02/12/2025
जीवन के प्रारब्ध कई थे,स्वर्ग सहज उपलब्ध कई थे,
किन्तु चुनी मैंने विपदाएं, स्वयं अपना अपकर्ष चुना है,
हाँ...! मैंने संघर्ष चुना है ...
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02/12/2025
जीवन के प्रारब्ध कई थे,स्वर्ग सहज उपलब्ध कई थे,
किन्तु चुनी मैंने विपदाएं, स्वयं अपना अपकर्ष चुना है,
हाँ...! मैंने संघर्ष चुना है ...