01/06/2020
यह पृथ्वी एक बहुत बड़े संक्रमण से गुज़र रही है जिसका मुख्य कारण इसका युग परिवर्तन करना है। ऐसे समय में विध्वंशकारक जितनी भी शक्तियां हैं, वह सब की सब नष्ट हो जाएंगी और सिर्फ सृजनात्मक शक्तियां ही बची रह जाएंगी। जिसका एक अर्थ यह भी है कि जो भी व्यक्ति, समूह, चेतना या संस्था या देश विध्वंश की ओर जा रहे हैं या जाएंगे, उन सबका नाश हो जाएगा और सिर्फ वही बच रहेगा जो लगातार सृजनात्मकता की ओर बढ़ रहा है या बढ़ता रहेगा। यदि आप सब इस संक्रमण काल को पार करके सुनहरे भविष्य में प्रवेश करना चाहते हैं तो अपने कर्म, मन, वचन को शुद्ध करना शुरू कर दीजिए। सत्य, परमात्मा, या अस्तित्व के आगे किसी का भी झूठ नहीं चलता। हर आत्मा की एक छाया होती है अर्थात आत्मा के रंग से यह पता चल जाता है कि वह क्या है, कोई भी इसको छुपा नहीं सकता। अतः शुद्ध बनो, बुद्ध बनो, ध्यान करो, प्रेम फैलाओ। और जो इन कार्यों में नहीं है, उनसे दूरी बनाओ। अपने आत्म रूपांतरण का भी यही समय सर्वश्रेष्ठ है, क्योंकि अभी पृथ्वी का भी रूपांतरण हो रहा है। जिसको भी समझ है, या समझ आ रहा है, वह सावधान होकर अपना करने योग्य कार्य करे। जिसको समझ नहीं आ रहा है, वह ध्यान न दे। और मस्ती से अपनी बाकी की जिंदगी काटे। मरना तो सभी को है। कोई आज, कोई कल, कोई कभी और। धन्यवाद। संजीव जैन, Akashic Reader & Pastlife Therapist।
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