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23/01/2024

भारत के महान क्रांतिकारी, विभिन्न आंदोलनों के अगुआकार नेताजी की उपाधि प्राप्त करने वाले सुभाष चंद्र बोस को सम्मान और उनके पराक्रम को सराहने के लिए प्रतिवर्ष 23 जनवरी को सुभाष चंद्र बोस जयंती के रूप में मनाया जाता है। नेताजी का जन्म 23 जनवरी 1897 में ओडिशा के कटक में बंगाली परिवार में हुआ था।

नेताजी ने भारत की आजादी में महत्वपूर्ण भूमिका को निभाया और युवाओं में आजादी के लिए लड़ने का जज्बा पैदा किया। नेताजी ने आजादी के लिए जय हिन्द, तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा, चलो दिल्ली जैसे नारे दिए जिन्होंने युवाओं में आजादी के लिए प्रेरणा का काम किया। आजादी के लिए उनके द्वारा किये गए संघर्ष को नमन करने के लिए उनकी जयंती को प्रतिवर्ष मनाया जाता जाता है।

2021 से पराक्रम दिवस के रूप में हुई शुरुआत
पहले इस दिन को सुभाष चंद्र जयंती के नाम से सेलिब्रेट किया जाता था लेकिन वर्ष 2021 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस दिन को नेताजी के योगदान को देखते हुए पराक्रम दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की। इसके बाद से प्रतिवर्ष नेताजी की जयंती को पराक्रम दिवस के रूप में मनाया जा रहा है।

05/12/2023

जब सभी कोशिशें नाकाम हो जाएं तो यही रास्ता बाकी रह जाता है।

12/10/2023

टोहाना ब्लॉक के गांव रत्ताखेड़ा में अंडर 11 स्कूली बच्चों की प्रतियोगिता की कुछ झलकियां।

12/10/2023

अगर भारत को विकासशील से विकसित देश करना है तो युवाओं को समय का पाबंद बनना होगा।
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युवा साथियों आज एक ऐसे विषय पर लिखना चाहता हूं जिसकी जरूरत काफी दिनों से महसूस हो रही थी। समय की पाबंदी किसी एक व्यक्ति की ही नही बल्कि राष्ट्र की होनी चाहिए, समय का एक एक पल मायने रखता है। भारत की इतनी बड़ी जनसंख्या का तभी कोई अर्थ है जब उनकी एक एक मिनट की वैल्यू हो, समय जिनकी तो कीमत होती है बगैर समय के तो कोई भी चीज नही मिल सकती है क्यों कि दुनिया में सबसे ज्यादा कोई है तो वो है समय। परंतु मुझे बड़े ही दुख से कहना पड़ता है कि हमारे यहां समय की पालना करने को मूर्खता समझा जाता है, अगर कोई कहीं पर समय पर आ जाए तो लोग उसे हैरत की नजर से देखते है। इसका अर्थ यह हुआ की हमारा जीवन का प्रबंधन सही नही है , जीवन की हर गतिविधि का प्रबंधन , समय के प्रबंधन से ही शुरू होता है। क्या आपने कभी समय के पालन के लिए कभी प्रयास करते देखा है, ये इसलिए नहीं है क्योंकि हम समय को अहमियत ही नही देते है इसीलिए हमारे यहां कभी नही सिखाया जाता है कि हम समय की पालना के लिए , सभी चीजों को न्यौछावर कर सकते है। राष्ट्र का एक एक पल, राष्ट्र को प्रगति की ओर लेकर जाते है। समय की खरीदा नही जा सकता है तथा ना ही समय का कोई क्षण वापिस आता है अगर आज 12 अक्तूबर 2023 है तो वो वर्तमान के किसी भी व्यक्ति के सामने कभी नहीं आने वाली है, अगर कोई गया क्षण वापिस नही आ सकता तो फिर है इंसान को समय के हर पल का सम्मान करना चाहिए तथा सदुपयोग करने की आदत हमे अपनी जीवनशैली में शुमार करने की जरूरत है। अगर हम एक मिनट की भी कीमत जानना चाहते है तो हमे उस व्यक्ति की तरफ देखिए जो एक मिनट की देरी से पहुंचने के कारण रेल छूट जाती है और उस व्यक्ति का उद्देश्य छूट जाता है उसका भाग्य टूट जाता है, दोस्तो अगर आप एक नैनो सेकंड की वैल्यू भी जानना चाहते है तो आप उस धावक से पूछिए जो 100 मीटर की दौड़ लगा रहा होता है अगर वो बताएगा आपको एक नैनो सेकंड की कीमत बताएंगे। प्रिय विद्यार्थियों, मैं कहना चाहता हूं कि समय दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण संपदा है जिसे हम सब की जिंदगी में महत्वपूर्ण स्थान मिलना चाहिए। परंतु हमने कभी ये सीखा ही नही कि समय की कद्र की जाए , हमे पीढ़ियों को ये ध्यान दिलाना चाहिए कि जो चीज पैसे से नही खरीदी जा सकती उसे जीवन अमूल्य मानना चाहिए जैसे स्वास्थ्य, नींद, भूख, आनंद, रूप, शरीर की बनावट, शरीर का रंग, समय, अनुशासन, संस्कार, अभय, विनम्रता, धैर्य,विद्वता यश कीर्ति ये सभी कभी भी पैसे से नही खरीदी जा सकते तो फिर उन्हे उतना ही इज्जत देनी चाहिए। जब हम अपनी पीढ़ियों की शिक्षा तथा संस्कार की बात करते है तो फिर इन बातो सीखने की व्यवस्था करनी चाहिए। जब हम व्यक्तिगत चरित्र की बात करते है तो कुछ सितारे लगते है जैसे समय निष्ठा का सितारा, धीरज का सितारा, अनुशासन का सितारा, वीरता का सितारा , निर्भीकता का सितारा ये सभी हमारे चरित्र की ऐसी पहचान है जो सदा हमे शीर्ष पर लेकर जाते है और इससे व्यक्तिगत चरित्र से राष्ट्रीय चरित्र बनता है तथा राष्ट्र की पहचान बनती है। हर नागरिक अपनी इन आदतों की वजह से ही राष्ट्र तरक्की करता है इसी से देश का विकास तय होता है , इसी से ह्यूमन डेवलमेंट के आयाम तय होते है। हम सब की चेस्ट पर एक तगमा लगेगा और वो होगा समय की पाबंदी का तगमा, हमारी चेस्ट पर अनुशासन का तगमां लगेगा। और ये ही सितारे हमारी इमेज बदलते है, हमारे राष्ट्र की इमेज बदलते है। समय की पाबंदी सबसे बड़ी क्वालिटी है, जो समय का पाबंद है उससे ज्यादा महत्वपूर्ण व्यक्ति कोई नही होता है और कुछ इतने आलसी होते है कि वो कितने ही लोगो के करोड़ो घंटे खराब करवा देते है, बहुत बड़ी संख्या में लोगो को ऐसे ही टहलाते रहते है, कितने ऐसे ड्राइवर होते जो बस, ट्रेन, समय से नही चलाएंगे, टीचर स्कूल कॉलेज विश्विद्यालय में समय पर नहीं जाते, कुछ लोग समय पर कभी ऑफिस नही जाते, कुछ लोग ऑफिस चले भी जाते है तो भी लोगो के काम नही करते है, किसी नेता और ब्यूरोक्रेट्स की कोई मीटिंग होती है तो वो महानुभाव कभी समय पर नहीं आते है और हजारों लोगो के समय के लाखो घंटे की वाट लगा देते है। और देश हजारों घंटे पीछे चला जाता है, बहुत से लोग समय की कीमत ही नही जानते, ना तो वो समय पर उठ सकते है, ना समय पर कहीं पहुंच सकते है और ना ही जीवन में अनुशासन तथ्य धैर्य रखते है। युवा दोस्तो और विद्यार्थियों, मैं एक ही बात कहना चाहता हूं कि अगर जीवन को व्यवस्थित करना चाहते हो तो पहली क्वालिटी समय की पाबंदी अपनाओ, सारी व्यवस्था अपने आप जीवन में पदार्पण करेगी। विद्यार्थियों , अगर सुबह उठने का समय तय कर लिया तो उस पर अमल करो चाहे कुछ भी हो जाए। आप समय का पालन सीखो चाहे कुछ भी हो जाए।

कॉपी पेस्ट

जय हिंद
लेखक
नरेंद्र यादव
नेशनल वाटर अवॉर्डी
प्रेषक
कृष्ण हिंदुस्तानी
युवा पुरूस्कार से सम्मानित
हिसार भारत

12/10/2023

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