राजस्थानी सबदकोस

राजस्थानी सबदकोस We are undertaking a project to develop a comprehensive digital dictionary of Rajasthani language, t

परियोजना उद्देश्य: सम्पूर्ण राजस्थानी शब्दकोश को ऑनलाइन बनाकर इसकी मोबाइल एप तथा वेबसाइट बनाना

भूमिका: भाषा मनुष्य के विकास का सबसे महत्वपूर्ण साधन है। भाषा के माध्यम से ही मानव ने अपना सांस्कृतिक एवं भौतिक विकास किया है, किन्तु इसके साथ ही यह भी सत्य है कि मानव के विकास के साथ भाषा का भी विकास होता है। इस दृष्टि से दोनों का विकास अन्योन्याश्रित है। राजस्थानी भाषा अपनी समृद्ध साहित्यक धरोहर एवं लगभग ढाई लाख शब्दों से भी अधिक के विशाल शब्द भंडार के साथ भारत वर्ष की सभी प्रादेशिक भाषाओं में अपना विशिष्ट स्थान रखती है। इसके बावजूद यह देखने में आया है कि राजस्थानी भाषा के प्रति प्रदेश के भाषा-साहित्य के विद्यार्थियों / शौधार्थियों की अभिरुचि कम हुई है। इक्कीसवीं सदी डिजिटल तकनीकी का युग है जिसमे आज का युवक, ज्ञान को इन्टरनेट, मोबाइल इत्यादि ऑनलाइन संसाधनों से प्राप्त कर रहा है | ऐसे में बहुत जरूरी है कि राजथानी भाषा की समृद्ध साहित्यिक धरोहर एवं मायड़ भाषा के शब्द-कोश को डिजिटल धरातलों पर उपलब्ध करवाया जाए। ऑनलाइन शब्दकोश मायड़ भाषा राजस्थानी के भाषा प्रेमियों, कवियों, पाठकों एवं छात्रों के लिए एक बहुमूल्य उपकरण सिद्ध होगा।

दिनांक 29 दिसंबर 2021 को पूर्व सांसद एवं महाराजा गजसिंह जी जोधपुर द्वारा राजस्थानी सबदकोश की वेबसाईट एवं मोबाईल एप का भव्य लोकार्पण किया गया। सम्पूर्ण कार्यक्रम की रिकॉर्डिंग इस लिंक पर क्लिक करके देख सकते हें: https://www.youtube.com/watch?v=qm6Xidb3Osc

डिजिटल सबदकोश का उपयोग करने के लिए आप इस की वेबसाईट https://www.rajsabadkosh.org/ पर जाएँ। एंड्रॉयड अथवा आईफोन पर इसकि मोबाईल एप इंस्टॉल करने के लिए PlayStore अथवा AppStore पर "rajasthani sabadkosh" (कोट सहित) टाइप करें और एप डाउनलोड करके इंस्टॉल करें।

आप सभी से अनुरोध है कि इस परियोजना के बारे मे अपने मित्रों को अवश्य बताएं तथा ऑनलाइन सबदकोश को अधिक से अधिक उपयोग करें एवं कोई भी गलती मिले तो [email protected] पर ईमेल करके सूचित करें।

30/03/2025

राजस्थान दिवस पर हार्दिक बधाई। जै राजस्थान, जै राजस्थानी।

सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामया।
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु, मा कश्चिद् दु:ख भागभवेत ।।

नव संवत्सर 2082 एवं चैत्र नवरात्रि की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ।।

विश्व मायड़भासा दिवस री घणेमान बधाई।जै जै राजस्थानी जै जै  राजस्थान।
21/02/2025

विश्व मायड़भासा दिवस री घणेमान बधाई।
जै जै राजस्थानी जै जै राजस्थान।

राजस्थानी शब्दकोश के निर्माता। महान विभूति, शब्द मनीषी पद्मश्री डॉ सीताराम जी लालस को उनकी जन्म जयंती एवं पुण्य तिथि पर ...
29/12/2024

राजस्थानी शब्दकोश के निर्माता। महान विभूति, शब्द मनीषी पद्मश्री डॉ सीताराम जी लालस को उनकी जन्म जयंती एवं पुण्य तिथि पर कोटि नमन, वंदन।

पद्म श्री डा. सीताराम जी लालस (सीताराम जी माड़साब के नाम से जनप्रिय) राजस्थानी भाषा के भाषाविद एवं कोशकार थे। आपने ४०

14/07/2024

गूगल ने गत 28 जून को विभिन्न भाषाओं को आपस में ट्रांसलेट करने वाली सुविधा में 110 नई भाषाएं जोड़ी। इसमें राजस्थानी को भी जोड़ा किंतु उसका नाम मारवाड़ी लिखा।
मारवाड़ी राजस्थानी भाषा की प्रमुख बोली है किंतु राजस्थानी भाषा के साहित्य विशेषकर काव्य परंपरा में डिंगल, पिंगल आदि प्रमुख भाषाएं हैं एवं राजस्थान की कई अन्य बोलियों को मिलाकर ही राजस्थानी भाषा अपने सम्पूर्ण स्वरूप में आती है।
मेरे विचार से मारवाड़ी भाषा की जगह गूगल को राजस्थानी भाषा लिखना चाहिए।
पद्मश्री सीताराम जी लालस ने भी राजस्थानी भाषा ही उपयोग किया। टेसीटोरी ने भी राजस्थानी शब्द ही उपयोग में लिया।
सभी को ये बात गूगल को रिपोर्ट करना चाहिए ताकि ये सुधार हो सके। इससे मारवाड़ी भी समृद्ध ही होगी। अन्यथा ये बात एक और निरर्थक विवाद पैदा करेगी।
राजस्थानी की व्याकरण उपलब्ध है, इसका वृहत शब्दकोश उपलब्ध है। इसको लेकर मान्यता की मुहिम चल रही है। राजस्थानी के अन्य शब्दों को विलग रखने से मारवाड़ी भी कमतर हो जाएगी और मारवाड़ी बोली के बिना राजस्थानी की कल्पना भी नहीं की जा सकती। अतः इसे राजस्थानी बनाम मारवाड़ी नहीं बनने दें एवं गूगल से सुधार करने की अपील करें।

21/02/2024

अंतरराष्ट्रीय मायड़ भासा दिवस री हिये तणी सुभकामनावां।
जै राजस्थानी।

https://www.charans.org/sitaram-lalas/वृहत राजस्थानी सबदकोश के संपादक, शब्द मनीषी पद्मश्री डॉ. सीताराम जी लालस का आज दिन...
29/12/2023

https://www.charans.org/sitaram-lalas/
वृहत राजस्थानी सबदकोश के संपादक, शब्द मनीषी पद्मश्री डॉ. सीताराम जी लालस का आज दिनांक 29 दिसंबर को जन्मदिवस एवं पुण्य तिथि है। आपको शत शत नमन एवं विनम्र श्रद्धांजलि।
वर्ष 2021 में आज ही के दिन वृहत राजस्थानी सबद कोश के डिजिटल संस्करण (https://www.rajsabadkosh.org) एवं मोबाईल एप का भी लोकार्पण किया गया था, जिसे आज दो वर्ष पूर्ण हुए। इन दो वर्षों के अंतराल मे इस ऑनलाइन राजस्थानी शब्दकोश पर 26,07,328 बार विभिन्न राजस्थानी शब्दों को खोजा गया।

पद्म श्री डा. सीताराम जी लालस (सीताराम जी माड़साब के नाम से जनप्रिय) राजस्थानी भाषा के भाषाविद एवं कोशकार थे। आपने ४०

विश्व मायड़ भाषा दिवस री बधाई।🙏🙏
21/02/2023

विश्व मायड़ भाषा दिवस री बधाई।🙏🙏

10/02/2023

पद्मश्री डॉ. सीताराम लालस के नाम पर राज्य स्तरीय पुरस्कार घोषित। बधाई..

https://www.charans.org/sitaram-lalas/वृहत राजस्थानी सबदकोश के संपादक, शब्द मनीषी पद्मश्री डॉ. सीताराम जी लालस का आज दिन...
28/12/2022

https://www.charans.org/sitaram-lalas/
वृहत राजस्थानी सबदकोश के संपादक, शब्द मनीषी पद्मश्री डॉ. सीताराम जी लालस का आज दिनांक 29 दिसंबर को जन्मदिवस एवं पुण्य तिथि है। आपको शत शत नमन एवं विनम्र श्रद्धांजलि।

गत वर्ष आज ही के दिन वृहत राजस्थानी सबद कोश के डिजिटल संस्करण एवं मोबाईल एप का भी लोकार्पण किया गया था, जिसे आज एक वर्ष पूर्ण हुआ। इस एक वर्ष के अंतराल मे इस ऑनलाइन सबदकोश पर 10,82,366 बार विभिन्न राजस्थानी शब्दों को खोजा गया।

पद्म श्री डा. सीताराम जी लालस (सीताराम जी माड़साब के नाम से जनप्रिय) राजस्थानी भाषा के भाषाविद एवं कोशकार थे। आपने ४०

https://anjas.orgजोधपुर में रेखता फ़ाउंडेशन द्वारा आयोजित दो दिवसीय कार्यक्रम "अंजस" बहुत शानदार रहा। राजस्थानी भाषा एवं...
31/10/2022

https://anjas.org
जोधपुर में रेखता फ़ाउंडेशन द्वारा आयोजित दो दिवसीय कार्यक्रम "अंजस" बहुत शानदार रहा। राजस्थानी भाषा एवं संस्कृति को समर्पित इस कार्यक्रम में अंजस की website लॉंच हुई जिस पर प्राचीन एवं आधुनिक राजस्थानी कवियों एवं रचनाकारों की रचनाएँ संजोयी गयी है।
राजस्थानी सबदकोश को भी उक्त website से लिंक किया गया है। अंजस की साइट पर प्रदर्शित किसी रचना के किसी भी शब्द को क्लिक करने पर rajsabadkosh.org से उस शब्द के अर्थ निकल कर सीधे अंजस की साइट पर ही दिख जाएँगे।
राजस्थानी सबदकोश का platform इस हेतु बहुत उपयोगी सिद्ध हुआ है।

The web's most comprehensive archive of medieval, early modern, modern, and contemporary Rajasthani literature, folk music, folk stories, and intangible traditions.

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