Siksha and Sanskriti

Siksha and Sanskriti A forum where information regarding National Educational Policy 2020 and teacher education will be posted.

15/08/2023

स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं आजादी के इस अमृत काल में का एक वर्ष पूर्ण हुआ

‘‘धूप में जलतेऔर खेत में झूमते/बीज बोते हुएधान-गेंहूँ-रहर/हिन्द के गाँव में रहने वाले कृषक!माँ धरा! पर फिरा करनजर प्रेम ...
26/08/2021

‘‘धूप में जलते
और खेत में झूमते/
बीज बोते हुए
धान-गेंहूँ-रहर/

हिन्द के गाँव में
रहने वाले कृषक!
माँ धरा! पर फिरा कर
नजर प्रेम की/

सर झुकाए हुए
गीत गाते हैं ये
आस्था से भरे
गुनगुनाते हैं ये-

‘माँ सुनो!
जब कि सूखे हुए बीज ये
तेरी ममता से
लहराती फसलें बनें
मान लेना मेरी इक दुआ उस घड़ी
जब कि दहकां को रोटी मयस्सर करो
सबसे पहले मेरे चाकरों के लिए
पेट भरने को फलसों की बालें खिलें
उनके बच्चों को चूल्हे से ठंडक मिले
उनके बूढ़ो को तावों से गर्मी मिले/
बेसहारों कि खातिर उगे अन्न फिर
और उनके भी चेहरे पे छलके खुशी
फिर हो मन्दिर में भगवान को भोग भी
और परसाद साधू की झोली भरे/
फिर ये करना कि मेहमान आए जो घर
उसको भूखा कभी भी न जाना पड़े
फिर मेरे खेत में हो मेहर जो तेरी
मेरे बच्चों की खातिर भी दानें पड़ें/
मेरी माँ! मेरी धरती!
अगर फिर तुझे
यूँ लगे कि मेरे वास्ते कुछ भी है
तो मुझे बख्श देना वो दुनका कि मैं
पेट अपना भरुँ और आगे बढूँ
कि तुझे सब्ज-चुनर चढ़ा फिर सकूँ
तेरी मिट्टी को सर पर सजा कर
फिरूँ...!!’’
स्वामी ओमा दि अक 24 अगस्त 2017
(एक लोकगीत डॉ. बनवारीलाल नाटिया
जी द्वारा काशी में 21 अगस्त 2017 को अक महोत्सव मेंसुनाया/उसके
भाव-भाषान्तर की कोशिश)
लोकगीत राजस्थानी भाषा में मेरे मित्र प्रोफ़ेसर किरण जी नाहटा ने लिखा था क्या भाव एक ग्रामीण व अनपढ़ भारतीय के हैं यह अपने आप में एक अनूठा उदाहरण है बताइए वह ग्रामीण सच्चा भारतीय संस्कृति का उपासक है अथवा पढ़ा लिखा शहरी व्यक्ति। यह निर्णय में आप पर छोड़ता हूं

*देश का सर्वांगीण विकास करना  है तो शिक्षा को ठीक करना होगा शिक्षा को ठीक करना है तो  समर्पित शिक्षक तैयार करने होंगे और...
17/08/2021

*देश का सर्वांगीण विकास करना है तो शिक्षा को ठीक करना होगा शिक्षा को ठीक करना है तो समर्पित शिक्षक तैयार करने होंगे और समर्पित शिक्षक तैयार करने के लिए शिक्षक शिक्षा को ठीक करना होगा*
सत्य यह है कि शिक्षक शिक्षा के विकास के बिना देश में शिक्षा का विकास नहीं हो सकता और शिक्षा के बिना न तो भारत विश्व गुरु बन सकता व न ही सोने की चिड़िया

15/08/2021

NEP 20 20 को लागू करने के लिए शिक्षण मंडल व सभी शैक्षिक संगठनों ने अपना पूरा श्रम लगा रखा है पूरे देश इस नीति को लागू करने के लिए जन जागरण का अभियान चला रखा है इसी से इसके सफल होने की आशा देश में फलीभूत हुई है तो एक सर्वविदित है
यह तो सर्वमान्य सत्य है कि किसी भी शिक्षा नीति के सफलतापूर्वक क्रियान्वन करने के लिए सबसे अहम भूमिका शिक्षक की होती है वही किसी भी नीति को प्रत्येक छात्र तक पहुंचा कर जमीन पर उतारता है इसलिए उसका सक्षम व समर्पीत होना आवश्यक है यदि वह सक्षम नहीं हुआ तो सरकार संगठन व अन्य लोग कितनी भी मेहनत करें पर्याप्त मात्रा में आपेक्षित बदलाव लाने में सफलता नहीं मिल पाएगी ईसलिए योग्य व समर्पित शिक्षक तैयार करना आवश्यक है और इसके लिए इस आपेक्षिक शिक्षक शिक्षा के विभिन्न पाठ्यक्रम चलाए गए अब प्रश्न उठता है क्या वर्तमान शिक्षक शिक्षा से एक समर्पित शिक्षक तैयार हो रहा है अथवा वह केवल शिक्षक शिक्षा की डिग्री ही प्राप्त कर रहा है । जैसा की शिक्षा नीति में भी कहा गया है अभी तक देश में शिक्षक शिक्षा पर इतना ध्यान नहीं दिया गया जितनी की आवश्यकता थीतथा शिक्षक शिक्षा हासिये पर ही रही यह शिक्षा के केंद्र बिंदु में अभी तक नहीं आ पाई सरकार व समाज का ध्यान इस ओर इतना नहीं गया जितना शिक्षा को ठीक करने के लिए आवश्यक था इस कारण सक्षम अध्यापक तैयार नहीं नहीं हो पाए वह हमारी शिक्षा व्यवस्था लचर रूप से चलती रही
भारत में शिक्षक शिक्षा । के परिदृश्य को देखा जाए तो लगभग 95% शिक्षक शिक्षा संस्थाएं निजी हाथों में है । निजी क्षेत्र में भी बड़े ग्रुप नहीं है और निजी क्षेत्र के बारे में शिक्षा नीति स्वयं मानती है कि वहां शिक्षक तैयार नहीं होते अपितु एक निश्चित कीमत पर डिग्री खरीदते हैं इस प्रकार यह अनैतिक कार्य से तैयार हुआ शिक्षक क्या हमारे देश के नौनिहालों को तैयार कर पाएगा
मेरी प्रार्थना है कि इस विषय को अपने हाथ में लेना चाहिए वास्तव में योग्य व समर्पित शिक्षक तो हमारे गुरुकुल के माध्यम से ही तैयार हो सकते हैं

15/08/2021

मैं भारतीय हूं और भारतीय होने पर मुझे गर्व है मैं मेरी सनातन धर्म संस्कृति व आध्यात्मिक ज्ञान विज्ञान के कारण दुनिया में सबसे उत्तम हूं मेरा मूल मंत्र है
* *सर्वे भवंतु सुखिनः**
यह मंत्र न केवल मेरा अपितु समस्त भारतीयता वह विश्व का व सभी धर्मों का मूल मंत्र है .
भारत का प्रत्येक विचार समस्त विश्व के हित के लिए व समस्त ब्रह्मांड केहित के लिए है जो विचार समस्त विश्व के हित के लिए नहीं है वह भारत का या किसी भी धर्म का विचार हो ही नहीं सकता
*स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं*

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