चाय को दुनिया भर में मशहूर बना दिया।

भारत में GI TAG देने का प्रथा वर्ष 2004 से शुरू हुआ था और दार्जिलिंग चाय भारत का पहला प्रोडक्ट है जिसे उसका गुणवत्ता के लिए GI TAG प्राप्त हुआ था।

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25/04/2026

GI Tag क्या है? आसान भाषा में समझिए...

GI Tag का मतलब होता है Geographical Indication, यानी ऐसा टैग जो किसी प्रोडक्ट को उसकी खास जगह से जोड़ता है। आसान शब्दों में समझें तो जो चीज जिस इलाके में बनती है और उसी वजह से उसकी पहचान बनती है, उसे GI Tag दिया जाता है।

जैसे बनारसी साड़ी, दार्जिलिंग चाय या मधुबनी पेंटिंग — ये सब अपने-अपने जगह की वजह से मशहूर हैं। अगर कोई और जगह पर बनाकर वही नाम इस्तेमाल करे, तो वो गलत माना जाएगा। GI Tag इसी चीज को रोकता है।

इसका फायदा ये है कि असली कारीगरों और बनाने वालों को उनका हक मिलता है और उनके काम की वैल्यू बढ़ती है। साथ ही ग्राहक को भी भरोसा रहता है कि वो असली प्रोडक्ट खरीद रहा है।

सीधी बात में कहें तो GI Tag एक तरह का “पहचान पत्र” है, जो बताता है कि ये प्रोडक्ट असली है और अपनी जगह के लिए खास है।

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24/04/2026
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