21/02/2026
मातृभाषा अनाहत निनाद-सी, चेतना का दिव्य उद्गार है,
जिसमें युग-युगांतर की स्मृतियों का संचित अमृत-भंडार है।
इसी में मानव-अस्मिता का, निहित सारा विस्तार है,
इसके संरक्षण से ही, संस्कृति का शाश्वत श्रृंगार है।
मातृभाषा हमारे अस्तित्व और पहचान की आधारशिला है, जिसके माध्यम से हम अपने विचारों एवं भावनाओं को सार्थक अभिव्यक्ति प्रदान करते हैं। यह हमारी सांस्कृतिक पहचान, पारिवारिक संस्कारों की गहराई और रिश्तों की आत्मीयता को अपने भीतर सुरक्षित रूप से संजोए रखता है, जो हमारे अस्तित्व और विरासत से हमारा संबंध जोड़ती है। मातृभाषा में किया गया संवाद और लेखन केवल शब्द-संयोजन नहीं, बल्कि हमारी स्मृतियों एवं अंतरात्मा की अनुभूतियों का संवेदनशील संरक्षण है। भाषाएँ जीवंत रहेंगी तो उनसे संबंधित कथाएँ, परंपराएँ और अस्मिता भी निरंतर सजीव बनी रहेगी। तो आइए, अपनी मातृभाषा को गर्व और आत्मीयता के साथ अपनाकर उसे जीवन का सर्वोच्च आधार बनाएँ।
हिन्दी समिति की ओर से आप सभी को अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ।
20/02/2026
मातृभाषा की ध्वनि में अपना अतीत मुस्काता है,
हर शब्द हमें गर्व से अभिव्यक्ति सिखलाता है।
कला, काव्य, नृत्य, नाट्य - अपनी धरोहर की ज्योति,
इनसे ही प्रदर्शित होती है भारतवर्ष की कीर्ति।
हिन्दी भाषा प्रकोष्ठ एवं हिन्दी समिति लेकर आ रहे हैं
हेराल्ड हैरिटेज(“परिचय -संस्कृति से”)।
एक सशक्त सांस्कृतिक मंच जहाँ कला केवल दिखाई नहीं देती, महसूस भी होती है। यहाँ काव्य, अभिनय और नृत्य के माध्यम से मातृभाषा की मिठास, परंपराओं की गरिमा और संस्कृति की समृद्ध छटा जीवंत रूप में सामने आती है। यह मंच प्रतिभा को अभिव्यक्ति और संस्कृति को सम्मान देने का अवसर प्रदान करता है।
नीचे दिए गए लिंक से पंजीकरण करें - https://forms.gle/3y3LxffdB8umY7Pe7
आप अपनी प्रस्तुति एकल या समूह किसी भी रूप में दे सकते हैं।
पंजीकरण की अंतिम समय-सीमा: 9 मार्च, दोपहर 12 बजे तक ।
ऑडिशन 9 मार्च को सुबह 10 बजे से LH में आयोजित किए जाएँगे।
यह कार्यक्रम 10 मार्च को निर्धारित समय पर सभागार में संचालित होगा ,श्रेष्ठ प्रस्तुतियों के लिए ₹4000/- तक के आकर्षक पुरस्कार प्रस्तावित हैं।
26/01/2026
तिरंगे की सलामी में जब सूरज के रंग झिलमिलाए,
बलिदान और त्याग की गूँज से हर गाथा मुस्काए।
कर्तव्य और चेतना की लय से हर हृदय गूँज उठे,
संविधान की ज्योति से हर आंगन खिल उठे।
गणतंत्र दिवस केवल सत्ता-परिवर्तन की स्मृति नहीं, बल्कि आत्मशासन की चेतना का उत्सव भी है। यह दिन हमें यह बोध कराता है, कि एक सशक्त राष्ट्र की पहचान केवल उसकी सीमाओं से नहीं, बल्कि उसके नागरिकों की चेतना और चरित्र से होती है।
संविधान ने हमें अधिकारों के साथ-साथ विवेक भी दिया, ताकि हमारे देश में न्याय, समानता और स्वतंत्रता केवल सिद्धांत न रहें, बल्कि नागरिकों के जीवन में स्वाभाविक चेतना का भी हिस्सा बने। गणतंत्र का वास्तविक गौरव तभी प्रकट होता है जब चिंतन स्वतंत्र हो, आचरण संयमित हो और दृष्टि समावेशी हो।
आज के भारत में गणतंत्र की शक्ति युवा चेतना, रचनात्मक ऊर्जा और सामाजिक सहभागिता में निहित है। यही वह आधार है जिस पर एक प्रगतिशील, संवेदनशील और आत्मनिर्भर राष्ट्र का निर्माण संभव है।
हिन्दी समिति, राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान हमीरपुर द्वारा गणतंत्र दिवस की गरिमामय शुभेच्छाएँ।
23/01/2026
ऋतु ने मौन से कह दी बात, बसंत उतर आया है,
पीत प्रभा की कोमल छाया में नव जीवन मुस्काया है।
स्वर और शब्द की साधना में चेतना खिल उठे,
माँ शारदा के चरणों से सृजन दीप जलाया है।
बसंत पंचमी वह क्षण है जब शीत ऋतु के पश्चात् बसंत का आगमन प्रकृति में नवजीवन का संचार करता है, और उसी नवचेतना से मन की सजगता तथा विचारों की शुद्धता एक साथ जागृत होने लगती है।
बसंत पंचमी भारतीय परंपरा में ज्ञान, विद्या और सृजन के आराध्य पर्व के रूप में मनाई जाती है। यह दिवस माँ सरस्वती की उपासना को समर्पित है, जो विवेक, वाणी और बौद्धिक चेतना की देवी हैं। इस पर्व का मूल उद्देश्य केवल ऋतु का स्वागत नहीं, बल्कि ज्ञान, विनम्रता और सतत साधना के मार्ग पर अग्रसर होने का संकल्प भी है।
हिन्दी समिति, राष्ट्र प्रौद्योगिकी संस्थान, हमीरपुर, इस पावन अवसर पर यह कामना करती है कि यह बसन्त हम सभी के भीतर बौद्धिक ऊर्जा, कलात्मक संवेदना और नवीन संकल्पों का संचार करे।
बसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनाएँ।
12/01/2026
“काल-चक्र की बेला में, नूतन सृजन स्वीकार करें,
भीतर की हर जड़ता का, अग्नि में हम परिहार करें,
श्रम-साधना से उपजी फसलें, संदेश बस यहीं देती,
चेतना हो प्रखर इतनी, मूल्यों से हम साक्षात्कार करें।”
लोहड़ी, केवल ऋतु-परिवर्तन का पर्व नहीं, अपितु इन उपयुक्त पन्क्तियों से हमें सचल जीवन की अनुभूति के साथ-साथ, प्रकृति की निरंतर गतिशीलता को सहर्ष स्वीकार करने का वह संधि-काल है, जहाँ सृष्टि नया श्रृंगार करती है और समाज अपनी सामूहिक स्मृतियों को अग्नि के साथ साझा करता है।
यह उत्सव प्रकृति, समाज और व्यक्ति के त्रिवेणी संगम पर होने वाले 'संक्रमण' का प्रतीक है, जो हमें याद दिलाता है कि वास्तविक 'प्रगति' जड़ों से कटकर नहीं, बल्कि संस्कारों के साथ आगे बढ़ने में है।
तो आइए, अनुसंधान और तकनीक के इस दौर में इस पर्व के माध्यम से हम अपनी सांस्कृतिक चेतना को और प्रखर करें।
हिन्दी समिति की ओर से आप सभी को लोहड़ी की हार्दिक शुभकामनाएँ।
11/01/2026
हिन्दी समिति के नवचयनित सदस्यों का अभिनंदन!"
आप सभी का कार्यकारी सदस्य के रूप में चयन, हमारी साझा सांस्कतिक यात्रा को एक नई दिशा और ऊर्जा प्रदान करेगा। आपकी सहभागिता समिति की कार्यशैली को न केवल सशक्त बनाएगी बल्कि हिन्दी की गरिमा और प्रभाव को भी नए शिखरों तक पहुँचाएगी।
स्नेह, विश्वास और समर्पण के साथ आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ।
09/01/2026
शब्दों से बुनती संस्कृतियाँ, विचारों का अम्बार,
संवाद में बहती हिन्दी, खोलती विश्व के द्वार।
सीमाओं को लाँघ कर पहुँचे, भावों की अभिव्यक्ति,
हिन्दी में समाहित है, भाषा की अनंत शक्ति।
हिन्दी केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक चेतना और बौद्धिक परंपरा का सशक्त वाहक है। समय के साथ हिन्दी ने राष्ट्रीय सीमाओं को पार कर, विश्व स्तर पर अपनी पहचान बनाई है और विभिन्न भाषाओं एवं संस्कृतियों के बीच सेतु का काम किया है।
विश्व हिन्दी दिवस (10 जनवरी) हिन्दी की इस वैश्विक उपस्थिति, उसके विकास और संवाद की शक्ति को स्मरण करने का अवसर है। यह दिन हमें हिन्दी भाषा के महत्व, उसकी समकालीन भूमिका और भविष्य की संभावनाओं पर चिंतन करने का प्रेरक क्षण प्रदान करता है।
आज हिन्दी शिक्षा, साहित्य, तकनीक और वैश्विक संवाद के विविध क्षेत्रों में निरंतर विस्तार कर रही है, जिससे उसकी प्रासंगिकता और प्रभाव दोनों सुदृढ़ होते जा रहे हैं।
हिन्दी समिति द्वारा आप सभी को विश्व हिन्दी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ।
07/01/2026
अक्षर नहीं, चेतना का संस्कार है हिन्दी,
संवाद नहीं, विचारों का विस्तार है हिन्दी।
काल की धड़कनों में धैर्य से धरी हुई धार,
ज्ञान, विवेक और सृजन का सतत संचार है हिन्दी।
हिन्दी भाषा भारतीय ज्ञान, परंपरा, सांस्कृतिक अभिव्यक्ति एवं संवाद का एक सशक्त माध्यम है। संस्थान के शैक्षणिक परिवेश में साहित्य मूल्यों के संवर्धन तथा विभिन्न संस्कृतियों की सक्रिय उपस्थिति व भागेदारी हेतु हिन्दी समिति निरंतर कार्यरत है।
हिन्दी समिति द्वारा प्रतिवर्ष हिन्दी दिवस (14 सितम्बर) पर ‘अभ्युदय’ तथा अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस (21 फरवरी) पर ‘परिचय : संस्कृति से’ जैसे संस्कृतिक आयोजनों के माध्यम से भाषाई विविधता एवं सांस्कृतिक चेतना को प्रोत्साहित किया जाता है। इसके अतिरिक्त, हिन्दी समिति संस्थान की वार्षिक हिन्दी पत्रिका ‘त्रिशूल’ का प्रकाशन एवं राष्ट्रीय पर्वों (15 अगस्त एवं 26 जनवरी) के अवसर पर मंच संचालन व कार्यक्रम समन्वय का दायित्व भी बखूबी निभाती है।
हिन्दी समिति छात्रों को लेखन, मंच संचालन, संवाद कौशल एवं टीमवर्क जैसे क्षेत्रों में व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करने का सशक्त मंच प्रदान करती है। इसी क्रम में, समिति द्वारा प्रथम वर्ष के छात्रों के लिए साक्षात्कार आयोजित किया जा रहा है जिसमें आप सभी प्रथम वर्ष के छात्र सादर आमंत्रित हैं।
(साक्षात्कार से संबंधित समस्त आवश्यक विवरण पोस्टर में उपलब्ध हैं।)
गूगल फॉर्म:- https://forms.gle/hfDS6rgBw6nZVmJr7
31/12/2025
यथा प्रभाते नूतन प्रकाशः प्रस्फुटति,
तथा अस्माकं अन्तःकरणे नूतन शान्तिः।
उम्मीद वह दीप है जो नए वर्ष की देहरी पर जल उठता है, और अंधकारों में भविष्य का पथ आलोकित करता है, इसी प्रवाह में 'वर्ष 2025' की स्मृतियाँ हमारे अनुभवों की उस धरोहर से जुड़ती हैं, जिनसे हमारे दृष्टिकोण को परिपक्वता और सोच को गहराई प्रदान हुई है। इस वर्ष ने हमें सिखाया कि हर चुनौती अपने भीतर एक अवसर छुपाए होती है, और हर अनुभव हमें भीतर से और अधिक दृढ़ व सक्षम बनाता है। इन्हीं अनुभवों की नींव पर अब वर्ष 2026 का उदय हो रहा है, जो हमें अपनी क्षमताओं को पुनः परिभाषित करने और संभावनाओं के नए क्षितिज खोजने का आमंत्रण देता है।
हम आशा करते हैं कि यह नव वर्ष हम सभी के जीवन में नए लक्ष्यों एवं नई उमंगों को आकार देने के साथ-साथ व्यापक दृष्टिकोण और सामूहिक उत्तरदायित्व को अपनाने की प्रेरणा प्रदान करेगा।
हिन्दी समिति की ओर से आप सभी को नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ।
20/10/2025
दीपज्योतिर्महोत्साहं सर्वेभ्यः सम्प्रदायिनी।
दीपावली शुभं नित्यं सुखसंपद्विवर्धिनी॥
दीपावली, दीपों के प्रकाश से सुशोभित एक पावन पर्व है, जो कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को मनाया जाता है । इस त्यौहार में संपूर्ण देश अपने सबसे सुंदर रूप में सजा होता है । दीपों की रोशनी हमारे जीवन में प्रेम, करुणा और आशा की नई किरण बनती है, जो न केवल घरों को बल्कि हृदयों को भी प्रकाशित करती है।
दीपावली हमें स्मरण कराती है कि जैसे श्रीराम ने कठिन वनवास के पश्चात विजय का प्रकाश फैलाया, वैसे ही हम भी जीवन के संघर्षों के बीच अपने अंतर्मन का दीप जलाकर प्रकाश की ओर अग्रसर हो सकते हैं।
हिन्दी समिति की ओर से आप सभी को शुभ दीपावली।
आपका जीवन दीपों-सा प्रकाशित हो और हर मन में स्नेह, शांति और समृद्धि का वास हो।
25/09/2025
अभ्युदय – 2025 के उपलक्ष्य में हिन्दी समिति द्वारा आयोजित ‘रहस्यावलोकन’ की कुछ झलकियां।
19/09/2025
तर्क बने तलवार, विचार बने कवच,
वाद-विवाद में परखे जाते हैं सब सच।
शब्दों की भिड़ंत से जब सत्य निखरता है,
तो हर मन में नया विश्वास उतरता है।
वाद-विवाद केवल शब्दों का खेल नहीं, यह विचारों का महासंग्राम है। यहाँ तर्क की तलवार और बुद्धि की ढाल लेकर प्रतिभागी उतरते हैं। एक पक्ष अपने पक्षधर तर्कों से मंच को रौशन करता है, तो दूसरा पक्ष प्रतितर्कों की अग्नि से उसे परखता है। यही प्रक्रिया संवाद की शक्ति, सोच की गहराई और प्रस्तुति की निपुणता को निखारती है। वाद-विवाद वह दर्पण है, जिसमें हमारी समझ, दृष्टिकोण और वैचारिक सामर्थ्य साफ़ झलकती है।
यह केवल वाणी की परीक्षा नहीं, बल्कि सोच की गहराई और आत्मविश्वास की पहचान है।
हिन्दी समिति द्वारा आयोजित 'अभ्युदय-2025’ की विभिन्न प्रतियोगिताओं के क्रम में अगली प्रतियोगिता 'वाद-विवाद' है।
उम्मीद है आप सभी इस प्रतियोगिता में भाग लेकर अपने विचारों की धार और तर्कों की चमक से मंच को रौशन करेंगे।
रजिस्ट्रेशन लिंक 🔗: https://forms.gle/BwZiXhbp562GHRZb9