25/01/2016
किसी ने शिक्षक से पूछा - क्या करते हो आप ??
शिक्षक का सुन्दर जवाब देखिए-
सुन्दर सुर सजाने को साज बनाता हूँ ।
नौसिखिये परिंदों को बाज बनाता हूँ ।।
चुपचाप सुनता हूँ शिकायतें सबकी ।
तब दुनिया बदलने की आवाज बनाता हूँ ।।
समंदर तो परखता है हौंसले कश्तियों के ।
और मैं डूबती कश्तियों को जहाज बनाता हूँ ।।
बनाए चाहे चांद पे कोई बुर्ज ए खलीफा ।
अरे मैं तो कच्ची ईंटों से ही ताज बनाता हूँ ।।
05/10/2015
जिन शब्दों से कोई फर्क नहीं पड़ता है, उन शब्दों का प्रयोग करने से भी कोई मतलब नहीं है
-होमर
डाॅ. पंकज दीक्षित
28/09/2015
होके मायूस ना यूँ शाम की तरह ढलते रहिये,............
ज़िंदगी एक भोर है सूरज की तरह निकलते रहिये,......
ठहरोगे एक पाँव पर तो थक जाओगे,.....................
धीरे धीरे ही सही मगर राह पे चलते रहिये।...............
डाॅ. पंकज दीक्षित