V H C C - Environment

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18/05/2020

Role Of Homoeopathy in Agriculture, Friends This time challenge was to treat Mango crop (चुनौती थीआम की फसल को बचाना,और होम्योपैथी सफल हुई), fruits were falling down from trees regularly and growth was also poor, Whole orchard was heavily infested with insects and diseases, this condition of crop is widespread and most of the orchards are suffering from this disease. Homoeopathy Treated the whole orchard and with in 10 Days result was unbelievable. I was happy to see the smiling face of farmer.



11/05/2020

आगरा से दुनिया को मिलेगा कोरोना का इलाज का शीर्षक पढ़ कर होम्योपैथी पर गर्व की अनुभति हुई साथ ही उन सभी लोगो के लिए दिल मे सम्मान आ गया जो वाकई में होम्योपैथी के लिए अपना दिन रात एक किये है इन्ही नामो में चंद नाम है डॉ प्रदीप गुप्ता जी का जिनके अथक परिश्रम से नेमिनाथ होम्योपैथी कॉलेज आगरा को कोरोना बीमारी पर होम्योपैथी दवाओं के ट्रायल की अनुमति मिली है

11/05/2020
02/11/2018
Photos 25/08/2017
Photos 12/05/2017

ग्रामीण कृषि व् स्वदेशी जैविक भूमि एवं क्रषि संरक्षण समिति
मिशन 100 करोड़
पेड़ लगाओ धरा बचाओ
आप भी हमारे इस मिशन से जुड़िये और धरा को सवारने में हमारी मदद करिये।
रोहित उपाधयाय राजीव कुमार
7898600800 9911909174

Photos 11/05/2017

🌳?🌳 ग्वालियर की पुकार🌳🌳
आज हम बात करते है ग्वालियर की गर्मी की बढ़ता हुआ शहरीकरण और कम होते हुए पेड़ मानव स्वार्थ के कारण ही के पेडो की बली चढाई गई है अगर आज हम नहीं जगे तो आने बाला कल बहुत भयानक होगा न ही पिने को पानी होगा न ही लेने को साँस ये समस्या दिनों दिन विकराल रूप लेती जा रही है इस समस्या निपटने के लिये हम को हर सम्भब प्रयासः करने होंगे ।
हम को आप अभी जरुरत है हरियाली लाने के लिये आप के पास का पार्क ,सड़क किनरे की रोड या कही भी जहाँ हम पौधा लगा सकते है वहाँ के फहोतो सेंड करे हम वहाँ हरियाली लाएंगे आप के साथ मिल के आप भी तैयार हो जाइये इस वर्षा में ग्वालियर सवरने के लिए।

जॉइन करें
7898600800
रोहित उपाघ्याय
ग्वालियर

Photos 08/05/2017

🌳🌳बीज (seed)🌳🌳
पौधों का जनक होता है। बीजों को जमीन में रोपने तथा उपयुक्त मौसमी दशा उपलब्ध कराने से वे अंकुर बनते है तथा पेड़ पौधों में विकसित होते है।

बीज का महत्व
मनुस्मृति में कहा गया है-
"अक्षेत्रे बीजमुत्सृष्टमन्तरैव विनश्यति।
अबीजकमपि क्षेत्रं केवलं स्थण्डिलं भवेत्।।
सुबीजम् सुक्षेत्रे जायते संवर्धते"
उपरोक्त श्लोक द्वारा स्पष्ट किया गया है कि अनुपयुक्त भूमि में बीज बोने से बीज नष्ट हो जाते हैं और अबीज अर्थात गुणवत्ताहीन बीज भी खेत में केवल लाथड़ी बनकर रह जाता है। केवल सुबीज-अर्थात् अच्छा बीज ही अच्छी भूमि से भरपूर उत्पादन दे सकता है। अब यह जानना आवश्यक है कि सुबीज़ क्या है सुबीजम् सु तथा बीजम् शब्द से मिल कर बना है। सु का अर्थ अच्छा और बीजम् का अर्थ बीज अर्थात् अच्छा बीज। अच्छा बीज जानने के पूर्व यह जानना भी आवश्यक है कि बीज क्या है?
बीज क्या है
क) ऐसी रचना जो साधारणतया गर्भाधान के बाद भ्रूण से विकसित होती है बीज कहलाती है।

ख) विस्तारणीय ऐसी इकाई को भ्रण से उत्पन्न होती है बीज कहलाती है।

ग) ऐसा परिपक्व भ्रूण जिसमें एक पौधा छिपा होता है। और पौधों के आरंभिक पोषण के लिए खाद्य सामग्री हो तथा यह बीज कवच से ढका हो और अनुकूल परिस्थितियों में एक स्वस्थ पौधा देने में समर्थ हो, बीज कहलाता है।
आओ इस गर्मी व्यर्थ जा रहे बीजो को सही जगह रोपित करे और प्रकर्ति को सवारे।
आप का रोहित उपाध्याय
रोहित उपाध्याय ग्वालियर
7898600800

07/03/2017

🌳होलिका दहन और 🌳
🌳प्रकर्ति के प्रति मानव धर्म🌳

होलिका दहन की परम्परा पर्यावरण के लिए दूसरी बड़ी समस्या है। अनुमानतः एक होली में लगभग सौ किलो लकड़ी का इस्तेमाल किया जाता है। और ये होलिकादहन शहर में एक से अधिक स्थानों पर होते है तथा इसके आयोजकों का प्रयास होता है कि उनकी होली का आकार दूसरे की होली से बड़ा हो, इस प्रतिस्पर्द्धा में होलिकादहन के नाम पर बड़ी संख्या में पेड़ों को काट दिया जाता है। हम होलिका दहन के विरोधी नहीं हैं, होलिका दहन में गाय के गोवर का उपयोग और पौधा रोपड़ भी किया जाय तो हम धर्म और समाज के साथ प्रकर्ति के संतुलन को बनाये रख सकते है इससे हमारी आस्था को भी ठेस नहीं लगेगी और पेड़ भी बच जाएंगे।
एक सामाजिक पर्व होने के नाते यह किसी एक परिवार तक सीमित नहीं होता, इसलिए होली के कारण हमारे पर्यावरण को किसी प्रकार का नुकसान न पहुँचे, इसकी जिम्मेदारी पूरे समाज पर आती है। इको फ्रैंडली होली का सपना तभी पूरा हो सकता जब समाज का प्रत्येक वर्ग जो इसे मनाता है इसमें अपना सहयोग दे। इसके लिए एक जन-जागरण अभियान की जरूरत है। लोगों को समझना होगा कि उनके थोड़े से प्रयास का पर्यावरण पर कितना अनुकूल असर पड़ता है। एक बार बात समझ में आने पर इस तरह के परिवर्तन के लिए उन्हें खुद को तैयार करना आसान हो जाएगा। हमारे लिए इको फ्रैंडली होली का विचार नया हो सकता है, पर अगर हम मथुरा-वृंदावन की होली देखें तो पाएंगे कि वहां होली गुलाल और फूलों की पंखुड़ियों से ही खेली जाती है। और इससे उनके त्योहार के आनंद में कोई कमी नहीं आती। वे ही नहीं वहां आने वाले विदेशी भी इस होली का आनंद उठाते हैं। तो दोस्तो, इस बार पर्यावरण और अपने स्वास्थ्य की रक्षा के लिए इको फ्रैंडली होली और पौधा रोपड़ का एक साथ आनंद उठाइए।
निवेदक
रोहित 7898600800
शिवम् 9806686275
नविन 7771981758
स्वदेशी जैविक भूमि एवं कृषि संरक्षण समिति ग्वालियर

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