वर्ष 2026 की कार्य योजना.
Gajra Raja Medical College Gwalior MP
Established in 1946 GRMC is the 17th Medical College of India and the first in the state of M.P.
Established in 1946, Gajra Raja Medical College, Gwalior, is the 17th Medical College of India and the first in the state of M.P. Presently It admits 200 students for MBBS, 164 students for post graduation Degree Courses and 15 students for Super specialty courses every year. Jaya Arogya Group of Hospitals is the affiliated teaching hospital and has about 2200 beds equipped with all modern facilities.
26/12/2025
सुखद खबर
हजार बिस्तर अस्पताल की धर्मशाला में आवासीय सुविधा शुरू
मंत्री श्री नारायण सिंह कुशवाह ने किया शुभारंभ
लायंस क्लब द्वारा किया जाएगा संचालन, मरीजों व परिजनों को मिलेगा नि:शुल्क आश्रय
24/12/2025
ट्रॉमा सेंटर जैसे संवेदनशील क्षेत्र में लापरवाही बर्दाश्त नहीं : अधिष्ठाता डॉ.धाकड़
- गजराराजा चिकित्सा महाविद्यालय अधिष्ठाता ने किया ट्रॉमा सेंटर का निरीक्षण
ग्वालियर, 23 दिसंबर 2025। गजराराजा चिकित्सा महाविद्यालय के अधिष्ठाता प्रो.डॉ. आर.के.एस. धाकड़ ने मंगलवार को जयारोग्य अस्पताल समूह के ट्रॉमा सेंटर का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने साफ-सफाई, व्यवस्थाओं और मरीजों को दी जा रही सुविधाओं का गहन अवलोकन किया। इस दौरान कई खामियां सामने आने पर उन्होंने संबंधित अधिकारियों को तत्काल सुधार के निर्देश दिए।
निरीक्षण के समय ट्रॉमा सेंटर परिसर में झाड़ू-पोंछा खुले में रखा हुआ मिला और कुछ स्थानों पर गंदगी भी नजर आई। इस पर अधिष्ठाता ने सफाई सुपरवाइजरों पर नाराजगी जताते हुए स्पष्ट निर्देश दिए कि अस्पताल परिसर में स्वच्छता सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ट्रॉमा सेंटर जैसे संवेदनशील क्षेत्र में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और सफाई व्यवस्था हर समय चुस्त-दुरुस्त रहनी चाहिए। निरीक्षण के दौरान प्रो.डॉ. धाकड़ ने ट्रॉमा सेंटर में भर्ती मरीजों से भी संवाद किया। उन्होंने मरीजों और उनके परिजनों से इलाज, दवाओं की उपलब्धता और सुविधाओं के बारे में जानकारी ली। अधिष्ठाता ने विशेष रूप से यह पूछा कि कहीं मरीजों को दवाएं बाहर से तो नहीं मंगानी पड़ रहीं। मरीजों ने अपनी समस्याएं भी साझा कीं, जिन पर उन्होंने संबंधित स्टाफ को ध्यान देने के निर्देश दिए। आईसीयू निरीक्षण के दौरान डॉक्टरों के बैठने की कुर्सियां खराब स्थिति में मिलीं। इस पर अधिष्ठाता ने इमरजेंसी मेडिसिन प्रभारी जितेंद्र अग्रवाल को आवश्यक फर्नीचर और उपकरणों के लिए तत्काल डिमांड भेजने के निर्देश दिए, ताकि चिकित्सकों को बेहतर कार्य वातावरण मिल सके और मरीजों के इलाज में कोई बाधा न आए।
इमरजेंसी गेट के सामने से हटाए जाएं पलंग
इसके अलावा उन्होंने इमरजेंसी गेट के सामने लगाए गए पलंगों को हटाने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि इमरजेंसी गेट का क्षेत्र हर समय खाली और सुचारु रहना चाहिए।
04/12/2025
Speach Dean Sir.
29/11/2025
आईएपीएसएम जोनल कॉन्फ्रेंस की क्विज प्रतियोगिता में जीआरएमसी रहा प्रथम
ग्वालियर। गजराजा चिकित्सा महाविद्यालय के कम्युनिटी मेडिसिन विभाग के पीजी रेजिडेंट्स ने रतलाम में आयोजित 11वी साउथ सेंट्रल जोन कांफ्रेंस (आईएपीएसएम) के दौरान हुई क्विज प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार प्राप्त किया है। सम्मेलन का आयोजन भारतीय रोकथाम एवं सामाजिक चिकित्साविज्ञान संघ द्वारा किया गया था। जीआरएमसी की ओर से डॉ. प्रवेश सिंह भदौरिया, डॉ. वीथिका दुदावत और डॉ. नीनू जैन ने प्रतिनिधित्व किया। तीनों रेजिडेंट्स ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए अन्य मेडिकल कॉलेजों की टीमों को पीछे छोड़ दिया और पहला स्थान हासिल किया।
रतलाम में आयोजित इस सम्मेलन का विषय नवाचार और सहयोग के माध्यम से सार्वजनिक स्वास्थ्य को आगे बढ़ाना रखा गया था। इस मंच पर देशभर के चिकित्सकों, विशेषज्ञों और पीजी छात्रों ने सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़े नवाचारों पर विचार-विमर्श किया। टीम ग्वालियर की इस उपलब्धि पर महाविद्यालय अधिष्ठाता डॉ.आरकेएस धाकड़ ने तीनों विद्यार्थियों को बधाई देते हुए उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि न सिर्फ संस्थान की शैक्षणिक उत्कृष्टता को दर्शाती है, बल्कि भविष्य के जनस्वास्थ्य विशेषज्ञों की क्षमता को भी उजागर करती है।
26/11/2025
प्रमुख दैनिक समाचार पत्रों में प्रकाशित समाचार.
ज्ञान का प्रसार ही सच्ची सफलता : पद्मश्री डॉ. ए.के. हेमल
25/11/2025
ज्ञान का प्रसार ही सच्ची सफलता : पद्मश्री डॉ. ए.के. हेमल
- गजराराजा चिकित्सा महाविद्यालय में आए पद्मश्री डॉ. ए.के. हेमल
- चिकित्सा शिक्षक व विद्यार्थियों से किया संवाद
ग्वालियर, 25 नवंबर 2025। गजराराजा चिकित्सा महाविद्यालय में मंगलवार को पद्मश्री डॉ. ए.के. हेमल का आगमन हुआ, जहां उन्होंने विद्यार्थियों और फैकल्टी के साथ संवाद किया। महाविद्यालय के अधिष्ठाता प्रो. डॉ. आरकेएस धाकड़, मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन के सचिव डॉ. अनुराग चौहान और नर्सिंग होम एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ.बृजेश सिंघल ने पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका स्वागत किया। इसके बाद, डॉ. हेमल ने महाविद्यालय के स्मार्ट क्लास रूम में विद्यार्थियों के साथ एक व्याख्यान कार्यक्रम में भाग लिया।
इस कार्यक्रम में डॉ. हेमल ने अपने अनुभव साझा किए और विद्यार्थियों को प्रेरित किया। उन्होंने कहा, मेरे जीवन का उद्देश्य सिर्फ सर्जरी करना नहीं था, बल्कि मैंने यह सोचा कि हम समाज को क्या दे सकते हैं और नई पीढ़ी के लिए क्या कर सकते हैं। डॉ.हेमल ने बताया कि 2001 में मैंने पहली बार हेनरी फोर्ड अस्पताल में रोबोटिक सर्जरी की। इसके बाद, मैंने भारत में पहली बार रोबोटिक सर्जरी 2005 में की, और इसके बाद से यह मेरी यात्रा का अहम हिस्सा बन गई। जब मैं एम्स में था, तो निजी प्रैक्टिस के कई प्रस्ताव मिले, लेकिन मुझे हमेशा एक शैक्षणिक संस्थान में काम करना पसंद था। एक सर्जन के तौर पर, मैं सिर्फ कुछ हजार सर्जरी कर सकता हूं, लेकिन यदि मैं अपनी जानकारी और अनुभव को छात्रों के साथ साझा करता हूं, तो हम कई लोगों को सिखा सकते हैं। उन्होंने महाविद्यालय अधिष्ठाता डॉ.धाकड़ को धन्यवाद देते हुए कहा कि वह मैंने ईमेल भेजा था, जिसका जवाब मुझे 48 घंटे के अंदर ही मिल गया। मैंने स्वयं अनुभव किया है कि महाविद्यालय डीन डॉ.धाकड़ बड़ी तर्त्पता के साथ काम करते हैं। आप बड़े सौभाग्यशाली हैं कि आपको डॉ.धाकड़ जैसा डीन मिला है। कार्यक्रम के अंत में, महाविद्यालय अधिष्ठाता प्रो. डॉ. आरकेएस धाकड़ ने डॉ. हेमल का धन्यवाद किया और कहा कि उनका अनुभव और मार्गदर्शन विद्यार्थियों के लिए अमूल्य है। कार्यक्रम का संचालन जनसंपर्क अधिकारी डॉ. केपी रंजन ने किया। इस अवसर पर महाविद्यालय के विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष, डॉ.एके भल्ला सहित चिकित्सा शिक्षक और दो सौ से अधिक विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में चिकित्सा शिक्षक-विद्यार्थियों ने डॉ. हेमल से सवाल-जवाब भी किए।
Launching Rabietrack portal
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22/11/2025
आज के दैनिक समाचार पत्रों में प्रकाशित समाचार.
21/11/2025
विभागों में एंटीबायोटिक स्टीवर्डशिप प्रोग्राम को प्राथमिकता से लागू किया जाए
- 'एंटीमाइक्रोबियल रेजि़स्टेंस : ए साइलेंट पांडेमिक पर सीएमई आयोजित
ग्वालियर, 21 नवंबर 2025। गजराराजा चिकित्सा महाविद्यालय के माइक्रोबायोलॉजी विभाग द्वारा 'एंटीमाइक्रोबियल रेजि़स्टेंस : ए साइलेंट पान्डेमिक विषय पर एक दिवसीय सीएमई का आयोजन महाविद्यालय के स्मार्ट क्लास रूम में किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य चिकित्सा समुदाय में बढ़ रहे एंटीमाइक्रोबियल रेजि़स्टेंस के खतरे, उसके गंभीर दुष्परिणामों तथा इसके नियंत्रण में डॉक्टरों की अहम भूमिका को रेखांकित करना रहा।
कार्यक्रम का शुभारंभ अधिष्ठाता प्रो. डॉ. आर.के.एस. धाकड़ एवं संयुक्त संचालक व अधीक्षक प्रो. डॉ. सुधीर सक्सेना द्वारा किया गया। अधिष्ठाता ने कहा कि सर्जरी के पूर्व और पश्चात एंटीबायोटिक के विवेकपूर्ण उपयोग की सख्त आवश्यकता है। उन्होंने सभी विभागों में एंटीबायोटिक स्टीवर्डशिप प्रोग्राम को प्राथमिकता से लागू करने का आह्वान किया। सीएमई में विभिन्न विभागों के विशेषज्ञों ने विषय पर विस्तृत मार्गदर्शन दिया। पूर्व अधिष्ठाता एवं फार्माकोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. सरोज कोठारी ने तर्कसंगत एंटीबायोटिक प्रिस्क्रिप्शन के सिद्धांतों पर महत्वपूर्ण व्याख्यान दिया। बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. अजय गौर ने शिशु रोगियों में सुरक्षित एवं तार्किक एंटीबायोटिक उपयोग पर चर्चा की। माइक्रोबायोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रो डॉ. नीलिमा रंजन ने माइक्रोबायोलॉजिस्ट की भूमिका और संक्रमण रोकथाम के उपायों की जानकारी दी। श्योपुर मेडिकल कॉलेज की स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ प्रो डॉ. वृंदा जोशी ने एएमआर की रोकथाम में प्रोबायोटिक्स की प्रभावी भूमिका पर प्रकाश डाला। माइक्रोबायोलॉजी विभाग के डॉ. अंशु मित्तल ने जयारोग्य अस्पताल समूह एवं जीआरएमसी के एएमआर सर्विलेंस डाटा को प्रस्तुत कर वर्तमान स्थिति का विश्लेषण किया। कार्यक्रम के अंत में प्रो. डॉ.के.पी. रंजन ने सभी अतिथियों, वक्ताओं और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर एनाटॉमी विभागाध्यक्ष डॉ. अखिलेश त्रिवेदी, फिजियोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. अजीत सिंह राजपूत, कम्युनिटी मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. मनोज बंसल, फार्माकॉलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. राजकुमार आर्य, डॉ. वैभव मिश्रा, डॉ. गजेंद्र परिहार, डॉ. महेंद्र गर्ग, डॉ. विशाल माहेश्वरी, डॉ. ऋषिका खेतान, डॉ. पुष्पा भार्गव उपस्थित थे.
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