23/05/2026
जय मां लक्ष्मी
Dost Ko Bana Kar Rakhiy Wo Hi Agy Kam Ay Ga
23/05/2026
जय मां लक्ष्मी
23/05/2026
रेलवे स्टेशन पर रोज घूमती थीं 3 'लड़कियां', GRP वालों ने रोककर पूछा- कौन हो तुम लोग, फिर जैसे ही पता चला तो...
Ajmer Latest News: अजमेर रेलवे स्टेशन पर सजधज कर तीन लड़कियां अक्सर घूमती रहती थीं. वह हर दिन मेकअप लगाकर स्टेशन पर घूमती और ट्रेनों में चढ़ जाती थीं. इससे लोग परेशान हो गए. इसके बाद जीआरपी वालों की शक हुआ. उनसे रोककर पूछा कि आप कौन हैं. फिर जो सच्चाई सामने आयी पुलिस के होश उड़ गए.
रिपोर्टः अशोक सिंह भाटी, अजमेरः राजस्थान के अजमेर से एक चौंकाने वाली खबर सामने आयी है. यहां रेलवे स्टेशन पर सजधज कर 3 लड़कियां अक्सर घूमती रहती थीं. वह आए दिन मेकअप लगाकर प्लेटफॉर्म पर टहलती रहती थीं. उनकी हरकतों से लोग परेशान हो गए थे. ऐसे में जीआरपी पुलिस तक शिकायत पहुंची. जीआरपी की टीम ने बीते दिन उनको फिर रेलवे स्टेशन पर देखा. उनसे पूछा तुम कौन, तो बोलीं कि हम किन्नर हैं. इसके बाद थाने ले जाकर पूछताछ में जो सामने आया उससे जीआपी टीम भी हैरत में पड़ गई.
अजमेर की जीआरपी थाना पुलिस को ट्रेने में यात्री की तरफ से शिकायत मिल रही थी. ट्रेनों में यात्रा कर रहे यात्रियों को तीन किन्नर परेशान किया करते थे. लोगों ने रुपये मांगा करते थे. इससे परेशान कई लोगों की शिकायत पर जीआरपी ने कार्रवाई की. इसमें तीनों किन्नरों को पकड़ लिया. पूछताछ में खुलासा हुआ कि वो किन्नर नहीं बल्कि पुरुष हैं. नकली किन्नर बनकर अवैध वसूली करते थे. जीआरपी ने उनके खिलाफ मामला दर्ज किया है.
अजमेर जीआरपी ने अवैध वसूली करने के मामले में तीन युवकों को गिरफ्तार किया है. यह सभी युवक नकली किन्नर बनकर ट्रेनों में अवैध वसूली का काम कर रहे थे. जिसकी लंबे समय से शिकायत मिल रही थी. इसके बाद जीआरपी ने इस कार्रवाई को अंजाम दिया. तीनों नकली किन्नर को गिरफ्तार कर लिया है. अजमेर की राजकीय रेलवे पुलिस ने ट्रेन में सफर करने वाले यात्रियों से अवैध वसूली व परेशान करने वाले तीन नकली किन्नर को पकड़ा है.
जीआरपी पुलिस ने उन्हें शांतिभंग में गिरफ्तार कर लिया है. थानाप्रभारी अनिल देव ने बताया कि सोमवार शाम महिलाओं की वेशभूषा में यात्रियों को परेशान करने वाले नकली किन्नर रूपनगढ़ मोतीपुरा के रहने वाले अर्जुन गुर्जर उर्फ सोना गुर्जरी, नगरा बैरवा बस्ती के रहने वाले राहुल कुमार उर्फ रोनिका बैरवा और मांगलियावास कोटाज के रहने वाले करण सिंह रावत उर्फ पायल को पकड़ लिया है. तीनों को गिरफ्तार कर पाबंद की कार्रवाई की गई. कार्रवाई में सिपाही मानसिंह और सुमेरचंद शामिल है
23/05/2026
नियति का विधान
मनुष्य चाहे कहीं भी चला जाये, कर्म उसका पीछा नहीं छोड़ता:
महाभारत में एक प्रसंग आया है, एक दिन धृतराष्ट्र ने भगवान कृष्ण को अपने यहां आमन्त्रित किया। उस समय धृतराष्ट्र काफी व्यथित थे। भगवान कृष्ण ने पूछा, क्या बात है राजन! आप इतने दुःखी क्यों लग रहे हैं? किस प्रयोजन से आपने मुझे याद किया?
धृतराष्ट्र बोले, हे वासुदेव! आप योगेश्वर हैं, परब्रह्म परमेश्वर के साकार रूप हैं, यह जानता हूँ मैं। बस आप मेरी विनती स्वीकार कर लें। मेरा मन काफी समय से उद्वेलित हो रहा है। केवल आप ही उस व्यथा का समाधान कर सकते हैं।
वासुदेव बोले, राजन! अपनी व्यथा तो व्यक्त करें। अगर मेरे सामर्थ्य में होगी तो उसे अवश्य दूर करूँगा।
धृतराष्ट्र बोले, भगवन! आज मेरे पास अपार सुख है, सम्पत्ति है, नाना प्रकार के भोग के साधन हैं लेकिन सब मेरे लिए व्यर्थ प्रतीत हो रहे हैं। सब कुछ होते हुए मैं देख नहीं सकता, यही मेरी व्यथा है। इसका क्या कारण है? बस, इसी का आप से उत्तर चाहता हूँ।
वासुदेव बोले, हो सकता है कि आपसे किसी जन्म में कोई बड़ा अपराध हुआ हो जो इस जन्म में भोगना पड़ रहा है जो कि नियति बनकर आपके सामने है। सारा सुख होते हुए भी आप सुख से वंचित हैं।
धृतराष्ट्र ने फिर प्रश्न किया, भगवन! यह नियति क्या है? पहले इसका रहस्य समझाएं।
भगवान कृष्ण बोले, मानव के अच्छे-बुरे कर्म मृत्यु के बाद जीवात्मा के साथ संस्कार रूप में चले जाते हैं। वह कर्म-संस्कार अनन्त काल तक जीवात्मा के साथ रहता है, जब तक उसका कर्मफल भोगकर क्षय नहीं हो जाता। जीवात्मा चाहे कितनी ही बार जन्म क्यों न ले ले। जब मनुष्य को दुःख या सुख मिलता है या अपार सुख के साधन होते हुए भी सुख-शान्ति नहीं मिलती तो मनुष्य यही कहता है कि इतना सारा पूजा-पाठ, दान-धर्म कर रहा हूँ, फिर भी दुःख, दुर्भाग्य कम नहीं हो रहा है। इसका वह कारण खोजता है। राजन! आप तो जानते हैं, वह संचित कर्म-संस्कार जब प्रकट होता है तो ऐसे समय में चाहे मनुष्य अपार सुख में रहे या रहे दुःख में, वही कर्म-संस्कार नियति बनकर कब प्रकट हो जाएगा, कोई नहीं जानता। जब नियति प्रकट होती है तो ईश्वर भी सहायता नहीं करता। नियति के विधान में वह न तो अपने लिए हस्तक्षेप करता है और न दूसरे के लिए। ईश्वर को भी नियति के विधान को मानना पड़ता है। ईश्वर सदैव तटस्थ रहता है। अगर मैं चाहूँ, वासुदेव ने कहा, तो मैं आपके नेत्र ठीक कर सकता हूँ। लेकिन जो आपका यह कष्ट है, वह नियति के कारण है।
तब धृतराष्ट्र बोले, आप कारण का तो पता लगा ही सकते हैं। कृपया मेरे दुःख के कारण को मालूम कर मेरे मन को हल्का कर सकते हैं।
भगवान बोले, इसका ज्ञान योगबल से हो सकता है।
इसके साथ ही भगवान ध्यानस्थ हो गए। वे एक-एक करके धृतराष्ट्र के पूर्व जन्म देखने लगे। जब भगवान चौदहवें जन्म में पहुँचे तब उन्होंने देखा कि धृतराष्ट्र उस जन्म में राजकुमार थे और पक्षियों का शिकार कर रहे थे।
धृतराष्ट्र ने एक पक्षी पर बाण चलाया, लेकिन बाण पक्षी के शिशु की आंख में जा लगा। उसके नेत्र फट गए और वह बुरी तरह तड़पने लगा। नेत्रों से रक्त बह निकला। उस बच्चे को उसी अवस्था में तड़पता हुआ छोड़कर वे चले गए। बच्चे की तड़प पर राजकुमार ने कोई पश्चाताप नहीं किया।
बड़े रहस्य की बात है। धृतराष्ट्र के चौदहवें जन्म के अपराध का फल इस जन्म में आकर मिला। इसी को कहते हैं नियति। नियति कभी भी प्रकट हो सकती है। नियति का विधान कठोर होता है। वह तब अक्सर प्रकट होती है जब मनुष्य सुख भोगने जा रहा हो।
भगवान बोले, राजन! उस समय आपने बच्चे की तड़प देखकर थोड़ा भी प्रायश्चित कर लिया होता, उस अबोध बच्चे की सहायता की होती जो आप कर सकते थे तो वह अपराध संस्कार के रूप में आपकी आत्मा पर अपनी छाप नहीं छोड़ता।
धृतराष्ट्र चुप रह गए। इससे यह स्पष्ट है कि नियति के विधान में न प्रकृति हस्तक्षेप करती है और न ईश्वर ही। मनुष्य का सकाम कर्म फल देकर ही क्षय होता है और भोग भोगना ही पड़ता है। मनुष्य चाहे कहीं चला जाये, कर्म पीछा नहीं छोड़ता।
जय जय श्री हरी
पानी में गुड डालिए, बीत जाए जब रात!
सुबह छानकर पीजिए, अच्छे हों हालात!!
*धनिया की पत्ती मसल, बूंद नैन में डार!*
दुखती अँखियां ठीक हों, पल लागे दो-चार!!
*ऊर्जा मिलती है बहुत, पिएं गुनगुना नीर!*
कब्ज खतम हो पेट की, मिट जाए हर पीर!!
*प्रातः काल पानी पिएं, घूंट-घूंट कर आप!*
बस दो-तीन गिलास है, हर औषधि का बाप!!
*ठंडा पानी पियो मत, करता क्रूर प्रहार!*
करे हाजमे का सदा, ये तो बंटाढार!!
*भोजन करें धरती पर, अल्थी पल्थी मार!*
चबा-चबा कर खाइए, वैद्य न झांकें द्वार!!
*प्रातः काल फल रस लो, दुपहर लस्सी-छांस!*
सदा रात में दूध पी, सभी रोग का नाश!!
*प्रातः- दोपहर लीजिये, जब नियमित आहार!*
तीस मिनट की नींद लो, रोग न आवें द्वार!!
*भोजन करके रात में, घूमें कदम हजार!*
डाक्टर, ओझा, वैद्य का , लुट जाए व्यापार !!
*घूट-घूट पानी पियो, रह तनाव से दूर!*
एसिडिटी, या मोटापा, होवें चकनाचूर!!
*अर्थराइज या हार्निया, अपेंडिक्स का त्रास!*
पानी पीजै बैठकर, कभी न आवें पास!!
*रक्तचाप बढने लगे, तब मत सोचो भाय!*
सौगंध राम की खाइ के, तुरत छोड दो चाय!!
*सुबह खाइये कुवंर-सा, दुपहर यथा नरेश!*
भोजन लीजै रात में, जैसे रंक सुजीत!!
*देर रात तक जागना, रोगों का जंजाल!*
अपच,आंख के रोग सँग, तन भी रहे निढाल^^
*दर्द, घाव, फोडा, चुभन, सूजन, चोट पिराइ!*
बीस मिनट चुंबक धरौ, पिरवा जाइ हेराइ!!
*सत्तर रोगों कोे करे, चूना हमसे दूर!*
दूर करे ये बाझपन, सुस्ती अपच हुजूर!!
*भोजन करके जोहिए, केवल घंटा डेढ!*
पानी इसके बाद पी, ये औषधि का पेड!!
*अलसी, तिल, नारियल, घी सरसों का तेल!*
यही खाइए नहीं तो, हार्ट समझिए फेल!
*पहला स्थान सेंधा नमक, पहाड़ी नमक सु जान!*
श्वेत नमक है सागरी, ये है जहर समान!!
*अल्यूमिन के पात्र का, करता है जो उपयोग!*
आमंत्रित करता सदा, वह अडतालीस रोग!!
*फल या मीठा खाइके, तुरत न पीजै नीर!*
ये सब छोटी आंत में, बनते विषधर तीर!!
*चोकर खाने से सदा, बढती तन की शक्ति!*
गेहूँ मोटा पीसिए, दिल में बढे विरक्ति!!
*रोज मुलहठी चूसिए, कफ बाहर आ जाय!*
बने सुरीला कंठ भी, सबको लगत सुहाय!!
*भोजन करके खाइए, सौंफ, गुड, अजवान!*
पत्थर भी पच जायगा, जानै सकल जहान!!
*लौकी का रस पीजिए, चोकर युक्त पिसान!*
तुलसी, गुड, सेंधा नमक, हृदय रोग निदान!
*चैत्र माह में नीम की, पत्ती हर दिन खावे !*
ज्वर, डेंगू या मलेरिया, बारह मील भगावे !!
*सौ वर्षों तक वह जिए, लेते नाक से सांस!*
अल्पकाल जीवें, करें, मुंह से श्वासोच्छ्वास!!
*सितम, गर्म जल से कभी, करिये मत स्नान!*
घट जाता है आत्मबल, नैनन को नुकसान!!
*हृदय रोग से आपको, बचना है श्रीमान!*
सुरा, चाय या कोल्ड्रिंक, का मत करिए पान!!
*अगर नहावें गरम जल, तन-मन हो कमजोर!*
नयन ज्योति कमजोर हो, शक्ति घटे चहुंओर!!
*तुलसी का पत्ता करें, यदि हरदम उपयोग!*
मिट जाते हर उम्र में,तन में सारे रोग।
*कृपया इस जानकारी को जरूर आगे बढ़ाएं*
23/05/2026
ताकत की खान हैं ये हरे पत्ते, पसलियों पर चढ़ेगा मांस, ऐसे खाकर मिलेगा दूध से 10 गुना ज्यादा प्रोटीन.........
How To Increase Muscles Mass: अगर शरीर कमजोरी की वजह से ढीला ढाला रहता है तो इन पत्तों का सेवन शुरू करें। यह आपको दूध, अंडे से भी ज्यादा ताकत दे सकते हैं। हड्डियों को ठोस बनाने वाला कैल्शियम भी देता है। इन फायदों के लिए मोरिंगा के पत्तों का ऐसे सेवन करें।
ताकत की खान है ये हरे पत्ते
हरी सब्जियों को घास-फूस नहीं समझना चाहिए। इनके अंदर बेशुमार ताकत छिपी होती है। ऐसे ही सहजन के पेड़ के पत्ते होते हैं। इन्हें मोरिंगा लीव्स भी कहते हैं। आंकड़े बताते हैं कि इनके अंदर दूध, दही, पनीर से भी ज्यादा प्रोटीन होता है। इतना ही नहीं, इनसे कैल्शियम की कमी भी पूरी की जा सकती है।
ऐसे खाने से तगड़ा बनेगा बदन
मोरिंगा के पत्तों को पाउडर बनाकर सेवन किया जा सकता है। इसे सलाद, अंडे, पास्ता के ऊपर छिड़कर खा सकते हैं। इसे सूप, डिप्स बनाकर खा सकते हैं। इसे जूस, नारियल पानी, स्मूदी, आइसक्रीम में मिलाकर खा सकते हैं।
10 गुना प्रोटीन
शाकाहारी लोगों के लिए दूध प्रोटीन का प्रमुख सोर्स है। यूएसडीए के मुताबिक 100 ग्राम दूध 3.28 ग्राम प्रोटीन देता है। मगर यूएसडीए के मुताबिक 100 ग्राम मोरिंगा पाउडर से 33 ग्राम से ज्यादा प्रोटीन मिलता है। इतना पोषण अंडा भी नहीं देता।
20 गुना कैल्शियम
हड्डियों के लिए भी मोरिंगा पाउडर ज्यादा बलशाली है। जहां दूध से करीब 123mg कैल्शियम मिलता है, वहीं इतनी ही मात्रा में मोरिंगा पाउडर 2667mg कैल्शियम देता है।
विटामिन ए की भरमार
मोरिंगा पाउडर आपकी आंखों और इम्यून सिस्टम को मजबूत बना सकता है। क्योंकि इसमें विटामिन ए की भरमार होती है। जो आपकी नजर और इम्यूनिटी को तेज करने में मदद करता है।
डायबिटीज
मधुमेह के रोगियों के लिए यह चूर्ण रामबाण इलाज बन सकता है। इसके ब्लड शुगर कम करने वाले गुणों की वजह से डॉक्टर इसका ज्यादा सेवन करने से मना करते हैं। क्योंकि यह ब्लड ग्लूकोज को बहुत ज्यादा भी गिरा सकता है।
कोलेस्ट्रॉल
नसों में कोलेस्ट्रॉल जमने से दिल पर प्रेशर बढ़ जाता है। यह हार्ट अटैक का कारण भी बन सकता है। मगर मोरिंगा पाउडर लिपिड प्रोफाइल को कम करके गंदे कोलेस्ट्रॉल से राहत दिलाता है।
आर्सेनिक से बचाव
खाने-पीने का आर्सेनिक से दूषित होने का खतरा बढ़ गया है। यह कैंसर और हार्ट डिजीज का कारण बन सकता है। मोरिंगा पाउडर इससे बचाने में भी सहायक होता है। यह आर्सेनिक टॉक्सिसिटी को कम करता है।
अंदरुनी सूजन
अगर आप लंबे समय से अंदरुनी सूजन व दर्द से जूझ रहे हैं तो इसकी मदद ले सकते हैं। इसमें एंटी इंफ्लामेटरी गुण होते हैं जो क्रॉनिक इंफ्लामेशन को कम करने का काम करते हैं।
23/05/2026
5 किलोमीटर पैदल चलना रोज़ाना आपके शरीर को फिट रखता है। यह कोलेस्ट्रॉल कम करता है, ब्लड शुगर नियंत्रित करता है और दिल की बीमारियों का खतरा घटाता है। पैदल चलना जीवनशैली सुधारने का सबसे आसान तरीका है।
23/05/2026
सांस फूलने के लिए प्रभावी घरेलू उपचार
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फेफड़ों से संबंधित प्रणाली को प्रभावित करने वाली स्थितियों के कारण भी सांस की समस्या होती है। वहीं फेफड़ों और ब्रोंकाइल ट्यूब्स में सूजन होना सांस फूलने के आम कारण होते हैं।
1. सांस फूलना या सांस ठीक से न ले पाना
सांस फूलना या सांस ठीक से न ले पाना एलर्जी, संक्रमण, सूजन, चोट या मेटाबोलिक स्थितियों की वजह से हो सकता है। अकसर सांस तब फूलती है जब मस्तिष्क के संकेत फेफड़ों को सांस की रफ्तार बढ़ाने का निर्देश देते हैं। फेफड़ों से संबंधित प्रणाली को प्रभावित करने वाली स्थितियों के कारण भी सांस की समस्या होती है। वहीं फेफड़ों और ब्रोंकाइल ट्यूब्स में सूजन होना सांस फूलने के आम कारण होते हैं। इसी तरह सिगरेट पीने या अन्य टॉक्सिंस के कारण श्वसन क्षेत्र (रेस्पिरेट्री ट्रैक) में लगी चोट की वजह से भी सांस लेने में दिक्कत पैदा हो सकती है। वहीं दिल की बीमारियों या खून में ऑक्सीजन का स्तर कम होने के कारण भी सांस फूलती है।
2. दमा होता है बड़ा कारण
श्वास नलिकाएं फेफड़े से हवा को अंदर व बाहर करती हैं। दमा होने पर इन नलिकाओं के अंदर की दीवार में सूजन हो जाती है। यह सूजन नलिकाओं को बेहद संवेदनशील बना देता है और किसी भी संवेदनशील चीज के स्पर्श से यह तीखी प्रतिक्रिया करता है। जब नलिकाएं प्रतिक्रिया करती हैं, तो उनमें संकुचन होता है और फेफड़े में हवा की कम मात्रा जाती है और सांस फूलने लगती है।
3. एसिड बनाने वाले पदार्थ न लें
सांस फूलने की समस्या होने पर आहार में कार्बोहाइड्रेट चिकनाई एवं प्रोटीन जैसे एसिड बनाने वाले पदार्थ सीमित मात्रा में लें और ताज़े फल, हरी सब्जियां तथा अंकुरित चने जैसे क्षारीय खाद्य पदार्थों का भरपूर मात्रा में सेवन करें।
4. कॉफी
अगर अस्थमा का अटैक आया है तो तुरंत गरम कॉफी पी सकते हैं। यह श्वांस नलिकाओं में रूकी हुई हवा को तुरंत ही खोल देगी। अगर कॉफी नहीं पी सकते तो कॉफी की महक सूंघने से भी लाभ होता है।
5. यूकेलिप्टस तेल
यदि सांस फूलने की समस्या है को घर में यूकेलिप्टस का तेल जरूर रखें। जब कभी सांस फूले तो यूकेलिप्टस का तेल सूंघ लें, इसको सूंघने से आपको तुरंत फायदा होगा और समस्या धीरे-धीरे ठीक होने लगेगी।
6. तुलसी का रस बेहद गुणकारी
तुलसी सांस फूलने की समस्या में भी लाभदायक होती है। तुलसी का रस और शहद मिलाकर लें।
20/05/2026
निरोगी व तेजस्वी आँखों के लिए :——
आँख हमारे शरीर के सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण व कोमल अंगों में से एक है।
वर्तमान समय में आँखों की समस्याओं से बहुत लोग ग्रस्त देखे जाते हैं, जिनमे विद्यार्थियों की भी बड़ी संख्या है।
निम्नलिखित बातों का ध्यान रखा जाय तो आँखों को जीवन भर स्वस्थ रख सकते हैं और चश्मे से भी छुटकारा पा सकते हैं :
*आँखों के लिए हानिकारक :-
कम प्रकाश में, लेटे –लेटे व चलते वाहन में पढना आँखों के लिए बहुत हानिकारक हैं।
मोबाइल, टीवी, लैपटॉप, कम्प्यूटर आदि की स्क्रीन को अधिक समय तक लगातार देखने व हेयरड्रायर के उपयोग से आँखों को बहुत नुकसान होता है।
आँखों को चौंधिया देनेवाले अत्यधिक तीव्र प्रकाश में देखना, ग्रहण के समय सूर्य या चन्द्रमा को देखना आँखों को हानि पहुँचता है।
सूर्योदय के बाद सोये रहने, दिन में सोने और रात में देर तक जागने से आँखों पर तनाव पड़ता है और धीरे-धीरे आँखों की रोशनी कम तथा रुखी व तीखी होने लगती है।
तेज रफ्तार की सवारी के दौरान आँखों पर सीधी हवा लगने से तथा मल-मूत्र और अधोवायु के वेग को रोकने एवं ज्यादा देर तक रोने आदि से आँखें कमजोर होती हैं।
सिर पर कभी भी गर्म पानी न डालें और न ही ज्यादा गर्म पानी से चेहरा धोया करें।
खट्टे, नमकीन, तीखे, पित्तवर्धक पदार्थों का अधिक सेवन नहीं करना चाहिए।
*नेत्र - रक्षा के उपाय :——
पढ़ते समय ध्यान रखें कि आँखों पर सामने से रोशनी नहीं आये, पीठ के पीछे से आये, आँख तथा पुस्तक के बीच की दूरी ३० से.मी. से अधिक हो।
पुस्तक आँखों के सामने नहीं, नीचे की ओर हो।
देर रात तक पढने की अपेक्षा प्रात: जल्दी उठकर पढ़ें।
तेज धूप में धूप के चश्में या छाते का उपयोग करें।
धूप से आकर गर्म शरीर पर तुरंत ठंडा पानी न डालें।
चन्द्रमा व हरियाली को देखना आँखों के लिए विश्रामदायक हैं।
सुबह हरी घास पर १५ – २० मिनट तक नंगे पैर टहलने से आँखों को तरावट मिलती है।
जलनेति : विधिवत् जलनेति करने से नेत्रज्योति बढती है।
इससे विद्यार्थियों का चश्मा भी छूट सकता है।
*नेत्रों के लिए विशेष हितकर पदार्थ :——
आँवला, देशी गाय का दूध व घी, शहद, सेंधा नमक, बादाम, सलाद, हरी सब्जियाँ – विशेषत: डोडी की सब्जी, पालक, पुनर्नवा, हरा धनिया, गाजर, अंगूर, केला, संतरा, मुलेठी, सौंफ, गुलाबजल, त्रिफला चूर्ण।
20/05/2026
रक्त शर्करा को गलाने में करामाती हैं ये 3 औषधीय पत्ते, खाली पेट चबाने से अपने आप बनेगा इंसुलिन, रिसर्च में हुआ प्रूव.............
3 Leaves Reduced Blood Sugar: डायबिटीज ऐसी बीमारी है जो शरीर को अंदर से खोखला कर देती है. शिथिल लाइफस्टाइल और गलत खान-पान की वजह से यह बीमारी होती है. खून में शुगर का लेवल यानी रक्त शर्करा का स्तर बढ़ जाता है. एनसीबीआई की एक रिसर्च में दावा किया गया है कि कुछ औषधीय पत्तों को अगर चबाया जाए तो ब्लड शुगर कम हो जाता है.
हाइलाइट्स
एनसीबीआई की रिसर्च के मुताबिक शरीफा के पत्तों में एंटी-डायबेटिक गुण होता है.
नीम के पत्ते डायबिटीज को भी कंट्रोल कर सकते हैं.
How to Control Blood Sugar Spike: एनसीबीआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया की 5 प्रतिशत आबादी डायबिटीज से पीड़ित है. डायबिटीज बहुत ही जटिल स्थिति है जिसमें हार्ट, बीपी, किडनी, आंख आदि से संबंधित बीमारियां लग जाती है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के मुताबिक विश्व में करीब 42.2 करोड़ लोग डायबिटीज से पीड़ित हैं. इसके साथ ही करीब 15 लाख लोगों की मौत हर साल प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से डायबिटीज के कारण होती है. भारत की स्थिति तो इस मामले में बहुत ही खराब है.वर्तमान में करीब 8 करोड़ लोगों को डायबिटीज है और अनुमान के तहत 2045 तक भारत में 13 करोड़ से ज्यादा लोग डायबेटिक होंगे. इसलिए भारत को कैपिटल ऑफ डायबिटीज कहा जाने लगा है.
हम सब जानते हैं कि डायबिटीज लाइफस्टाइल से संबंधित बीमारी है और इस स्थिति में खून में शुगर का लेवल यानी रक्त शर्करा का स्तर बढ़ जाता है. लेकिन अगर लाइफस्टाइल को ठीक कर लिया जाए तो इससे ब्लड शुगर का खात्म किया जा सकता है. एनसीबीआई की एक रिसर्च में दावा किया गया है कि अगर कुछ औषधीय पत्तों को चबाया जाए तो इंसुलिन के उत्पादन को बढ़ाकर ब्लड शुगर को कंट्रोल किय जा सकता है.
ये हैं 3 कारामाती पत्तियां
1.एलोवेरा के पत्ते-एलोवेरा को भारत में शायद ही कोई ऐसा होगा जो नहीं जानता होगा. भारत में एलोवेरा को विशिष्ट औषधीय पौंधा माना जाता है. अब एनसीबीआई यानी अमेरिकी नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफॉर्मेशन की एक रिसर्च में भी इसे साबित किया गया है. एनसीबीआई की रिपोर्ट के मुताबिक एलोवेरा में हाइपोग्लासेमिक गुण है. यानी यह रक्त शर्करा को कम करने की क्षमता रखता है. एलोवेरा के पत्तों को सुबह खाली पेट खाने से इंसुलिन का उत्पादन बढ़ सकता है जिससे ब्लड शुगर अपने आप कंट्रोल हो सकता है.
2. शरीफा के पत्ते-(Annona squamosa)-शरीफा बेहद स्वादिष्ट फल है लेकिन इसके पत्ते भी कम कमाल के नहीं हैं. एनसीबीआई की रिसर्च के मुताबिक शरीफा के पत्तों में एंटी-डायबेटिक गुण होता है. शरीफा के पत्तों में फोटोकंस्टीट्यूटेंट गुण मौजूद होते हैं जिसके कारण यह पैंक्रियाज में इंसुलिन की मात्रा को बढ़ाने में मदद करता है. इसके साथ ही यह हाइपोग्लाइसेमिक क्षमता के साथ ब्लड शुगर को कम करता है.
3.नीम के पत्ते-(Azadirachta indica)-नीम को आमतौर पर लोग एंटी-फंगल, एंटी-बैक्टीरियल गुणों के रूप में जानते हैं लेकिन एनसीबीआई की रिसर्च में यह साबित हो चुका है कि नीम के पत्ते डायबिटीज को भी कंट्रोल कर सकते हैं. नीम के पत्तों को सुबह-सुबह चबाने से खून में शुगर की मात्रा नहीं बढ़ती है और पैंक्रियाज अपना काम सही से करती है जिसके कारण इंसुलिन का उत्पादन सहज प्रक्रिया से हो पाता है. नीम के पत्तों में कई ऐसे कंपाउंड पाए गए हैं जिनसे ब्लड शुगर को कंट्रोल करने में मदद मिलती है.
जय श्री बजरंग बली
| Monday | 10am - 7pm |
| Tuesday | 10am - 7pm |
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