17/04/2024
क्षत्राणी गा रही हैं दिन रात राम गुणगान दुनिया के लोग सुन लो श्रीराम राम गुणगान
Dr.Amrita Soni
Ph.D. in Indian Classical Music
23/12/2022
श्री गजानन महाराज धून | गजानना श्री गजानना जय जय श्री गजानना | Gajanana Shri Gajanana Dhun श्री गजानन महाराज धून | गजानना श्री गजानना जय श्री गजाननाSinger: KUMAAR SANJEEV | AMRITA SONIMusic: KUMAAR SANJEEVLyrics: TRADITIONAL ...
23/12/2022
*🌹अति सुन्दर,सनातन घड़ी🌹*
*12:00* बजने के स्थान पर *आदित्य* लिखा हुआ है जिसका अर्थ यह है कि *सूर्य 12 प्रकार* के होते हैं।
*1:00* बजने के स्थान पर *ईश्वर* लिखा हुआ है इसका अर्थ यह है कि *ईश्वर एक* ही प्रकार का होता है। *एको ब्रह्म द्वितीयो नास्ति।*
*2:00* बजने की स्थान पर *पक्ष* लिखा हुआ है जिसका तात्पर्य यह है कि *पक्ष दो* होते हैं *1 कृष्ण पक्ष* औऱ दूसरा *शुक्ल पक्ष।*
*3:00* बजने के स्थान पर *अनादि तत्व* लिखा हुआ है जिसका तात्पर्य यह है कि *अनादि तत्व 3* हैं। *परमात्मा*, *जीवात्मा* और *प्रकृति* ये तीनों तत्व अनादि है ,
*4:00* बजने के स्थान पर *वेद* लिखा हुआ है जिसका तात्पर्य यह है कि वेद चार प्रकार के होते हैं -- *ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद।*
*5:00* बजने के स्थान पर *महाभूत* लिखा हुआ है जिसका तात्पर्य है कि महाभूत पांच प्रकार के होते हैं। *पांच महाभूत हैं* - *सत्वगुण, रजगुण, कर्म, काल, स्वभाव"*
*6:00* बजने के स्थान पर *दर्शन* लिखा हुआ है इसका तात्पर्य है कि *दर्शन 6 प्रकार* के होते हैं । छः दर्शन *सांख्य, योग, न्याय, वैशेषिक, मीमांसा और वेदान्त* के नाम से विदित है।
*7:00* बजे के स्थान पर *धातु* लिखा हुआ है इसका तात्पर्य है कि *धातु 7* हैं। सात धातुओं के नाम
*रस : प्लाज्मा*
*रक्त : खून (ब्लड)*
*मांस : मांसपेशियां*
*मेद : वसा (फैट)*
*अस्थि : हड्डियाँ*
*मज्जा : बोनमैरो*
*शुक्र : प्रजनन संबंधी ऊतक*
*8:00* बजने के स्थान पर *अष्टांग योग* लिखा हुआ है इसका तात्पर्य है कि *योग के आठ प्रकार* होते है। योग के आठ अंग हैं: *1) यम, २) नियम, ३) आसन, ४) प्राणायाम, ५) प्रत्याहार, ६) धारणा ७) ध्यान ८) समाधि*
*9:00* बजने के स्थान पर *अंक* लिखा हुआ है इसका तात्पर्य है कि *अंक 9 प्रकार के होते हैं। 1 2 3 4 5 6 7 8 9*
*10:00* बजने के स्थान पर *दिशाएं* लिखा हुआ है इसका तात्पर्य है कि *दिशाएं 10 होती है।*
*11:00* बजने के स्थान पर *उपनिषद* लिखा हुआ है इसका तात्पर्य है कि *उपनिषद 11 प्रकार के होते हैं।*
🙏🙏🙏
*रियाज़ करने के कुछ टिप्स*
1.संगीत सीखने का सबसे पहला पाठ और रियाज़ ओंकार का है. वेबसाइट पर इसके बारे में बताया गया है. ३ महीनो तक आप रोज़ सुबह कम से कम ३० मिनट 'सा' के स्वर में ओंकार का लगातार अभ्यास करें ।
2.अगर आप और समय दे सकते हैं तो ओंकार रियाज़ करने के बाद 5 मिनट आराम कर के, सरगम आरोह अवरोह का धीमी गति में ३० मिनट तक रियाज़ करें. जल्दबाजी नहीं करें ।
3.सरगम का रियाज़ करते समय स्वर ठीक से लगाने का पूरा ध्यान रखें । अगर स्वर ठीक से नहीं लग रहा है तो बार बार कोशिश करें । संगीत अभ्यास में लगन की जरूरत होती है और शुरुआत में बहुत धीरज और इत्मीनान चाहिए ।
4.रियाज़ में खरज का रियाज़ सबसे अच्छा माना जाता है । खरज का रियाज़ करने से गायकी में गहराई और ऊंचे स्वर लगाने की काबलियत आती है । खरज के सुर लगाना थोड़ा मुश्किल होता है लेकिन अगर खरज का रियाज़ सुबह ५ से ६ बजे के बीच में किया जाये तो आसानी से हो जाता है । एक अच्छे गायक के लिए सारे सप्तकों में गा पाना महत्वपूर्ण है और ऐसा कर पाने के लिए खरज का रियाज़ ही एक मात्र अभ्यास है । इसे मन लगा कर, रोज एक अनुशासन के साथ, साधना की तरह करना चाहिए ।
5.संगीत भगवान की देन मानी जाती है और ऐसा सोचा जाता है कि जिसपे भगवान की कृपा होती है, वही गा सकता है । परन्तु ईश्वर ने सबको अपनी कर्मठता से अपने सपने साकार करने की शक्ति दी है । अगर आपका गला और आवाज़ साधारण भी है, तो भी जबरदस्त रियाज़ करके आप अपनी आवाज़ में न सिर्फ नयी जान ला सकते है बल्कि संगीत की बुलंदियों को छू सकते हैं ।
6.कई बार संगीत सीखते समय लोगपूछते हैं कि कितना रियाज़ करना पड़ेगा और कब तक । एक सच्चे संगीत सीखने वाले के लिए रियाज़ कभी ख़त्म नहीं होता और कितना भी रियाज़ ज्यादा नहीं होता और ये बात मैं सिर्फ एक कहने कि बात के लिए नहीं लिख रहा । यह सदी दर सदी से चली आ रही सच्चाई है । लेकिन एक बात और मैं कह सकता हूँ कि जब तक आपको गाने में मेहनत पड़ रही है; जब तक बहुत कोशिश करनी पड़ रही है तब तक आपको सिर्फ और सिर्फ रियाज़ करना चाहिए; गाने और रागों के पीछे नहीं भागना चाहिए । जब आपकी सरगम आरोह-अवरोह में सहजता आ जाये और स्वर के बारे में सोचने भर से आप एक बार में सही स्वर लगता सकते है, बिना किसी सहायता के, तब आप समझिये कि अब आप संगीत के अगले चरण, रागों कि दुनिया में क़दम रख सकते हैं ।
7.रियाज़ करते समय आपकी चार प्रकार से तैयारी होती है ।
एक - आपकी साँस की शक्ति और नियंत्रण स्थिर होते हैं।
दो - आपके गले की पेशियाँ गायकी के उतार चढ़ाव के तनाव को सहजता से झेलने के लिए तैयार होती हैं ।
तीन - आपके कान और दिमाग स्वर को स्वतः प्राकृतिक रूप से पकड़ पाने में समर्थ होते है ।
और
चार - आपका मन और आंतरिक सोच गायकी के लिए जरूरी धैर्य, एकाग्रचित्तता, पवित्रता और सकारात्मकता लाती है ।
अच्छा गायक बनाने के लिए इन चारों ही प्रकार से अपने आप को विकसित करना जरूरी है ।
8.अगर आप रोजाना समय लगा कर कड़ा रियाज़ कर रहे हैं तो 10 -15 दिन के लगातार रियाज़ करने के बाद 1 दिन का विश्राम ले सकते हैं । इससे आपके शरीर में उभरे सभी प्रकार के तनाव गायब हो जातें हैं और आप गायकी के रियाज़ की मेहनत जारी रखने के लिए फिर से, पहले से भी ज्यादा मजबूती से तैयार हो जाते हैं ।
9.रियाज़ में जितना खुद अभ्यास करने की मान्यता है, उतना ही अच्छे संगीत को सुनाने की भी महत्ता है । इसलिए, जितना हो सके अच्छे अच्छे शास्त्रीय संगीत के गायकों को सुनें, चाहे इंटरनेट पे सुने, या CD में सुनें । संगीत को सुनने और उसको मन में ढालने से आपकी सोच तैयार होती है ।
10.रियाज़ में अपनी शारीरिक क्षमता को सम्पूर्ण रूप से तैयार करने के लिए एक और राज़ -
रोजाना कम से कम ३० मिनट प्राणायाम, अगर आप कर सकें । गाते समय अलग अलग सप्तक शरीर के चार अलग अलग भाग पर जोर डालते है - पेट, फेफड़े, गला और सर का ऊपरी हिस्सा । अगर आप रोजाना भस्त्रिका, भ्रामरी और कपालभाती करें तो अपने आप में चमत्कारी परिवर्तन महसूस कर सकते हैं । एक सिर्फ कहने की बात नहीं है, खुद करके देखिये, चमत्कार जरूर होगा ।
11.एक आखिरी बात ।
इस बात का ध्यान रखें की रियाज़ करने के लिए आपने अपनी दिनचर्या को बहुत कष्टकारी, तनावपूर्ण और असहज न बना दिया हो । ऐसा कर के रियाज़ करने से सफलता नहीं मिलती इसलिए ये बहुत जरूरी है कि आप संगीत सीखने के साथ साथ जीवन में बाकी चीजों के साथ संतुलन और सहजता बनाये रखें ।
16/08/2022
https://youtu.be/bF__mNxvFR4
आप सभी को 75 स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं 🙏🇮🇳
मैढ़ क्षत्राणी महामंच की प्रस्तुती आज़ादी के 75 अमृत महोत्सव के उपलक्ष्य में घर घर तिरंगा अभियान🇮🇳 भारत माता की जय 🇮🇳 जय भवानी जय क्षत्राणी 🇮🇳🙏🚩
13/07/2022
*गुरु पूर्णिमा पर सभी गुरूओं को*
*प्रणाम करती हूँ।*
*गुरु पूर्णिमा*
गुरु पूर्णिमा पर किस गुरु का प्रथम वंदण करु,किस गुरु को प्रथम प्रणाम करु....
क्या उस *माॅं* को प्रथम प्रणाम करु
जिसने मुझे इस दुनिया में लाने का काम किया, मैंरी अपनी " *माॅं*" जिसने मुझे प्रथम शब्द का बोध करवाया, प्रथम शब्द बोलना, पढ़ना-लिखना सीखाया.... या उस *पिता* को जिन्होंने मुझे वह पहली स्लेट-पेंन्सिल लाकर दी जिस पर मैं शब्दों को उकेंर सका,वह पुस्तक,वह
बस्ता लाकर दिया जिसमें सांसारिक जीवन की शुरुआत का बोध था .. ...या उस *शिक्षक* को जिसने मुझे अपने पैरों पर खड़े होने की शिक्षा का बोध करवाया...या उस *गुरु* को जिन्होंने मुझे अध्यात्म की और झुकाव करवाया ...या उन *छोटे-बडे भाई-बहनों, परिजनों व मित्रों* को जिन्होंने समय-समय पर मुझे राह दिखा मैंरा उत्साहवर्धन किया ..
*गुरु पूर्णिमा के पावन पर्व पर आप सभी गुरुजनों को प्रणाम*...
🙏🌹🙏🌹🙏🌹🙏🌹🙏🌹🙏
*कुछ लोग मुझसे ज्ञान में श्रेष्ठ है..*
*कुछ लोग मुझसे संस्कार में श्रेष्ठ है..*
*कुछ लोग मुझसे बल में श्रेष्ठ है..*
*कुछ लोग मुझसे धन में श्रेष्ठ है..*
*कुछ लोग मुझसे सादगी में श्रेष्ठ है..*
*कुछ लोग मुझसे पराक्रम में श्रेष्ठ है..*
*कुछ लोग मुझसे बुद्धिमता में श्रेष्ठ है..*
*कुछ लोग मुझसे बोल व्यवहार में श्रेष्ठ है..*
*कुछ लोग मुझसे सेवा कार्यों में श्रेष्ठ है..*
*कुछ लोग मुझसे कर्मशीलता में श्रेष्ठ है..*
*कुछ लोग मुझसे गम्भीरता में श्रेष्ठ है..*
*कुछ लोग मुझसे भोलेपन में श्रेष्ठ है..*
*इसका मतलब प्रत्येक व्यक्ति किसी न किसी रूप में मुझसे श्रेष्ठ अवश्य है।*
*अतः मैं सभी श्रेष्ठ व्यक्तियों को हृदय की गहराइयों से प्रणाम करती हूँ।*
*गुरु पूर्णिमा की शुभकामनाएं*।
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
05/07/2022
🌹 गायन वादन नृत्य से मिलकर संगीत बनता है मगर गायन सबसे श्रेष्ठ है क्योंकि वह तन रूपी तानपुरे के अंदर से आ रहा है इसलिए मनुष्य शरीर को गात्र वीणा भी कहते हैं ।🌹
30/06/2022