School Lecturer-political Science Group

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Politics is the game of corner.

20/04/2023

जस्टिस ' ऑगस्टाइन जॉर्ज मसीह;होंगे राजस्थान उच्च न्यायालय के 41 वें मुख्य न्यायाधीश।

13/04/2023

🙏🙏वर्तमान में राष्ट्रीय दल

1. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस:__
स्थापना:_ 28 दिसंबर 1885 को

2. भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी)
स्थापना:__ 1980 में
राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा:_ 1980-84 के बीच

3. भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी)__
स्थापना:_ 1964 में
राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा:_1968 में

4. बहुजन समाज पार्टी (बसपा)___
स्थापना:_ 1984 में
राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा:_ 2004 में

5. नेशनल पीपुल्स पार्टी:_
स्थापना:_ 2013
राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा:_ जून 2019 में

6. आम आदमी पार्टी (आप)__
स्थापना:_ 2012 में
राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा ___2023 में।

11/04/2023

#भारत में क्षेत्रीय परिषद्

परिचय:
क्षेत्रीय परिषदें वैधानिक (संवैधानिक नहीं) निकाय हैं।

ये संसद के एक अधिनियम, यानी राज्य पुनर्गठन अधिनियम 1956 द्वारा स्थापित किये गए हैं।

इस अधिनियम ने देश को पाँच क्षेत्रों- उत्तरी, मध्य, पूर्वी, पश्चिमी और दक्षिणी में विभाजित किया तथा प्रत्येक क्षेत्र के लिये एक क्षेत्रीय परिषद प्रदान की।

#इन क्षेत्रों का निर्माण करते समय कई कारकों को ध्यान में रखा गया है जिनमें शामिल हैं:-

देश का प्राकृतिक विभाजन,
नदी प्रणाली और संचार के साधन,
सांँस्कृतिक व भाषायी संबंध
आर्थिक विकास, सुरक्षा एवं कानून व्यवस्था की आवश्यकता।

उपर्युक्त क्षेत्रीय परिषदों के अलावा, संसद के एक अलग अधिनियम वर्ष 1971 के उत्तर-पूर्वी परिषद अधिनियम द्वारा एक उत्तर-पूर्वी परिषद बनाई गई थी।
इसके सदस्यों में असम, मणिपुर, मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मेघालय, त्रिपुरा और सिक्किम शामिल हैं।

ये सलाहकार निकाय हैं जो केंद्र और राज्यों के सीमा विवादों, भाषाई अल्पसंख्यकों, अंतर-राज्यीय परिवहन या राज्यों के पुनर्गठन से जुड़े मामलों के बीच आर्थिक और सामाजिक योजना के क्षेत्र में सामान्य हित के किसी भी मामले के संबंध में सिफारिशें करते हैं।

#संरचना:__
उत्तरी क्षेत्रीय परिषद: इसमें हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, राजस्थान राज्य, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली और संघ राज्य क्षेत्र चंडीगढ़, जम्मू और कश्मीर तथा लद्दाख शामिल हैं।

मध्य क्षेत्रीय परिषद: इसमें छत्तीसगढ़, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश राज्य शामिल हैं।

पूर्वी क्षेत्रीय परिषद: इसमें बिहार, झारखंड, उड़ीसा और पश्चिम बंगाल राज्य शामिल हैं।

पश्चिमी क्षेत्रीय परिषद: इसमें गोवा, गुजरात, महाराष्ट्र राज्य और संघ राज्य क्षेत्र दमन-दीव तथा दादरा एवं नगर हवेली शामिल है।

दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद: इसमें आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, राज्य और संघ राज्य क्षेत्र पुद्दुचेरी शामिल हैं।

#संगठनात्मक ढाँचा:_
अध्यक्षः केन्द्रीय गृह मंत्री इन सभी परिषदों के अध्यक्ष होता है।

उपाध्यक्ष– प्रत्येक क्षेत्रीय परिषद में शामिल किये गए राज्यों के मुख्यमंत्री, रोटेशन से एक समय में एक वर्ष की अवधि के लिये उस अंचल के आंचलिक परिषद के उपाध्यक्ष के रूप में कार्य करते हैं।

सदस्य: मुख्यमंत्री और प्रत्येक राज्य से राज्यपाल द्वारा यथा नामित दो अन्य मंत्री और परिषद में शामिल किये गए संघ राज्य क्षेत्रों से दो सदस्य।

सलाहकार: प्रत्येक क्षेत्रीय परिषदों के लिये योजना आयोग (अब नीति आयोग) द्वारा नामित एक, मुख्य सचिव और जोन में शामिल प्रत्येक राज्य द्वारा नामित एक अन्य अधिकारी/विकास आयुक्त होते हैं।

#उद्देश्य:_
राष्ट्रीय एकीकरण को साकार करना।
तीव्र राज्यक संचेतना, क्षेत्रवाद तथा विशेष प्रकार की प्रवृत्तियों के विकास को रोकना।
केंद्र एवं राज्यों को विचारों एवं अनुभवों का आदान-प्रदान करने तथा सहयोग करने के लिये सक्षम बनाना।
विकास परियोजनाओं के सफल एवं तीव्र निष्पादन के लिये राज्यों के बीच सहयोग के वातावरण की स्थापना करना।

#परिषदों के कार्य:_
आर्थिक और सामाजिक नियोजन के क्षेत्र में सामान्य हित का कोई भी मामला;
सीमा विवाद, भाषाई अल्पसंख्यकों या अंतर-राज्यीय परिवहन से संबंधित कोई भी मामला;
राज्य पुनर्गठन अधिनियम के तहत राज्यों के पुनर्गठन से संबंधित या उससे उत्पन्न कोई भी मामला।

10/04/2023

व्लादिमीर इलिच लेलिन ___(1870-1924)

मार्क्सवाद को सर्वप्रथम व्यवहार में लाने का श्रेय " लेनिन; को ही है।

क्रांति होती नहीं,क्रांति की जाती है।( लेनिन)

#लेनिन की मूल मान्यताएं:_

लेनिन ने मार्क्स की सभी मान्यताओं को स्वीकार किया और मार्क्स की मान्यताओं को व्यवहार में प्रयोग करने का प्रयास किया।।

उन्होंने मार्क्स के विचारों का प्रयोग करते हुए,कुछ नए विचारों का निर्माण किया।

01:_ साम्राज्यवाद का सिद्धांत।
02:_ दल का सिद्धान्त।

लेनिन ने " लोकतान्त्रिक केंद्रवाद ; का विचार दिया।

लेनिन के अनुसार " साम्यवादी लोकतंत्र, निर्देशित लोकतंत्र है।

लेनिन ने अक्टूबर 1917 की क्रांति में " रोटी,भूमि और शांति ; का नारा दिया।

लेनिन ने पूंजीवाद के विनाश को अपरिहार्य माना। साम्यवादी क्रांति को सुनिश्चित माना।
लेकिन उन्होंने वर्ग की संकल्पना में मजदूरों के साथ ( किसानों) को भी जोड़ दिया।

लेनिन के अनुसार ' क्रांति का अभिप्राय Class in itself का class for itself में परिवर्तित होना है।।

#साम्राज्यवाद का सिद्धान्त:_

📖__ "imperialism,the Highest stage of capitalism (1917)

लेनिन ने पूंजीवाद की उच्चतम अवस्था ' वित्तीय पूंजीवाद / एकाधिकारवादी पूंजीवाद को कहा।

कथन__साम्राज्यवाद,पूंजीवाद की उच्चतम अवस्था है।

लेनिन ने साम्राज्यवादी शोषण की रूस को कमज़ोर कड़ी कहते हुए कहा कि यहां क्रांति करना ज्यादा आसान है। क्योंकि रूस में एक संगठित दल विद्यमान है।

# दल का सिद्धान्त:_

लेनिन ने अपनी पुस्तक :📖
"व्हाट इज टू बी done ✅
में दल को बुद्धिजीवी और प्रशिक्षित लोगों का संघटन माना।

दल,सर्वहारा वर्ग की सबसे प्रशिक्षित और भौतिक रूप में श्रेष्ठ और अग्रवाहक पंक्ति है।।

#लेनिन के अनुसार,दल के मूलभूत कार्य:__

01: सर्वहारा वर्ग को साम्यवादी शिक्षा प्रदान करना।
02: साम्यवादी समाज की योजना बनाना।

09/04/2023

#ऐतिहासिक भौतिकवाद:_

इतिहास की आर्थिक व्याख्या ही " ऐतिहासिक भौतिकवाद; है।

मार्क्स ने अपनी रचना 📖_ "द जर्मन आइडियोलॉजी; में भौतिकवाद का विश्लेषण किया।

मार्क्स ने इतिहास का आर्थिक विश्लेषण करते हुए, इतिहास की निम्न 05 अवस्थाएं बताई।

01:_ आदिम साम्यवाद
02:_ दास युग
03:_ सामंतवादी युग
04:_ सर्वहारा वर्ग का अधिनायकवाद
05:_ साम्यवाद।

मार्क्स के अनुसार इतिहास की व्याख्या " विकासवादी और नियति वादी है।

विकासवादी इसलिए क्यों कि _ इतिहास की प्रत्येक अवस्था उसके पहले की अवस्था से प्रगतिशील है।

परंतु नियतिवादी इसलिए___ कि साम्यवाद ने बाद इसका विकास नहीं होगा।

मार्क्स ने साम्यवाद को विकास का सर्वोच्च स्तर माना।

मार्क्स ने अपनी रचना __थीसिस ऑन फ्यूरबैच (1845) में लिखा__ अभी तक विचारकों ने दुनिया की व्याख्या की है,आवश्यकता इसे परिवर्तित करने की है।

09/04/2023

मार्क्स के सिद्धांत

#द्वंदात्मक भौतिकवाद:_

द्वंदवाद विकास की पद्धति है,जिसके अनुसार विकास की प्रक्रिया वाद,प्रतिवाद और संवाद से पूर्ण होती है। इस प्रक्रिया में प्रतिवाद वाद का निषेध करता है तथा "संवाद; निषेधों का निषेध होता है।

द्वंदात्मक भौतिकवाद का आशय उस प्रक्रिया से है , जिसमें मूल भौतिक तत्वों का विकास द्वंदात्मक प्रक्रिया के माध्यम से व्यक्त किया जाता है।

भौतिक तत्व__ मार्क्स से अनुसार स्वत: गतिशील होते है।

हॉब्स से अनुसार:__ भौतिक तत्वों में बाहर से गति प्रदान की जाती थी।

द्वंदात्मक पद्धति के अनुसार__

वाद ( पूंजीवाद)।
प्रतिवाद ( सर्वहारा वर्ग का अधिनायकतत्व)।
संवाद (साम्यवाद)।
की यह प्रक्रिया वर्ग विहीन और राज्य विहीन समाज ( साम्यवाद) के रूप में अपने विकास के सर्वोच्च स्तर को प्राप्त करेगी।।

द्वंदात्मक भौतिकवाद के नियम:__

01:_मात्रा का गुणवता के तथा इसके विपरीत नियम

02:_ विरोध की एकता के नियम
03:_ नकारने को नकारने का नियम

# हीगल की आलोचना:_

मार्क्स ने द्वंदात्मक पद्धति हीगल से ग्रहण की। परंतु जहां हीगल ने मूल तत्व " चेतना; को माना। वहीं मार्क्स ने मूल तत्व" भौतिक ; को स्वीकार किया।

मार्क्स ने कहा:_ मैनें हीगल के विचार को सीधा खड़ा कर दिया। वह अभी तक सिर के बल खड़ा था।

09/04/2023

कार्ल मार्क्स (1818_1883)

जन्म __1818 में प्रेशिया के ट्रियर नगर में यहूदी परिवार में हुआ।

मार्क्स के विचारों का दार्शनिक आधार__

होलबेक __के भौतिकवादी विचारों से प्रभावित।

होलबेक ___ मनुष्य द्वारा ईश्वर का निर्माण हुआ है।

इंग्लैंड में परंपरागत दार्शनिको (एडम स्मिथ और रिकार्डो) से " श्रम का मूल्य सिद्धांत ; लिया।

वर्ग संघर्ष का विचार___ " ऑगस्टिन थियरे; से

द्वंदात्मक दर्शन__हीगल से ग्रहण किया।

भौतिकवाद दर्शन___फायरबाख से ग्रहण किया।

#मार्क्स के मूल विचार:_

मार्क्स ने समाज को आर्थिक रूप से दो वर्गों में विभाजित किया।
01:__ बर्जुआ वर्ग ( पूंजीवादी)
02:__ सर्वहारा वर्ग

मार्क्स के सिद्धान्त का मूल आधार___ आर्थिक नियतिवाद है।

मार्क्स ने वर्ग संघर्ष द्वारा समाज के विकास और क्रांति का विश्लेषण किया।

पहली बार " इतिहास का आर्थिक विश्लेषण; किया।

वर्ग विहीन और राज्य विहीन समाज की कल्पना की।

मार्क्स ने स्वतंत्रता का आशय " विवशता का अंत; बताया।

मार्क्स पहले समाजवादी नहीं,बल्कि पहले वैज्ञानिक समाजवादी है।।

रचना 📖__ द कम्युनिस्ट मेनिफेस्टो (1848) में " मार्क्स और फ्रेडरिक एंगेल्स ने लिखी।

इस पुस्तक में इन्होंने स्वयं को " वैज्ञानिक समाजवादी कहा और सेंट साइमन, चार्ल्स फोरियर और रॉबर्ट ओवन को " कल्पना लोकिया; समाजवादी कहा।

समाजवाद के मूल तत्व __ समानता,समुदाय की प्राथमिकता,उत्पादन के साधनों पर समुदाय का नियंत्रण और बंधुत्व है।।

मार्क्स की रचनाओं के क्रम __

01:_ थीसिस ऑन फ्यूरबैच (1845)

02:_ द पावर्टी ऑफ फिलोसॉफी ( 1847)
03:_ द कम्युनिस्ट मेनिफेस्टो (1848)

07/04/2023

जॉन स्टुअर्ट मिल ___

जन्म:_ 20 मई 1806 को (लंदन) में
मृत्यु:_ 1873 में

मिल उपयोगितावाद का अंतिम समर्थक और व्यक्तिवाद का अग्रणी समर्थक था।

# स्वतंत्रता संबंधी विचार___ 📖 _Essay on liberty 🗽 (1859) में

मिल ने महिला मताधिकार का जोरदार समर्थन किया।

महिला मताधिकार संबंधी विचार__📖 Considerations on repersentative government (1861) में

मिल ने पहली बार " कल्याणकारी राज्य का सिद्धांत प्रतिपादन किया।

और हस्तक्षेप वादी राज्य का समर्थन किया।

कल्याणकारी राज्य संबंधी विचार _📖
Principal of political economy (1848 ) में

मिल एलेक्सी डी. टॉकवेल की रचना __ डेमोक्रेसी इन अमरीका से प्रभावित था।

04/04/2023

उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (अंग्रेज़ी: North Atlantic Treaty Organization, NATO ; नॉर्थ एटलांटिक ट्रीटी ऑर्गनाइज़ेशन, नाटो ) एक सैन्य गठबंधन है, जिसकी स्थापना 04 अप्रैल 1949 को हुई। इसका मुख्यालय ब्रुसेल्स (बेल्जियम) में है। संगठन ने सामूहिक सुरक्षा की व्यवस्था बनाई है, जिसके अन्तर्गत सदस्य राज्य बाहरी आक्रमण की स्थिति में सहयोग करने के लिए सहमत होंगे।

सदस्य संख्या ___31 ( हाल ही में फिनलैंड ने 31 वें सदस्य के तौर पर नाटो सैन्य संगठन की सदस्यता ग्रहण की है।)

03/04/2023

पंचायतों के खण्ड स्तर पर विविध नाम____

राजस्थान ,आंध्रप्रदेश, बिहार उड़ीसा__ पंचायत समिति

जनपद पंचायत ___मध्य प्रदेश

तालुका परिषद ____गुजरात और कर्नाटक

क्षेत्र समिति___उत्तर प्रदेश

आंचलिक पंचायत समिति _____आसाम

आंचलिक परिषद ___पश्चिमी बंगाल

पंचायत संघ __तमिलनाडु

29/03/2023

● ● मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्त इनकी पहले नियुक्ति - केन्द्र सरकार की सिफारिश पर अनुच्छेद 324 (2) के तहत राष्ट्रपति करता वर्तमान में उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद संसद द्वारा कानून बनाने तक कॉलेजियम के तहत स्वतन्त्र पैनल द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की जाएगी । स्वतंत्र पैनल के सदस्य :- PM लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष CGI पैनल | मुख्य चुनाव आयुक्त व चुनाव आयुक्त का कार्यकाल :- 6 वर्ष या 65

साल | चुनाव आयुक्त का दर्जा उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश स्तर का होता है। संविधान सभा में मुख्य चुनाव आयुक्त के बारे में डॉ. बी. आर. अम्बेडकर ने कहा था, कि किसी अनुपयुक्त व्यक्ति को मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में नियुक्ति उनके तथा पूरी सभा के लिए सिरदर्दी है।

Join group chat on Telegram 31/10/2022

प्रमुख संविधान संशोधन - जहां से हर बार प्रश्न एग्जाम में पूछे जाते हैं। 🔰

▪️1st (1950) - भूमि सुधार

▪️35th (1974) - सिक्किम को भारतीय संघ के सह राज्य का दर्जा

▪️36th (1975) - सिक्किम को पूर्ण राज्य का दर्जा

▪️42nd (1976) - समाजवादी धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र की अखंडता को परिभाषित किया गया, नीति निदेशक तत्व को अधिक व्यापक बनाया गया, मूल कर्तव्यों को जोड़ा गया, न्यायाधीशों की न्यूनतम संख्या निर्धारित की गई

▪️44th (1978) - संपत्ति के अधिकार को मूल अधिकार से हटा दिया गया

▪️52nd (1985) - दलबदल अधिनियम लाया गया

▪️61th (1989) - मताधिकार की आयु 21 से घटाकर 18 की गई

▪️73rd (1992) - पंचायती राज व्यवस्था

▪️74th (1992) - नगर पालिका

▪️86th (2002) - 6 से 14 वर्ष के बच्चों को निशुल्क शिक्षा

▪️101वां (2016) - GST

▪️102वां (2018) - राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा

▪️103वां (2019) - EWS के लिए

▪️104वां (2019) - संविधान के अनुच्छेद 334 में संशोधन स्थानों के आरक्षण और विशेष प्रतिनिधित्व का 80 वर्ष के पश्चात ना रहना

▪️105वां (2021) - इस संशोधन ने राज्य सूचियों और पिछड़े वर्गों की पहचान करने और उन्हें अधिसूचित करने की राज्यों की शक्ति को संरक्षित किया।👏

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