29/03/2026
पाकिस्तान में अज्ञात धुरंधर के खौफ का ये आलम है कि पाकिस्तानियों को हर भिखारी और मजदूर में भारतीय जासूस नज़र आ रहे हैं!😂
धर सहाब ये क्या गद्दर बना दिए हो!
Fear is a choice! I choose to be Fearless!
29/03/2026
पाकिस्तान में अज्ञात धुरंधर के खौफ का ये आलम है कि पाकिस्तानियों को हर भिखारी और मजदूर में भारतीय जासूस नज़र आ रहे हैं!😂
धर सहाब ये क्या गद्दर बना दिए हो!
23/03/2026
Real Dhurandhar of India👇 who never came back but had only one wish to protect India and were ready for ultimate sacrifice. Many citizens don't know the sacrifices made by the unsung heroes of India. They left everything behind just for the sake of our nation. Salute to them.🫡
Protagonist of Dhurandhar represents all such unsung heroes of our nation! It’s a must watch and class apart movie ever produced in the history of Film making! Jai Hind 🇮🇳
23/03/2026
#शहीद_दिवस 🇮🇳
भारत की आज़ादी सिर्फ क्रांतिकारियों की बहादुरी से नहीं, बल्कि उन माँओं के साहस से भी लिखी गई जिन्होंने अपने बेटों को देश के लिए कुर्बान होते देखा और फिर भी सिर ऊँचा रखा!
23 मार्च का दिन हमें याद दिलाता है कि मातृभूमि की रक्षा के लिए कुछ वीरों ने हँसते-हँसते फाँसी का फंदा चूम लिया! आज हम नमन करते हैं उन अमर शहीदों को और उन महान माँओं को जिन्होंने ऐसे सपूत इस धरती को दिए!
शत-शत नमन अमर बलिदानियों को 🙏 जय हिन्द 🇮🇳
19/03/2026
#हिन्दूनववर्ष2083🚩
आपको सपरिवार हिन्दू नववर्ष (चैत्र शुक्ल प्रतिपदा) एवं विक्रम संवत 2083 के शुभारंभ पर हार्दिक बधाई एवं मंगलकामनाएं! 🙏
साथ ही चैत्र नवरात्रि के प्रथम दिन की अनेकानेक शुभकामनाएं! माता रानी की कृपा आप सब पर बनी रहे और आपकी सभी मनोकामनाएँ पूर्ण हों! जय माता दी!🙏
हिंदू नव वर्ष - विक्रम संवत 2083! प्राकृतिक और आध्यात्मिक महत्व !
हिंदू नव वर्ष का आगमन चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि पर होता है, जो इस वर्ष 19 मार्च को पड़ रही है! यह दिन न केवल ब्रह्मा जी द्वारा सृष्टि की रचना का प्रतीक है, बल्कि हमारे जीवन में नव आरंभ और सजृन का भी प्रतीक है!
विक्रम संवत की शुरुआत राजा विक्रमादित्य द्वारा 57 ईसा पूर्व में की गई थी! इस संवत के महीनों के नाम नक्षत्रों के आधार पर होते हैं, जो हमारी सांस्कृतिक धरोहर का अटूट हिस्सा हैं!
🕉️ धार्मिक और सामाजिक महत्व 🕉️
इस समय, मौसम में बदलाव के साथ, शरीर को संतुलित रखने के लिए सात्विक आहार और व्रतों का पालन किया जाता है! यह समय पूजा, दान-पुण्य और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए विशेष रूप से उपयुक्त है!
आप सभी को पुनः हिंदू नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं! 🌼💐
18/03/2026
भारत की सैन्य परंपरा में कुछ नाम केवल पदों से नहीं पहचाने जाते, बल्कि अपने निर्णयों, साहस और दृष्टि से इतिहास का हिस्सा बन जाते हैं! ऐसा ही एक नाम था जनरल बिपिन रावत का! एक ऐसा सैनिक जिसने उत्तराखंड के पहाड़ों से निकलकर भारत की तीनों सेनाओं को एक धागे में पिरोने की जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठाई! लेकिन उनकी कहानी केवल ऊंचे पदों की नहीं है! इस कहानी में संघर्ष है, अनुशासन है, गलतियाँ हैं और उन गलतियों से निकलकर असाधारण उपलब्धियाँ हासिल करने का साहस भी है!
दिलचस्प बात यह है कि जिस व्यक्ति ने आगे चलकर भारत का पहला चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ बनकर सैन्य इतिहास में नई इबारत लिखी, उसी व्यक्ति को अपने प्रशिक्षण के दिनों में एक ऐसी सजा मिली थी जिसने उनकी सीनियॉरिटी तक छीन ली थी। कारण था – स्विमिंग पूल में छलांग न लगा पाना!
पहाड़ों से निकला एक सैनिक!
16 मार्च 1958 को उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले में बिपिन रावत का जन्म हुआ! यह परिवार साधारण जरूर था, लेकिन इसकी पहचान सेना से जुड़ी हुई थी! उनके दादा भी सेना में थे! उनके पिता लेफ्टिनेंट जनरल लक्ष्मण सिंह रावत भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारी रहे! इतना ही नहीं, उनके चाचा भी सेना में हवलदार के पद से सेवानिवृत्त हुए थे!
इस तरह कहा जाए तो सेना की वर्दी केवल पेशा नहीं थी, बल्कि यह उनके परिवार की विरासत थी! दिलचस्प संयोग यह भी रहा कि जिस 11 गोरखा राइफल्स की बटालियन में उनके पिता की पहली पोस्टिंग हुई थी, उसी बटालियन में आगे चलकर बिपिन रावत को भी नियुक्ति मिली! यहीं से एक नई सैन्य यात्रा की शुरुआत हुई।
स्कूल से सेना तक का सफर
बिपिन रावत की शुरुआती पढ़ाई देहरादून के कैम्ब्रियन हॉल स्कूल में हुई! इसके बाद उन्होंने शिमला के सेंट एडवर्ड्स स्कूल में शिक्षा प्राप्त की! बचपन से ही अनुशासन और सैन्य जीवन का माहौल उन्हें मिला था। इसलिए आगे की पढ़ाई के लिए उन्होंने नेशनल डिफेंस अकादमी, खडकवासला का रास्ता चुना!
एनडीए के बाद वे भारतीय सैन्य अकादमी, देहरादून पहुंचे! यहां उनका प्रदर्शन इतना शानदार रहा कि वे अपने कोर्स में मेरिट में सबसे ऊपर रहे और उन्हें प्रतिष्ठित “स्वॉर्ड ऑफ ऑनर” से सम्मानित किया गया! यह सम्मान केवल उसी कैडेट को मिलता है जो पूरे बैच में सर्वश्रेष्ठ साबित होता है!
एनडीए इंटरव्यू का दिलचस्प किस्सा!
उनकी जिंदगी का एक रोचक प्रसंग एनडीए इंटरव्यू से जुड़ा हुआ है! इंटरव्यू के दौरान सामने बैठे एक ब्रिगेडियर रैंक के अधिकारी ने उनसे पूछा-आपकी हॉबी क्या है! बिपिन रावत ने बिना झिझक जवाब दिया–ट्रेकिंग! इसके बाद अधिकारी ने उनसे एक और सवाल पूछा! अगर आपको किसी ट्रेक पर भेजा जाए और आप अपने साथ केवल एक चीज ले जा सकें, तो वह क्या होगी।
बिपिन रावत का जवाब था – माचिस की डिब्बी! जब उनसे कारण पूछा गया तो उन्होंने कहा कि जंगल या पहाड़ों में माचिस सबसे उपयोगी चीज साबित हो सकती है! आग जलाने से लेकर भोजन बनाने और सुरक्षा तक, यह छोटी सी चीज कई मुश्किलों को आसान बना सकती है! उनका यह व्यावहारिक जवाब इंटरव्यू लेने वाले अधिकारियों को बेहद प्रभावित कर गया।
स्विमिंग पूल की वह सजा!
लेकिन उनकी सैन्य यात्रा में सब कुछ हमेशा इतना आसान नहीं था! एनडीए प्रशिक्षण के दौरान एक दिन कैडेट बिपिन रावत को स्विमिंग पूल में ऊंचाई से छलांग लगाने का टास्क दिया गया!
यह प्रशिक्षण का हिस्सा था! लेकिन उस दिन वे यह छलांग नहीं लगा पाए! सेना में अनुशासन कठोर होता है। परिणामस्वरूप उन्हें सजा मिली और उनकी छह महीने की सीनियॉरिटी छीन ली गई!
यह घटना उनकी जीवनी “बिपिन: द मैन बिहाइंड द यूनिफॉर्म” में भी दर्ज है! किसी ने उस समय शायद यह कल्पना भी नहीं की होगी कि स्विमिंग पूल में छलांग लगाने से डरने वाला यही कैडेट आगे चलकर भारतीय सेना का प्रमुख बनेगा और फिर देश का पहला चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ भी!
सेना में शुरुआती जिम्मेदारियाँ!
16 दिसंबर 1978 को बिपिन रावत को 11 गोरखा राइफल्स की 5वीं बटालियन में कमीशन मिला! अपने शुरुआती सैन्य करियर में उन्होंने ऊंचाई वाले युद्धक्षेत्रों में लंबा समय बिताया!
अरुणाचल प्रदेश में वास्तविक नियंत्रण रेखा के पास तैनाती हो या कश्मीर घाटी में आतंकवाद विरोधी अभियान–उन्होंने हर मोर्चे पर अनुभव हासिल किया! उनकी बटालियन 1987 में चीन के साथ सुमदोरोंग चु क्षेत्र में हुए सैन्य तनाव के दौरान भी तैनात रही थी!इस अनुभव ने उन्हें सीमाओं की वास्तविक चुनौतियों को करीब से समझने का अवसर दिया!
कश्मीर से कांगो तक!
कश्मीर में उन्होंने राष्ट्रीय राइफल्स के एक सेक्टर और बाद में 19 इन्फैंट्री डिवीजन का नेतृत्व किया! उनका नेतृत्व केवल भारत तक सीमित नहीं रहा! 2008 में वे संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन के तहत कांगो में बहुराष्ट्रीय ब्रिगेड के कमांडर भी रहे! कांगो में उस समय हालात बेहद तनावपूर्ण थे! कई विद्रोही समूह सक्रिय थे और हजारों नागरिकों की सुरक्षा खतरे में थी।
लेकिन उनके नेतृत्व में वहां की स्थिति को स्थिर करने में महत्वपूर्ण सफलता मिली! म्यांमार ऑपरेशन जिसने दुनिया का ध्यान खींचा! 2015 में मणिपुर में आतंकवादियों ने घात लगाकर हमला किया जिसमें 18 भारतीय जवान शहीद हो गए!
इसके बाद भारतीय सेना ने एक साहसिक निर्णय लिया! 21 पैरा कमांडो की टीम ने सीमा पार जाकर म्यांमार में आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाया! उस समय यह ऑपरेशन थर्ड कॉर्प्स के अधीन था और उसके कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल बिपिन रावत थे!
इस ऑपरेशन ने दुनिया को यह संदेश दिया कि भारत अब सीमा पार से होने वाले हमलों का जवाब देने में हिचकिचाएगा नहीं! सर्जिकल स्ट्राइक और कड़ा संदेश-बाद के वर्षों में पाकिस्तान के खिलाफ हुई सर्जिकल स्ट्राइक के समय भी उनकी रणनीतिक भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है!
उनका स्पष्ट संदेश था कि आतंकवाद को समर्थन देने वालों को इसकी कीमत चुकानी होगी! उन्होंने कई बार सार्वजनिक मंचों पर कहा कि भारत को हमेशा अपने दुश्मनों से दो कदम आगे रहना होगा!
उनके शब्दों में -आतंकवादी अपनी रणनीति बदलते रहते हैं, इसलिए सेना को उनसे पहले कदम उठाने के लिए तैयार रहना चाहिए।
जब बने भारतीय सेना के प्रमुख!
दिसंबर 2016 में बिपिन रावत को भारतीय सेना का 27वां प्रमुख नियुक्त किया गया! यह नियुक्ति चर्चा का विषय भी बनी क्योंकि उन्होंने दो वरिष्ठ अधिकारियों को पीछे छोड़ते हुए यह पद संभाला था!
लेकिन पद संभालने के बाद उन्होंने कई महत्वपूर्ण सैन्य सुधारों पर काम शुरू किया! उनकी प्राथमिकता थी-सेना का आधुनिकीकरण और भविष्य की युद्ध रणनीति।
देश के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ!
जनवरी 2020 में भारत सरकार ने उन्हें देश का पहला चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ नियुक्त किया! इस पद का उद्देश्य था – थल सेना, वायु सेना और नौसेना के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना! सीडीएस बनने के बाद उन्होंने थिएटर कमांड की अवधारणा को आगे बढ़ाया!
इस योजना के तहत तीनों सेनाओं को संयुक्त कमांड के माध्यम से संचालित करने की दिशा में काम शुरू हुआ! उन्होंने सेना के बजट प्रबंधन, तकनीकी आधुनिकीकरण और इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप जैसे कई महत्वपूर्ण सुधारों का रोडमैप तैयार किया!
निजी जीवन!
1985 में बिपिन रावत ने मधुलिका रावत से विवाह किया! मधुलिका रावत सेना से जुड़े परिवारों के कल्याण के लिए सक्रिय रूप से काम करती थीं! वे आर्मी वाइव्स वेलफेयर एसोसिएशन और बाद में डिफेंस वाइव्स वेलफेयर एसोसिएशन की अध्यक्ष भी रहीं!
यह दंपति दो बेटियों – कृतिका और तारिणी – के माता-पिता थे! वह दिन जिसने देश को झकझोर दिया! 8 दिसंबर 2021 का दिन भारत के लिए बेहद दुखद साबित हुआ!
तमिलनाडु के कुन्नूर के पास भारतीय वायुसेना का Mi-17 हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया! इस हेलीकॉप्टर में जनरल बिपिन रावत, उनकी पत्नी और अन्य सैन्य अधिकारी सवार थे! इस दुर्घटना में कुल 13 लोगों की मृत्यु हो गई! पूरा देश स्तब्ध रह गया!
जिस व्यक्ति ने चार दशक से अधिक समय तक देश की सुरक्षा के लिए काम किया, उसका जीवन एक पल में समाप्त हो गया!
एक सैनिक की विरासत!
करीब 43 वर्षों की सैन्य सेवा में बिपिन रावत को कई वीरता और सेवा पदकों से सम्मानित किया गया! उन्हें विशिष्ट सेवा मेडल, सेना मेडल, युद्ध सेवा मेडल, अति विशिष्ट सेवा मेडल, उत्तम युद्ध सेवा मेडल और परम विशिष्ट सेवा मेडल से नवाजा गया!
उनके निधन के बाद भारत सरकार ने उन्हें पद्म विभूषण से भी सम्मानित किया! लेकिन इन पुरस्कारों से भी बड़ी उनकी पहचान है – एक ऐसे सैनिक की, जिसने सेना के भविष्य को बदलने की दिशा में साहसिक कदम उठाए!
एक अधूरी छलांग, और एक अमर कहानी!
एनडीए के स्विमिंग पूल में एक अधूरी छलांग के कारण सीनियॉरिटी खो देने वाला वह कैडेट आगे चलकर भारतीय सेना का चेहरा बन गया! इतिहास अक्सर ऐसे ही विरोधाभासों से भरा होता है! कभी छोटी सी असफलता जीवन की दिशा बदल देती है, और कभी वही असफलता व्यक्ति को उस ऊंचाई तक पहुंचा देती है जिसकी कल्पना भी उस समय कोई नहीं कर पाता!
जनरल बिपिन रावत की कहानी भी कुछ ऐसी ही है अनुशासन, साहस, निर्णय और राष्ट्रसेवा की कहानी! एक सैनिक की कहानी, जो आज भी भारत की सैन्य स्मृति में जीवित है!!
CDS Bipin Rawat, Indian Army Chief!🫡
16/03/2026
💐🙏🇮🇳
Remembering General Bipin Rawat Ji on his Birth Anniversary. India's first Chief of Defence Staff & former Chief of one of the world's largest armies, the Indian Army.
Today, honouring and remembering the legacy of this highly decorated officer for his dedicated service to the nation. 💐🙏You are an inspiration to us!🫡Jai Hind 🇮🇳
07/03/2026
आज ईरान, इजरायल, अमेरिका, दुबई, अबुधाबी, कतर, बहरीन, इराक, सीरिया, यमन, सूडान, सऊदी अरेबिया, यूक्रेन, रूस, फिलिस्तीन, जॉर्डन में हजारों बम बरस रहे हैं!
पिछले चार सालों से आधा यूरोप युद्ध के साये में है... आधी दुनिया में अस्थिरता और भुखमरी छाई हुई है! रमजान के महीने में इस्लामिक देशों में धमाके हो रहे हैं! अफगानिस्तान और पाकिस्तान जैसे भिखमंगे देश भी, आपसी लड़ाई में लगे हैं!
हमारे सभी पड़ोसी देश पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका, नेपाल के हालातों पर ना ही बोलें तो अच्छा है! सारे देश आपस में लड़ रहे हैं ! और इधर भारत में, बिना डरे बे-खौफ़ विश्वकप क्रिकेट मैच हो रहा है!
होली, रंगपंचमी जैसे त्यौहार मनाये जा रहे हैं.. जगह जगह भण्डारे चल रहे हैं! और मुस्लिम लोग शांती से रमजान का पर्व मना रहे हैं! क्योंकि, हमारे पास मोदी जी हैं और उनकी लाजवाब विदेश नीति है! भारत में हो, इसलिए सुरक्षित हो वरना, दुबई या कतर की लग्जरी लाईफ में भी लोग असमय ही बेमौत मारे जा रहे हैं!
भारत को छोड़ पूरी दुनिया में अफरा तफरी मची हुई है ! पता है क्योंकि एक शेर खड़ा है भारत की रक्षा के लिए! अपने दूरदर्शी राष्ट्रीय नेताओं और उनकी विदेश नीतियों का अपमान ना करें और उन्हें सपोर्ट करें !
*भारत ही सर्वश्रेष्ठ है!
*भारत ही सुरक्षित है!
*राष्ट्रहित सर्वोपरि!
भारत माता की जय ! वंदे मातरम - जय हिंद 🇮🇳 🙏
06/03/2026
India has lost two brave officers of the Indian Air Force after a tragic crash involving a Sukhoi Su-30MKI fighter aircraft.
Deeply sadended and shocked by the loss of two fighter pilots Squadron Leader Anuj and Flight Lieutenant Purvesh Duragkar in a tragic Su-30 crash! 🥲
A Big Salute 🫡 & homage to the Bravehearts 💐 Heartfelt condolences to the bereaved families! 🥲
03/03/2026
राइफलमैन जसवंत सिंह रावत: वह अमर सैनिक जो आज भी सरहद पर तैनात है!
भारतीय सेना के इतिहास में अनगिनत शौर्य गाथाएं हैं, लेकिन गढ़वाल राइफल्स के राइफलमैन जसवंत सिंह रावत की कहानी सबसे अलग और अद्भुत है! यह कहानी है उस वीर सपूत की, जो शहादत के दशकों बाद भी देश की रक्षा कर रहा है, जिसकी आज भी ड्यूटी लगती है, प्रमोशन होता है और छुट्टियां भी मंजूर की जाती हैं!
1962 का युद्ध और एक ऐतिहासिक फैसला:
बात 1962 के भारत-चीन युद्ध की है! अरुणाचल प्रदेश के नूरानांग में भारी चीनी आक्रमण के कारण जब भारतीय सेना की टुकड़ी को पीछे हटने का आदेश मिला, तो मातृभूमि के इस दीवाने ने अपनी पोस्ट छोड़ने से साफ इनकार कर दिया! उन्होंने वहीं रुककर अकेले ही विशाल चीनी सेना का सामना करने का अदम्य फैसला लिया!
72 घंटे का महासंग्राम और 'वन मैन आर्मी':
इस असंभव सी लगने वाली लड़ाई में जसवंत सिंह को सेला और नूरा नाम की दो साहसी स्थानीय लड़कियों का साथ मिला! उन्होंने अपनी सूझबूझ से अलग-अलग बंकरों में हथियार और मशीनगनें सेट कीं! वे लगातार एक बंकर से दूसरे बंकर में भागते हुए फायरिंग करते रहे! उनकी इस शानदार रणनीति ने चीनी सेना को पूरी तरह भ्रमित कर दिया; उन्हें लगा कि उनका सामना किसी पूरी भारतीय बटालियन से हो रहा है! लगातार 3 दिन (72 घंटे) तक उन्होंने चीनियों को वहीं रोके रखा और वीरगति प्राप्त करने से पहले लगभग 300 चीनी सैनिकों को मौत के घाट उतार दिया!
जसवंत गढ़: जहां आज भी मौजूद है वह शूरवीर:
उनके इस सर्वोच्च बलिदान और अकल्पनीय वीरता के सम्मान में भारतीय सेना ने उन्हें कभी 'मृत' या रिटायर नहीं माना! आज भी अरुणाचल प्रदेश के 'जसवंत गढ़' मेमोरियल में उन्हें एक जीवित सैनिक का सम्मान दिया जाता है! वहां तैनात जवान रोज सुबह उनके जूतों पर पॉलिश करते हैं, उनका बिस्तर लगाया जाता है और उन्हें चाय दी जाती है! यहां तक कि एक जीवित सैनिक की तरह समय-समय पर उनका प्रमोशन भी होता है!
राइफलमैन जसवंत सिंह रावत सिर्फ एक सैनिक नहीं, बल्कि भारत के अदम्य साहस का वह अमर प्रतीक हैं, जिनके आगे दुश्मन और मौत, दोनों ने घुटने टेक दिए थे!!
28/02/2026
"दुश्मन की गोलियों का हम सामना करेंगे, आजाद ही रहे हैं, आजाद ही रहेंगे!" 🇮🇳
भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महानायक, अदम्य साहस और देशभक्ति के प्रतीक अमर शहीद चन्द्रशेखर आज़ाद जी की पुण्यतिथि पर उन्हें कोटि-कोटि नमन!🙏
मातृभूमि की स्वतंत्रता के लिए उनका सर्वोच्च बलिदान हर भारतीय के दिल में हमेशा अमर रहेगा! उनकी वीरता और अंतिम सांस तक 'आज़ाद' रहने का संकल्प आज भी हमारे रगों में जोश भर देता है!
आइए, आज देश के इस वीर सपूत को श्रद्धांजलि अर्पित करें और उनके बलिदान को याद करें! भारत माता की जय! वन्दे मातरम्! 🇮🇳
26/02/2026
जब राष्ट्र के स्वाभिमान की बात आती है, तो दुनिया के कुछ देशों का विपक्ष अनुकरणीय मिसाल पेश करता है, जबकि हमारे यहाँ का विपक्ष देश को शर्मसार करने का कोई मौका नहीं छोड़ता!
हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इजरायल यात्रा के दौरान नेसेट (इजरायली संसद) में जो हुआ, वह हर भारतीय की आँखें खोलने के लिए काफी है! इजरायल में बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार और वहां के विपक्ष (जैसे याइर लापिद और बेनी गैंट्ज़) के बीच कुछ विषयों पर तीखे मतभेद हैं! इजरायली विपक्ष ने पहले ही घोषित किया था कि वे अपने प्रधानमंत्री और स्पीकर के संसदीय संबोधन का विरोध करेंगे और उनके भाषण का बहिष्कार करेंगे, लेकिन जब बात अपने राष्ट्र इज़रायली आतिथ्य सत्कार व भारत के प्रधानमंत्री के सम्मान की आई, तो नजारा बदल गया! जैसे ही पीएम मोदी भाषण के लिए खड़े हुए, बहिष्कार कर रहा विपक्ष तुरंत अपनी कुर्सियों पर वापस लौट आया! उन्होंने दुनिया को यह संदेश दिया कि वे अपने प्रधानमंत्री से लड़ सकते हैं, यह उनका अंदरूनी राजनीतिक मामला है, लेकिन एक विदेशी राष्ट्राध्यक्ष के सामने अपने देश की गरिमा को कम नहीं होने देंगे! इसे कहते हैं राष्ट्रभक्ति और परिपक्व विपक्ष!
इसके ठीक उलट, भारत के विपक्षी दल विशेषकर कांग्रेस और उसके पिछलग्गू पार्टियां क्या कर रही हैं?
हाल ही में दिल्ली के 'भारत मंडपम' में आयोजित वैश्विक 'India AI Impact Summit 2026' में, जहाँ 100 से अधिक देशों के प्रतिनिधि, दर्जनों राष्ट्राध्यक्ष और वैश्विक टेक लीडर्स (जैसे सैम ऑल्टमैन और डेमिस हसबिस) उपस्थित थे, वहां राहुल गांधी के निर्देश पर यूथ कांग्रेस के नेताओं ने जो "नग्न प्रदर्शन" किया, उसने पूरे देश का सिर शर्म से झुका दिया! विदेशी मेहमानों के सामने शर्ट उतारकर अर्धनग्न होकर हंगामा करना और देश की छवि को धूमिल करना क्या यही राहुल गांधी की 'मोहब्बत की दुकान' है? 🤔
प्रधानमंत्री मोदी का यह कहना एकदम सही है कि "देश तो पहले से जानता है कि आप (मानसिक रूप से) नग्न हैं, तो विदेशी मेहमानों के सामने कपड़े उतारकर देश को शर्मिंदा करने की क्या आवश्यकता थी?”
विडंबना देखिए, कांग्रेस के जयराम रमेश और कांग्रेस व उसके सहयोगी दलों के अन्य नेता इजरायल दौरे का विरोध कर रहे हैं, जबकि इजरायल का विपक्ष भारत के पीएम मोदी के सम्मान में खड़ा हो रहा है! यह स्पष्ट दिखाई देता कि कांग्रेस की यह "हताशा की राजनीति" अब केवल मोदी विरोध तक सीमित नहीं रही, बल्कि सीधे भारत के 'सॉफ्ट पावर' और राष्ट्रीय गौरव पर हमला बन गई है!
भारतीय विपक्ष को इजरायल के विपक्ष से यह सीखना चाहिए कि सत्ता के लिए देश की साख को दांव पर नहीं लगाया जाता! उत्तर प्रदेश में 2027 हो या 2029 में आम चुनाव, भारत की राष्ट्रवादी जनता इस "शर्मनाक आचरण" का हिसाब अवश्य करेगी!!
जब छोटा था तो सुना था कि विदेश मैं अच्छी पढ़ाई होती है! लेकिन राहुल और अखिलेश को देखने के बाद मेरा भ्रम टूट गया!! 😂